Sunday, February 8, 2026
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DBUU में Balancing Act लेक्चर: संतुलन विकारों पर जागरूकता बढ़ाने की पहल, छात्रों ने सीखी वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स की गहराई

देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में Balancing Act अतिथि व्याख्यान आयोजित हुआ, जिसमें छात्रों ने वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स, वर्टिगो और आधुनिक उपचार तकनीकों पर गहन जानकारी हासिल की।

देहरादून स्थित देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी (DBUU) के फिजियोथेरेपी विभाग में मंगलवार को आयोजित विशेष अतिथि व्याख्यान ने छात्रों को वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स की जटिल दुनिया से रूबरू कराया। ‘Balancing Act: Collaborative Care in Vestibular Disorders’ शीर्षक से हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य वर्टिगो, मेनियर डिज़ीज़ और वेस्टिब्यूलर न्यूरीटिस जैसे बेहद संवेदनशील विकारों पर गहराई से समझ विकसित करना था।

मुख्य वक्ता डॉ. लवनीश कुमार ने भरी छात्रों में ऊर्जा

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिमालयन हॉस्पिटल, जौलीग्रांट के प्रोफेसर व सर्जन डॉ. लवनीश कुमार थे। छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि आज के छात्रों में जो जिज्ञासा और आत्मविश्वास मैंने देखा, वह प्रेरणा देने वाला है। ऐसे युवा आने वाले समय में मेडिकल फील्ड में उल्लेखनीय योगदान देंगे। मुझे भरोसा है कि अपने ज्ञान और मेहनत से वे नई ऊंचाइयां हासिल करेंगे। उनका यह संबोधन छात्रों में नई सोच, नई ऊर्जा और प्रैक्टिकल लर्निंग की ओर उत्साह भर गया।

नए उपचारों और निदान तकनीकों पर विस्तृत चर्चा

सत्र का मुख्य फोकस था—

  • वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स के नवीन उपचार
  • केस-बेस्ड डिस्कशन
  • आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकेंबेहतर मैनेजमेंट एप्रोच
  • विशेष तौर पर, विशेषज्ञों ने बताया कि वेस्टिब्यूलर सिस्टम के बारीक बदलाव किस तरह मरीज के संतुलन, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं।

इंटरएक्टिव सेशन में खूब पूछे छात्रों ने सवाल

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा Q&A इंटरएक्टिव सेशन, जहां छात्रों ने वेस्टिब्यूलर फिजियोथेरेपी, डिजीज मैनेजमेंट और कोलैबोरेटिव ट्रीटमेंट से जुड़े सवाल पूछे और विशेषज्ञों ने केस स्टडीज़ के माध्यम से समझाया कि सही निदान और मल्टी-डिसिप्लिनरी एप्रोच मरीजों की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छात्रों ने इस अवसर को नॉलेज बूस्टर बताया।

ऐसे कार्यक्रम बनाते हैं छात्रों को भविष्य के लिए तैयार

फिजियोथेरेपी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तृप्ति पांडेय ने कहा कि यह व्याख्यान छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ। इससे उन्हें न सिर्फ मेडिकल साइंस के नवीन पहलुओं की समझ मिली बल्कि यह उन्हें वास्तविक परिस्थितियों से भी जोड़ता है। ऐसे सेशन छात्रों के स्किल डेवलपमेंट के लिए ज़रूरी हैं। वहीं डीन फिजियोथेरेपी, डॉ. चारू ने कहा कि हमारी यूनिवर्सिटी ऐसे अकादमिक कार्यक्रमों को लगातार प्रोत्साहित करती है। हमारा लक्ष्य है कि छात्र प्रैक्टिकल नॉलेज से लैस होकर बेहतर भविष्य बनाएं। हम डॉ. लवनीश कुमार का आभार व्यक्त करते हैं।

छात्र बोले-इस सत्र ने दिया नया विज़न

सत्र के अंत में छात्रों ने डॉ. लवनीश कुमार का धन्यवाद किया और कहा कि यह अनुभव उनके करियर दृष्टिकोण को नई दिशा देने वाला रहा। मेडिकल साइंस की जटिलताओं को सरल तरीके से समझाने वाला यह व्याख्यान DBUU की क्वालिटी एजुकेशन का एक और बेहतरीन उदाहरण बन गया।

वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स क्या होते हैं?

वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स ऐसे विकार हैं जिनमें शरीर का संतुलन (Balance) बनाए रखने वाली प्रणाली प्रभावित हो जाती है। यह प्रणाली हमारे भीतरी कान (Inner Ear) और दिमाग के कुछ हिस्सों की मदद से काम करती है। जब इस सिस्टम में कोई गड़बड़ी होती है, तो व्यक्ति को चक्कर, असंतुलन, मतली, घूमने जैसा महसूस होना और चलने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
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