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रामनगरी अयोध्या में बनेगा धामी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट: सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने किया निरीक्षण

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अतिथि गृह से श्रद्धालुओं को सहूलियत और संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय मंच*

*सचिव आवास व राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने लिया अयोध्या अतिथि गृह निर्माण स्थल का किया विस्तृत जायजा, अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा पर दिए सख्त निर्देश*

देश की धार्मिक राजधानी अयोध्या में उत्तराखंड सरकार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। अयोध्या-फैजाबाद हाईवे पर प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह अब हकीकत का रूप लेता दिख रहा है। लगभग 54,000 (चव्वन हजार) वर्ग फीट क्षेत्र में बनने वाला यह विशाल परिसर उत्तराखंड से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना बनेगा। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार के स्थल निरीक्षण के बाद परियोजना के क्रियान्वयन ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे साफ है कि सरकार इस योजना को लेकर पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पीछे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्पष्ट सोच और परिणामोन्मुख कार्यशैली दिखाई देती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़ने की जो रणनीति बनाई है, यह परियोजना उसी की एक मजबूत कड़ी है। चारधाम यात्रा को बेहतर प्रबंधन और सुविधाओं से जोड़ने के बाद अब सरकार अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी उत्तराखंड की पहचान स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परियोजना गुणवत्ता, आधुनिकता और तय समयसीमा के मानकों पर खरी उतरे। सचिव आवास-राज्य संपित्त जल्द मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत कार्ययोजना रिपोर्ट सौंपेंगें। निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर पेयजल निगम राकेश चन्द्र तिवारी, राज्य संपत्ति विभाग से डॉ विनीता सिंह, वरिष्ठ व्यवस्था अधिकारी मुन्ना सिंह सहित संबधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

*रणनीतिक लोकेशन, आसान पहुंच*
प्रस्तावित अतिथि गृह की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। श्रीराम मंदिर से करीब 6.60 किलोमीटर और फैजाबाद शहर से 6.40 किलोमीटर की दूरी इसे अत्यंत सुविधाजनक बनाती है। अयोध्या एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी इसे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी सुलभ बनाती है। वहीं लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से सीधा संपर्क इसे धार्मिक पर्यटन का अहम केंद्र बना सकता है। देहरादून और नई दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिए भी यह एक प्रमुख पड़ाव होगा।

*आम श्रद्धालुओं को बड़ी राहत*
इस परियोजना की खासियत यह है कि इसे केवल वीआईपी सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती दरों पर ठहरने की व्यवस्था इस योजना को जन-हितैषी बनाती है। चारधाम यात्रा की तर्ज पर यहां भी उत्तराखंड के श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिलेगा। इससे अयोध्या यात्रा के दौरान ठहरने की समस्या काफी हद तक कम होगी और यात्रा अधिक सुगम बनेगी।

*सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होगा परिसर*
सरकार की योजना इस अतिथि गृह को केवल ठहरने तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में विकसित करने की है। यहां लोक कला, लोक संगीत, पारंपरिक उत्सव और सरस मेले जैसे आयोजन किए जाएंगे। इससे उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर मंच मिलेगा। साथ ही विवाह समारोह और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए भी यह परिसर उपयोगी साबित होगा, जिससे राजस्व के नए अवसर भी बनेंगे।

*पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा*
अयोध्या में तेजी से बढ़ते धार्मिक पर्यटन के बीच यह परियोजना उत्तराखंड के लिए आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो सकती है। लाखों श्रद्धालुओं के बीच उत्तराखंड की मौजूदगी इस अतिथि गृह के माध्यम से और मजबूत होगी। यह पहल “धार्मिक पर्यटन” और “संस्कृति कनेक्ट” के मॉडल को आगे बढ़ाते हुए राज्य के पर्यटन उद्योग को अप्रत्यक्ष रूप से नई गति देगी।

*गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर*
स्थल निरीक्षण के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड की छवि से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।

