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लॉ कॉलेज देहरादून के 20वें मूट कोर्ट में गवर्नर की विवेकाधीन शक्तियों पर हुई जोरदार बहस

प्रतिष्ठा बर्थवाल, योशिता सिंघल, व मिताली नेगी बने लॉ कॉलेज देहरादून के 20वें मूट कोर्ट के विजेता

देहरादून 4 दिसम्बर। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में आज 20वें सुशीला देवी मेमोरियल मूट कोर्ट कम्पीटिशन के अंतिम मुकाबलें का आयोजन किया गया। नैनिताल हाई कोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जनरल श्री डी0 पी0 गैरोला इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे जबकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। अंतिम मुकाबलें के लिए कॉलेज के मूट कोर्ट में एक खण्डपीठ की संरचना की गई जिसकी अध्यक्षता श्री डी0 पी0 गैरोला ने की एवं द्वितीय जज कॉलेज के डीन प्रो0 राजेश बहुगुणा थे। प्रो0 बहुगुणा ने बताया कि 30 दिन तक चली इस प्रतियोगिता में कुल 29 कोर्ट बनाये गये जबकि 38 लोगों ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के अंतिम मुकाबलें में प्रतिभागियों ने मूट कोर्ट में गठित सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के सामने बहस की। मुख्य मुद्दा था कि क्या किसी राज्य का गवर्नर किसी बिल को राष्ट्रपति की संस्तुति के नाम पर अनिश्चित काल के लिए रोक सकता है। सरकार की ओर से बहस कर रहे प्रतिभागियोें ने इसको न्याय संगत बताया वहीं विपक्ष ने इसे संविधानिक नैतिकता और उस कमूल ढ़ाचें पर आघात बताया। कोर्ट में संविधान के 130वें संशोधन की वैधानिकता पर भी बहस हुई। विदित हो कि 130वें संविधान संशोधन के अनुसार यदि किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केन्द्र/राज्य सरकार के मंत्री को गम्भीर अपराध में गिरफ्तार किया जाता है और वे 30 दिनों तक जमानत नही पाते तो उन्हें अपने पद से हटा दिया जाएगा।
अपने सम्बोधन में प्रो0 धर्म बुद्धि ने पिछले 20 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता को कॉलेज की विशेष उपलब्धि बताया उन्होंने कहा कि मूटकोर्ट प्रतियोगिता छात्रों के सर्वांगीण विकास का सर्वोत्तम आधार है।
अपने सम्बोधन में श्री डी0 पी0 गैरोला ने अपने अनुभव साझा करते हुए विधि के छात्रों को वकालत के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि बार काउंन्सिल ऑफ इंडिया द्वारा मूट कोर्ट प्रैक्टिस को विधिक शिक्षा का आवश्यक अंग बनाना एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि ए0आई0 के भरोसे न रहकर स्वयं पढ़ने, शोध करने और ड्राफ्टिंग करने का अभ्यास करें। ए0आई0 एक दोधारी तलवार है जो विधिक व्यवसाय के लिए वरदान व घातक दोनों है।

कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रो0 राधेश्याम झा, डा0 ऐश्वर्य सिंह, प्रो0 अनिल दीक्षित, डा0 जितेन्द्र सिंह, डा0 लक्ष्मी प्रिया विंजामूरी, डा0 रमाकान्त त्रिपाठी, हादिया खान, गरिमा चुफाल, ईशा शर्मा, नाव्या, अश्वती गुप्ता, नंदिनी मजूमदार, सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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