शिमला: हिमाचल प्रदेश इस बार मानसून की मार से कराह रहा है. लगातार बारिश और उससे जुड़ी आपदाओं ने लोगों की ज़िंदगी मुश्किल बना दी है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 360 लोगों की जान जा चुकी है और राज्य का आम जनजीवन (Himachal Monsoon Disaster 2025) पूरी तरह प्रभावित है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के मुताबिक, 1,087 सड़कें अभी भी बंद हैं. 2,838 बिजली की लाइनें और 509 पानी की सप्लाई स्कीमें भी प्रभावित हैं. यानी गांव से लेकर शहर तक लोग परेशान हैं.
मौत का आंकड़ा डराने वाला
इस साल बारिश से जुड़ी घटनाओं (भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़, डूबना, बिजली गिरना आदि) में अब तक 197 लोगों की मौत हुई है. वहीं, सड़क हादसों में 163 लोग जान गंवा चुके हैं. कुल मिलाकर मानसून शुरू होने के बाद से अब तक 360 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा 47 लोग अभी भी लापता हैं और 426 लोग घायल हुए हैं.
किस ज़िले में कितनी तबाही?
आइए, एक नज़र जिलेवार डालते हैं. मंडी में सबसे ज़्यादा 36 मौतें, कांगड़ा में 31, कुल्लू में 20, चंबा में 21,शिमला में 21मौतें हुईं. भूस्खलन से 37, बादल फटने से 17 और डूबने से 33 लोगों की जान गई है. अब तक का अनुमान है कि इस आपदा से करीब 4,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान (Himachal Pradesh Rain Havoc) हुआ है. खेती-बाड़ी, बागवानी और पशुपालन को भी गहरा झटका लगा है. कुल मिलाकर, इस साल का मानसून हिमाचल के लिए सबसे भारी साबित हो रहा है. लोगों की ज़िंदगी, खेती और बुनियादी ढांचा, तीनों पर इसका गहरा असर दिख रहा है
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटा एयरफोर्स
बरसात के बीच हिमाचल का मशहूर मणिमहेश यात्रा मार्ग भी बंद हो गया था. यहां फंसे श्रद्धालुओं को निकालने के लिए भारतीय वायुसेना ने मोर्चा संभाला. एयरफोर्स के चिनूक हेलीकॉप्टर से 50 श्रद्धालुओं को सुरक्षित चंबा लाया गया. छोटे हेलीकॉप्टर से 35 बीमार और बुजुर्ग लोगों को (Himachal Flood and Landslide News) भी एयरलिफ्ट किया गया. एमआई-17 हेलीकॉप्टर को भी किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखा गया है. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार हर संभव कोशिश कर रही है कि किसी की जान न जाए और सभी श्रद्धालुओं व पर्यटकों को सुरक्षित उनके घर भेजा जाए.
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