*ड्रीम प्रोजेक्ट से बनेगा सांस्कृतिक सेतु – डॉ. आर. राजेश कुमार*
डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार अयोध्या में बनने वाला उत्तराखंड राज्य अतिथि गृह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और प्रभावी कार्ययोजना का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि उत्तराखंड को देश के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर नई मजबूती के साथ स्थापित करेगी। यह अतिथि गृह केवल एक इमारत नहीं बल्कि उत्तराखंड और अयोध्या के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करेगा। यहां श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ उत्तराखंड की परंपराओं और संस्कृति को भी राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

 

सीएम धामी की अध्यक्षता में हिमालयी राज्यों से समन्वय और नीति निर्धारण परिषद की अहम बैठक सम्पन्न

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मुख्यमंत्री धामी बोले, हिमालयी राज्य आपसी सहयोग और अनुभवों से करें नीति निर्माण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों के मध्य आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने, साझा चुनौतियों के समाधान हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक के लिए समेकित रणनीति तैयार करने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिस्थितियाँ समान होने के कारण आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रभावी नीति निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि जिन हिमालयी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे कार्य हुए हैं, उन कार्यों का विस्तृत अध्ययन बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में राज्य में अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृति सम्पन्नता एवं जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। हिमालय और औषधियों के संरक्षण के क्षेत्र में राज्य में कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। जल स्रोंतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय और पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में जो संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं, उनका भी निरंतर सहयोग लिया जाए। हिमालयी राज्यों की विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए हिमालयी राज्यों के विशेषज्ञों के साथ बैठक समय-समय पर बैठकों और विचार गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाए। बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बैठक में जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाये जायेंगे।

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी राज्यों की चुनौतियों को दूर करने के लिए हिमालयी राज्य कैसे एकीकृत रूप में कार्य कर सकते हैं, इस दिशा में प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी को हिमालय से फायदा होगा। हिमालय के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में कार्य करने के लिए हमें इस क्षेत्र में कार्य करने वाले राष्ट्रीय संस्थानों का भी नियमित सहयोग लेना होगा।

हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद के सदस्य एवं विधायक श्री किशोर उपाध्याय ने कहा कि हिमालय एवं मध्य हिमालय क्षेत्र की अद्यतन वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिकि स्थिति का अध्ययन होना चाहिए। हिमालयी नदियों के जल स्तर और प्रवाह का आंकलन करना भी जरूरी है। सदस्य एवं पूर्व डीजीपी श्री अनिल रतूड़ी ने कहा कि हिमालयी राज्यों को संगठित रूप से कार्य कर हिमालयी से संबंधित सभी सम्पदाओं और लोगों की आजीविका को बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। आचार्य डॉ. प्रशांत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स बननी चाहिए। हिमालयी राज्यों की चुनौतियां लगभग एक जैसे होती हैं, इनके लिए मिलकर बेहमर नीति निर्धारण की दिशा में कार्य होने चाहिए। डॉ. जी.एस. रावत ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य होने चाहिए। पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि बुग्यालों का संरक्षण बहुत जरूरी है। जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव शैलेश बगौली, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

 

उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में 7वीं राष्ट्रीय मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ 

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देहरादून, 24 अप्रैल। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज, देहरादून में आज 7वीं राष्ट्रीय मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिनों तक चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए 300 से अधिक युवा प्रतिनिधियों (युवा सांसदों) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने बताया कि इस वर्ष कॉन्फ्रेंस में लोकसभा, संयुक्त राष्ट्र महासभा, अखिल भारतीय राजनीतिक दल और अंतरराष्ट्रीय व भारतीय मीडिया जैसे विभिन्न मंचों का गठन किया गया है।


