कोलकाता (GST Bachat Utsav): नए जीएसटी (Goods and Services Tax) रेट्स के लागू होने के साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस राहत का पूरा बोझ राज्य सरकारों (State Government) ने उठाया है और केंद्र ने इसमें एक भी पैसा खर्च नहीं किया.
राज्य सरकार को मिला खर्च का बोझ
ममता बनर्जी ने कहा, केंद्र सरकार को इसमें कोई क्रेडिट नहीं मिलता. मैंने सबसे पहले पत्र लिखकर जीवन बीमा और कई जरूरी दवाओं को GST से छूट देने की मांग की थी. राहत के सारे पैसों का बोझ राज्य की जेब से पड़ा. केंद्र बस इसका क्रेडिट ले रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की GST हिस्सेदारी से यह पैसा कट गया और कई योजनाओं जैसे 100 दिन का काम, आवास योजना, सड़क, जल सपनो और सर्व शिक्षा अभियान के फंड भी रुके हुए हैं.
GST reforms से आम जनता को मिलेगा फायदा
हालांकि, मुख्यमंत्री ने खुशी जताई कि आम लोगों को राहत जरूर मिलेगी. उन्होंने कहा कि नए GST reforms India से उपभोक्ता की जेब पर सकारात्मक असर पड़ेगा. कुणाल घोष (Trinamool Congress Leader) ने भी कहा कि पहले की GST दरें जनविरोधी थीं. ममता बनर्जी ने आवाज़ उठाई और पूरे देश ने समर्थन किया, जिसके बाद केंद्र को दरें बदलनी पड़ी.
नए GST ढांचे का विवरण
पुराने चार-स्तरीय GST सिस्टम को खत्म करके अब दो स्तरीय प्रणाली (5% और 18%) लागू कर दी गई है. विलासिता और ‘सिन गुड्स’ के लिए 40% अलग स्लैब रखा गया है. यह नया ढांचा compliance आसान बनाएगा, consumer prices India कम करेगा, MSMEs और manufacturing sector को बढ़ावा देगा.
FMCG और डेयरी में तुरंत असर
FMCG और डेयरी सेक्टर के बड़े ब्रांड जैसे Amul, Mother Dairy ने कीमतों में कटौती कर दी है. अब 100 ग्राम अमूल बटर 62 रुपये से घटकर 58 रुपये और UHT दूध 77 रुपये से घटकर 75 रुपये प्रति लीटर बिकेगा. मदर डेयरी ने भी पनीर, घी, मिल्कशेक और फ्रोजन प्रोडक्ट्स की कीमतें कम कर दी हैं.
राज्यों के हितों की अनदेखी- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने इस बदलाव में अपनी अहम भूमिका दिखाई. उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने दरें तय करते समय जनता और राज्यों के हितों की अनदेखी की, लेकिन अब राहत मिलने के बावजूद इसका पूरा क्रेडिट केंद्र ले रहा है. नई GST rates से आम जनता के लिए जीवन यापन सस्ता होगा, कीमतों में राहत मिलेगी और कारोबारियों के compliance आसान होंगे. साथ ही यह सवाल भी उठता है कि fund allocation India में राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर संतुलन कैसे बनता है.
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