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सीएम धामी ने विश्व दिव्यांग दिवस पर हल्द्वानी में आयोजित कार्यक्रम में 41 दिव्यांगजनों को किया सम्मानित

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हल्द्वानी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विश्व दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार वितरण समारोह में दिव्यांगजन प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून में ₹905.13 लाख की लागत से बनने वाले आयुक्त दिव्यांगजन उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड तथा समाज कल्याण आईटी सेल के बहुउद्देशीय कार्यालय भवन का शिलान्यास तथा प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र, नैनीताल (एलिम्को) का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने सभी दिव्यांगजनों को विश्व दिव्यांग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन असाधारण व्यक्तियों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने चुनौतियों को अवसर और संघर्षों को प्रेरणा में बदलकर समाज को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता शरीर में हो सकती है, लेकिन सपनों में नहीं”, और आज हमारे दिव्यांग भाई-बहन प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन दिव्यांग नही समाज के दिव्य अंग है।

उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चौनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया तथा बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी चौंपियन बनीं शीतल देवी जैसे प्रेरक उदाहरण साझा किए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारत की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम द्वारा कोलंबो में टी-20 ब्लाइंड वूमेन वर्ल्ड कप-2025 जीतने पर भी गर्व व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केन्द्र और राज्य सरकार दोनों दिव्यांगजनों को समान अवसर और गरिमामय जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नए भवनों, अस्पतालों व बस अड्डों के निर्माण में दिव्यांगजन-अनुकूल व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं। कई पुराने भवनों में भी सुगम्यता हेतु आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं। साथ ही “कॉमन साइन लैंग्वेज” के प्रसार और दिव्यांगजन हितैषी स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन भी सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को ₹1500 मासिक पेंशन, दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को ₹700 मासिक भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली विशेष दिव्यांग पेंशन योजना व बौना पेंशन योजना के तहत ₹1200 मासिक पेंशन के साथ ही सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए क्षैतिज आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किये जाने, दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति तथा कृत्रिम अंगों हेतु ₹7000 अनुदान, दिव्यांग से विवाह करने पर ₹50,000 प्रोत्साहन राशि, दिव्यांग छात्रों के लिए सिविल सेवा परीक्षा की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराते हुए जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों के माध्यम से उन्हें सभी योजनाओं का एकीकृत लाभ प्रदान किया जा रहा है।

इसके साथ ही देहरादून स्थित आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था तथा ऊधमसिंह नगर में मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए पुनर्वास गृह का निर्माण किया गया है। देहरादून में राज्य का पहला “प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र” भी प्रारंभ किया गया है। राज्य गठन के बाद पहली बार दिव्यांग सर्वेक्षण भी प्रारंभ किया गया है, जिससे दिव्यांगजनों की वास्तविक संख्या व आवश्यकताओं का सही आकलन हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य के “यंग इनोवेटिव माइंड्स” से अपील की कि वे अपने आविष्कारों में दिव्यांगजनों की जरूरतों को विशेष स्थान दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित कर दिव्यांगजनों के जीवन को और सुगम बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे युवाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए।

इस दौरान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा 41 प्रतिभाशाली दिव्यांगजनों को ₹8000 की पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने सभी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका मनोबल भी बढ़ाया।
इस दौरान कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर गजराज बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अदांगी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।

MDDA की अवैध निर्माण व प्लॉटिंग पर कार्रवाई जारी, उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी बोले—नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

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मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत देहरादून, ऋषिकेश, विकासनगर, शिमला बाईपास सहित कई इलाकों में बीते दिनों महत्वपूर्ण कार्रवाइयाँ की गईं, जिनमें बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग शामिल रहे। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि राजधानी देहरादून के सुनियोजित विकास और मास्टर प्लान के पालन में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी।

आज मंगलवार को प्राधिकरण ने छरबा इंटर कॉलेज रोड स्थित मधुकर जोशी द्वारा लगभग 50 से 60 बीघा भूमि में की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई अमल में लाई। मौके पर अवैध रूप से काटी गई सड़कों और गैर-कानूनी रूप से विकसित हो रहे प्लॉटों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान अवर अभियंता सिद्धार्थ सेमवाल, अमन पाल, सुपरवाइजर टीम तथा पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। प्राधिकरण टीम ने स्पष्ट कर दिया कि बिना स्वीकृत नक्शे, बिना लेआउट अनुमोदन और नियमों के विपरीत होने वाली किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या निर्माण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी क्रम में एमडीडीए ने शिमला बाईपास रोड स्थित बालाजी एन्क्लेव में दो अलग-अलग अवैध निर्माणों को सील किया। शौकीन द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर प्राधिकरण की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई पूरी की। वहीं जुल्फी एवं अन्य द्वारा किए गए अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई करते हुए भवनों को सील किया गया। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के निर्देशों पर सहायक अभियंता विजय रावत, अवर अभियंता जितेंद्र सिंह एवं सुपरवाइजरों की टीम द्वारा संपन्न की गई।