कॉन्फ्रेंस के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है, जिनमें लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 की समीक्षा, संघवाद, निष्पक्षता की अवधारणा और संवैधानिक नैतिकता पर विशेष जोर शामिल है। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में पश्चिम एशिया के संघर्ष से उत्पन्न आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट को कम करने पर विचार-विमर्श हो रहा है। इसके अलावा, अखिल भारतीय राजनीतिक दलों की बैठक में “विकसित भारत 2047” योजना की समीक्षा और युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार के बीच की दूरी को कम करने हेतु स्किल इंडिया 2.0 पहल का मूल्यांकन भी किया जा रहा है।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री अशोक वर्मा ने कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और देश की संसद उसका मंदिर है। उन्होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को भविष्य की स्वस्थ राजनीति का संकेत बताया और अपने अनुभव भी साझा किए।
कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे युवाओं का उत्साह देखने लायक था। सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने किरदारों का प्रभावशाली ढंग से प्रतिनिधित्व किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यकारी निदेशक डॉ. अभिषेक जोशी, प्रो. भावना अरोड़ा, कार्तिक चमोला, अपूर्वा शुक्ला, ईशा शर्मा, शिवम गर्ग, प्रियांश भारद्वाज, हर्षवर्धन द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 

देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली में सीएम धामी ने लिया भाग

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउण्ड, देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री, हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जन आक्रोश पदयात्रा में भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार दिलाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था। परंतु लोकसभा में संख्या बल के कारण बिल पारित नहीं हो पाया। उन्होंने कहा विपक्ष ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति का अधिकार छिनने का काम किया है। उन्होंने कहा देश की नारी, अन्याय के विरुद्ध अवश्य आवाज उठाएगी क्योंकि अब नारी अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री द्वारा देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के प्रयास को लोकसभा में विपक्ष ने विफल करके देश के साथ महा पाप किया है।मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मातृशक्ति को नए भारत के निर्माण का आधार माना है। महिलाओं को सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं अभियान, उज्ज्वला योजना, एवं जन धन योजना द्वारा करोड़ों बहनों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, स्टार्टअप योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को सशक्त बनाने, लखपति दीदी योजना द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को आगे बढ़ने का काम किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की प्रेरणा से देश के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएँ आगे आ रही हैं। आदिवासी समाज की बेटी, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची हैं। केंद्रिय मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया है। इसके साथ राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में अब तक 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट, सांसद श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक श्रीमती सविता कपूर, श्रीमती आशा नौटियाल, श्रीमती रेनू बिष्ट, श्रीमती रुचि भट्ट, श्रीमती दीप्ति रावत, श्रीमती नेहा जोशी, हिमानी, रश्मि रस्तोगी एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद थी।

 

बड़ी उपलब्धि: श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में बिना सर्जरी घुटने के दर्द का सफल उपचार

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कूल्ड आरएफए से किए गए उपचार से मरीज को मिली बड़ी राहत
देहरादून के किसी अस्पतालों में बिना सर्जरी घुटने के उपचार का पहला मामला

देहरादून में दर्द प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। यह उपलब्धि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नाम दर्ज हुई है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में पहली बार कूल्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) तकनीक के माध्यम से घुटनों के गंभीर दर्द का सफल उपचार किया गया। इस आधुनिक और कम हस्तक्षेप वाली प्रक्रिया से बिना सर्जरी मरीज को लंबे समय तक राहत मिली है। 64 वर्षीय सावित्री देवी, जो लंबे समय से घुटने की ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थीं और अत्यधिक दर्द के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थीं, उन्हें दवाइयों और पारंपरिक उपचारों से कोई लाभ नहीं मिल रहा था। ऐसे में डॉक्टरों ने बिना ऑपरेशन के विकल्प के रूप में कूल्ड आरएफए प्रक्रिया अपनाई, जिसमें विशेष सुई के जरिए घुटनों की दर्द उत्पन्न करने वाली जेनिक्यूलर नसों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे दर्द के संकेत दिमाग तक कम पहुंचते हैं और मरीज को लंबे समय तक राहत मिलती है।


