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सरकार आपके द्वारः न्याय पंचायत झांझरा में प्रशासन ने सुनीं जन समस्याएं

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ग्रामीणों के द्वार पर सरकारः झांझरा में 613 लाभार्थियों को मिला योजनाओं का लाभ।*

*लाभ भी, समाधान भीः 181 निःशुल्क स्वास्थ्य जांच से लेकर औषधि वितरण, शिविर में मिला संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ,*

*11 आयुष्मान, 20 आधार अपडेशन, 04 लोगों की पेंशन मौके पर स्वीकृत*

*शिविर में दर्ज 98 में से 37 शिकायतें मौके पर निस्तारित*

*देहरादून 06 जनवरी,2026(सू.वि)*
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार, प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत मंगलवार को सहसपुर ब्लॉक की न्याय पंचायत झांझरा में तहसीलदार विवेक राजौरी की अध्यक्षता में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया गया तथा विभागीय योजनाओं के माध्यम से 613 लोगों को लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, जिला अध्यक्ष मीता सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

शिविर में ग्रामीणों द्वारा कुल 98 शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनमें से 37 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को अग्रसारित करते हुए समयबद्ध ढंग से निस्तारण के निर्देश दिए गए। जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने पेयजल, विद्युत, सिंचाई, प्रधानमंत्री आवास, अवैध खनन एवं अतिक्रमण से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठाईं।

झांझरा ग्राम प्रधान अर्जुन कुमार ने 300 मीटर लंबी एसटी विद्युत लाइन को निजी संपत्ति से हटाकर मुख्य मार्ग के किनारे स्थानांतरित कराने, बरसाती नालों के निर्माण तथा मौजा बंशीवाला स्थित अंबेडकर पार्क की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग रखी। साथ ही झांझरा में सरकारी भूमि पर हाट बाजार लगाने की अनुमति की मांग भी की।

ग्राम अटकफार्म की प्रधान सुनीता देवी ने डुंगा रेंज वन क्षेत्र एवं वन पंचायत की भूमि के बीच सीमा विवाद के समाधान हेतु वन विभाग से सीमांकन कराने की मांग की। कंडोली ग्राम प्रधान कोमल ने ग्राम पंचायत के प्रमुख स्थलों एवं चौराहों पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए जाने की मांग रखी।

सिद्धौवाला ग्राम प्रधान ने जल संस्थान के माध्यम से गांव में पानी के बिल भुगतान हेतु शिविर लगाने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को भुगतान में आ रही कठिनाइयों का समाधान हो सके। साथ ही उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल लाइन बिछाने एवं आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति प्रदान करने की मांग भी रखी।

यूकेडी के सहसपुर ब्लॉक अध्यक्ष यशपाल सिंह नेगी ने पछवादून क्षेत्र में नदी-नालों के किनारे हो रहे अवैध कब्जों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। जनसुनवाई के दौरान फरियादी दिनेश नौटियाल ने अपने घर के सामने से विद्युत खंभा हटाने, रमेश चंद्र ने हरबर्टपुर जैन गेट के सामने लटकी विद्युत लाइन एवं खंभे को ठीक कराने की मांग रखी। वहीं झांझरा निवासी मनोज कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत करने की गुहार लगाई।

बहुउद्देशीय शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एलोपैथिक में 77, होम्योपैथिक में 64 तथा आयुर्वेदिक में 40 लोगों की जांच कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। राजस्व विभाग ने 26 प्रमाण पत्र जारी किए। कृषि विभाग ने 8 एवं उद्यान विभाग ने 20 किसानों को कृषि यंत्र, बीज एवं पीएम किसान निधि का लाभ प्रदान किया। समाज कल्याण विभाग ने 04 पात्र व्यक्तियों की पेंशन मौके पर स्वीकृत की। जिला पूर्ति विभाग द्वारा 28 राशन कार्ड धारकों की केवाईसी कराई गई। इसके अतिरिक्त बाल विकास विभाग ने 20, एनआरएलएम ने 28 तथा श्रम विभाग ने 15 लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ पहुंचाया। सेवायोजन विभाग द्वारा 20 छात्रों को करियर काउंसलिंग दी गई, जबकि यूको बैंक ने 25 ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी।

शिविर में सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, जिला अध्यक्ष मीता सिंह, जिला महामंत्री यशपाल नेगी, जिला पंचायत सदस्य कंचन, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मेघ सिंह, ग्राम प्रधान अर्जुन कुमार, सलोनी, निधि गैरोला, आरती नैनवाल, कोमल सहित तहसीलदार विवेक राजौरी, खंड विकास अधिकारी मुन्नी शाह, ग्राम विकास अधिकारी चमन प्रकाश नौटियाल, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

 

भारतीय मानक ब्यूरो ने गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में किया उल्लेखनीय कार्य: मुख्यमंत्री

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गुणवत्ता ही पहचान के मंत्र को साकार कर रहा भारतीय मानक ब्यूरो: सीएम धामी

