नई दिल्ली (US-India Trade War): भारतीय कपड़ा उद्योग (Garment Industry) के लिए बुरी खबर आई है. रेटिंग एजेंसी ICRA ने कपड़ों के निर्यात को लेकर अपना आउटलुक Stable से घटाकर Negative कर दिया है. वजह है, अमेरिका की ओर से बढ़ाए गए टैरिफ रेट्स, जिनका सीधा असर भारतीय निर्यातकों की कमाई पर पड़ने वाला है.
FY26 में 6-9% तक घट सकती है कमाई
ICRA के मुताबिक, अगर हालात ऐसे ही रहे तो वित्त वर्ष 2026 (FY26) में भारत के कपड़ा निर्यात की कमाई 6-9% तक घट सकती है. हालांकि, यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और कुछ हद तक नए बाज़ारों में सप्लाई डायवर्ट करने से थोड़ी राहत मिल सकती है. सिर्फ एक्सपोर्ट ही नहीं, बल्कि प्रॉफिट पर भी असर दिखेगा. रिपोर्ट कहती है कि इंडस्ट्री का ऑपरेटिंग मार्जिन FY25 के 10% से गिरकर FY26 में करीब 7.5% रह सकता है. दरअसल, साल की दूसरी छमाही में ऑर्डर घटने से फैक्ट्रियों की ऑपरेशन एफिशिएंसी भी कम हो जाएगी. यानी कमाई गिरेगी और कंपनियों को कैश फ्लो मैनेज करने में मुश्किल होगी.
अमेरिकी मार्केट सबसे बड़ा रिस्क
भारत के कपड़ा निर्यात में अमेरिका का हिस्सा करीब एक-तिहाई है. फिलहाल भारत की हिस्सेदारी US गारमेंट इम्पोर्ट मार्केट में सिर्फ 6% है. ऐसे में नए टैरिफ के बाद अपना शेयर बचाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी. अगर यह हिस्सा घटा तो आने वाले सालों में रिकवरी और भी मुश्किल हो जाएगी. ICRA का कहना है कि सभी ऑर्डर तुरंत लो-टैरिफ वाले देशों (जैसे बांग्लादेश, वियतनाम) में शिफ्ट करना आसान नहीं है. वजह है, हर देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता अलग है और नई कैपेसिटी बनाने में समय लगता है. इसलिए अमेरिकी खरीदारों के लिए अभी तुरंत भारत से ऑर्डर हटाना मुश्किल है, लेकिन धीरे-धीरे यह रिस्क बढ़ सकता है.

पिछले पांच सालों का हाल
1. पिछले पांच सालों में भारत का कपड़ा निर्यात लगभग फ्लैट रहा है.
2. डिमांड कमजोर रही.
3. UK और UAE जैसे देशों से ऑर्डर कम हुए.
4. सोर्सिंग धीरे-धीरे बांग्लादेश और वियतनाम की तरफ शिफ्ट हुई. हालांकि इसी दौरान अमेरिका को निर्यात 4.8% बढ़ा, क्योंकि भारतीय कंपनियों ने वहां वॉल्यूम पर फोकस किया.
नया टैरिफ, नई मुश्किलें
अमेरिका ने 27 अगस्त 2025 से 50% ज्यादा टैरिफ लागू कर दिया है. टैरिफ लागू होने से पहले भारतीय कंपनियों ने जल्दी-जल्दी शिपमेंट भेजकर आंकड़े मजबूत दिखाए. लेकिन ICRA का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी राहत है. FY26 की दूसरी छमाही में जब टैरिफ का पूरा असर दिखेगा, तब निर्यात सबसे ज्यादा दबाव में आ सकता है. ICRA के अनुसार, FY26 में भारतीय कपड़ा निर्यातकों को काफी दिक्कत होगी. लेकिन FY27 में तस्वीर थोड़ी बदल सकती है. यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ FTA का असर नजर आने लगेगा. सप्लाई नए बाज़ारों में डायवर्ट होगी. H1 FY26 में हुए एडवांस शिपमेंट्स सालाना गिरावट को थोड़ा संभाल लेंगे.
भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री के लिए FY26 आसान नहीं होगा. अमेरिका के नए टैरिफ से निर्यात और प्रॉफिट दोनों दबाव में रहेंगे. ICRA की रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि अब कंपनियों को नए मार्केट्स और प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस करना पड़ेगा. वरना अमेरिका पर ज़्यादा निर्भरता लंबे समय में नुकसानदेह साबित हो सकती है.
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