Home Blog Page 124

Nepal Violence: नेपाल की हिंसा पर उत्तराखण्ड भी सतर्क, CM धामी बोले- छोटी चूक भी बर्दाश्त नहीं

0
Nepal Violence:
नेपाल की हिंसा पर उत्तराखंड भी सतर्क

Nepal Violence: काठमांडू से लेकर देहरादून तक, नेपाल में जारी राजनीतिक उथल-पुथल का असर पड़ोसी देश भारत तक महसूस किया जा रहा है. नेपाल में बीते दो दिनों से हिंसक प्रदर्शनों ने भयावह रूप ले लिया है. पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की प्रदर्शनकारियों (Kathmandu Burns) द्वारा उनके घर में आग लगाए जाने से मौत हो गई. संसद भवन और राष्ट्रपति कार्यालय तक को आग के हवाले कर दिया गया. इस हिंसा में 19 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 500 से अधिक घायल हैं. ऐसे हालात में नेपाल से सटे भारतीय राज्य उत्तराखण्ड सरकार भी पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई है.

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास से चंपावत, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर के जिला प्रशासन, पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) अधिकारियों के साथ (Nepal political crisis 2025) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की. इन जिलों की अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल से लगती है और राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर यहां दिख सकता है. बैठक में सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और खुफिया सूचनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई.

Nepal Violence

सीएम धामी के अधिकारियों को कड़े निर्देश
सीएम धामी (Uttarakhand border security) ने स्पष्ट कहा कि नेपाल से लगी सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाए जाएं. किसी भी असामाजिक या उत्पाती तत्व पर कड़ी नजर रखी जाए. उन्होंने सोशल मीडिया की भी निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए ताकि किसी तरह की अफवाह, भ्रामक सूचना या उकसाने वाले कंटेंट को समय (Gen Z Revolution Nepal) रहते रोका जा सके. सीएम धामी ने अधिकारियों से कहा कि जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियों और SSB के बीच संपर्क और समन्वय लगातार बना रहे. ग्रामीणों, स्थानीय समितियों, पुलिस और वन विभाग को भी इस निगरानी व्यवस्था में जोड़ा जाए ताकि सामूहिक भागीदारी से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.

Nepal Violence

नेपाल में हालात क्यों बिगड़े?
नेपाल में हाल ही में शुरू हुए Gen Z मूवमेंट ने सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का रूप ले लिया है. सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार के खिलाफ नाराजगी और पारदर्शिता की मांग को लेकर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू कर दिए. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन हालात और बेकाबू हो गए. राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा.

Nepal Violence

उत्तराखण्ड प्रशासन भी चौकन्ना
उत्तराखण्ड का नेपाल के साथ लंबा सीमा क्षेत्र जुड़ा हुआ है. लोग सीमापार रोजमर्रा के कामों और व्यापार के लिए आते-जाते हैं. नेपाल में बढ़ते विरोध-प्रदर्शन और हिंसा का असर सीमा पार से अवैध आवाजाही, अफवाहों और असामाजिक गतिविधियों के रूप में उत्तराखण्ड तक पहुंच सकता है. यही कारण है कि मुख्यमंत्री धामी (Pushkar Singh Dhami news) ने सीमावर्ती जिलों के प्रशासन को तुरंत चौकन्ना रहने और हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है. कुल मिलाकर, उत्तराखण्ड सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि नेपाल में अस्थिरता चाहे जितनी भी बढ़े, सीमाओं पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी.


ये भी पढ़ें: नेपाल में सोशल मीडिया बैन! भड़की हिंसा; 19 की मौत; जानें वजह

Dehradun News: DBUU में मनाया वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे, हेल्दी एजिंग पर रहा फोकस; जानें ख़ास बातें

0
Dehradun News
देवभूमि विश्वविद्यालय में मनाया गया विश्व फिजियोथेरेपी दिवस

देहरादून (Dehradun News): आपने कभी सोचा है कि जब उम्र बढ़ने लगे और शरीर थकान देने लगे, तब कौन-सी चिकित्सा हमें बिना दवाओं के फिर से सक्रिय और फिट बना सकती है? जवाब है –फिजियोथेरेपी, यही वजह है कि हर साल 8 सितंबर को दुनियाभर में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस (World Physiotherapy Day) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य है लोगों को यह जागरूक करना कि फिजियोथेरेपी सिर्फ चोट का इलाज नहीं बल्कि जीवन को स्वस्थ, सक्रिय और बेहतर बनाने का साइंस है.

