वॉशिंगटन: आजकल बढ़ती उम्र के साथ सबसे बड़ा डर होता है याददाश्त खोने का. अक्सर आपने सुना होगा–बुज़ुर्गों को भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया या अल्ज़ाइमर हो गया है. यह बीमारी धीरे-धीरे इंसान की सोचने और याद रखने की ताकत को कम कर देती है. लेकिन हाल ही में आई एक इंटरनेशनल स्टडी (Alzheimer Prevention diet) ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है. रिसर्च में सामने आया है कि अगर लोग मेडिटेरेनियन डाइट (Mediterranean Diet) को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें तो अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है.
मेडिटेरेनियन डाइट क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो ये डाइट मेडिटेरेनियन देशों (जैसे इटली, ग्रीस) की खाने की आदतों पर आधारित है. इसमें ताज़े फल-सब्ज़ियां, साबुत अनाज, दालें, मछली, ऑलिव ऑयल और ड्राई फ्रूट्स को ज्यादा जगह दी जाती है. रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड बहुत कम मात्रा में लिया जाता है. मतलब साफ है, हेल्दी और नेचुरल फूड पर फोकस.
जेनेटिक रिस्क वालों को सबसे ज्यादा फायदा
ये स्टडी Nature Medicine जर्नल में पब्लिश हुई है. रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में अल्ज़ाइमर का खतरा जेनेटिक तौर पर ज्यादा है, उन्हें मेडिटेरेनियन डाइट से सबसे ज्यादा फायदा हुआ. खासकर जिन लोगों में APOE4 जीन के दो कॉपी (हाई रिस्क फैक्टर) पाए गए, उनमें भी डिमेंशिया का रिस्क (natural ways to reduce Alzheimer’s risk) काफी कम हो गया. अगर आपके परिवार में किसी को अल्ज़ाइमर रहा है और आपको डर है कि आपको भी यह प्रॉब्लम हो सकती है, तो मेडिटेरेनियन डाइट आपके लिए डिफेंस की तरह काम कर सकती है.

स्टडी में क्या हुआ?
1. रिसर्चर्स ने करीब 4,200 महिलाओं और 1,500 पुरुषों का डाटा एनालाइज किया.
2. ये सभी हेल्थ प्रोफेशनल्स और नर्सिंग स्टडीज का हिस्सा थे.
3. सालों तक उनकी डाइट, ब्लड सैंपल और जेनेटिक डाटा को ट्रैक किया गया.
4. नतीजा यह निकला कि जो लोग मेडिटेरेनियन डाइट फॉलो कर रहे थे, उनमें याददाश्त कमजोर होने और डिमेंशिया के केस कम पाए गए.
कैसे काम करती है यह डाइट?
रिसर्चर्स के मुताबिक, मेडिटेरेनियन डाइट बॉडी के मेटाबॉलिज़्म को बैलेंस करती है. ब्लड में मौजूद छोटे-छोटे मॉलेक्यूल (metabolites) को पॉजिटिव तरीके से बदलती है. इसका सीधा असर (Alzheimer’s prevention diet) दिमाग पर पड़ता है और ब्रेन हेल्थ बेहतर रहती है.डॉक्टर्स और साइंटिस्ट्स का कहना है कि यह डाइट किसी एक के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए फायदेमंद है. लेकिन खासकर उनके लिए जरूरी है जो अल्ज़ाइमर के जेनेटिक रिस्क में आते हैं.
ये बातें का रखें विशेष ध्यान
1. हर दिन फ्रूट्स और सब्ज़ियां खाएं.
2. रेड मीट, पैकेज्ड फूड और शुगर को लिमिट करें.
3. डाइट में नट्स, सीड्स, मछली और ऑलिव ऑयल जैसी हेल्दी फैट वाली चीज़ें शामिल करें.
ज्यादा से ज्यादा नेचुरल और होममेड खाना खाएं.
लेकिन कुछ लिमिटेशन भी हैं
रिसर्च टीम ने माना कि उनका स्टडी ग्रुप ज्यादातर यूरोपियन बैकग्राउंड के लोग थे और अच्छी-खासी एजुकेटेड पॉपुलेशन थी. इसलिए इसे सब पर लागू करने से पहले और रिसर्च की जरूरत है. इसके अलावा, हर इंसान को अपना जेनेटिक रिस्क पता नहीं होता. इसलिए डॉक्टर्स कहते हैं कि इसे अभी प्रैक्टिकल (Mediterranean diet for brain health) गाइडलाइन की तरह नहीं बल्कि एक हेल्दी लाइफस्टाइल ऑप्शन की तरह लें. हम सब जानते हैं (Alzheimer’s genes) कि आप वही हैं जो आप खाते हैं. अगर आपकी डाइट हेल्दी होगी तो दिमाग और शरीर दोनों मजबूत रहेंगे. अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी अभी पूरी तरह से क्योर नहीं हो सकती, लेकिन रिसर्च बता रही है कि सही खानपान से इसके रिस्क को कम किया जा सकता है.
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