प्रक्रिया के बाद सावित्री देवी को दर्द से काफी राहत मिली और अब वे पहले की तुलना में बेहतर तरीके से चल-फिर पा रही हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार हुआ है। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें न तो सर्जरी की जरूरत होती है और न ही कोई बड़ा चीरा लगाया जाता है, साथ ही मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। कम खर्च, सीजीएचएस कैशलेस सुविधा और जल्दी रिकवरी के कारण यह प्रक्रिया बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक यह सुविधा देश के चुनिंदा महानगरों और उन्नत पेन मैनेजमेंट केंद्रों तक सीमित थी, लेकिन देहरादून में इसकी शुरुआत से उत्तराखंड के मरीजों को अपने ही शहर में अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
डाॅ गिरीश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि ”हमारा उ्देश्य मरीज़ को बिना चीरा बड़ी सर्जरी के सुरक्षित, आधुनिक और प्रभावी तरीके से दर्द से राहत देना है। कूल्ड आरएफए तकनीक घुटनों के पुराने दर्द में एक गेम-चेंजर साबित हो रही है”।
इस सफल प्रक्रिया को डॉ. गिरीश कुमार सिंह (एमडी, डीएम पेन मेडिसिन, सीसीईपीसी, एफआईपीएम) के नेतृत्व में अंजाम दिया गया, जो किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और एम्स से प्रशिक्षित हैं तथा देश के चुनिंदा सुपर-स्पेशलिस्ट पेन मेडिसिन विशेषज्ञों में शामिल हैं। उनके साथ पेन मेडिसिन टीम के डॉ. आदित्य सेमवाल (वरिष्ठ रेजिडेंट), प्रणय हटवाल (जूनियर रेजिडेंट) सहित नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियनों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह भव्यता से सम्पन्न