इस थीम पर रहा वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे
इस बार इस दिवस की थीम रही – हेल्दी एजिंग (Healthy Ageing) यानी बढ़ती उम्र में भी शरीर को चुस्त-दुरुस्त और फिट बनाए रखना. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय (DBUU) के फिजियोथेरेपी विभाग ने इस दिन को बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया. इस दौरान छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों (नृत्य, गायन और थीम-आधारित नाटक) के जरिए ‘हेल्दी एजिंग’ का संदेश बहुत प्रभावशाली तरीके से दर्शाया. समापन पर केक काटकर इस यादगार पल का जश्न मनाया गया.

dehradun News

देहरादून में हुआ खास आयोजन
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं जानी-मानी फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जसलीन कालरा शर्मा, जो उत्तराखंड पुलिस की आधिकारिक फिजियोथेरेपिस्ट भी रह चुकी हैं. उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि फिजियोथेरेपी केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण और सक्रिय जीवन जीने की दिशा में मार्गदर्शन है. इस मौके पर विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर, वाइस चांसलर और कॉलेज की डीन डॉ. चारु ठाकुर सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. कार्यक्रम का संचालन विभाग की टीम ने किया, जिसमें डॉ. तृप्ति पांडे, डॉ. मेघा जुगरा, डॉ. अदिति कुलियाल, डॉ. अलिशा और डॉ. ऋतु नेगी शामिल थीं. वहीं इस अवसर पर डॉ. तृप्ति पांडे ने कहा कि डॉ. जसलीन कालरा शर्मा ने जिस बारीकी से विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी की गहराई और व्यावहारिकता समझाई, वह सराहनीय है. छात्रों को उनके मार्गदर्शन को आत्मसात करते हुए अपने जीवन में अपनाना चाहिए.

भारत में कितने फिजियोथेरेपिस्ट?
आज के दौर में भारत में फिजियोथेरेपी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है. 2025 तक देश में लगभग 1.5 लाख से ज्यादा फिजियोथेरेपिस्ट पंजीकृत हो चुके हैं. लेकिन भारत की जनसंख्या (करीब 1.4 अरब) के हिसाब से यह संख्या अभी भी बहुत कम है. वर्तमान में भारत में प्रति 10,000 लोगों पर सिर्फ 0.59 फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध हैं. जबकि WHO मानक के अनुसार प्रत्येक 10,000 लोगों पर कम से कम 1 फिजियोथेरेपिस्ट होना चाहिए. 2024 के वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डेटा में यह अनुपात और भी कम यानी 0.36 प्रति 10,000 दर्ज किया गया था. हालांकि पिछले कुछ सालों में फिजियोथेरेपिस्ट की तादाद बढ़ने लगी है.

भविष्य में बढ़ेगी मांग
आज लोग स्वास्थ्य को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो गए हैं. खेल, फिटनेस, जिम और सबसे बढ़कर बढ़ती हुई बुजुर्गों की आबादी, इन सबके कारण आने वाले सालों में फिजियोथेरेपिस्ट की मांग और तेजी से बढ़ेगी. अस्पतालों से लेकर स्पोर्ट्स टीम, कॉर्पोरेट सेक्टर और निजी क्लीनिक तक, हर जगह इनकी जरूरत महसूस हो रही है.
देहरादून में देवभूमि विश्वविद्यालय द्वारा मनाया गया यह आयोजन न सिर्फ छात्रों के लिए प्रेरणादायी रहा, बल्कि समाज को भी यह संदेश मिला कि फिजियोथेरेपी भविष्य का अहम क्षेत्र है. ‘हेल्दी एजिंग’ की थीम ने यह याद दिलाया कि उम्र बढ़ना तो स्वाभाविक है, लेकिन सही देखभाल और फिजियोथेरेपी की मदद से जीवन को लंबे समय तक स्वस्थ और खुशहाल बनाया जा सकता है.


