देहरादून (Dehradun News): आपने कभी सोचा है कि जब उम्र बढ़ने लगे और शरीर थकान देने लगे, तब कौन-सी चिकित्सा हमें बिना दवाओं के फिर से सक्रिय और फिट बना सकती है? जवाब है –फिजियोथेरेपी, यही वजह है कि हर साल 8 सितंबर को दुनियाभर में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस (World Physiotherapy Day) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य है लोगों को यह जागरूक करना कि फिजियोथेरेपी सिर्फ चोट का इलाज नहीं बल्कि जीवन को स्वस्थ, सक्रिय और बेहतर बनाने का साइंस है.
इस थीम पर रहा वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे
इस बार इस दिवस की थीम रही – हेल्दी एजिंग (Healthy Ageing) यानी बढ़ती उम्र में भी शरीर को चुस्त-दुरुस्त और फिट बनाए रखना. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय (DBUU) के फिजियोथेरेपी विभाग ने इस दिन को बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया. इस दौरान छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों (नृत्य, गायन और थीम-आधारित नाटक) के जरिए ‘हेल्दी एजिंग’ का संदेश बहुत प्रभावशाली तरीके से दर्शाया. समापन पर केक काटकर इस यादगार पल का जश्न मनाया गया.

देहरादून में हुआ खास आयोजन
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं जानी-मानी फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जसलीन कालरा शर्मा, जो उत्तराखंड पुलिस की आधिकारिक फिजियोथेरेपिस्ट भी रह चुकी हैं. उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि फिजियोथेरेपी केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण और सक्रिय जीवन जीने की दिशा में मार्गदर्शन है. इस मौके पर विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर, वाइस चांसलर और कॉलेज की डीन डॉ. चारु ठाकुर सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. कार्यक्रम का संचालन विभाग की टीम ने किया, जिसमें डॉ. तृप्ति पांडे, डॉ. मेघा जुगरा, डॉ. अदिति कुलियाल, डॉ. अलिशा और डॉ. ऋतु नेगी शामिल थीं. वहीं इस अवसर पर डॉ. तृप्ति पांडे ने कहा कि डॉ. जसलीन कालरा शर्मा ने जिस बारीकी से विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी की गहराई और व्यावहारिकता समझाई, वह सराहनीय है. छात्रों को उनके मार्गदर्शन को आत्मसात करते हुए अपने जीवन में अपनाना चाहिए.
भारत में कितने फिजियोथेरेपिस्ट?
आज के दौर में भारत में फिजियोथेरेपी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है. 2025 तक देश में लगभग 1.5 लाख से ज्यादा फिजियोथेरेपिस्ट पंजीकृत हो चुके हैं. लेकिन भारत की जनसंख्या (करीब 1.4 अरब) के हिसाब से यह संख्या अभी भी बहुत कम है. वर्तमान में भारत में प्रति 10,000 लोगों पर सिर्फ 0.59 फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध हैं. जबकि WHO मानक के अनुसार प्रत्येक 10,000 लोगों पर कम से कम 1 फिजियोथेरेपिस्ट होना चाहिए. 2024 के वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डेटा में यह अनुपात और भी कम यानी 0.36 प्रति 10,000 दर्ज किया गया था. हालांकि पिछले कुछ सालों में फिजियोथेरेपिस्ट की तादाद बढ़ने लगी है.

भविष्य में बढ़ेगी मांग
आज लोग स्वास्थ्य को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो गए हैं. खेल, फिटनेस, जिम और सबसे बढ़कर बढ़ती हुई बुजुर्गों की आबादी, इन सबके कारण आने वाले सालों में फिजियोथेरेपिस्ट की मांग और तेजी से बढ़ेगी. अस्पतालों से लेकर स्पोर्ट्स टीम, कॉर्पोरेट सेक्टर और निजी क्लीनिक तक, हर जगह इनकी जरूरत महसूस हो रही है.
देहरादून में देवभूमि विश्वविद्यालय द्वारा मनाया गया यह आयोजन न सिर्फ छात्रों के लिए प्रेरणादायी रहा, बल्कि समाज को भी यह संदेश मिला कि फिजियोथेरेपी भविष्य का अहम क्षेत्र है. ‘हेल्दी एजिंग’ की थीम ने यह याद दिलाया कि उम्र बढ़ना तो स्वाभाविक है, लेकिन सही देखभाल और फिजियोथेरेपी की मदद से जीवन को लंबे समय तक स्वस्थ और खुशहाल बनाया जा सकता है.
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