प्राधिकरण के साथ जनता की सजगता से रुकेगा अवैध निर्माण— बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण शहर के नियोजित विकास के लिए पूर्ण कड़ाई से कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनाइज़र, अनधिकृत निर्माणकर्ता और बिना अनुमति भूमि काटने वालों पर निरंतर और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने अपील की कि जनता किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या निर्माण शुरू करने से पूर्व प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति अवश्य प्राप्त करे, जिससे उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े। तिवारी ने कहा कि भूखंड या प्लॉट खरीदने से पहले नागरिक प्राधिकरण की वेबसाइट या कार्यालय से उसकी वैधता अवश्य जांच लें। साथ ही यदि कहीं भी अवैध प्लॉटिंग या बिना स्वीकृति निर्माण दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत एमडीडीए को दें।

मास्टर प्लान के अनुरूप शहर के विकास का लक्ष्य — मोहन सिंह बर्निया
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता देहरादून में नियम-सम्मत निर्माण को प्रोत्साहित करना और अवैध गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाना है। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान को ध्यान में रखते हुए सभी निर्माण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। सचिव ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार के अनधिकृत निर्माण, अवैध प्लॉटिंग या नियम-विरुद्ध गतिविधि में शामिल व्यक्तियों पर ध्वस्तीकरण, सीलिंग सहित नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि एमडीडीए की टीमें प्रतिदिन क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही हैं और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा रही है, जो लगातार जारी रहेगी।

NDA 149 कोर्स में कई डीडीए डायमंड्स ने पार किया अंतिम पग: लहराया जीत का परचम

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NDA 149 कोर्स में कई डीडीए डायमंड्स ने पार किया अंतिम पग: लहराया जीत का परचम

पुणे खड़कवासला से हुए पासआउट, डीडीए निदेशक संदीप गुप्ता ने दी बधाई
देहरादून। संदीप सर दून डिफेंस एकेडमी के छात्रों गोपाल बाल्यान और अंशुल थापा समेत कई डीडीए डायमंड्स ने पुणे खड़कवासला से एनडीए 149 कोर्स से अंतिम पग पार कर एक बार फिर साबित कर दिया कि डीडीए देश की बेस्ट एकेडमी है। गोपाल बाल्यान और अंशुल थापा ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय डीडीए के निदेशक संदीप गुप्ता और उपनिदेशक दिव्या गुप्ता के उचित मार्ग दर्शन के साथ फेकल्टी, स्टडी मेटेरियल को दिया। साथ ही साप्ताहिक टेस्ट और एग्जाम से पहले होने वाले फुल लेंथ मॉक टेस्ट को सफलता की कुंजी बताया। गोपाल बाल्यान और अंशुल थापा ने पुणे खड़कवासला से तीन साल के कठोर प्रक्षिशण प्राप्त कर में एनडीए 149 कोर्स से हुए पासआउट और अब गोपाल बाल्यान इंडियन एयरफोर्स और अंशुल थापा इंडियन आर्मी का हिस्सा बनेंगे।
डीडीए निदेशक संदीप गुप्ता और उपनिदेशक दिव्या गुप्ता ने गोपाल बाल्यान और अंशुल थापा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आर्म्ड फोर्स में अफसर के तौर बड़ी जिम्मेदारी आपके कंधों पर है और जिम्मेदार अफसर बनने के साथ जिम्मेदार नागरिक की भूमिका भी आपको निभानी है।

बता दें कि अंशुल थापा के बड़े भाई भी डीडीए के स्टूडेंट रह चुके हैं और इस समय वे इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिस के पद पर तैनात है। इस वक़्त डीडीए भारत में सबसे ज्यादा डिफेंस ऑफिसर और अन्य रैंक में सलेक्शन देने वाली एकेडमी है और पिछले एक साल में डीडीए ने 250 से ज्यादा सलेक्शन दिए है। जबकि वर्ष 2005 से पिछले 21 वर्षों में 14 हजार से ज्यादा सलेक्शन दिए हैं।

देहरादून में कांग्रेस ने लॉन्च किया National Talent Hunt, मीडिया में नई आवाज़ें लाने की राष्ट्रीय पहल

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national talent hunt

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून बीते मंगलवार को कांग्रेस के एक बड़े कार्यक्रम (National Talent Hunt) का केंद्र बनी। यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से पार्टी ने अपने महत्वाकांक्षी नेशनल टैलेंट हंट (राष्ट्रीय प्रतिभा खोज) अभियान की शुरुआत कर दी। इसका लक्ष्य है-मीडिया से जुड़े नए, सक्षम और जागरूक युवाओं को कांग्रेस की मीडिया टीम में जिम्मेदारी देना। लॉन्च कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख हरक सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी मौजूद रहे। इस पहल को पार्टी की मीडिया रणनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

