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हरिद्वार एवं देहरादून के दो अत्यंत संवेदनशील मामलों पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान 

बच्चों के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा सर्वोपरि : डॉ गीता खन्ना

देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने हरिद्वार एवं देहरादून में सामने आए दो अत्यंत संवेदनशील मामलों पर गंभीर संज्ञान लिया है और संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की है।

पहला मामला हरिद्वार जनपद के खानपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म से संबंधित है, जिसमें पुलिस की कथित लापरवाही भी प्रकाश में आई है। आयोग ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर मानते हुए निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम सहित सभी प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के अनुरूप त्वरित एवं संवेदनशील तरीके से की जाए। आयोग ने घटना की पूरी समय-रेखा, आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई, संबंधित पुलिस कर्मियों पर की गई विभागीय कार्यवाही तथा पीड़िता एवं उसके परिवार की सुरक्षा संबंधी उठाए गए कदमों की जानकारी 7 दिवस के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़ित बालिका को मनोवैज्ञानिक परामर्श, समुचित चिकित्सीय उपचार, ट्रॉमा सपोर्ट, विधिक सहायता एवं प्रभावी पुनर्वास की सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।

दूसरा मामला देहरादून के राजपुर क्षेत्र में एक छात्रावास में रह रहे 17 वर्षीय किशोर (मूल निवासी झारखंड) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु से संबंधित है। किशोर एनडीए परीक्षा की तैयारी हेतु देहरादून आया था। आयोग ने इस घटना को भी गंभीरता से लेते हुए मृत्यु के कारणों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, छात्रावास प्रबंधन से पूछताछ, तथा अन्य बच्चों की सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी 3 दिवस के भीतर मांगी है।

डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि दोनों ही मामलों में बच्चों के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी प्रकरणों में किशोर न्याय अधिनियम, POCSO अधिनियम एवं पीड़ित प्रतिकर योजनाओं के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।

 

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