देहरादून (India Longest Rail Tunnel): उत्तराखंड में रेल नेटवर्क को नए आयाम देने वाली एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है. ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच चल रही महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सबसे बड़ी सफलता रही देवप्रयाग और जनासू के बीच 14.57 किलोमीटर लंबी दोहरी रेल सुरंग (Rishikesh Karnaprayag rail project) का निर्माण, जिसे समय से सवा साल पहले यानी 2025 में पूरा कर लिया गया. यह अब देश की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है.
परियोजना का उद्देश्य और महत्व
125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों (देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली) को रेल नेटवर्क से जोड़ना है. इससे यात्रियों का समय बचेगा, यात्रा तेज़ और सुविधाजनक (Uttarakhand News) होगी और आपदा प्रबंधन के लिए भी यह मार्ग बेहद उपयोगी साबित होगा. अनुमान है कि इस परियोजना के पूरा (Devprayag Janasu rail tunnel) होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर लगभग 2 घंटे रह जाएगा.

सुरंग निर्माण में तकनीकी उपलब्धियां
इस सुरंग के निर्माण में पहली बार हिमालयी क्षेत्र में अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का इस्तेमाल किया गया. ‘शिव’ और ‘शक्ति’ नामक दो टीबीएम मशीनों ने काम किया. कुल 30 किलोमीटर सुरंगों में से 70% सुरंग टीबीएम तकनीक से और बाकी 30% ड्रिल ब्लास्ट तकनीक से बनाई गई. एलएंडटी के ऑपरेटर बलजिंदर सिंह और राम अवतार सिंह राणा ने बताया कि निर्माण के दौरान सबसे (Himalayan railway tunnel construction) बड़ी चुनौती तब आई, जब सुरंग में अचानक भूस्खलन हुआ. इस दौरान टीबीएम को सामान्य 50-60 हजार किलो न्यूटन की क्षमता से 1.3 लाख किलो न्यूटन पर चलाना पड़ा. 10 दिन तक दिन-रात 12-12 घंटे की शिफ्ट में लगातार मशीन चलाई गई.
क्या है ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड में परिवहन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. यह न सिर्फ़ यात्रियों की यात्रा को तेज़ करेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था (Char Dham yatra rail connectivity) के लिए भी एक नई राह खोलेगी. इस परियोजना के जरिए पहाड़ी जिलों में माल और यात्रियों की आवाजाही आसान होगी और आपदा जैसे समय पर राहत सामग्री तेजी से पहुंचाई जा सकेगी.
कितना होगा फायदा?
इस परियोजना के पूरा होने से उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में यातायात में बड़ा सुधार आएगा. स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी इसका फायदा उठाएंगे. साथ ही, यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी. देवप्रयाग-जनासू सुरंग और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के लिए तकनीकी और सामाजिक दोनों दृष्टियों से मील का पत्थर साबित हो रही है. हालांकि कई पर्यावरणविद् इसे प्रकृति से छेड़छाड़ करार दे रहे हैं.
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