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Dehradun News: नारी से परिवार तक, उत्तराखंड में हेल्थ और अवेयरनेस का मेगा ड्राइव; जानें ख़ास बातें

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उत्तराखंड में “स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार” अभियान

देहरादून (Dehradun News): उत्तराखंड में इन दिनों एक बड़ा और असरदार स्वास्थ्य आंदोलन चल रहा है, जिसका नाम है स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार”. ये सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और पूरे परिवार की भलाई से जुड़ा एक बड़ा (Uttarakhand women health campaign) महाअभियान है. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) से लेकर महात्मा गांधी जयंती (2 अक्टूबर) तक पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है. इस अभियान को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग ने एक जनांदोलन का रूप दे दिया है. इसका मकसद साफ है — महिला स्वास्थ्य मजबूत होगा, तो परिवार और समाज भी मजबूत होंगे.

7,500 से ज्यादा कैंप, लाखों लोग हुए लाभान्वित

अभियान के दौरान अब तक प्रदेशभर में 7,500 से ज्यादा स्वास्थ्य शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 200 से अधिक (Swasth Nari Sashakt Parivar) विशेषज्ञ कैंप भी रहे. इन शिविरों से अब तक 3.5 लाख से ज्यादा लोग लाभ ले चुके हैं. अकेले 22 सितंबर को ही पूरे प्रदेश में 1,487 शिविर आयोजित किए गए, जहां हजारों लोगों ने जांच और इलाज की सुविधाएं पाईं.

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कैंपों में क्या हो रहा है खास?

इस महाअभियान में सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य जांच ही नहीं, बल्कि कई अहम सेवाएं एक साथ दी जा रही हैं—

  • एनीमिया, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर की जांच
  • गर्भवती महिलाओं की एएनसी चेकअप
  • टीबी जांच और निक्षय मित्र पंजीकरण
  • बच्चों का टीकाकरण
  • महिलाओं और किशोरियों के लिए स्वास्थ्य व कौशल जागरूकता सत्र
  • निःशुल्क दवा वितरण और काउंसलिंग
  • ब्लड डोनेशन और ई-रक्तकोश पंजीकरण

आंकड़े जो बताते हैं अभियान का असर

अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक—

  • 1.07 लाख से ज्यादा महिलाओं और 79 हजार पुरुषों की हाई ब्लड प्रेशर जांच हुई.
  • 1 लाख से ज्यादा महिलाओं और करीब 70 हजार पुरुषों की डायबिटीज जांच हुई.
  • 1.30 लाख महिलाओं और 43 हजार पुरुषों की कैंसर स्क्रीनिंग हुई.
  • 39,000 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की जांच हुई.
  • 60 हजार से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण किया गया।
  • 38,000 से ज्यादा लोगों ने ब्लड डोनेशन किया।

विभाग का सख्त संदेश

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का कहना है कि ये अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने का सबसे बड़ा कदम है. उनका साफ संदेश है— “स्वस्थ नारी ही सशक्त परिवार की नींव है.”

क्यों खास है ये पहल?

ये अभियान सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है. इसमें स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ महिलाओं को (Uttarakhand government health initiative) सशक्त बनाने, उनकी सेहत पर ध्यान देने और पूरे परिवार को हेल्दी बनाने पर जोर दिया जा रहा है. यही वजह है कि इसे लोग एक “जनआंदोलन” मान रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो, ये पहल महिलाओं की हेल्थ सिक्योरिटी + फैमिली वेलनेस दोनों को एक साथ मजबूत करने का काम कर रही है.


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Bageshwar News: बागेश्वर जिला अस्पताल में बच्चे की मौत, लापरवाह डॉक्टर-स्टाफ पर गिरी गाज़

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बागेश्वर अस्पताल में बच्चे की मौत पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन

देहरादून/बागेश्वर: बागेश्वर जिला चिकित्सालय में बच्चे की मौत का मामला (Bageshwar News) सरकार तक पहुंचते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत संज्ञान लिया. उनकी सख़्त हिदायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया. जांच रिपोर्ट में सामने आया कि अस्पताल में गंभीर (Government action on doctors) लापरवाही हुई है. एम्बुलेंस से लेकर इलाज तक, हर स्तर पर संवेदनशीलता की कमी दिखी. इस पर स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर तुरंत कार्रवाई की.