सीएम धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो ने बीते आठ दशकों में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर गुणवत्ता ही पहचान के मंत्र को साकार किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में भारतीय मानक संस्था के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बीआईएस द्वारा मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से न केवल उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया गया है, बल्कि उपभोक्ताओं के जीवन में भरोसे और सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मानकीकरण का क्षेत्र केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन एवं डिजिटल सेवाओं तक विस्तृत हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा डिजिटल सुरक्षा, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रिसाइकिल सामग्री एवं हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समयानुकूल मानक तय कर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो सतत विकास के लक्ष्य के अनुरूप इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में सराहनीय योगदान दे रहा है। राज्य में बीआईएस द्वारा लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, एमडीडीए, यूपीसीएल सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करते हुए मानकीकरण संबंधी जागरूकता और सहयोगात्मक कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियान देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति के आधार स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद विश्व में गुणवत्ता का मानदंड बनें यह प्रधानमंत्री का स्पष्ट दृष्टिकोण है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में बीआईएस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी अपने स्थानीय उत्पादों हस्तशिल्प, जैविक कृषि उत्पाद, औषधीय जड़ी-बूटियाँ एवं स्थानीय खाद्य उत्पाद के लिए उच्च गुणवत्ता मानक स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘‘हाउस ऑफ हिमालयाज’’ ब्रांड राज्य के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता को केवल मानक नहीं बल्कि आदत बनाना आवश्यक है, ताकि गुणवत्ता आधारित संस्कृति एक जन आंदोलन के रूप में विकसित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय मानक ब्यूरो वन नेशन, वन स्टैंडर्ड की नीति के तहत देश को वैश्विक मानकों की प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगा और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के संकल्प में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा।

नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025 लागू की गई है। राज्य के सभी 13 जनपदों के 95 ब्लॉकों में लगभग 180 विज्ञान, तकनीक इंजीनियरिंग एवं गणित आधारित प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। सभी जिलों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग प्रारंभ की गई है, जिससे सैकड़ों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। प्रत्येक जनपद में एक-एक ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ संचालित की जा रही है। विभिन्न विश्वविद्यालयों व केन्द्रों में 60 पेटेंट सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान आधारित विकास के लिए ‘सीमांत क्षेत्र विकास परिषद’ का गठन किया गया है। साइंस महोत्सवों का आयोजन अब पर्वतीय जनपदों तक विस्तारित किया गया है, इस वर्ष यह महोत्सव रुद्रप्रयाग में हुआ। वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जनपद में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केन्द्रों की स्थापना हेतु बजट आवंटित किया गया है। राज्य में शीघ्र विज्ञान व नवाचार आधारित प्रसारण प्रारंभ किए जाएंगे।

सु ने कहा कि देहरादून में बनने वाली देश की पाँचवीं साइंस सिटी के निर्माण कार्य को उल्लेखनीय गति मिली है। भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से 175 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। महिला प्रौद्योगिकी केन्द्रों की स्थापना भी प्रारंभ की जा चुकी है। राज्य में केन्द्रीय संस्थानों से विज्ञान व नवाचार संवाद को नई गति दी गई है। सिलक्यारा के अभियान में अपनाए गए विज्ञान-प्रौद्योगिकी आधारित रेस्क्यू मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है और इसी पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज राज्य के हर कोने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ा गया है।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, श्रीमती सविता कपूर, निदेशक भारतीय मानक ब्यूरो सौरभ तिवारी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, ब्रिगेडियर के.जी बहल (सेनि), उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सीएम धामी ने अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर की प्रेस वार्ता : कहा अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता

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सीएम धामी ने कहा अंकित के पिता से बात करूंगा: हर जांच के लिए सरकार तैयार

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में चल रही सियासी घमासान के बीच आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता को न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और सरकार ने इस दिशा में पूरी गंभीरता संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य किया है।

सचिवालय मीडिया हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम धामी ने कहा कि इस जघन्य अपराध की निष्पक्षता एवं गहन जांच के लिए महिला अधिकारी श्रीमती पी रेणुका देवी की अध्यक्षता में SIT का गठन किया गया है। समिति ने मामले में सभी पहलुओं की गहराई से जांच की है। न्यायालय में सरकार की सशक्त और प्रभावी पैरवी की परिणाम स्वरुप तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच पर न केवल निचली अदालत बल्कि माननीय उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय ने भी संतोष व्यक्त किया है जो जांच की निष्पक्षता और मजबूती को दर्शाता है। वर्तमान में किसी अधिकृत ऑडियो क्लिप के आधार पर प्रदेश में अनावश्यक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकी वास्तविकता यह है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी गंभीरता से अपनी निष्कर्ष तक पहुंच चुकी है और दोषियों को कड़ी सजा मिल चुकी है।।

सीएम धामी ने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीति करने के लिए और भी कई विषय हैं, लेकिन बेटी अंकिता को सियासी हथियार न बनाया जाए।

तीन साल पहले घटित हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम सामने आने पर विपक्ष सहित तमाम सामाजिक संगठन सरकार से सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। बीते कई दिनों से अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सिलसिलेवार वीडियो ने सोशल मीडिया ही नहीं पूरे प्रदेश में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। उर्मिला अपने वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड की परतें खोलने का दावा कर रही है वहीं वीआईपी नामों को लेकर भी पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगा रही है। इस सियासी घमासान के बीच आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेस वार्ता कहा की उत्तराखंड की बेटी के साथ पूरा न्याय होगा।

सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो नया प्रकरण सामने आया है, उस पर भी सरकार हर स्तर पर जांच कराने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वायरल ऑडियो क्लिप की प्रमाणिकता की जांच पहले जरूरी है। इसके लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है और ऑडियो की सत्यता सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आरोप लगाने वाले लोग आखिर कहां हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास सबूत हैं तो उन्हें पुलिस या अदालत के सामने रखना चाहिए। केवल आरोप लगाकर माहौल खराब करना उचित नहीं है। सीएम ने ऑडियो क्लिप में कहीं हत्या तो कहीं आत्महत्या जैसी बातों का जिक्र होने पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे साफ है कि मामले को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कोई भी दोषी होगा, वह बचेगा नहीं। सरकार हर जांच कराने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करेंगे और बेटी को न्याय दिलाने के लिए वे जो भी चाहेंगे, उसे कानून सम्मत तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

गौरतलब है कि यह प्रेस वार्ता केंद्र सरकार की वीबी जी राम जी योजना को लेकर आयोजित की गई थी, लेकिन पत्रकारों के सवालों के बाद पूरा फोकस अंकिता भंडारी मामले पर आ गया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सभी सवालों के जवाब दिए जाएंगे।

उधर, इस मामले में सियासत और तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी की ओर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

तहरीर में उन पर सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो जारी कर छवि खराब करने और दंगे भड़काने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। साथ ही कांग्रेस, यूकेडी और आप पर भी साजिश का आरोप लगाते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है।

अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर प्रदेश में सियासी घमासान और विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है, जबकि सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा दिला रही

 

वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता : सीएम धामी

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सीएम धामी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने हेतु दिए दिशा निर्देश: नियंत्रण एवं प्रभावी कदम उठाने के दिया निर्देश

देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके नियंत्रण के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भालू, गुलदार, बाघ तथा हाथी से संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए और वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित ग्रामों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी बी फेंसिंग, वॉच टावर एवं अन्य सुरक्षात्मक उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएँ। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्कता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविरों के आयोजन और रैपिड रिस्पॉन्स टीम को निरंतर सक्रिय रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हाथी एवं बाघ कॉरिडोर सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोरों के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। वन्यजीवों के आवागमन वाले मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास निर्माण की व्यवस्था को और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि वर्तमान वन्यजीव संरक्षण नियमों या प्राविधानों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो संबंधित विभाग आवश्यक परीक्षण कर संशोधन प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजें।

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वन्यजीव समन्वय समिति को सक्रिय बनाए रखने के साथ ही संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों एवं ग्रामों की हॉट स्पॉट मैपिंग तत्काल पूरी की जाए। उन्होंने स्कूलों, आंगनबाड़ियों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भालू और अन्य वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित न हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईको-टूरिज्म व्यवस्था को और अधिक सृदृढ़ बनाने के लिए रिजर्व फारॅरेस्ट के अलावा प्रदेश की वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं कंजरर्वेशन रिजर्व क्षेत्रों में भी कार्य किये जाएं। मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने तथा जन सुरक्षा की दृष्टि से टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिविजन में पशु चिकित्सकों की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित कुल 9 प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। इनमें जनपद रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य की 4 विविध पेयजल योजनाएं और 2 पेयजल योजनाएं, राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से जुड़ी 2 मोटरमार्ग योजनाएं तथा रामनगर वन प्रभाग से संबंधित एक ऑप्टिकल फाइबर प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा संरक्षित क्षेत्रों की 10 किलोमीटर परिधि में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ संदर्भित किए जाने का निर्णय लिया गया।

वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक समग्र और दूरदर्शी कदम हैं, जिनसे उत्तराखंड में वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।

बैठक में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 21वीं बैठक में लिए गए निर्णय पर की गई कार्यवाही की जानकारी देते हुए प्रमुख वन संरक्षक श्री रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि चौरासी कुटिया के पुनर्विकास, मंसादेवी मन्दिर एवं पहुंच मार्ग में आपदा से हुई क्षति के कार्यों के पुनःनिर्माण के प्रथम चरण, ऋषिकेश नीलकंठ महादेव रोपवे परियोजना के निर्माण एवं लालढ़ांग -चिल्लरखाल वन मोटरमार्ग के विशेष पुनरूद्वार के लिए स्टैंडिंग कमेटी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। जुलाई 2025 से दिसबंर 2025 तक वन भूमि हस्तान्तरण के 56 प्रस्तावों के वाइल्डलाईफ मैनेजमेंट प्लान स्वीकृत किये गये हैं, जबकि 29 प्रस्तावों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत किये गये हैं। वन्यजीवों द्वारा मानव मृत्यु के प्रकरणों पर अनुग्रह राशि 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख की गई है। 32 वन प्रभागों के अन्तर्गत मानव -वन्यजीव संघर्ष पर त्वरित कार्यवाही के लिए 93 क्यू.आर.टी का गठन किया गया है। पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना हेतु केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजने की भी स्वीकृति दी गई है।

बैठक में राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य विधायक दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान, बंशीधर भगत, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ अन्य सदस्यगण एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

 

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सीएम धामी को लिखा पत्र: विशेष विधानसभा सत्र की की मांग

