Monday, February 9, 2026
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उत्तराखंड की जनता अंकिता को न्याय दिलाये‌ बिना नहीं बैठेगी चुप : सबूत मिटाने वाली सरकार आज सबूत मांग रही  –गणेश गोदियाल

चमोली में अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस प्रदेश  अध्यक्ष के नेतृत्व में हुआ जन आदोलन

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पिछले एक हफ्ते से उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के
श्रीनगर, गौचर, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली, नंदप्रयाग, चमोली और गोपेश्वर में “अंकिता भंडारी को न्याय दो”पदयात्रा पर निकले हुए हैं।जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की आत्मा जाग चुकी है।
पदयात्रा के दौरान गोदियाल ने कहा कि आज उत्तराखंड की देवतुल्य जनता के सामने यह सच्चाई रखना जरूरी है कि राज्य में सत्ता न केवल निरंकुश हो चुकी है, बल्कि अब वह अपराध के सबूत मिटाकर खुद को बचाने की राजनीति पर उतर आई है।
इस सत्ता को आइना दिखाना कांग्रेस का राजनीतिक दायित्व है और जनता का सामाजिक कर्तव्य।
गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जो हुआ, वह न्याय नहीं बल्कि साक्ष्य विनाश का संगठित अपराध था।
सबूत नष्ट करने के लिए रिसोर्ट में बुलडोजर चलाया गया। दो-दो बार पुलिस कस्टडी में उसी रिसोर्ट में आगजनी हुई।
और आज वही धामी सरकार, उसके मंत्री और सांसद जनता और विपक्ष से “साक्ष्य” मांग रहे हैं।
यह सत्ता का दोहरा चरित्र है?
जिन लोगों ने सबूत मिटाए, वही आज सबूतों की दुहाई दे रहे है।
धामी सरकार और भाजपा संगठन के पास कांग्रेस के सवालों का कोई तार्किक जवाब नहीं है।इसीलिए अब मनगढ़ंत नॉरेटिव गढ़ने के लिए नेताओं को लाइन से प्रेस वार्ता करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
गोदियाल ने स्पष्ट मांग करते। हुए कहा
उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर की टेलिफोनिक बातचीत की सत्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जब सरकार खुद पाक-साफ है तो CBI से डर क्यों?
गोदियाल जी ने यह भी याद दिलाया कि सत्र न्यायालय ने स्वयं माना है कि हत्या का मोटिव वह वीआईपी था जिसको स्पेशल सर्विस देने के लिए अंकिता भंडारी पर दबाव डाला जा रहा था।फिर सवाल उठता है
उस वी आई पी को अब तक बचाया क्यों जा रहा है?
गोदियाल ने कहा कि आज भाजपा सरकार और संगठन इस हद तक घबराए हुए हैं कि उनके पास प्रवक्ताओं का भी टोटा पड़ गया है।
अब पुलिस अधिकारियों को प्रेस में उतारकर सरकार अपना बचाव करा रही है, वह भी बिना किसी प्रोटोकॉल के।
जब राज्य का कैबिनेट मंत्री या ADG प्रेस वार्ता कर चुका हो,
तो उसके बाद एडिशनल एसपी से प्रेस वार्ता कराने का क्या औचित्य है?
यह साफ दर्शाता है कि अंकिता भंडारी के मुद्दे पर सरकार बिखरी हुई है,
जांच दिशाहीन है,
और सत्ता सच्चाई से डर रही है।
इन्हीं सवालों और जनता की आवाज़ को लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेशभर में
“अंकिता भंडारी को न्याय दो” पदयात्रा कर रहे हैं।
यह पदयात्रा राजनीतिक नहीं, बल्कि न्याय की जनआंदोलन है।
कांग्रेस की मांग एकदम स्पष्ट है अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच CBI से हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, और सभी संदिग्धों का नार्को टेस्ट कराया जाए।
जबतक वी आई पी बेनकाब नहीं होता,
सबूत मिटाने वालों पर कार्रवाई नहीं होती,
और अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलता,
तब तक कांग्रेस का संघर्ष सड़क से अदालत तक जारी रहेगा।
अंकिता सिर्फ एक पीड़िता नहीं,
अंकिता उत्तराखंड की बेटी है,
और बेटी के न्याय पर कोई समझौता नहीं होगा।

गरिमा मेहरा दसौनी

 

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