CMS डॉ. तपन शर्मा हटाए गए

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तपन शर्मा पर प्रशासनिक अक्षमता और एम्बुलेंस व्यवस्था न सुनिश्चित करने का आरोप लगा. परिणामस्वरूप उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर कुमाऊं मंडल कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया.

एम्बुलेंस चालक और नर्सिंग स्टाफ पर गाज़

108 एम्बुलेंस चालक ईश्वर सिंह टोलिया और लक्ष्मण कुमार पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगा. इन्हें एक महीने के लिए काम से अलग कर दिया गया. वहीं नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, हिमानी और कक्ष सेवक सूरज सिंह कन्नाल को कठोर चेतावनी दी गई है.

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (फाइल फोटो)

डॉक्टरों पर भी कार्रवाई

चिकित्साधिकारी डॉ. भूरेन्द्र घटियाल और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार पर भी कार्रवाई हुई. डॉ. घटियाल को (Uttarakhand health department action) चेतावनी दी गई, जबकि डॉ. अंकित कुमार के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई. आरोप है कि उन्होंने संघर्षरत बच्चे के प्रति सहानुभूति नहीं दिखाई.

स्वास्थ्य सचिव का सख़्त संदेश

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा – “यह घटना बेहद दुखद है। मुख्यमंत्री जी के आदेश पर तुरंत एक्शन लिया गया है. स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हर अधिकारी और कर्मचारी अपनी ड्यूटी पूरी संवेदनशीलता से निभाए, वरना कठोर कार्रवाई तय है.

जनता को दिलाया भरोसा

धामी सरकार का यह कदम जनता को भरोसा दिलाने की (Child death due to negligence) कोशिश है कि अस्पतालों में अब पेसेंट केयर फर्स्ट (patient care first) यानी मरीजों की देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही होगी तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.


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Uttar Pradesh News: पुलिस स्टेशनों-वाहनों से हटेंगे जाति प्रतीक! योगी सरकार ने अचानक लिया ये फैसला

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उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को जातिवाद (caste discrimination) को खत्म करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य में पुलिस रिकॉर्ड और सार्वजनिक स्थानों पर जाति आधारित किसी भी (Uttar Pradesh News) प्रकार के ज़िक्र पर पूरी तरह प्रतिबंध (Complete Ban) का आदेश जारी किया.

FIR और पुलिस दस्तावेजों में जाति का नाम नहीं
मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि अब First Information Reports (FIRs), गिरफ्तारियों के मेमो और अन्य पुलिस दस्तावेजों में जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा. इसके बजाय पहचान के लिए माता-पिता के नाम का इस्तेमाल किया जाएगा.

पुलिस स्टेशनों और वाहनों से हटेंगे जाति प्रतीक
सरकार ने यह भी आदेश दिया कि पुलिस स्टेशन के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड पर लगे जाति प्रतीक, स्लोगन तुरंत हटाए जाएं. इसके अलावा, पूरे राज्य में जाति (Uttar Pradesh Government Orders) आधारित रैलियों पर भी रोक लगाई गई है. कानून प्रवर्तन एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखकर किसी भी उल्लंघन को रोकेंगी.

SC/ST मामलों में विशेष छूट
सरकार ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) Prevention of Atrocities Act के तहत दर्ज मामलों में जाति की पहचान आवश्यक होने पर छूट रहेगी. हाईकोर्ट के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए SOP और पुलिस मैनुअल में संशोधन किया जाएगा.

CM योगी ने जनता दर्शन में सुनी लोगों की समस्याएं
इसी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में जनता दर्शन (Janata Darshan Gorakhpur) आयोजित किया. इस दौरान उन्होंने आम जनता की शिकायतें सुनी और अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया. साथ ही उन्होंने शारदीय नवरात्रि पर लोगों को शुभकामनाएं दी.

विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश की योजना
21 सितंबर को मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 300 विशेषज्ञों को Developed India-Developed Uttar Pradesh 2047 के रोडमैप तैयार करने के लिए नियुक्त किया है. इनमें से रिटायर्ड मुख्य सचिव, सचिव, डिप्टी सेक्रेटरी और विश्वविद्यालय कुलपति शामिल हैं. ये विशेषज्ञ राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में जाकर लोगों से चर्चा कर रहे हैं और 2047 के विकास लक्ष्यों के लिए सुझाव जुटा रहे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम जातिवाद खत्म करने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने (Law and Order India) की दिशा में बड़ा कदम है. जनता दर्शन और विशेषज्ञों की भागीदारी से राज्य में विकास और जनता कल्याण दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है.


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GST Bachat Utsav: पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी का केंद्र पर निशाना, बोलीं-बस..क्रेडिट लूटने में लगे

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केंद्र सरकार पर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का तंज

कोलकाता (GST Bachat Utsav): नए जीएसटी (Goods and Services Tax) रेट्स के लागू होने के साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस राहत का पूरा बोझ राज्य सरकारों (State Government) ने उठाया है और केंद्र ने इसमें एक भी पैसा खर्च नहीं किया.

राज्य सरकार को मिला खर्च का बोझ
ममता बनर्जी ने कहा, केंद्र सरकार को इसमें कोई क्रेडिट नहीं मिलता. मैंने सबसे पहले पत्र लिखकर जीवन बीमा और कई जरूरी दवाओं को GST से छूट देने की मांग की थी. राहत के सारे पैसों का बोझ राज्य की जेब से पड़ा. केंद्र बस इसका क्रेडिट ले रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की GST हिस्सेदारी से यह पैसा कट गया और कई योजनाओं जैसे 100 दिन का काम, आवास योजना, सड़क, जल सपनो और सर्व शिक्षा अभियान के फंड भी रुके हुए हैं.

GST reforms से आम जनता को मिलेगा फायदा

हालांकि, मुख्यमंत्री ने खुशी जताई कि आम लोगों को राहत जरूर मिलेगी. उन्होंने कहा कि नए GST reforms India से उपभोक्ता की जेब पर सकारात्मक असर पड़ेगा. कुणाल घोष (Trinamool Congress Leader) ने भी कहा कि पहले की GST दरें जनविरोधी थीं. ममता बनर्जी ने आवाज़ उठाई और पूरे देश ने समर्थन किया, जिसके बाद केंद्र को दरें बदलनी पड़ी.

नए GST ढांचे का विवरण
पुराने चार-स्तरीय GST सिस्टम को खत्म करके अब दो स्तरीय प्रणाली (5% और 18%) लागू कर दी गई है. विलासिता और ‘सिन गुड्स’ के लिए 40% अलग स्लैब रखा गया है. यह नया ढांचा compliance आसान बनाएगा, consumer prices India कम करेगा, MSMEs और manufacturing sector को बढ़ावा देगा.

FMCG और डेयरी में तुरंत असर
FMCG और डेयरी सेक्टर के बड़े ब्रांड जैसे Amul, Mother Dairy ने कीमतों में कटौती कर दी है. अब 100 ग्राम अमूल बटर 62 रुपये से घटकर 58 रुपये और UHT दूध 77 रुपये से घटकर 75 रुपये प्रति लीटर बिकेगा. मदर डेयरी ने भी पनीर, घी, मिल्कशेक और फ्रोजन प्रोडक्ट्स की कीमतें कम कर दी हैं.

राज्यों के हितों की अनदेखी- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने इस बदलाव में अपनी अहम भूमिका दिखाई. उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने दरें तय करते समय जनता और राज्यों के हितों की अनदेखी की, लेकिन अब राहत मिलने के बावजूद इसका पूरा क्रेडिट केंद्र ले रहा है. नई GST rates से आम जनता के लिए जीवन यापन सस्ता होगा, कीमतों में राहत मिलेगी और कारोबारियों के compliance आसान होंगे. साथ ही यह सवाल भी उठता है कि fund allocation India में राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर संतुलन कैसे बनता है.


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PM Modi Arunachal Visit: ‘खरीदो स्वदेशी-बेचो स्वदेशी’, अरुणाचल की धरती से PM Modi का बड़ा संदेश

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PM Modi Arunachal Visit
पीएम मोदी ने अरुणाचल दौरे पर कही बड़ी बात...

