Nepal Violence: काठमांडू से लेकर देहरादून तक, नेपाल में जारी राजनीतिक उथल-पुथल का असर पड़ोसी देश भारत तक महसूस किया जा रहा है. नेपाल में बीते दो दिनों से हिंसक प्रदर्शनों ने भयावह रूप ले लिया है. पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की प्रदर्शनकारियों (Kathmandu Burns) द्वारा उनके घर में आग लगाए जाने से मौत हो गई. संसद भवन और राष्ट्रपति कार्यालय तक को आग के हवाले कर दिया गया. इस हिंसा में 19 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 500 से अधिक घायल हैं. ऐसे हालात में नेपाल से सटे भारतीय राज्य उत्तराखण्ड सरकार भी पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई है.
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास से चंपावत, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर के जिला प्रशासन, पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) अधिकारियों के साथ (Nepal political crisis 2025) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की. इन जिलों की अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल से लगती है और राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर यहां दिख सकता है. बैठक में सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और खुफिया सूचनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई.

सीएम धामी के अधिकारियों को कड़े निर्देश
सीएम धामी (Uttarakhand border security) ने स्पष्ट कहा कि नेपाल से लगी सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाए जाएं. किसी भी असामाजिक या उत्पाती तत्व पर कड़ी नजर रखी जाए. उन्होंने सोशल मीडिया की भी निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए ताकि किसी तरह की अफवाह, भ्रामक सूचना या उकसाने वाले कंटेंट को समय (Gen Z Revolution Nepal) रहते रोका जा सके. सीएम धामी ने अधिकारियों से कहा कि जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियों और SSB के बीच संपर्क और समन्वय लगातार बना रहे. ग्रामीणों, स्थानीय समितियों, पुलिस और वन विभाग को भी इस निगरानी व्यवस्था में जोड़ा जाए ताकि सामूहिक भागीदारी से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.

नेपाल में हालात क्यों बिगड़े?
नेपाल में हाल ही में शुरू हुए Gen Z मूवमेंट ने सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का रूप ले लिया है. सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार के खिलाफ नाराजगी और पारदर्शिता की मांग को लेकर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू कर दिए. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन हालात और बेकाबू हो गए. राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा.

उत्तराखण्ड प्रशासन भी चौकन्ना
उत्तराखण्ड का नेपाल के साथ लंबा सीमा क्षेत्र जुड़ा हुआ है. लोग सीमापार रोजमर्रा के कामों और व्यापार के लिए आते-जाते हैं. नेपाल में बढ़ते विरोध-प्रदर्शन और हिंसा का असर सीमा पार से अवैध आवाजाही, अफवाहों और असामाजिक गतिविधियों के रूप में उत्तराखण्ड तक पहुंच सकता है. यही कारण है कि मुख्यमंत्री धामी (Pushkar Singh Dhami news) ने सीमावर्ती जिलों के प्रशासन को तुरंत चौकन्ना रहने और हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है. कुल मिलाकर, उत्तराखण्ड सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि नेपाल में अस्थिरता चाहे जितनी भी बढ़े, सीमाओं पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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