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देहरादून : वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में नवम दीक्षांत समारोह गरिमामयी ढंग से आयोजित हुआ। समारोह में 14 शोधार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि प्रदान की गई तथा स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों के मेधावी विद्यार्थियों को 37 स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक दिए गए।
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखण्ड राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय कुलाधिपति ले. जनरल गुरमीत सिंह (पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम सेवानिवृत्त) ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री, उत्तराखण्ड उपस्थित रहे। अतिथि के रूप में डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आई.ए.एस., सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन ने प्रतिभाग किया।
समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में 124 सीट क्षमता वाले नए महिला छात्रावास तथा टाइप-III आवास के लोकार्पण से हुई, जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, सचिव महोदय तथा कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर के करकमलों द्वारा किया गया।
विश्वविद्यालय सभागार में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, कुलगीत, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने सभी सम्मानित अतिथियों का शॉल एवं प्लांटर भेंट कर स्वागत किया तथा अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का भी हार्दिक स्वागत किया।
कुलपति का स्वागत उद्बोधन
कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख किया:
• नवंबर 2024 से मार्च 2026 के दौरान 14 शोधार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि प्रदान की जा रही है।
• सत्र 2024-25 में स्नातक स्तर पर 3582 विद्यार्थियों (बी.टेक. 2455, बी.आर्क. 12, बी.ए.एल.एल.बी. 102, बी.बी.ए.एल.एल.बी. 21, बी.एच.एम.सी.टी. 102, बी.फार्म 633, एल.एल.बी. 257 आदि) को उपाधि दी जा रही है।
• परास्नातक स्तर पर 1545 विद्यार्थियों (एम.फार्म 240, एम.टेक. 59, एम.बी.ए. 976, एम.सी.ए. 153, एल.एल.एम. 88 आदि) को डिग्री प्रदान की जा रही है।
• 37 स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक वितरित किए गए। बी.टेक. की ओवरऑल टॉपर सुश्री गुंजन भटनागर (तुलास इंस्टीट्यूट) को श्रीमती विनोद देवी अग्रवाल मेमोरियल स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में कुल 26,115 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 22,229 स्नातक, 3,816 परास्नातक एवं 121 शोधार्थी शामिल हैं। विश्वविद्यालय के शोधार्थियों द्वारा 37 पेटेंट पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 25 प्रकाशित हो चुके हैं। अब तक 34,257 उपाधियां डिजिलॉकर के माध्यम से प्रदान की जा चुकी हैं।
नई पहलों में एआई लिटरेसी मिशन, COE स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग लैब, EVORA APP, EVORA उत्तराखण्ड एनवायरनमेंट गार्डियन APP, सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम तथा भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्रों का शुभारंभ शामिल है। आई.आई.टी. रोपड़, आई.आई.टी. रुड़की तथा जर्मनी के संस्थान के साथ एम.ओ.यू. किए गए हैं।
मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अतिथि के उद्बोधन
राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने वीर माधो सिंह भण्डारी के साहस, तकनीकी कौशल एवं समाज सेवा को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नौकरी सृजन करने वाले बनें। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भविष्य में “एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस” और 2047 तक “कॉस्मिक इंटेलिजेंस” के रूप में देखने की बात कही तथा भारत द्वारा इस क्रांति का नेतृत्व करने पर जोर दिया। उन्होंने कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर के नेतृत्व की सराहना की।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह परिश्रम और सपनों की उपलब्धि का उत्सव है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा 350 नियमित पदों पर नियुक्ति, 16 करोड़ रुपये की निधि स्वीकृति तथा कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से आंगनवाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालय गोद लेने का आह्वान किया।
डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों से समाज हित में ज्ञान का उपयोग करने, AI, रोबोटिक्स, डाटा साइंस में दक्षता बढ़ाने तथा आपदा प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “सपने खुली आँखों से देखिए और उन्हें पूरा करके ही रुकिए।”
अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम
• सभी 14 पी.एच.डी. शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की गई।
• एआई लिटरेसी एवं स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग विवरणिका का विमोचन।
• मुख्य अतिथि द्वारा उपाधियों पर डिजिलॉकर में डिजिटल हस्ताक्षर।
• EVORA उत्तराखण्ड एनवायरनमेंट गार्डियन APP एवं सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम की विवरणिका का विमोचन।
विश्वविद्यालय कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने की।
समारोह में उत्तराखण्ड के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति—प्रो. एन.के. जोशी (श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय), प्रो. सुरेखा डंगवाल (दून विश्वविद्यालय), प्रो. प्रवेन्द्र कौशल, प्रो. मनमोहन सिंह चौहान, प्रो. भानु दुग्गल आदि—तथा विश्वविद्यालय की कार्य परिषद्, विद्या परिषद्, शिक्षकगण, अधिकारीगण एवं छात्र-छात्राओं के परिजन उपस्थित रहे।
यह समारोह उत्तराखण्ड में तकनीकी शिक्षा, शोध, नवाचार एवं समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

 

UTU के दीक्षांत समारोह में छाया रहा जी. आर. डी संस्थान

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ऍम. फार्मा के गोल्ड, सिल्वर एवं ब्रॉन्ज तीनो मैडल संस्थान को, बी.टेक सिविल में भी लगातार दूसरे वर्ष लहराया परचम !

संस्थान के कुल 37 छात्र-छात्राओं ने मनवाया अपनी प्रतिभा का लोहा !

