Sustainable Fashion: क्या आपने नोटिस किया है कि अब लाइफस्टाइल का असली फैशन सिर्फ नए कपड़े या गैजेट नहीं, बल्कि इको-फ्रेंडली आदतें बन चुकी हैं? जी हां, 2025 में सस्टेनेबल लिविंग यानी पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly products) जीवनशैली तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी (reduce plastic waste) का हिस्सा बन रही है. कहीं लोग प्लास्टिक छोड़कर ग्लास और स्टील अपना रहे हैं, तो कहीं सेकंड हैंड कपड़ों का चलन युवाओं को खूब भा रहा है.
क्यों बढ़ा सस्टेनेबल लिविंग का चलन
2024 इतिहास का सबसे गर्म साल रहा. वैश्विक तापमान औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया. ऐसे में पर्यावरण और संसाधनों को बचाना अब ज़रूरी ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल (sustainable fashion) का हिस्सा बन गया है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि 72% उपभोक्ता इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं. खासतौर पर Gen Z और मिलेनियल्स इस बदलाव को लीड कर रहे हैं.

रीयूजेबल चीज़ों का बढ़ता चलन
प्लास्टिक प्रोडक्शन 2023 में करीब 430 मिलियन टन रहा, जिसमें से 65% तुरंत कचरे में बदल गया. इसके नुकसान का अनुमान 600 बिलियन डॉलर तक है. अब लोग घरों (second hand clothing) में ग्लास कंटेनर, स्टील की बोतलें और जूट बैग इस्तेमाल कर रहे हैं। वीकेंड मार्केट्स में बायोडिग्रेडेबल पैकिंग और बांस के टूथब्रश, लकड़ी की कटलरी जैसी चीजें आम हो चुकी हैं.
लो-वेस्ट किचन और स्मार्ट लाइफ
2025 में हर दूसरा घर लो-वेस्ट या ज़ीरो-वेस्ट किचन अपनाने की कोशिश कर रहा है. मील प्लानिंग, स्मार्ट स्टोरेज, कंपोस्टिंग और बचे खाने से नए व्यंजन बनाने का ट्रेंड बढ़ा है. लोग DIY होम स्टेपल्स बना रहे हैं, जैसे खुद का सॉस, स्नैक्स और ब्रेड. इससे न सिर्फ कचरा कम हो रहा है बल्कि खर्च भी बच रहा है.
सेकंड हैंड फैशन – नया स्टाइल स्टेटमेंट
कपड़ों की दुनिया में भी बड़ा बदलाव आया है. अब सेकंड हैंड या थ्रिफ्ट शॉपिंग को जनरेशन Z स्टाइलिश और स्मार्ट चॉइस मान रही है. आंकड़े बताते हैं कि 2025 तक सेकंड हैंड ऐपैरल मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ हुई है. यह चलन भारत समेत दुनिया भर में कपड़ा अपशिष्ट घटाने का बड़ा जरिया बना है.

घर और इंटीरियर में ग्रीन टच
सिर्फ कपड़े और किचन ही नहीं, बल्कि घरों की सज्जा में भी सस्टेनेबिलिटी का रंग दिख रहा है. क्ले और वुड फर्नीचर, बायोफिलिक डिज़ाइन, पौधों से सजावट और ऑर्गेनिक कॉटन व बांस के टेक्सटाइल्स की डिमांड बढ़ी है. अब तो कम्पोस्ट बिन, वर्टिकल गार्डन और सोलर होम सॉल्यूशंस आम बात हो चुकी है.
व्यवसाय भी हो रहे ग्रीन
रिपोर्ट्स कहती हैं कि 75% कंपनियों के टॉप एक्जीक्यूटिव मानते हैं कि सस्टेनेबल प्रैक्टिस से बिज़नेस बेहतर चलता है. 55% को उम्मीद है कि 2030 तक इस ट्रेंड से (zero waste lifestyle) उन्हें सीधा फायदा होगा. वहीं, टेक्नोलॉजी में AI की मदद से 2050 तक कार्बन उत्सर्जन 20% घटाने का टारगेट (carbon neutral brands) रखा गया है.
2025 में सस्टेनेबल लिविंग सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि जीने का नया नजरिया बन गया है. लोग अब सिर्फ यह नहीं पूछते कि ब्रांड क्या बेच रहा है, बल्कि यह भी कि वो कैसे बना और कहां से आया. यही सोच भविष्य की दुनिया को ग्रीन और हेल्दी बनाने का सबसे बड़ा हथियार है.
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