नई दिल्ली: भारतीय सेना ने सुपर हाई-ऑल्टिट्यूड इलाकों में तैनात जवानों के लिए (Made in India) इस्तेमाल होने वाले स्पेशल क्लोदिंग एंड माउंटेनियरिंग इक्विपमेंट (SCME) का 97% हिस्सा पूरी तरह देसी बना लिया है। कुल 57 में से 55 आइटम अब स्वदेशी हैं, जबकि बाकी दो उपकरणों के ट्रायल जारी हैं और ये भी 2026 तक देश में ही बनेंगे। सेना ने इसे आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
नया Combat Coat: NIFT की डिज़ाइन, सेना की पहचान
ADG PI के अनुसार, सेना ने जनवरी 2025 में नया New Coat Combat (Digital Print) लॉन्च किया था। इसे NIFT, नई दिल्ली ने डिज़ाइन किया है। तीन-लेयर वाले इस कॉम्बैट कोट में एडवांस टेक्निकल टेक्सटाइल का इस्तेमाल किया गया है, जो ऊंचाई पर तैनात सैनिकों की कम्फर्ट, मूवमेंट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को पहले से ज्यादा बेहतर बनाता है।
डिज़ाइन अब सेना की मिल्कियत: मिली IPR सुरक्षा
भारतीय सेना ने इस कॉम्बैट कोट के डिज़ाइन और कैमोफ्लाज पैटर्न को Controller General of Patents, Designs & Trademarks, कोलकाता में आधिकारिक रूप से रजिस्टर करा लिया है। Design Application No.: 449667-001 इस रजिस्ट्रेशन के बाद इस डिज़ाइन पर पूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) सिर्फ भारतीय सेना के पास होंगे। सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूनिफॉर्म का अनधिकृत इस्तेमाल दंडनीय अपराध है।
तीन लेयर-एक लक्ष्य: जवानों को अधिक सुरक्षा और आराम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, New Coat Combat तीन विशेष लेयरों से मिलकर बना है।
1. Outer Layer
डिजिटल कैमोफ्लाज प्रिंट
हर तरह के भूभाग में बेहतर कंसीलमेंट
ऑपरेशनल ड्यूरेबिलिटी
2. Inner Jacket
हल्का और सांस लेने योग्य इंसुलेटेड मिड-लेयर
मूवमेंट में रुकावट नहीं
3. Thermal Layer
अत्यधिक ठंड में तापमान नियंत्रण
मॉइस्चर बैलेंस बनाए रखता है
SCME आइटमों की स्वदेशीकरण यात्रा न केवल लॉजिस्टिक चेन को मजबूत बनाती है, बल्कि भारत को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सक्षम बनने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देती है।