इटानगर (अरुणाचल प्रदेश): सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर में व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों से सीधा (PM Modi Arunachal Visit) संवाद किया. इस दौरान उन्होंने एक बार फिर देश के लोगों से अपील की कि वे “खरीदो स्वदेशी और बेचो स्वदेशी” (Buy Swadeshi sell Swadeshi) के मंत्र को अपनाएं. पीएम मोदी (PM MODI) ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) बनाने के लिए ज़रूरी है कि हम अपने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें.

PM Modi Arunachal Visit


व्यापारियों के लिए गेम चेंजर बना GST
स्थानीय कारोबारियों ने इस मौके पर बताया कि पहले उन्हें अलग-अलग टैक्सों से जूझना पड़ता था.लेकिन मोदी सरकार ने ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानी जीएसटी लागू करके उनकी बड़ी मुश्किल (Viksit Bharat vision Modi) आसान कर दी. व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म्स से कारोबार में पारदर्शिता आई है और लागत भी कम हुई है. कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े लोगों ने कहा कि अब मकान बनाने की लागत घटेगी और घर आम लोगों के लिए सस्ते होंगे. वहीं, होटल कारोबारियों ने उम्मीद जताई कि जीएसटी कटौती से घरेलू पर्यटन को ज़बरदस्त बढ़ावा मिलेगा. मछली पालन और कृषि से जुड़े व्यापारियों ने भी इसे अपने क्षेत्र के लिए फायदेमंद बताया.

मोदी बने ‘ब्रांड एंबेसडर’
पीएम मोदी ने कहा कि वे खुद स्थानीय उत्पादों के ‘ब्रांड एंबेसडर’ हैं. उन्होंने व्यापारियों से कहा कि अपने सामान पर गर्व करें और ग्राहकों को भी ये बताएं कि यह पूरी तरह से स्वदेशी है. इसी कड़ी में उन्होंने व्यापारियों को “गर्व से कहो ये स्वदेशी है” वाले पोस्टर भी दिए, जिन्हें दुकानदारों ने उत्साह से स्वीकार किया और अपने प्रतिष्ठानों पर लगाने का भरोसा दिया.

सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने लिखा कि आज जब सूरज उगा तो भारत की अर्थव्यवस्था में भी एक नया अध्याय शुरू हुआ, जीएसटी बचत उत्सव’. इटानगर में व्यापारियों और दुकानदारों ने अपनी रंग-बिरंगी झलक दिखाई, खुशबूदार (GST Bachat Utsav Itanagar) चाय, चटपटे अचार, हल्दी, बेकरी उत्पाद और खूबसूरत हस्तशिल्प. उन्होंने जीएसटी सुधारों पर खुशी जताई और इसे भविष्य के लिए फायदेमंद बताया.

5,100 करोड़ की परियोजनाओं का तोहफ़ा
अरुणाचल दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य को 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का तोहफ़ा भी दिया. इनमें सबसे अहम दो बड़े जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला शामिल रही.
1. हेओ हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (240 मेगावाट)
2. टाटो-I हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (186 मेगावाट)
ये दोनों परियोजनाएं सियोम उप-बेसिन में विकसित होंगी और राज्य की ऊर्जा ज़रूरतों के साथ-साथ रोज़गार और आर्थिक विकास को नई रफ्तार देंगी.

इसके अलावा, तवांग में लगभग 9,820 फीट की ऊँचाई पर बनने वाले कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला भी रखी गई. यह सेंटर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों का बड़ा केंद्र होगा. साथ ही, 1,290 करोड़ रुपये की विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया गया, जिनमें कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, फायर सेफ्टी और कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं शामिल हैं. अरुणाचल की धरती से पीएम मोदी का ये संदेश साफ है, स्थानीय उत्पादों को अपनाओ, स्वदेशी पर भरोसा करो और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दो.