आवेदन से लेकर चयन तक

कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व विशेषकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे मीडिया क्षेत्र में नई सोच वाले प्रतिभावान व्यक्तियों को आगे लाने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। उन्होंने पूरे अभियान का टाइमलाइन भी साझा किया।

  1. पहले 7 दिनों तक — जिला और राज्य स्तर पर ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।
  2. अगले 7 दिन — प्राप्त आवेदनों की विस्तृत जांच होगी।
  3. 09 से 17 नवंबर— पांच अलग-अलग जोन में आमने-सामने इंटरव्यू निर्धारित हैं।
  4. इसी के बाद— राज्य स्तर पर दो दिवसीय फाइनल इंटरव्यू होगा।
  5. 25 दिसंबर तक— पूरी तरह से नई मीडिया कमेटी का गठन कर दिया जाएगा। कुल मिलाकर पार्टी का प्रयास है कि दिसंबर के अंत तक एक नई, मजबूत और प्रशिक्षित मीडिया टीम तैयार हो जाए।
National Talent Hunt

पुरानी मीडिया कमेटी भंग

अभियान की घोषणा के साथ ही आलोक शर्मा ने बताया कि वर्तमान मीडिया कमेटी को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
नई टीम बनने तक मीडिया संबंधित कार्य एडहॉक कमेटी संभालेगी, ताकि पार्टी की गतिविधियां बिना रुकावट जारी रहें।

कौन बनेगा कांग्रेस की मीडिया टीम का चेहरा?
इस प्रतिभा खोज अभियान में सिर्फ आवेदन देना पर्याप्त नहीं होगा। चयन पूरी तरह मेरिट और वैचारिक समझ पर आधारित रहेगा।
चयन के प्रमुख पैरामीटर इस प्रकार हैं-

कांग्रेस की नीति, विचारधारा और इतिहास की समझ
1. यूपीए-1 और यूपीए-2 सरकारों के कार्यों का ज्ञान
2. भाषा और संचार कौशल
3. उत्तराखंड के सामाजिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक मुद्दों पर गहरी पकड़
4. वर्तमान सरकारी नीतियों की समझ और उनका विश्लेषण

National Talent Hunt

इसके साथ ही कांग्रेस जिला व विधानसभा स्तर पर रिसर्च कमेटी बनाने जा रही है, जो राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार, सरकारी कार्यप्रणाली और प्रमुख समस्याओं पर रिसर्च कर जनता तक पहुंचाने का काम करेगी।

युवा, महिलाएं और सभी वर्गों के लिए खुला मंच

आलोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह अभियान युवा और नए चेहरों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। महिलाओं, एसटी-एससी, ओबीसी और सभी सामाजिक वर्गों के योग्य उम्मीदवारों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ाया जाएगा। पार्टी चाहती है कि मीडिया मंच पर वही लोग आएं, जो सामाजिक मुद्दों को निर्भीकता के साथ उठा सकें।


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UPNL VS Berojgar Sangh: बेरोज़गार संघ ने उपनल नियमितीकरण की मांग पर उठाए सवाल, बोले- ये असंवैधानिक; उपनल संघ की आई प्रतिक्रिया

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UPNL VS Berojgar Sangh
बेरोजगार संघ ने उपनल कर्मचारियों की मांग पर उठाए सवाल

देहरादून का परेड ग्राउंड शुक्रवार को फिर से गरमा गया। कारण वही-उपनल कर्मचारियों का लंबे समय से चला आ रहा आंदोलन, लेकिन इस बार हवा में एक नया विवाद शामिल हो गया। उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने बैकडोर नियुक्तियों और नियमितीकरण के विरोध में (UPNL VS Berojgar Sangh) सीधे मोर्चा खोला तो पूरे मामले में एक नया तनाव पैदा हो गया। अब यह लड़ाई सिर्फ उपनल कर्मचारियों और सरकार के बीच नहीं रह गई, बल्कि बेरोज़गार युवाओं बनाम आउटसोर्सिंग व्यवस्था का बड़ा मुद्दा बन गई है।

UPNL VS Berojgar Sangh

लगभग 22 हजार उपनल कर्मचारी बीते 12 दिनों से लगातार परेड ग्राउंड में धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं—

1. नियमितीकरण

2. समान वेतन

3. सेवा सुरक्षा और भविष्य की भर्ती व्यवस्था में साफ-सुथरी नीति

सरकार ने तीन दफा बातचीत की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं निकल सका है। इसी बीच बेरोज़गार संघ के बयान ने विरोध का नया मोर्चा खोल दिया है।