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22 दिसंबर 2025 को ऋषिकेश के पशु लोक और उससे लगे इलाकों की 2866 एकड़ भूमि के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय के कठोर निर्देश आए है। माननीय न्यायालय ने मुख्य सचिव उत्तराखण्ड व मुख्य वन संरक्षक उत्तराखण्ड को इस प्रश्नगत भूमि की जांच करने के लिए एक जांच समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। इस भूमि को वन विभाग ने 1952 के लगभग पूज्य बापू की शिष्या मीरा बेन को लीज पर दिया उन्होंने पशुलोक सेवा समिति के द्वारा इस भूमि पर पशुओं के संबर्धन का कार्य शुरु किया था। मीरा बहिन पशुधन को पर्वतीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाना चाहती थी। पशुलोक की शुरुआत के साथ इनसे लगे इलाकों में लोगों का बसना भी शुरु हो गया था इस भूमि पर एम्स ऋषिकेश, आई0डी0पी0एल0, पशुलोक जैसे सरकारी प्रतिष्ठान बने हैं, इसी भूमि पर बड़ी संख्या में टिहरी विस्थापिथों को भी पुर्नवासित किया गया है।

माननीय उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के बाद ऋषिकेश में कई दशकों से रह रहे हजारों लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। सरकारी जांच कमेटी, पुलिस बल और वन बिभाग के जबरदस्ती इस क्षेत्र में प्रवेश करने से महौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। उत्तराखंड राज्य के 65 प्रतिशत से अधिक भूभाग में वन हैं। ऋषिकेश की इस बड़े भू-भाग पर ही नहीं, पर्वतीय जिलो के हर क्षेत्र से लेकर, भावर, तराई और मैदानी जिलों के अनेक क्षेत्रों में यहां के निवासी पीढ़ियों से वनों में या वन भूमियों में निवासरत हैं या वनों पर आश्रित हैं।

देश के अनेक हिस्सों में वन भूमियों पर सालों से निवासरत या आश्रितों को अधिकार दिलाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री माननीय मनमोहन सिंह जी की सरकार ने देश की संसद से पास करा कर वनाधिकार कानून 2006 बनाया था। देश के कई राज्यों ने इस कानून का सदुप्रयोग कर अपने लाखों निवासियों को वन भूमियों में भूमिधरी अधिकार दिए हैं। उत्तराखण्ड में इस कानून का बहुत कम प्रयोग हुआ। इसलिए वन भूमियों में पीढ़ियों या सालों से निवासरत लोगों या सरकारी विभागों को भी कब्जेदार माना जा रहा है। इस स्थिति को राज्य सरकार ने कभी देश के न्यायालयों के सामने भी नहीं रखा है।

रामनगर विधानसभा के मालधन चैड़ जैसे 31 वन ग्राम या खत्ते भूमिधरी अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गौलापार क्षेत्र का बागजाला गांव 100 सालों से अधिक समय से वन भूमि पर बसा है। हल्द्वानी के दमुवाढुंगा क्षेत्र में हजारों लोग पीढ़ियों से वन भूमि में निवास कर रहे हैं। अब ये सारा क्षेत्र नगर निगम में आ गया है लेकिन इन लोंगों को भूमिधरी नहीं मिल पायी है।

नैनीताल जनपद के भाबर क्षेत्र का बिंदुखत्ता 200 सालों से अधिक समय से वन भूमि पर बसा है। अभिलेखों के अनुसार 1932 से इनके पास लिखित पशु चारण की अनुमति है। जिला अधिकारी की अध्यक्षता वाली वन अधिकार समिति ने 19 जून 2024 को बिंदुखत्ता का राजस्व ग्राम बनाने की संस्तुति भेजी है । यह खेद का विषय है कि, वनाधिकार कानून 2006 की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी अभी तक सरकार ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम नहीं बनाया है। पीढ़ियों से वनों में अपना जीवन गुजारने के बाद भी बिन्दुखत्त्ता सहित सभी खत्तों के निवासियों को सरकार कब्जेदार मान रही है।

द्वितीय केदार मदमहेश्वर के हक-हकूकधारी गौंडार , तृृतीय केदार के मक्कू, पाव , जगपूड़ा के निवासियों को चोपता में, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के हक-हकूक धारियों को गंगोलगाव से लेकर रुद्रनाथ तक कब्जेदार मानते हुए उजाड़ दिया है या नोटिस दिए गए हैं। पिछले साल पिंडर घाटी के 1400 से अधिक परिवारों को वन भूमि से हटने के नोटिस दिए हैं। कुछ माह पूर्व पौड़ी जिले के पैठाणी के वन क्षेत्राधिकारी ने एक पूरे गांव मंजवी के निवासियों को भी वन भूमि से हटने के नोटिस दिए हैं। ये लोग 150 सालों से अधिक समय से इन भूमियों में निवासरत हैं। ऐसे सैकड़ों मामले हर पर्वतीय जिले में हैं इसलिए इन सब का उल्लेख नहीं किया जा सकता है।

माननीय उच्चतम न्यायालय के हाल के निर्देश के बाद वन विभाग के अधिकारी एक तरफा कार्यवाही कर हजारों परिवारों को उजाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। प्रदेश भर में वनों में या वन भूमियों में निवासरत लोगों में बैचेनी और अशांति है, जो राज्य के लोगों और कानून व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। मेरा मानना है कि, मनुष्य और वन्य जीव संघर्ष के सैकड़ों

घटनाओं के बाद अब राज्य ऋषिकेश जैसे सरकार और वन भूमियों में बसे लोगों के बीच संघर्ष के मुहाने पर बैठा है। इसलिए राज्य को समय रहते अपने निवासियों को उजड़ने से बचाने के लिए उचित वैधानिक उपाय करने चाहिए।