देहरादून, 23/04/2026, गुरु राम दास इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, देहरादून के लिए आज का दिन अत्यंत गर्व और उपलब्धि से भरा रहा। उत्तराखंड तकनीकी विस्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल द्वारा संस्थान के कुल 37 विद्यार्थियों को विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया गया ।

एक और ऍम. फार्मा की एकादशी सेमवाल-(गोल्ड मैडल), कुमारी अंकिता (सिल्वर मैडल), एवं श्रया रंजन(ब्रॉन्ज मैडल) तीनो मैडल संस्थान के छात्र-छात्राओं को मिले वही बी.टेक सिविल में लगातार दूसरे वर्ष संस्थान के छात्र हरविंदर सिंह ने रजत पदक प्राप्त करके परचम लहराया ! इसके अलावा 33 अन्य छात्र छात्राओं को भी राज्य स्तर पर अपनी अपनी विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया गया ।

संस्थान के चेयरमैन सरदार इंदरजीत सिंह ओबेराय ने शिक्षकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि संस्थान की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, अनुभवी संकाय और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण का भी प्रमाण है। जी. आर. डी संस्थान निरंतर अपने विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करता रहा है, जिसका परिणाम आज इस ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया है।

संस्थान के महा निदेशक डॉ. पंकज चौधरी ने इस अवसर पर सभी मेधावी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि, “यह हमारे लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। हमारे विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और समर्पण हो, तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। हम भविष्य में भी ऐसे ही उत्कृष्ट परिणामों की अपेक्षा करते हैं। इंस्टीट्यूट आगे भी इसी प्रकार शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

एक अवसर पर संस्थान के चेयरमैन सरदार इंदरजीत सिंह ओबेराय, डॉली ओबेराय, सरदार प्रबजी ओबेराय, महानिदेशक डॉ. पंकज चौधरी, सभी विभाग अध्यक्ष एवं शिक्षक गण उपस्थित रहे !

आपातकालीन स्थितियों से निपटने को 24 अप्रैल को आयोजित होगा मॉक ड्रिल अभ्यास

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देहरादून।, नागरिक नागरिक सुरक्षा एयर रेड/ब्लैक आउट के सम्बन्ध में महानिदेशालय अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृहरक्षक, गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्धारित एसओपी के अनुसार 24 अपै्रल 2026 को रात्रि में 10 बजे आयोजित की जाने वाले मॉक अभ्यास के सम्बन्ध में जिलाधिकारी/ अध्यक्ष जनपद आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण सविन बसंल के निर्देशोंके अनुपालन में सम्बन्धित रेखीय विभागों के अधिकारियों के साथ एनआईसी सभागार में टेबल टॉप बैठक आयोजित की गई। बैठक में रेखीय विभाग एवं तहसील स्तर पर (तहसील सदर) गठित आईआरएस नामित अधिकारी उपस्थित रहे।
भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारी, समन्वय एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना है, ताकि किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जनपद अंतर्गत शहर के चिन्हित प्रमुख 4 स्थानों आईएसबीटी, डिल रायपुर, घंटाघर एवं आराघर में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। रात्रि 10ः05 बजे से इन क्षेत्रों में लगभग 30 मिनट के लिए ब्लैकआउट किया जाएगा, जिसके अंतर्गत स्ट्रीट लाइट, पार्क एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों की रोशनी अस्थायी रूप से बंद रखी जाएगी। मॉक ड्रिल प्रारंभ होने से पूर्व संबंधित क्षेत्रों में आपातकालीन सायरन बजाया जाएगा, जिससे आमजन को संकेत प्राप्त हो सके।
माकड्रिल का मुख्य उद्देश्य नागरिक सुरक्षा संगठन की तैयारी एवं क्षमता का मूल्यांकन, ब्लैकआउट एवं चेतावनी प्रणाली का परीक्षण,विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करना, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को परखना है। मॉक ड्रिल के सफल संचालन हेतु जिला स्तर पर इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (इओसी) की स्थापना की गई है। इसके साथ ही विभिन्न चिन्हित स्थलों पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। दूरसंचार, मोबाइल, वायरलेस एवं हॉटलाइन माध्यमों से सतत संपर्क बनाए रखा जाएगा। सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी 24×7 कंट्रोल रूम में तैनात रहेंगे।
जिला प्रशासन द्वारा समस्त नागरिकों से अपील की गई है कि यह एक पूर्व निर्धारित मॉक अभ्यास है, अतः किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट से बचें। अभ्यास के दौरान प्रशासन को सहयोग प्रदान करें तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें।
ज्ञातब्य है कि भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में सम्पूर्ण देशभर सहित प्रदेश एवं जनपद स्तर पर नागरिक सुरक्षा संगठन की तैयारी व क्षमता आदि का मूल्यांकन करने एवं आपातकालीन तैयारी का परीक्षण के दृष्टिगत मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम मे जिलें में 24 अपै्रल को इस मॉक अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। इस मॉकड्रिल का उद्देश्य प्रदेश एवं जनपद स्तर पर नागरिक सुरक्षा संगठन की तैयारी व क्षमता आदि का मूल्यांकन करने एवं आपातकालीन तैयारी का परीक्षण करना। ब्लैकआउट एवं चेतावनी प्रणाली का उपयोग एवं परीक्षण करना। विभागीय समन्वय सुनिश्चत करना। डिस्ट्रिक कन्ट्रोल रूम ईओसी की स्थापना। सम्बन्धित पोस्ट में कन्ट्रोल रूम। दूरसंचार, मोबाईल, वायरलेस /हॉटलाईन कन्ट्रोल रूम में रेखीय विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी 24×7 उपस्थित रहेंगे।
जिला प्रशासन ने आमजन से अनुरोध किया कि यह एक मॉक अभ्यास है इससे घबराएं नही इस अभ्यास में जिला प्रशासन का सहयोग करने की अपेक्षा की है।
इस अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारियों सहित समस्त रेखीय विभागों, सिविल डिफेंस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने का किया आह्वान 