UPNL VS Berojgar Sangh

बेरोज़गार संघ का आरोप-उपनल बैकडोर भर्ती का सबसे बड़ा रास्ता

प्रेस वार्ता में बेरोज़गार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रदेश में आउटसोर्सिंग के नाम पर लगातार बैकडोर नियुक्तियां हो रही हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उपनल, पीआरडी और अन्य एजेंसियों के माध्यम से विभागों में होने वाली भर्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती हैं। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक उमा देवी बनाम कर्नाटक राज्य (2006) निर्णय में स्पष्ट कहा गया है कि अनियमित या बैकडोर नियुक्तियों का नियमितीकरण कानून के खिलाफ है।

इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार इन नियुक्तियों को अनदेखा कर रही है, जो बेरोज़गार युवाओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

UPNL VS Berojgar Sangh

कंडवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उपनल का उद्देश्य भूतपूर्व सैनिकों का पुनर्वास था, लेकिन आज यह नेताओं और प्रभावशाली लोगों के लिए अपनों को नौकरी देने का माध्यम बन चुका है। उनका कहना कि अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी करती रही, तो बेरोज़गार संघ अदालत में याचिका दायर करेगा।

UPNL VS Berojgar Sangh

उपनल कर्मचारियों ने कहा- बेरोज़गार संघ की मुद्दा भटकाने की चाल

बेरोज़गार संघ के बयान के बाद उपनल कर्मचारियों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बेरोज़गार संघ कर्मचारियों की संघर्षशील आवाज को कमजोर करने के लिए गलत जानकारी फैला रहा है। उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा कि वे किसी “बैकडोर भर्ती” का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्षों से जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोग हैं। उनकी सेवा शर्तें बेहद अस्थिर हैं और उन्हें नियमित करने की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। अगर बेरोज़गार संघ को आपत्ति है, तो उसे सीधे कोर्ट में जाकर अपना पक्ष रखना चाहिए। कई कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उनकी लड़ाई नियमित वेतन और स्थायी सेवा संरचना के लिए है, न कि किसी के अवसर छीनने के लिए।

सुरेश सिंह ने रखे चार बड़े बिंदु, सरकार से तुरंत नीति बनाने की मांग

बेरोज़गार संघ के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चार बड़ी मांगें रखीं।

  1. उपनल, पीआरडी और सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली बैकडोर नियुक्तियां तत्काल रोकी जाएं।
  2. सभी रिक्त पदों पर सीधी भर्ती UKPSC/UKSSSC जैसी वैधानिक संस्थाओं से ही कराई जाए।
  3. उमा देवी फैसला (2006) अक्षरशः लागू किया जाए और स्पष्ट शासनादेश जारी हो।
  4. नियमितीकरण प्रस्तावों की समीक्षा कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप बनाया जाए।

सुरेश सिंह ने कहा कि यह मुद्दा लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है और सरकार का दायित्व है कि वह पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करे।

UPNL VS Berojgar Sangh

सरकार दबाव में, कमेटी कर रही है समाधान खोजने की कोशिश

राज्य सरकार ने उपनल कर्मचारियों की मांगों पर विचार के लिए एक कमेटी बनायी है।
कमेटी सेवा सुधार, नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग नीति पर विकल्प तलाश रही है। लेकिन बेरोज़गार संघ के विरोध ने इस प्रक्रिया को और पेचीदा बना दिया है।

प्रदेश में रोजगार मॉडल पर बड़ा सवाल उठ खड़ा

यह पूरा विवाद केवल उपनल तक सीमित नहीं है। यह प्रदेश की रोजगार व्यवस्था, पारदर्शिता, और आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार किस दिशा में कदम बढ़ाती है। उपनल कर्मचारियों के पक्ष में या बेरोज़गार संघ की मांगों के अनुरूप पूरी व्यवस्था बदलने की ओर। फिलहाल परेड ग्राउंड में विरोध जारी है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति और भर्ती व्यवस्था दोनों की लिटमस टेस्ट बन गया है।


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Made in India का दम: भारतीय सेना ने रचा कीर्तिमान, 97% हाई-ऑल्टिट्यूड गियर अब पूरी तरह स्वदेशी

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Made in India
भारतीय सेना ने रचा कीर्तिमान

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने सुपर हाई-ऑल्टिट्यूड इलाकों में तैनात जवानों के लिए (Made in India) इस्तेमाल होने वाले स्पेशल क्लोदिंग एंड माउंटेनियरिंग इक्विपमेंट (SCME) का 97% हिस्सा पूरी तरह देसी बना लिया है। कुल 57 में से 55 आइटम अब स्वदेशी हैं, जबकि बाकी दो उपकरणों के ट्रायल जारी हैं और ये भी 2026 तक देश में ही बनेंगे। सेना ने इसे आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

नया Combat Coat: NIFT की डिज़ाइन, सेना की पहचान

ADG PI के अनुसार, सेना ने जनवरी 2025 में नया New Coat Combat (Digital Print) लॉन्च किया था। इसे NIFT, नई दिल्ली ने डिज़ाइन किया है। तीन-लेयर वाले इस कॉम्बैट कोट में एडवांस टेक्निकल टेक्सटाइल का इस्तेमाल किया गया है, जो ऊंचाई पर तैनात सैनिकों की कम्फर्ट, मूवमेंट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को पहले से ज्यादा बेहतर बनाता है।