हाल में ऋषिकेश के पशुलोक का मामला माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश से पैदा हुआ है। किसी भी न्यायालय में राज्य के निवासियों के वनों पर अधिकार, 2006 के वनाधिकार अधिनियम से मिलने वाले अधिकारों, वन भूमियों के पट्टों और वन भूमियों पर पीढ़ियों से रह रहे लोगों की विवशता की विस्तार से चर्चा होना संभव नहीं है। वन भूमियों में निवासरत लोगों के संबध में व्यापक चर्चा, उनके अधिकार और उनकी विवशता की चर्चा केवल राज्य की विधानसभा में ही हो सकती है। राज्य के प्रत्येक विधायक के क्षेत्र में इस तरह के मामले हैं। राज्य के लोगों को उजड़ने से बचाना भी राज्य का प्रमुख कर्तव्य है। इसलिए इन मामलों में राज्य की विधानसभा में ही चर्चा के बाद ही किसी सही और वैधानिक निष्कर्ष पर पंहुचा जा सकता है।

इसलिए मेरा आग्रह है कि कृपया वन भूमियों पर निवासरत राज्य भर के हजारों परिवारों के हित में अतिशीघ्र उत्तराखण्ड विधान सभा का विशेष सत्र आहूत करवाने का कष्ट करें।

आपका,

(यशपाल आर्य)
श्री पुष्कर सिंह धामी जी,
माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तराखण्ड सरकार।

 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के नेतृत्व में अल्मोड़ा में अंकित भंडारी नया यात्रा

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धामी सरकार की चुप्पी असहनीय, वीआईपी को बचाने का षड्यंत्र उजागर : करन माहरा

आज अल्मोड़ा में कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित अंकिता भंडारी न्याय यात्रा में मैं कांग्रेसजनों, मातृशक्ति, युवाओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों के साथ शामिल हुआ। यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और हमारी बहन-बेटियों की इज़्ज़त के लिए उठी निर्णायक आवाज़ है। प्रदेश की जनता अब स्पष्ट रूप से कह रही है कि न्याय के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।


अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज भी सबसे गंभीर और मूल सवाल अनुत्तरित है कि आख़िर किस ‘वीआईपी’ को बचाने के लिए सरकार ने सच्चाई पर पर्दा डाला? क्यों सरकार सीबीआई जांच से लगातार बच रही है? क्या पुष्कर सिंह धामी की कुर्सी उसी वीआईपी की बैसाखियों पर टिकी है? यदि सरकार निर्दोष है, तो निष्पक्ष जांच से डर किस बात का?
भाजपा के पूर्व विधायक एवं मंत्री से जुड़ा कथित ऑडियो, जिसे उनकी ही कथित पत्नी द्वारा सार्वजनिक किया गया है, सरकार के सामने मौजूद है। उस ऑडियो में पूर्व विधायक द्वारा ‘गट्टू’ का नाम लिया जाना सरकार की कथनी और करनी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। इतने महत्वपूर्ण संकेतों के बावजूद जांच को आगे न बढ़ाना, सत्ताधारी दल की मंशा को उजागर करता है। सरकार को और क्या सबूत चाहिए?
यह सरकार इसे अपनी कुर्सी बचाने की राजनीति समझ सकती है, लेकिन हमारे लिए यह हमारी बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय का सवाल है। उत्तराखंड की जनता ने राज्य निर्माण इसलिए नहीं किया था कि रसूख़दारों को बचाने के लिए कानून को मोड़ा जाए और पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित रखा जाए। सत्ता का संरक्षण, जांच से पलायन और चुप्पी..ये सब जनता को स्वीकार्य नहीं हैं।
कांग्रेस पार्टी स्पष्ट करती है कि जब तक अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर किया जाएगा, वीआईपी को बेनकाब किया जाएगा और निष्पक्ष सीबीआई जांच के माध्यम से दोषियों को कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी। यह लड़ाई सड़क से सदन तक, और न्याय मिलने तक निरंतर चलती रहेगी।

— श्री करन माहरा
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी
एवं सदस्य, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC)

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में जनता दर्शन कार्यक्रम का हुआ आयोजन 

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कार्यक्रम के दौरान 88 शिकायतें हुई प्राप्त

