टोक्यो (जापान): जापान की राजनीति रविवार को बड़े उलटफेर की गवाह बनी. प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में पदभार संभाला था, ने अचानक लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा कर दी. यह फैसला उन्होंने ऐसे समय लिया है (Japan PM Resignation) जब उनकी पार्टी लगातार चुनावी हार और आंतरिक कलह से जूझ रही है.
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
इशिबा ने अपने इस्तीफ़े की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की. उन्होंने लिखा – “आज मैंने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय लिया है”. इसके बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि वे एलडीपी (Liberal Democratic Party) की आने वाली विशेष नेतृत्व प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगे. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री का यह कदम पार्टी में बढ़ते अंदरूनी असंतोष और गुटबाज़ी को थामने की कोशिश है. पार्टी के कई धड़े लगातार मांग कर रहे थे कि इशिबा चुनावी हार की ज़िम्मेदारी लें और पद छोड़ें. पिछले कुछ महीनों में एलडीपी पर फंडिंग स्कैंडल्स और नीतिगत मुद्दों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए. यही वजह रही कि पार्टी के अंदरूनी दबाव ने प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया.
चुनावी हार बनी वजह
इशिबा के नेतृत्व में एलडीपी और उसके सहयोगी कोमेटो को पहले निचले सदन और फिर जुलाई में हुए ऊपरी सदन के चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. दोनों सदनों में गठबंधन अपनी बहुमत खो बैठा, जो जापानी राजनीति के इतिहास में एक ऐतिहासिक हार मानी जा रही है. इस नतीजे के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी खुलकर सामने आई. लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए माना जा रहा था कि पार्टी जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन का ऐलान करेगी.
अमेरिकी टैरिफ़ समझौते का ज़िक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिगेरू इशिबा ने कहा कि हाल ही में अमेरिका के साथ टैरिफ़ उपायों पर एक अहम समझौता हुआ है. उनके मुताबिक, यह मसला लंबे समय से अटका हुआ था और इसके सुलझ जाने के बाद अब उन्हें लगा कि पार्टी और देश को नई दिशा देने के लिए नए नेतृत्व की ज़रूरत है. उन्होंने एलडीपी महासचिव मोरियामा हीरोशी को आदेश दिया है कि पार्टी के नियमों के अनुसार जल्द से जल्द नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए.

सुधार और महंगाई से जूझने के वादे
प्रधानमंत्री बनने के बाद शिगेरू इशिबा ने महंगाई पर काबू पाने और पार्टी को सुधारने का वादा किया था. लेकिन उनके कार्यकाल में न तो महंगाई काबू में आई और न ही पार्टी के भीतर गुटबाज़ी कम हुई. उल्टा, दक्षिणपंथी धड़ों का दबाव और चुनावी पराजय ने उनकी साख को और कमजोर कर दिया. इस्तीफ़े से ठीक एक दिन पहले इशिबा ने पूर्व प्रधानमंत्री सुगा योशिहिदे और कृषि मंत्री कोइज़ुमी शिंजिरो से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इशिबा से साफ कहा कि पार्टी एकजुटता सबसे अहम है और उन्हें चुनाव से पहले ही पद छोड़ देना चाहिए, ताकि और ज्यादा भ्रम की स्थिति न बने. यही सलाह आखिरकार उनके इस्तीफ़े की बड़ी वजह बनी.
अब आगे क्या?
इशिबा के इस्तीफ़े के बाद अब एलडीपी के भीतर नए अध्यक्ष को चुनने की कवायद शुरू होगी. पार्टी के कई वरिष्ठ चेहरे पहले से ही दावेदारी जता चुके हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन बेहद अहम साबित होगा, क्योंकि उसे जनता का भरोसा दोबारा हासिल करना है. प्रधानमंत्री इशिबा शिगेरू का अचानक इस्तीफ़ा जापान की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है. एक तरफ पार्टी को चुनावी हार का ग़म है, तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार और आंतरिक कलह से निकलने की चुनौती भी. अब देखना होगा कि एलडीपी नया चेहरा सामने लाकर क्या जनता और सहयोगियों का विश्वास दोबारा जीत पाएगी या नहीं.
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