डिज़ाइन अब सेना की मिल्कियत: मिली IPR सुरक्षा

भारतीय सेना ने इस कॉम्बैट कोट के डिज़ाइन और कैमोफ्लाज पैटर्न को Controller General of Patents, Designs & Trademarks, कोलकाता में आधिकारिक रूप से रजिस्टर करा लिया है। Design Application No.: 449667-001 इस रजिस्ट्रेशन के बाद इस डिज़ाइन पर पूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) सिर्फ भारतीय सेना के पास होंगे। सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूनिफॉर्म का अनधिकृत इस्तेमाल दंडनीय अपराध है।

तीन लेयर-एक लक्ष्य: जवानों को अधिक सुरक्षा और आराम

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, New Coat Combat तीन विशेष लेयरों से मिलकर बना है।

1. Outer Layer

डिजिटल कैमोफ्लाज प्रिंट

हर तरह के भूभाग में बेहतर कंसीलमेंट

ऑपरेशनल ड्यूरेबिलिटी

2. Inner Jacket

हल्का और सांस लेने योग्य इंसुलेटेड मिड-लेयर

मूवमेंट में रुकावट नहीं

3. Thermal Layer

अत्यधिक ठंड में तापमान नियंत्रण

मॉइस्चर बैलेंस बनाए रखता है

SCME आइटमों की स्वदेशीकरण यात्रा न केवल लॉजिस्टिक चेन को मजबूत बनाती है, बल्कि भारत को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सक्षम बनने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देती है।


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Nitish Oath Ceremony: नीतीश ने ली 10वीं बार शपथ, NDA सरकार ने शुरू किया नया अध्याय; PM मोदी भी मौजूद

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nitish oath Ceremony
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पटना: बिहार में नई सरकार के शपथ ग्रहण का राजधानी पटना (Nitish Oath Ceremony) का गांधी मैदान सियासी उत्साह और उत्सव के रंग में रंगा दिखा। लगातार दसवीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार के साथ पूरा NDA नेतृत्व आज ऐतिहासिक पल का गवाह बना। गुरुवार सुबह BJP और JDU नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि यह जीत केवल सत्ता की नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और विकास की राजनीति की जीत है।

NDA की बड़ी जीत पर सम्राट चौधरी का बयान

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि जनता ने 20 साल से जो आशीर्वाद दिया है, उसे NDA लगातार निभाता आ रहा है और आगे भी बिहार के विकास का काम तेज रफ्तार से जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शपथ समारोह में शामिल हुए, जो बिहार की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की जनता ने NDA को ऐतिहासिक समर्थन दिया है। यह भरोसा हमारा हौसला बढ़ाने वाला है, और हम विकास के अपने वादों पर पूरी गंभीरता से काम करेंगे।

वहीं, भाजपा नेता नितिन नवीन ने इस जीत को NDA की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सिर्फ सरकार बनाने का मौका नहीं, बल्कि जनता द्वारा दिए गए भरोसे को आगे बढ़ाने का संकल्प है। नितिन नवीन ने कहा कि नीतीश जी का 10वीं बार शपथ लेना खुद में एक ऐतिहासिक क्षण है। जनता ने जबरदस्त बहुमत दिया है, यह विकास के एजेंडे पर उनकी विश्वास का प्रमाण है।

डबल इंजन सरकार को मिला जनादेश: विजय सिन्हा

भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा ने भी साफ कहा कि यह चुनाव परिणाम प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार की डबल इंजन सरकार पर जनता के विश्वास की मुहर है। उन्होंने कहा कि जनता ने साफ कर दिया है कि बिहार को मजबूत नेतृत्व और स्थिर सरकार की आवश्यकता है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की सांसद शंभवी चौधरी ने NDA की जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह क्षण सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि लोगों की मेहनत, उम्मीदों और विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि खुशी तो है ही, पर उससे बड़ी जिम्मेदारी भी है। जनता को अब और बेहतर काम की उम्मीद है।

Nitish Oath Ceremony

JDU नेता बोले-लोगों ने नीतीश जी पर फिर भरोसा जताया

जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि जनता ने एक बार फिर उन्हें बड़ा जनादेश देकर साफ कर दिया कि स्थिर और अनुभवी नेतृत्व ही राज्य की दिशा तय कर सकता है।