देहरादून, ।जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में आज  ऋषिपर्णा  सभागार कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा की अध्यक्षता में जनता दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान 88 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें अधिकांश शिकायत भूमि संबंधी प्राप्त हुई इसके अतिरिक्त आपसी विवाद, सामाजिक व व्यक्तिगत समस्याओं से जुड़ी शिकायतें शामिल रहीं। अपर जिलाधिकारी द्वारा प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जनता दर्शन में नई बस्ती, चंदरनगर निवासी एक बुजुर्ग दंपति ने शिकायत दर्ज कराई कि उनका बेटा उनके साथ मारपीट करता है तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर को भरण-पोषण अधिनियम के अंतर्गत वाद दायर कराने के निर्देश दिए।
प्रगति विहार विकास संस्था, अजबपुर द्वारा प्रस्तुत शिकायती पत्र में बताया गया कि लेन नंबर- 6 में स्थित खाली प्लॉट पर संदिग्ध व्यक्तियों/भूमाफियाओं द्वारा कब्जा किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर नगर निगम एवं तहसीलदार सदर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ग्राम पंचायत चकजोगीवाला निवासियों ने शिकायती पत्र के माध्यम से चकजोगीवाला में भूमाफियाओं द्वारा समाज की भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है तथा 18 मीटर चौड़े नाले पर भी अतिक्रमण किया गया है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को समाज की भूमि को कब्जा मुक्त कराने हेतु कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शास्त्री नगर, डाकरा कैंट निवासी निर्मला देवी ने अपने शिकायती पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि उनके पति वर्ष 2012 से गुमशुदा हैं। उन्होंने पति को मृत घोषित करते हुए कैंट बोर्ड से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने का अनुरोध किया। इस पर अपर जिलाधिकारी ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी, देहरादून कैंट को नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।
शिकायतकर्ता हनीफ ने अपने दिवंगत भाई वसीम अहमद (श्रमिक), जिनका 21-01-2022 को कार्य के दौरान दुर्भाग्यवश निधन हो गया था, के संबंध में ई-श्रम योजना अंतर्गत देय अनुग्रह राशि के भुगतान हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत आईडी एलबी57117 की स्थिति वर्तमान में बंद दर्शाई जा रही है, जबकि आज तक मृतक की पत्नी को अनुग्रह राशि प्राप्त नहीं हुई है, जिससे परिवार गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने प्रकरण की पुनः जांच कराते हुए संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि देय अनुग्रह राशि भुगतान के संबंध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के  निर्देश दिए।
जनता दर्शन कार्यक्रम के अंत में अपर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक प्रभावी रूप से पहुंचे। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजीत सिंह, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी स्मृति परमार, उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह, उप नगर आयुक्त नगर निगम संतोष कुमार सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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जन-जन के द्वारा पहुंची सरकार:  सुदूरवर्ती न्याय पंचायत पंजीटिलानी में प्रभारी मंत्री ने सुनी जन समस्याएं

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जनहित में बडी पहल: 50 आयुष्मान कार्ड, 18 दिव्यांग प्रमाण पत्र, 57 आधार अपडेट*

*पंजीटिलानी बहुउदेशीय शिविरः 1286 लाभार्थियों को मिला सेवाओं का लाभ*

*लाभ भी, समाधान भीः 544 निःशुल्क स्वास्थ्य जांच से लेकर औषधि वितरण, शिविर में मिला संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ,*

*मौके पर निस्तारण की मिसालः 178 में से अधिकांश समस्याओ का ऑन-द-स्पॉट समाधान*

*क्षेत्रवासियों का शिविर में सड़क और पेयजल संकट रहा प्रमुख मुद्दा*

मुख्यमंत्री का विज़न, जनता का विश्वास—सुशासन की मजबूत नींव: -प्रभारी मंत्री*

जन-जन के द्वार पहुँची सरकार, बहुउद्देशीय शिविर बने ग्रामीणों की बड़ी राहत,*

*पंजीटिलानी में 5:30 बजे तक चली जनसुनवाई, प्रभारी मंत्री ने सुनीं जनसमस्याएँ*

*देहरादून ।
जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान के अंतर्गत मा.प्रभारी मंत्री श्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में सोमवार को विकासखंड कालसी स्थित पंजीटिलानी मिनी स्टेडियम में वृहद बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के माध्यम से आम जनता को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी सविन बंसल ने शिविर में लगाए गए विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और देहरादून जिला सूचना अधिकारी कार्यालय द्वारा प्रकाशित ”विकास पुस्तिका-2025” का विमोचन भी किया। शिविर में लगे विभागीय स्टालो पर 1286 से अधिक लोगों का लाभान्वित किया गया।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री का संकल्प है कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक सरकार की योजनाओं का लाभ पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध ढंग से पहुँचे तथा कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप यह शिविर सुदूरवर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने तथा जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। कहा कि सरकार अंत्योदय की भावना से काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियो को समयबद्दता के साथ समस्याओ का निराकरण के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने आश्वस्त किया कि जनता से संबंधित प्रत्येक विषय एवं समस्या पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित कुल 178 समस्याएँ प्रस्तुत की गईं। प्रभारी मंत्री ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरतापूर्वक सुना गया तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई एवं समाधान के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर कोई भी शिकायत अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए।

शिविर में 80 प्रतिशत अनुदान पर अज्जू तोमर (ग्राम सुपौऊ) एवं इन्द्र सिंह (ग्राम तारली) को पावर वीडर, सुनील तोमर (ग्राम कोटतारली) को चेक कटर तथा सुनील (ग्राम अस्टी) को आटा चक्की प्रदान की गई।”

शिविर में ग्राम पंजीटिलानी, सलगा, खमरौली, चिबोऊ, टिबोऊ, मलोऊ, चन्दोऊ, खोई, सुयोऊ, जिसऊ घराना आदि गांवों के ग्रामीणों ने सड़क, पेयजल, वन, शिक्षा, विद्युत, सोलर लाइट, आर्थिक सहायता, आपसी विवाद, मुआवजा आदि से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से रखी।