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उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति ने बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मजबूत करने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की प्रशंसा की

पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती को अवसर में बदलें, युवा चिकित्सक- राज्यपाल

चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए- मुख्यमंत्री

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने  कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद श्री नरेश बंसल, श्री महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।
 

गैप फिलिंग के लिए प्रत्येक गांव को मिलगी 20 लाख की सौगात

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प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 14 ग्रामों के समग्र विकास पर जोर

 

*देहरादून । जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में भारत सरकार द्वारा संचालित “प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना” (पीएमएजीपी) की जिला स्तरीय अभिसरण समिति की बैठक आयोजित की गई।

जिला समाज कल्याण अधिकारी/नोडल अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जनपद देहरादून में 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति बाहुल्य के 14 ग्रामों का चयन किया गया है। इनमें विकास खंड चकराता के 8 ग्राम (लावड़ी, भुनर, कुणा, कोटा तपलाड़, कंडोई भरम, मस्क, जोगियों एवं बूरायला) विकास खंड कालसी के 4 ग्राम (सुरऊ, कचटा, रूपऊ एवं घरना) तथा विकास खंड विकासनगर के 2 ग्राम (पस्ता एवं धलाई) शामिल हैं। योजना के तहत प्रत्येक ग्राम को ‘गैप फिलिंग’ कार्यों के लिए 20 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी।

बैठक में चयनित ग्रामों के समग्र विकास हेतु विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आपसी समन्वय पर विस्तृत चर्चा की गई। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि पेयजल एवं स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय निर्माण एवं मरम्मत, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, सर्व-ऋतु सड़क निर्माण तथा सोलर व स्ट्रीट लाइट की स्थापना जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

वरिष्ठ परियोजना अधिकारी, उरेडा ने जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 की जिला योजना में चयनित प्रत्येक ग्राम में 15 सोलर लाइट स्थापित करने का प्रस्ताव है।

मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि चयनित ग्रामों में योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और निर्धारित समयसीमा में लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही योजनाओं का लाभ अधिकतम पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया गया।

बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला पंचायतराज अधिकारी मनोज नौटियाल, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उरेडा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं चयनित ग्रामों के ग्राम प्रधान उपस्थित रहे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।