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Dehradun News: हेलीकॉप्टर से फुलेत-छमरौली पहुंचा राशन; DM सविन बंसल ने निभाया वादा; जानें पूरा मामला

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फुलेत-छमरौली तक हेली से पहुंचा राशन

देहरादून (Dehradun News): जब-जब पहाड़ों पर आपदा कहर बरपाती है, सबसे ज़्यादा मुश्किलें आम लोगों के लिए रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने में आती हैं. उत्तराखंड में इस बार की आपदा ने फुलेत और छमरौली जैसे (disaster relief) गांवों को अलग-थलग कर दिया. 12 किलोमीटर पैदल सफर कर जब जिलाधिकारी (डीएम) सविन बंसल खुद इन गांवों तक पहुँचे थे, तो ग्रामीणों ने साफ कहा था कि सितंबर महीने का खाद्यान्न अब तक नहीं मिला. उसी समय डीएम ने वादा किया था कि मुख्यालय पहुंचते ही राशन आपके गांव तक पहुंचाया जाएगा और अब उस वादे को ज़मीनी हकीकत में बदलकर दिखाया गया है.

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क्यों ज़रूरी थी हवाई मदद?
फुलेत और छमरौली गाव आपदा के बाद सड़क संपर्क से कटे रहे. करीब 1500 की आबादी वाले इन दोनों गाँxवों तक राशन पहुंचाना बड़ी चुनौती थी. बरसात और पहाड़ों की मुश्किल भौगोलिक स्थिति के कारण ट्रक या जीप से पहुंच पाना लगभग नामुमकिन था. ऐसे में जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से (DM Savin Bansal news) विशेष अनुमति ली कि हेलीकॉप्टर से खाद्यान्न पहुंचाया जाए. मुख्यमंत्री ने भी साफ निर्देश दिए कि प्रभावितों को राहत कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए.

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सुबह-सुबह पहुंचा राशन
मुख्यालय लौटते ही डीएम ने आदेश जारी किए और रविवार सुबह-सुबह ही राहत अभियान शुरू हो गया. अपर सिटी मजिस्ट्रेट अपूर्वा सिंह की अगुवाई में हेलीकॉप्टर से खाद्यान्न गांव तक भेजा गया. ग्राउंड जीरो पर स्पेशल तहसीलदार चमन सिंह पहले से मौजूद थे. उन्होंने गांव वालों को राशन प्राप्त कर वितरण का काम संभाला.

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वादे की मिसाल
अक्सर ग्रामीण इलाकों में लोग ये शिकायत करते हैं कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं. लेकिन इस बार मामला अलग था. डीएम सविन बंसल ने 12 किलोमीटर पैदल चलकर ग्रामीणों से मुलाकात की, हाल सुने और वादा किया और अब उसी वादे को निभाते हुए हेलीकॉप्टर से खाद्यान्न भेजा गया. ग्रामीणों के लिए यह राहत की बड़ी खबर है कि सितंबर महीने का राशन अब उनके घरों तक पहुंच गया है.

इस पूरी कार्रवाई ने एक बात साफ कर दी, जब सिस्टम गंभीरता से काम करे तो राहत पहुंचाना नामुमकिन नहीं है. हेलीकॉप्टर से राशन पहुंचाना सिर्फ एक मदद नहीं, बल्कि भरोसे (Uttarakhand helicopter relief operation) की मिसाल है कि संकट की घड़ी में सरकार और प्रशासन आपके साथ खड़ा है. फुलेत और छमरौली के लोगों के लिए ये सिर्फ राशन का सवाल नहीं था, बल्कि यह उम्मीद का पैगाम भी है और जिलाधिकारी सविन बंसल ने यह दिखा दिया कि प्रशासन अगर ठान ले, तो पहाड़ की सबसे कठिन राह भी आसान हो सकती है.


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PM Modi Assam visit: PM मोदी का असम के लिए सौगातों का पिटारा, जानें कैसे बदलेगी राज्य की तस्वीर

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PM Modi Assam visit
PM मोदी का असम के लिए सौगातों का पिटारा

Darrang (Assam): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Assam visit) ने रविवार को असम के दरंग जिले में कई अहम विकास परियोजनाओं की नींव रखी और कुछ का लोकार्पण भी किया. यह दौरा न सिर्फ (PM Modi Assam infrastructure) राज्य के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, बल्कि स्वास्थ्य, सड़क और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई दिशा देने वाला रहा.

स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
दरंग जिले में पीएम मोदी ने दरंग मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के साथ-साथ जीएनएम स्कूल और बी.एससी. नर्सिंग कॉलेज की नींव रखी. इन संस्थानों के निर्माण से न (Darrang Medical College) केवल स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत होंगी बल्कि युवाओं को मेडिकल क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे. असम जैसे पूर्वोत्तर राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में दूरगामी बदलाव लाएगा.