गांधी मैदान फिर बना ऐतिहासिक मंच

पटना का गांधी मैदान आज एक बार फिर राजनीतिक इतिहास का साक्षी बनने जा रहा है। यहीं 2005, 2010 और 2015 में भी नीतीश कुमार ने शपथ ली थी। यही वह मैदान है जहाँ 1974 में जयप्रकाश नारायण ने ‘पूर्ण क्रांति’ का नारा दिया था।

nitish Oath Ceremony

कैसे बनी NDA सरकार – चुनावी गणित

2025 के विधानसभा चुनाव NDA के लिए रिकॉर्ड तोड़ साबित हुए।

कुल सीटें जीतीं: 202 / 243

  • बीजेपी: 89
  • जेडीयू 85
  • एलजेपी (RV): 19
  • हम (से.): 5
  • राष्ट्र लोक मोर्चा: 4

महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। इतना विशाल बहुमत NDA ने पहले 2010 में हासिल किया था, जब उसने 206 सीटें जीती थीं।

67.13% वोटिंग-महिलाओं की भागीदारी सबसे आगे

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार मतदान प्रतिशत 67.13 रहा, जो 1951 के बाद सबसे ज्यादा है। महिलाओं की मतदान भागीदारी पुरुषों से काफी अधिक रही थी।

  • महिलाएं: 71.6%
  • पुरुष: 62.8%

NDA की ऐतिहासिक जीत और नीतीश कुमार का दसवां कार्यकाल बिहार में आने वाले वर्षों के लिए नई उम्मीदें जगाता है। सभी दलों और नेताओं के बयानों में एक बात साफ दिखाई दी। विकास, स्थिरता और जनता के भरोसे को केंद्र में रखकर नया शासन आगे बढ़ेगा।


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Uttarakhand News: चमोली के उर्गम घाटी में 100 मी. गहरी खाई में गिरी टाटा सुमो; 2 की मौत, 3 घायल

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उर्गम घाटी में बड़ा हादसा: सुमो 100 मीटर खाई में गिरी, SDRF ने बचाई तीन जिंदगियां

चमोली जिले की उर्गम घाटी में बुधवार को एक बड़ी सड़क दुर्घटना (Uttarakhand News) हुई, जिसमें एक टाटा सुमो (UK11TA-1685) बेकाबू होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। पहाड़ी क्षेत्र में हुए इस हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ स्ट जोशीमठ तुरंत अलर्ट हुआ और राहत-बचाव दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया। दुर्घटना की गंभीर स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन समय के खिलाफ दौड़ की तरह था।

कठिन पहाड़ी मार्ग और SDRF की प्रतिक्रिया

कोतवाली जोशीमठ से सूचना मिलते ही सब इंस्पेक्टर देवीदत्त बर्थवाल के नेतृत्व में SDRF टीम उर्गम घाटी के लिए निकली। रास्ता बेहद कठिन, संकरा और जोखिमभरा था, लेकिन टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची। पहाड़ की गहरी खाई में गिर चुके वाहन तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। SDRF जवानों ने सुरक्षा रस्सियों की मदद से नीचे उतरकर राहत कार्य शुरू किया।

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उर्गम घाटी में टाटा सुमो गिरने से दो की मौत

खाई में उतरा दल, तेजी से शुरू हुआ बचाव कार्य

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद टीम ने खाई में उतरकर यात्रियों की खोजबीन शुरू की। दुर्घटना में वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिससे घायलों तक पहुंचना कठिन था। इसके बावजूद SDRF टीम ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू मिशन को आगे बढ़ाया। टीम की तेज़ कार्रवाई और समन्वय ने कई जिंदगियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हादसे में 2 मौत, 3 गंभीर घायल

लगातार प्रयासों के बाद SDRF टीम को खाई से कुल तीन घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत अस्पताल भेज दिया गया। वहीं, दुखद पहलू यह रहा कि इस हादसे में दो लोगों की मौत हो चुकी थी। SDRF ने दोनों शवों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला और सड़क तक लाकर उन्हें जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया। वाहन में कुल पांच लोग सवार थे।

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रातभर चला SDRF का हाई-रिस्क ऑपरेशन

घायलों की सूची

  1. कमलेश (25 वर्ष)-ग्राम पल्ला, चालक
  2. मिलन- ग्राम सलुड
  3. पूरन सिंह (55 वर्ष)-ग्राम सलुड

मृतकों की सूची

  1. कन्हैया (20 वर्ष-ग्राम सलुड
  2. ध्रुव (19 वर्ष)-ग्राम सलुड

हादसे का कारण और इलाके की चुनौतियां

उर्गम घाटी अपनी संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और गहरी खाइयों के कारण हमेशा जोखिम भरा माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में हल्की सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। हालांकि, वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की सही वजह क्या थी, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

एसडीआरएफ की मुस्तैदी बनी जीवनरक्षक

हादसे में एसडीआरएफ की प्रतिक्रिया और प्रोफेशनल रेस्क्यू ऑपरेशन एक बार फिर साबित करता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे बल कितने महत्वपूर्ण हैं। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने तेजी से कार्रवाई कर तीन लोगों की जान बचाई, जो उनकी दक्षता और समर्पण को दर्शाता है। यह हादसा फिर याद दिलाता है कि पहाड़ी मार्गों पर सावधानी व नियंत्रण ही सुरक्षित यात्रा का सबसे बड़ा आधार है।