ग्रामीणों द्वारा खमरौली–चिबऊ मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान डामरीकरण में घटिया सामग्री के उपयोग तथा वर्तमान में सड़क के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने की शिकायत की गई, जिस पर संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार कोठा बैंड–पंजियां मोटर मार्ग एवं खमरौली मोटर मार्ग के निर्माण में वर्ष 2008 से कृषि भूमि एवं फलदार वृक्षों के दबान का मुआवजा न मिलने की शिकायत पर पीएमजीएसवाई द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त सड़कें लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। इस पर लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि संयुक्त निरीक्षण कर वन-टाइम मेंटेनेंस के अंतर्गत मुआवजा प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। क्षेत्रवासियों ने खमरोली-तिरोसैंण मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त व स्कवर बंद होने, पंजीटिलानी मिनी स्टेडियम लिंक मोटर मार्ग डामरीकरण व खमरोली-टीराछानी तक नई सडक निर्माण की मांग रखी। दोयरा से देऊ मोटर मार्ग निर्माण न होने की शिकायत पर पीएमजीएसवाई ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है, जल्द निर्माण शुरू किया जाएगा।

ग्राम जिसऊ-घराना में एसीपी योजना से बरात घर स्वीकृत करने तथा गांव के मुख्य मार्ग से चलदा महाराज मंदिर तक सड़क किनारे सोलर लाइट लगाने की मांग पर संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

ग्राम बोहरी में नलकूप सोलर पंप की मोटर न लगने की शिकायत पर जल संस्थान को शीघ्र मोटर लगाने के निर्देश दिए। खमरोली में कई घरों में पानी न आने, अवैध कनेक्शन, लीकेज की समस्या पर एक्शन जल संस्थान को मौका मुआयना कर शिकायत का समाधान करने के निर्देश दिए। डांडा-खुरडी पंपिंग योजना के निर्माण पर एक्शन ने बताया कि तकनीकी समस्या के कारण इस योजना को विलोपित किया गया है।

पीएचसी कोटी व पंजीटिलानी में चिकित्सक की कमी और एंबुलेंस न होने की समस्या पर सीएमओ को समस्या का समाधान करने को कहा। प्रा.वि खराया का भवन जर्जर स्थिति की शिकायत पर मंत्री ने प्राथमिकता पर भवन ठीक कराने के निर्देश दिए। पंजीटिलानी श्रेत्र में शिक्षकों का समय पर स्कूल न आने शिकायत पर डीएम को जांच कराने को कहा।

ग्राम नराया, बोआ, कौथी के आसपास 4-5 गांव की छानियों में बिजली न होने की समस्या पर प्रभारी मंत्री ने गांव वालों को कनेक्शन के लिए आवेदन करने और विद्युत विभाग को तत्काल लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिविर में अन्य विभागों से संबधित शिकायतों का निस्तारण भी किया।

बहुउद्देशीय शिविर में विभागीय अधिकारियों द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एलोपैथिक में 248, होम्योपैथिक में 231 तथा आयुर्वेदिक में 65 लोगों की स्वास्थ्य जांच कर निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया। शिविर में 57 लोगों का आधार अपडेशन, 18 दिव्यांग प्रमाण पत्र, 18 लोगों की टीबी जांच एवं 50 आयुष्मान कार्ड मौके पर निर्गत किए गए। पशुपालन विभाग द्वारा 98 पशुपालकों को पशु औषधियाँ प्रदान की गईं। राजस्व विभाग ने 48 खाता खतौनी, 07 आय व 01 स्थायी प्रमाण पत्र जारी किए।

कृषि विभाग ने 137 तथा उद्यान विभाग ने 50 किसानों को कृषि यंत्र, बीज एवं पीएम किसान निधि का लाभ प्रदान किया। समाज कल्याण विभाग द्वारा वयोश्री योजना के अंतर्गत 75 वृद्वजनों को 310 सहायक उपकरण वितरित किए गए। साथ ही 08 लोगों की विभिन्न सामाजिक पेंशन मौके पर ही स्वीकृत कर ऑनलाइन की गई। जिला पूर्ति विभाग ने 42 राशन कार्ड धारकों की केवाईसी और 21 आवेदन राशन कार्ड में नई यूनिट दर्ज कराने के लिए गए। पंचायती राज विभाग द्वारा किसान, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन तथा परिवार रजिस्टर से संबंधित 37 मामलों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त, डेयरी विभाग ने 17, बाल विकास विभाग ने 10 किशोरी किट, 03 मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट, एनआरएलएम ने 10, श्रम विभाग ने 56, पर्यटन 06, शिक्षा 35, उद्योग 15, वन विभाग 15, लीड बैंक 10, रीप 24, सेवायोजन 69, उरेड 40, विद्युत 13, सैनिक कल्याण 03, सहकारिता विभाग ने 40 लाभार्थियों को लाभान्वित किया।

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया मा. मुख्यमंत्री की पहल पर जन जन की सरकार, जन जन के द्वार कार्यक्रम के तहत संचालित बहुउदेशीय शिविरों के माध्यम से अब तक जिले में 13 हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित करने के साथ ही ढाई हजार शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।

शिविर में राज्यमंत्री कुलदीप कुमार, उपाध्यक्ष अमर सिंह चौहान, मंडल अध्यक्ष प्रवीन चौहान, युवा मोर्चा अध्यक्ष विनय नौटियाल, जिप सदस्य दीवान सिंह व मधु चौहान, ब्लाक प्रमुख सावत्री चौहान, ज्येष्ठ प्रमुख मीना राठौर, कनिष्ठ उप प्रमुख प्रियंका चौहान, ग्राम प्रधान दयाराम शर्मा, क्रांति तोमर सहित जिलाधिकारी सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, एसडीएम प्रेम लाल, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, सीएमओ डॉ एम के शर्मा, डीडीओ सुनील कुमार, सी ए ओ देवेंद्र सिंह, डीपीओ मीना विष्ट, जितेन्द्र कुमार, बीडीओ जगत सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बडी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