गुवाहाटी रिंग रोड-ब्रह्मपुत्र पर नया पुल
यातायात और कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट (Guwahati Ring Road Project) का शिलान्यास किया. इस परियोजना से राजधानी गुवाहाटी में जाम की समस्या कम होगी और शहर में आवागमन और सुगम बनेगा. इसके अलावा, पीएम मोदी ने कुरुवा-नारेंगी पुल की भी नींव रखी, जो ब्रह्मपुत्र नदी पर बनेगा। यह पुल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई ताकत देगा और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा.

ऊर्जा और उद्योग को नई दिशा
नुमालीगढ़ (गोलाघाट जिला) में प्रधानमंत्री ने असम बायोएथेनॉल प्लांट का उद्घाटन किया. यह संयंत्र स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा. इसके साथ ही, उन्होंने पॉलीप्रोपलीन प्लांट की नींव रखी, जो असम के पेट्रोकेमिकल सेक्टर में अहम योगदान देगा। इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

18,530 करोड़ की सौगात
पीएम मोदी ने असम को कुल 18,530 करोड़ रुपये की परियोजनाओं (Rs 18,530 crore projects Assam) की सौगात दी. इनमें सड़कें, पुल, मेडिकल कॉलेज, ऊर्जा और उद्योग से जुड़ी कई योजनाएं शामिल हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे असम के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से राज्य का हर वर्ग लाभान्वित होगा.

कार्यक्रम के दौरान सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी को कृषक शहीद दिवस की याद में एक स्मृति चिन्ह भेंट किया. यह दिन 1894 के दरंग नरसंहार की याद दिलाता है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी में भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी. प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय असम दौरा न सिर्फ विकास की नई शुरुआत माना जा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और ऊर्जा के क्षेत्र में आने वाले समय में असम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कदम साबित होगा.


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India Retail Inflation 2025

नई दिल्ली (India Retail Inflation):अगस्त 2025 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) मामूली बढ़कर 2.07% पर पहुंच गई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित यह आंकड़ा शुक्रवार को जारी किया गया. अच्छी खबर यह है कि यह दर अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2 से 6 प्रतिशत के तय लक्ष्य के भीतर बनी हुई है. जुलाई 2025 में खुदरा महंगाई दर 1.55% थी, जो जून 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर था. अगस्त में इसमें 46 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई और यह 2.07% हो गई. खाद्य महंगाई (Food Inflation) अगस्त में -0.69% दर्ज की गई. ग्रामीण इलाकों में -0.70%, शहरी इलाकों में -0.58%. इसके बावजूद सब्जियों, मांस और मछली, तेल-घी और अंडे जैसी चीजों की कीमतों में वृद्धि ने महंगाई को ऊपर खींचा.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई
अगस्त 2025 में पांच राज्यों में महंगाई सबसे ज्यादा दर्ज की गई. इनमें केरल, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, तमिलनाडु. भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार 11 बार रेपो रेट 6.5% पर स्थिर रखने के बाद फरवरी 2025 में लगभग पांच साल बाद पहली बार कटौती की थी. इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना था. RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 2025-26 के लिए महंगाई अनुमान को घटाकर 3.7% कर दिया है, जबकि पहले यह 4% था.

आने वाले समय का अनुमान
अगर मानसून सामान्य रहता है तो तिमाहीवार महंगाई का अनुमान इस प्रकार है:
पहली तिमाही (अप्रैल-जून): 2.9%
दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर): 3.4%
तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर): 3.9%
चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च): 4.4%

ग्लोबल लेवल पर भारत की स्थिति
दुनिया के कई विकसित देशों में महंगाई अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसके मुकाबले भारत ने अपनी महंगाई दर को नियंत्रित रखने में बेहतर प्रदर्शन किया है. विश्लेषकों का मानना है कि आगे भी खुदरा महंगाई RBI के दायरे में रहेगी और अब फोकस आर्थिक विकास की गति बढ़ाने पर होगा. अगस्त में महंगाई दर हल्की बढ़ी है लेकिन यह अब भी सुरक्षित सीमा में है. सरकार और RBI दोनों के लिए यह संकेत राहत भरे हैं कि कीमतों पर नियंत्रण रखते हुए विकास को मजबूत किया जा सकता है.