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UPNL Strike: सरकार ने लगाई 6 महीने तक हड़ताल पर रोक, कर्मचारियों पर नो वर्क-नो पे लागू; उपनल कर्मियों ने जलाई ऑर्डर की प्रतियां

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हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर ‘नो वर्क-नो पे’
हड़ताल बैन से बढ़ी हलचल

देहरादून: राज्य में पिछले कई दिनों से लगातार चर्चाओं में चल रहे उपनल कर्मचारियों के आंदोलन (UPNL Strike) के बीच धामी सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठा दिया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर अगले छह महीनों तक सभी राज्य सेवाओं में हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजधानी देहरादून स्थित परेड ग्राउंड पर उपनल कर्मचारी पिछले 10 दिनों से नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।

राज्य के कार्मिक सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना ने साफ कर दिया कि अब किसी भी विभाग, निगम, बोर्ड या संस्थान में कार्यरत कर्मचारी अगले छह महीनों तक हड़ताल नहीं कर सकेंगे। अधिसूचना को उत्तर प्रदेश आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1966 की धारा 3(1) (जो उत्तराखंड राज्य में लागू है) के तहत जारी किया गया है। सरकार का तर्क है कि जनहित और आवश्यक सेवाओं के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय अनिवार्य हो गया था।

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हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर ‘नो वर्क-नो पे’

उपनल कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी

सरकार ने सिर्फ हड़ताल पर रोक नहीं लगाई, बल्कि इसके साथ ही उपनल कर्मियों को लेकर एक और कड़ा आदेश जारी कर दिया है। सैनिक कल्याण विभाग को भेजे गए पत्र में निर्देश दिया गया है कि हड़ताल में शामिल उपनल कर्मचारियों की पहचान की जाए और जिन कर्मचारियों की आंदोलन में सहभागिता पाई जाएगी, उन्हें No Work, No Pay के तहत कार्रवाई झेलनी होगी। इस सख्ती के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार अब आंदोलन को लेकर नरमी नहीं दिखाने वाली। कई विभागों को अपनी रिपोर्ट शासन को तुरंत भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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उत्तराखंड में 6 महीने की हड़ताल पर पूरी रोक

10 दिनों से देहरादून में धरना, कांग्रेस का खुला समर्थन

गौरतलब है कि उपनल कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन और सुरक्षा लाभों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर वे पिछले 10 दिनों से परेड ग्राउंड, देहरादून में लगातार धरने पर बैठे हैं। राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा गर्मा चुका है। कांग्रेस ने खुले तौर पर उपनल कर्मचारियों के आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश तेज कर दी है। विपक्ष का कहना है कि कर्मचारियों की मांग जायज है और सरकार को बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।

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सरकार का एक्शन, आंदोलन की रफ्तार और तेज?

जारी अधिसूचना के बाद आंदोलन कर रहे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हड़ताल पर प्रतिबंध और ESMA की सख्ती से एक तरफ जहां शासन तंत्र को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर संघर्षरत कर्मचारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

शासनादेश को लेकर उपनल कर्मचारियों की दो टूक

वहीं दूसरी ओर, उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों का शोषण करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर नियमितीकरण के लिए उप समिति बनाने का ढोंग रचती है वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को डराने धमकाने के लिए काला शासनदेश जारी करती है, जिसके विरोध में कर्मचारियों ने सचिव दीपेंद्र चौधरी का पुतला दहन के साथ नो वर्क नो पर के ऑर्डर की प्रतियां जलाई।

UPNL Strike
उपनल कर्मचारियों पर सरकार का शिकंजा

अब देखना होगा कि क्या सरकार संवाद का रास्ता चुनेगी या सख्ती बढ़ने से आंदोलन और उग्र होगा? उपनल कर्मचारियों पर नो वर्क, नो पे की तलवार क्या नए विवाद पैदा करेगी? फिलहाल इतना तय है कि उत्तराखंड में अगले छह महीनों तक हड़ताल का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है और शासन ने साफ संदेश दे दिया है कि आवश्यक सेवाओं में किसी तरह का व्यवधान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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Su-57 India Deal: क्या भारत की आसमान में ताकत बदलने वाली है? रूस ने पेश किया अब तक का सबसे बड़ा Su-57 पैकेज!