यह भी पढ़ें: यहां बनी देश की सबसे बड़ी रेल सुरंग, पहाड़ों को चीरकर तैयार की 14 KM लंबी टनल

Nepal Gen Z Protests: नेपाल में सोशल मीडिया बैन! भड़की हिंसा; 19 की मौत; जानें वजह

0
Nepal Gen Z Protests
नेपाल में भड़की हिंसा में 19 लोगों की मौत

काठमांडू (Nepal Gen Z Protests): नेपाल इन दिनों भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू समेत कई बड़े शहर हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहे हैं. वजह है—सरकार द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (एक्स), व्हाट्सएप और यूटूब जैसे करीब 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Nepal social media ban 2025) पर लगाया गया प्रतिबंध. सरकार का दावा है कि ये प्लेटफॉर्म नेपाल में पंजीकृत नहीं हैं और अफवाहों, धार्मिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता को हवा दे रहे थे. लेकिन इस फैसले ने युवाओं और छात्रों के गुस्से को ज्वालामुखी की तरह फोड़ दिया. जानिए पूरा मामला…

Nepal Gen Z Protests

क्या है विवाद का कारण?
नेपाल सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म देश में बिना पंजीकरण के काम कर रहे थे और उनका इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, भड़काऊ कंटेंट डालने और समाज में विभाजन पैदा करने के लिए हो रहा था. लेकिन दूसरी ओर, युवाओं ने इसे अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी (Social media ban violence Nepal) पर सीधा हमला माना. उनके लिए सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि रोजगार, पढ़ाई, डिजिटल मार्केटिंग और संवाद का मुख्य जरिया था. अचानक लगे इस प्रतिबंध ने उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर गहरा असर डाला.

Nepal Gen Z Protests

हिंसा और खून-खराबा
सरकारी आदेश के खिलाफ सोमवार को काठमांडू, पोखरा, विराटनगर समेत कई जिलों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और अंदर घुसने की कोशिश की. भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट का (Nepal youth protests social media ban) इस्तेमाल किया. हालात बिगड़ते देख सेना तक को तैनात करना पड़ा. पहले से ही बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे युवाओं का गुस्सा फट पड़ा. प्रतिबंध ने उनकी नाराजगी को और भड़का दिया, जिसका नतीजा देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के रूप में सामने आया.

Nepal Gen Z Protests

सीमा पर सख्ती और कर्फ्यू
नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा जानकारी के अनुसार, झड़पों में 19 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 347 से ज्यादा लोग घायल हैं. मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, कई जिलों में कर्फ्यू लगाया गया है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद या सीमित कर दी गई हैं. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नेपाल-भारत सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. काठमांडू और अन्य जिलों में धारा 144 लागू है. बावजूद इसके, जगह-जगह से विरोध और झड़पों की खबरें आ रही हैं. इस बीच, नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने सोमवार को हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

Nepal Gen Z Protests

क्यों कह रहे हैं इसे Gen-Z रिवोल्यूशन?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया प्रतिबंध का विरोध नहीं, बल्कि लंबे समय से पनप रही राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवा वर्ग का गुस्सा है. कई विश्लेषक इसे Gen-Z रिवोल्यूशन कह रहे हैं, क्योंकि इसमें सबसे बड़ी भागीदारी छात्रों और युवाओं की है. नेपाल में फैली हिंसा सिर्फ इंटरनेट बंदी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस निराशा का परिणाम है जो सालों से बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक खींचतान से लोगों के दिलों में जमा हो रही थी. सोशल मीडिया प्रतिबंध ने इस गुस्से को भड़का दिया और नतीजा हिंसा, मौत और अराजकता के रूप में सामने आया. सवाल यह है कि क्या सरकार संवाद और सुधार का रास्ता चुनेगी या हालात और बिगड़ेंगे?


यह भी पढ़ें:  रूस का यूक्रेन पर सबसे बड़ा हमला, दागे 800 ड्रोन मिसाइल; 3 लोगों की मौत

India Longest Rail Tunnel: यहां बनी देश की सबसे बड़ी रेल सुरंग, पहाड़ों को चीरकर तैयार की 14 KM लंबी टनल

0
India Longest Rail Tunnel
उत्तराखंड के देवप्रयाग-जनासू के बीच टनल तैयार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

देहरादून (India Longest Rail Tunnel): उत्तराखंड में रेल नेटवर्क को नए आयाम देने वाली एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है. ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच चल रही महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सबसे बड़ी सफलता रही देवप्रयाग और जनासू के बीच 14.57 किलोमीटर लंबी दोहरी रेल सुरंग (Rishikesh Karnaprayag rail project) का निर्माण, जिसे समय से सवा साल पहले यानी 2025 में पूरा कर लिया गया. यह अब देश की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है.