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India US trade War
भारत-अमेरिका के संबंधों में सुधार के आसार

नई दिल्ली (India US Trade War): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता दोबारा शुरू हो चुकी है. अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखते हुए ट्रंप ने कहा कि मुझे खुशी है कि भारत और अमेरिका फिर से बातचीत (India-US war negotiations back on track Trump certain of no difficulty in trade talks) कर रहे हैं ताकि आपसी व्यापार में मौजूद रुकावटें दूर की जा सकें. जल्द ही मैं अपने बहुत अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पर बात करूंगा. मुझे पूरा यकीन है कि यह बातचीत दोनों देशों के लिए आसानी से सफल नतीजे तक पहुंचेगी.

हालिया तनाव की वजह
बीते कुछ हफ्तों से दोनों देशों के रिश्ते में खिंचाव देखा गया था. अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाया था और इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25% का अतिरिक्त जुर्माना भी लगा दिया था. यही वजह थी कि भारत-अमेरिका संबंधों में असहजता बढ़ गई थी. जिसके बाद से दोनों देशों की बीच संबंधों में खटास देखने को मिली.

ट्रंप बोले– भारत-अमेरिका रिश्ते खास
इस सप्ताह व्हाइट हाउस से दिए बयान में भी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता ‘बहुत खास’ है. उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री मोदी और वह हमेशा दोस्त रहेंगे. ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, कभी-कभी कुछ मौके ऐसे आ जाते हैं, लेकिन भारत और अमेरिका का रिश्ता मजबूत है.

India US Trade War

मोदी पर ट्रंप की नाराज़गी
हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें इस वक्त पीएम मोदी की कुछ नीतियों से नाराज़गी है. उन्होंने कहा कि मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा, वह बेहतरीन प्रधानमंत्री हैं. लेकिन इस समय वे जो कर रहे हैं, वह मुझे पसंद नहीं आ रहा. फिर भी दोनों देशों के रिश्ते को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है. एक पत्रकार (US India tariff dispute) ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या भारत और रूस चीन के करीब जा रहे हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता. ट्रंप का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी अभी भी मज़बूत है और भविष्य में और बेहतर होगी.

पीएम मोदी ने कही ये बात
ट्रंप के इस संदेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप के विचारों और हमारे रिश्तों की सकारात्मक आकलन की मैं सराहना करता हूं और उसका पूरा जवाब देता हूं. भारत-अमेरिका की साझेदारी बेहद सकारात्मक और भविष्य की ओर देखने वाली है। यह साझेदारी अब व्यापक और वैश्विक रणनीतिक सहयोग की ओर बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कोई बड़ा समझौता हो सकता है. अमेरिका के सख्त टैरिफ और रूस से जुड़े तेल आयात के मसले पर बातचीत आगे बढ़ेगी. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की आपसी समझदारी से दोनों देशों के बीच रिश्ते फिर से सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है.


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Himalaya Calling 2025: देहरादून में गूंजा हिमालय कॉलिंग! भविष्य की दिशा होगी तय; ये है ख़ास बात

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Himalaya Calling 2025
देहरादून स्थित UPES में सजा ‘हिमालय कॉलिंग’

देहरादून (Himalaya Calling 2025): यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (यूपीईएस) ने सोमवार को अपने देहरादून परिसर में 3 दिवसीय ग्लोबल समिट ‘हिमालय कॉलिंग 2025’ की शुरुआत की. इस आयोजन का संचालन हिमालयन इंस्टीट्यूट फॉर लर्निंग एंड लीडरशिप (HILL) कर रहा है. इस साल सम्मेलन का विषय रखा गया है ‘हिमालय के साथ उठो और सतत विकास लक्ष्यों की गति बढ़ाओ’. ‘हिमालय कॉलिंग’ का मकसद हिमालय की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को उजागर करना, सतत विकास पर शोध और नीति संवाद को गति देना, युवाओं को नेतृत्व के लिए प्रेरित करना और HILL को वैश्विक स्तर पर ज्ञान व विचार नेतृत्व का प्रमुख केंद्र बनाना है.

