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Himalaya Calling 2025: देहरादून में गूंजा हिमालय कॉलिंग! भविष्य की दिशा होगी तय; ये है ख़ास बात

Himalaya Calling 2025: देहरादून में यूपीईएस ने ‘हिमालय कॉलिंग 2025’ की शुरुआत की. तीन दिवसीय सम्मेलन में 1600+ प्रतिनिधि, 700 छात्र और 10 पद्म विजेता शामिल होकर सतत विकास, शोध, संस्कृति और हिमालय संरक्षण पर मंथन करेंगे.

देहरादून (Himalaya Calling 2025): यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (यूपीईएस) ने सोमवार को अपने देहरादून परिसर में 3 दिवसीय ग्लोबल समिट ‘हिमालय कॉलिंग 2025’ की शुरुआत की. इस आयोजन का संचालन हिमालयन इंस्टीट्यूट फॉर लर्निंग एंड लीडरशिप (HILL) कर रहा है. इस साल सम्मेलन का विषय रखा गया है ‘हिमालय के साथ उठो और सतत विकास लक्ष्यों की गति बढ़ाओ’. ‘हिमालय कॉलिंग’ का मकसद हिमालय की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को उजागर करना, सतत विकास पर शोध और नीति संवाद को गति देना, युवाओं को नेतृत्व के लिए प्रेरित करना और HILL को वैश्विक स्तर पर ज्ञान व विचार नेतृत्व का प्रमुख केंद्र बनाना है.

हिमालय से जुड़ी बातों पर गंभीर चर्चा
इस सम्मेलन में 700 से अधिक छात्र और 1,600+ प्रतिनिधि ऑनलाइन और ऑफ़लाइन शामिल हो रहे हैं. तीन दिनों के इस आयोजन में 17 ऑफ़लाइन और 9 ऑनलाइन सत्र, कुल 25+ सत्र और 128 से ज्यादा प्रमुख वक्ता हिस्सा ले रहे हैं. इस बार सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें 10 पद्म पुरस्कार (Padma awardees UPES event) विजेता शामिल हो रहे हैं. उद्घाटन समारोह एमएसी हॉल में हुआ. इसी के साथ हिमालयी उत्पादों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया, जिसमें 400 से अधिक वस्तुएं (हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद और स्मृति-चिह्न) प्रदर्शित की गईं. यह प्रदर्शनी 9 से 11 सितम्बर तक रोज़ सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी. साथ ही, हिमालयी फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है.

Himalaya Calling 2025
UPES के कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह

हिमालय की रक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने की. उन्होंने कहा:-

हिमालय कॉलिंग हमारे महान हिमालय की रक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता है. यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, समुदायों और छात्रों को जोड़कर स्थायी समाधान का रास्ता खोलता है. यूपीईएस और HILL को इस दूरदर्शी आयोजन के लिए मेरी शुभकामनाएं है.

3 दिन के कार्यक्रम की रहेगी ये ख़ास बातें
तीन दिनों का यह सम्मेलन अलग-अलग विषयों पर केंद्रित रहेगा. आइए, जानते हैं:-

पहला दिन: ईएसजी, पर्वतीय आजीविका, खाद्य सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और ऊर्जा अनुकूलन.

दूसरा दिन: मिथक, इतिहास और कला को विज्ञान से जोड़ने वाली चर्चाएं. मानवाधिकार, जलवायु मॉडलिंग, अक्षय ऊर्जा और प्राचीन हिमालयी ज्ञान परंपराएं मुख्य विषय होंगे. इसी दिन राउंड टेबल बैठक होगी, जिसमें 30 से अधिक विशेषज्ञ और संगठन साझा कार्ययोजना बनाएंगे.

तीसरा दिन: वैलेडिक्टरी सत्र और सांस्कृतिक संवाद. इसमें स्थानीय परंपराओं को सतत विकास के साथ जोड़ने पर विचार होगा. समापन सत्र में मुख्य वक्ता होंगे, डॉ. नितिन सेठ (IFCPAR), पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, डॉ. दुर्गेश पंत (डीजी, यूकॉस्ट) और श्री मीनाक्षी सुंदारम (सचिव, उत्तराखंड सरकार).

Himalaya Calling 2025
हिमालयी उत्पादों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ

हिमालय कॉलिंग के जरिए सुनेंगे आवाज़
यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्म ने कहा कि ‘हिमालय कॉलिंग एक जीवंत कक्षा है, जहं वैज्ञानिक, कलाकार और नीति निर्माता मिलकर शोध को व्यवहार में बदल रहे हैं और सतत विकास लक्ष्यों को गति दे रहे हैं. वहीं, HILL के निदेशक डॉ. जे.के. पांडेय ने कहा कि हम इस बार समाधान प्रधान (UPES Dehradun conference) दृष्टिकोण लेकर आए हैं. गहन शोध को सामुदायिक ज्ञान से जोड़ना, हिमालयी उत्पादों और फोटोग्राफी का प्रदर्शन करना और गोलमेज संवाद के जरिए दीर्घकालिक सहयोग की नींव रखना हमारा उद्देश्य है.

क्यों ज़रूरी है यह सम्मेलन
हिमालयी क्षेत्र इस समय जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, जैव विविधता हानि और भूकंपीय खतरों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में ‘हिमालय कॉलिंग 2025’ जैसे आयोजन बेहद अहम हैं. यह न केवल संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने में मदद करते हैं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान (Himalayan sustainability summit) को आधुनिक समाधानों से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए टिकाऊ रास्ता भी तैयार करते हैं. गौरतलब है कि उत्तराखंड में बीते कुछ सालों में हिमालय से जुड़ी कई प्राकृतिक घटनाएं देखी गई है.


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