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Su-57 Technology Transfer
भारत-रूस लड़ाकू विमान सौदा

दुबई एयर शो 2025 में रूस ने भारत को एक ऐसा प्रस्ताव दिया है जिसने वैश्विक रक्षा जगत में हलचल मचा दी है। रूस ने कहा है कि वह अपने 5th जनरेशन स्टील्थ फाइटर Sukhoi Su-57 की बिना किसी प्रतिबंध वाली टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Su-57 India Deal) भारत को देने को तैयार है।

रूसी रक्षा कंपनी Rostec के CEO सर्गेई चेमेज़ोव ने साफ कहा कि भारत जो भी चाहेगा, वो हमारे लिए पूरी तरह स्वीकार्य है। यह पेशकश ऐसे समय में हुई है जब विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन और लावरोव से मुलाकात की है और पुतिन अगले महीने भारत दौरे पर आने वाले हैं।

6 दशकों की साझेदारी, भरोसा कायम: रूस

चेमेज़ोव ने कहा कि भारत-रूस रक्षा सहयोग हमेशा मजबूत रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत पर प्रतिबंध लगाए गए थे, तब भी हमने उसकी सुरक्षा के लिए हथियार सप्लाई किए। उन्होंने कहा कि रूस आज भी भारत की सभी मिलिट्री जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Su-57 India Deal

भारत की हर टेक्निकल मांग ‘कबूल’: UAC प्रमुख की पुष्टि

United Aircraft Corporation (UAC) के डायरेक्टर जनरल वदीम बाडेखा ने पुष्टि की कि भारत की सभी तकनीकी मांगें पूरी तरह स्वीकार्य है। Su-57 से जुड़े सभी मुद्दों पर गहरी बातचीत हो रही है। भारत के साथ सहयोग बहुत सकारात्मक स्तर पर होने वाला है। यह बयान संकेत देता है कि रूस Su-57 प्रोजेक्ट में भारत को व्यापक भूमिका देने को तैयार है।

रूस का बड़ा पैकेज: खरीद + भारत में उत्पादन + ओपन टेक ट्रांसफर

Rosoboronexport के प्रतिनिधि ने बताया कि भारत को निम्न ऑफर दिए जा रहे हैं।

  • Russia made Su-57 की सप्लाई
  • स्टेज-वाइज प्रोडक्शन भारत में शिफ्ट
  • बिना प्रतिबंध टेक ट्रांसफर, जिसमें इंजन तकनीक, ऑप्टिक्स, AESA रडार, AI सिस्टम, स्टील्थ/लो-ऑब्ज़र्वेबल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड एयर वेपन्स, भारतीय हथियारों को Su-57 में इंटीग्रेट करने की सुविधा, सॉफ्टवेयर और सिस्टम अपग्रेड के लिए ओपन एक्सेस शामिल है। रूस का दावा है कि यह मॉडल भारत को किसी भी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से दूर रखेगा।
https://twitter.com/narendramodi/status/1990807066513191045

भारत के लिए खास दो सीटर Su-57? रूस ने हरी झंडी दी

रूस ने कहा कि वह भारत के साथ मिलकर Su-57E/FGFA का दो सीटर कॉम्बैट वर्ज़न डेवलप करने के लिए तैयार है। यह भारत की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए होगा। गौरतलब है कि मॉस्को में जयशंकर-पुतिन मुलाकात के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई।वहीं, पुतिन के करीबी सहयोगी निकोलाई पात्रुशेव ने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात कर समुद्री सहयोग, कनेक्टिविटी, स्किल डेवलपमेंट, शिपबिल्डिंग, ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर बातचीत की। पीएम मोदी ने पुतिन की भारत यात्रा को लेकर उत्साह जताया है।

Su-57 India Deal

Sukhoi Su-57 क्या है?

Sukhoi Su-57 रूस का अत्याधुनिक फिफ्थ-जनरेशन स्टील्थ मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे भविष्य के एरियल कॉम्बैट को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह दो शक्तिशाली AL-41F1 या आने वाले AL-51F1 (Izdeliye 30) टर्बोफैन इंजनों से लैस है, जो इसे Mach 2 तक की अधिकतम गति और Mach 1.3 सुपरक्रूज़ क्षमता देते हैं यानी आफ्टरबर्नर के बिना सुपरसोनिक उड़ान। इसके स्टेल्थ डिज़ाइन में कंपोजिट मटेरियल, रडार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग और बहुत कम रडार क्रॉस सेक्शन शामिल है, जिससे यह दुश्मन की नज़र से लगभग अदृश्य हो जाता है। इसमें मल्टीबैंड AESA रडार, एडवांस्ड डिजिटल एवियोनिक्स, DIRCM, और OLS-50M IRST जैसे हाई-एंड सेंसर लगे हैं, जो इसे 360-डिग्री बैटल अवेयरनेस प्रदान करते हैं। कुल मिलाकर, Su-57 आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर, स्टेल्थ, गति और AI-इंटीग्रेटेड सिस्टम का एक शक्तिशाली संयोजन है।

क्या Su-57 बनेगा भारत का अगला गेम-चेंजर?

रूस का यह प्रस्ताव भारत के फ्यूचर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। खासकर जब दुनिया में कोई भी बड़ा देश इतनी अनलिमिटेड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश नहीं करता। अब नज़रें भारत की प्रतिक्रिया पर हैं। क्या Su-57 भारत की एयरपावर में क्रांतिकारी बढ़त लाएगा?