हिमालय से जुड़ी बातों पर गंभीर चर्चा
इस सम्मेलन में 700 से अधिक छात्र और 1,600+ प्रतिनिधि ऑनलाइन और ऑफ़लाइन शामिल हो रहे हैं. तीन दिनों के इस आयोजन में 17 ऑफ़लाइन और 9 ऑनलाइन सत्र, कुल 25+ सत्र और 128 से ज्यादा प्रमुख वक्ता हिस्सा ले रहे हैं. इस बार सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें 10 पद्म पुरस्कार (Padma awardees UPES event) विजेता शामिल हो रहे हैं. उद्घाटन समारोह एमएसी हॉल में हुआ. इसी के साथ हिमालयी उत्पादों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया, जिसमें 400 से अधिक वस्तुएं (हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद और स्मृति-चिह्न) प्रदर्शित की गईं. यह प्रदर्शनी 9 से 11 सितम्बर तक रोज़ सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी. साथ ही, हिमालयी फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है.

Himalaya Calling 2025
UPES के कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह

हिमालय की रक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने की. उन्होंने कहा:-

हिमालय कॉलिंग हमारे महान हिमालय की रक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता है. यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, समुदायों और छात्रों को जोड़कर स्थायी समाधान का रास्ता खोलता है. यूपीईएस और HILL को इस दूरदर्शी आयोजन के लिए मेरी शुभकामनाएं है.

3 दिन के कार्यक्रम की रहेगी ये ख़ास बातें
तीन दिनों का यह सम्मेलन अलग-अलग विषयों पर केंद्रित रहेगा. आइए, जानते हैं:-

पहला दिन: ईएसजी, पर्वतीय आजीविका, खाद्य सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और ऊर्जा अनुकूलन.

दूसरा दिन: मिथक, इतिहास और कला को विज्ञान से जोड़ने वाली चर्चाएं. मानवाधिकार, जलवायु मॉडलिंग, अक्षय ऊर्जा और प्राचीन हिमालयी ज्ञान परंपराएं मुख्य विषय होंगे. इसी दिन राउंड टेबल बैठक होगी, जिसमें 30 से अधिक विशेषज्ञ और संगठन साझा कार्ययोजना बनाएंगे.

तीसरा दिन: वैलेडिक्टरी सत्र और सांस्कृतिक संवाद. इसमें स्थानीय परंपराओं को सतत विकास के साथ जोड़ने पर विचार होगा. समापन सत्र में मुख्य वक्ता होंगे, डॉ. नितिन सेठ (IFCPAR), पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, डॉ. दुर्गेश पंत (डीजी, यूकॉस्ट) और श्री मीनाक्षी सुंदारम (सचिव, उत्तराखंड सरकार).

Himalaya Calling 2025
हिमालयी उत्पादों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ

हिमालय कॉलिंग के जरिए सुनेंगे आवाज़
यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्म ने कहा कि ‘हिमालय कॉलिंग एक जीवंत कक्षा है, जहं वैज्ञानिक, कलाकार और नीति निर्माता मिलकर शोध को व्यवहार में बदल रहे हैं और सतत विकास लक्ष्यों को गति दे रहे हैं. वहीं, HILL के निदेशक डॉ. जे.के. पांडेय ने कहा कि हम इस बार समाधान प्रधान (UPES Dehradun conference) दृष्टिकोण लेकर आए हैं. गहन शोध को सामुदायिक ज्ञान से जोड़ना, हिमालयी उत्पादों और फोटोग्राफी का प्रदर्शन करना और गोलमेज संवाद के जरिए दीर्घकालिक सहयोग की नींव रखना हमारा उद्देश्य है.

क्यों ज़रूरी है यह सम्मेलन
हिमालयी क्षेत्र इस समय जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, जैव विविधता हानि और भूकंपीय खतरों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में ‘हिमालय कॉलिंग 2025’ जैसे आयोजन बेहद अहम हैं. यह न केवल संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने में मदद करते हैं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान (Himalayan sustainability summit) को आधुनिक समाधानों से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए टिकाऊ रास्ता भी तैयार करते हैं. गौरतलब है कि उत्तराखंड में बीते कुछ सालों में हिमालय से जुड़ी कई प्राकृतिक घटनाएं देखी गई है.


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