 

 

सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से ऋषिकेश बाईपास सहित कई सड़क परियोजनाओं को लेकर की चर्चा

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दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर और बाईपास परियोजनाओं से मिलेगी गति: पहाड़ से मैदान तक सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई दिशा

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं को प्रमुखता से रखते हुए उनके शीघ्र अनुमोदन का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा–दन्या–पनार–घाट मार्ग, ज्योलिकोट–खैरना–गैरसैंण–कर्णप्रयाग मार्ग तथा अल्मोड़ा–बागेश्वर–कांडा–उडियारी बैंड मार्ग से संबंधित प्रस्तावों को रखते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य की आंतरिक और बाह्य कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

बैठक में अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत ऋषिकेश बाईपास परियोजना में तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपये है। परियोजना में 4.876 किमी लंबा एलिवेटेड मार्ग (हाथी कॉरिडोर), चंद्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी शामिल है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी प्रस्तावित है, जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात सुगम होगा।

अल्मोड़ा–दन्या–पनार–घाट मार्ग (एनएच-309बी) के 76 किमी हिस्से में 988 करोड़ रुपये की लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव है। वहीं ज्योलिकोट–खैरना–गैरसैंण–कर्णप्रयाग मार्ग (एनएच-109) के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्तावित किया गया है। अल्मोड़ा–बागेश्वर–कांडा–उडियारी बैंड मार्ग (एनएच-309ए) के पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। कांडा–बागेश्वर खंड के लिए वन भूमि हस्तांतरण को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। सड़कों का विकास केवल तीर्थाटन और पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रयासों से राज्य आधुनिक और सुरक्षित सड़क नेटवर्क की ओर तेजी से अग्रसर है।

चारधाम यात्रा को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए 12,769 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। राज्य में 3,723 किमी का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित हो रहा है, जिसमें से 336 किमी से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है और लगभग 193 किमी पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।

दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर–देहरादून खंड में 30 किमी लंबा छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास, हरिद्वार बाईपास, बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी, रुद्रपुर–काशीपुर बाईपास तथा दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे से राज्य को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए प्रस्तावों पर समुचित कार्रवाई का आश्वासन दिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में चल रही परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ तय समय-सीमा में पूरा किया जाए।

इस दौरान बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

MDDA की सलियावाला धौलास में अवैध प्लॉटिंग पर बड़ी कार्रवाई:  8 से10 बीघा भूमि पर चला ध्वस्तीकरण अभियान

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प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: बंशीधर तिवारी

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने प्राधिकरण क्षेत्र में बढ़ते अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ सख़्त रुख अपनाते हुए व्यापक स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान तेज कर दिया है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत एमडीडीए की प्रवर्तन टीमें लगातार फील्ड में उतरकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई कर रही हैं। इस अभियान का उद्देश्य न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, बल्कि नियोजित विकास को सुनिश्चित करना और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना भी है।

*08 से 10 बीघा भूमि पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई*
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्राधिकरण की टीम द्वारा नीरज शर्मा एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा सलियावाला, धौलास, देहरादून क्षेत्र में लगभग 08 से 10 बीघा भूमि में की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। जांच में उक्त प्लॉटिंग बिना स्वीकृत लेआउट एवं मानकों के विपरीत पाई गई, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। उक्त कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के अनुपालन में की गई। ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान सहायक अभियंता सुर्जीत सिंह रावत, अवर अभियंता हर्षित मौठानी, संबंधित सुपरवाइजर एवं पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। कार्रवाई शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित ढंग से संपन्न कराई गई। एमडीडीए द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण एवं अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध आगे भी सख़्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की भूमि खरीद या निर्माण से पूर्व प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृतियां अवश्य प्राप्त करें।

*नागरिकों को किया जा रहा जागरूक*
एमडीडीए अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की भूमि खरीदने या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले प्राधिकरण से संबंधित स्वीकृतियों की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से आम लोग अपने जीवन की गाढ़ी कमाई जोखिम में डाल देते हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। प्राधिकरण की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ भविष्य में और भी सख़्त कार्रवाई की जाएगी। बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

*उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान*
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत और जनहित में की जा रही है। हमारा उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि क्षेत्र के सुनियोजित विकास और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करना है। सभी नागरिकों से अपील है कि निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृति और अन्य आवश्यक अनुमतियां अवश्य लें। जो लोग नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख़्त से सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष या क्षेत्र विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी मामलों में समान रूप से कार्रवाई की जा रही है। एमडीडीए का मानना है कि सख़्त प्रवर्तन के साथ-साथ नियोजित विकास की दिशा में सकारात्मक संदेश देना भी आवश्यक है। वैध निर्माण करने वालों और नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

*सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान*
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा एमडीडीए की प्रवर्तन टीमें लगातार प्राधिकरण क्षेत्र में निरीक्षण कर रही हैं। अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के मामलों में नियमानुसार ध्वस्तीकरण, सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई की जा रही है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। आम जनता से अनुरोध है कि वे अवैध कॉलोनियों में निवेश से बचें और किसी भी निर्माण से पहले प्राधिकरण से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।