परियोजना का उद्देश्य और महत्व
125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों (देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली) को रेल नेटवर्क से जोड़ना है. इससे यात्रियों का समय बचेगा, यात्रा तेज़ और सुविधाजनक (Uttarakhand News) होगी और आपदा प्रबंधन के लिए भी यह मार्ग बेहद उपयोगी साबित होगा. अनुमान है कि इस परियोजना के पूरा (Devprayag Janasu rail tunnel) होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर लगभग 2 घंटे रह जाएगा.

India Longest Rail Tunnel
उत्तराखंड में देवप्रयाग-जनासू के बीच टनल तैयार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुरंग निर्माण में तकनीकी उपलब्धियां
इस सुरंग के निर्माण में पहली बार हिमालयी क्षेत्र में अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का इस्तेमाल किया गया. ‘शिव’ और ‘शक्ति’ नामक दो टीबीएम मशीनों ने काम किया. कुल 30 किलोमीटर सुरंगों में से 70% सुरंग टीबीएम तकनीक से और बाकी 30% ड्रिल ब्लास्ट तकनीक से बनाई गई. एलएंडटी के ऑपरेटर बलजिंदर सिंह और राम अवतार सिंह राणा ने बताया कि निर्माण के दौरान सबसे (Himalayan railway tunnel construction) बड़ी चुनौती तब आई, जब सुरंग में अचानक भूस्खलन हुआ. इस दौरान टीबीएम को सामान्य 50-60 हजार किलो न्यूटन की क्षमता से 1.3 लाख किलो न्यूटन पर चलाना पड़ा. 10 दिन तक दिन-रात 12-12 घंटे की शिफ्ट में लगातार मशीन चलाई गई.

क्या है ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड में परिवहन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. यह न सिर्फ़ यात्रियों की यात्रा को तेज़ करेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था (Char Dham yatra rail connectivity) के लिए भी एक नई राह खोलेगी. इस परियोजना के जरिए पहाड़ी जिलों में माल और यात्रियों की आवाजाही आसान होगी और आपदा जैसे समय पर राहत सामग्री तेजी से पहुंचाई जा सकेगी.

कितना होगा फायदा?
इस परियोजना के पूरा होने से उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में यातायात में बड़ा सुधार आएगा. स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी इसका फायदा उठाएंगे. साथ ही, यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी. देवप्रयाग-जनासू सुरंग और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के लिए तकनीकी और सामाजिक दोनों दृष्टियों से मील का पत्थर साबित हो रही है. हालांकि कई पर्यावरणविद् इसे प्रकृति से छेड़छाड़ करार दे रहे हैं.


यह भी पढ़ें: चेरी ब्लॉसम भूल जाइए, अब उत्तराखंड में बुरांश-पदम का रंगीन पर्व; वन विभाग का ख़ास प्लान

Jyotish Manyta: तेल मालिश से बढ़ती है बच्चों की उम्र और भाग्य! जानें इसके पीछे का ज्योतिषीय कारण

0
Jyotish Manyta
नहाने से पहले बच्चे की सरसों के तेल से मालिश (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Jyotish Manyta: तेल मालिश से बढ़ती है बच्चों की उम्र और भाग्य! जानें इसके पीछे का ज्योतीषीय कारणभारतीय परिवारों में यह आम बात है कि छोटे बच्चों को नहलाने से पहले तेल से मालिश की जाती है. अक्सर दादी-नानी इसे जरूरी आदत कहकर आगे बढ़ाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह (bachcho ki tel malish) सिर्फ परंपरा भर नहीं, बल्कि ज्योतिष और विज्ञान दोनों के हिसाब से बेहद फायदेमंद मानी जाती है? आइए, जानते हैं इसके एक पहलू को…

शनि ग्रह और लंबी आयु का संबंध
ज्योतिष शास्त्र में तेल को शनि ग्रह से जोड़ा गया है. शनि को आयु, स्वास्थ्य और कर्मों का कारक (traditional oil massage India) कहा जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नहलाने से पहले तेल की मालिश करने से बच्चों को शनि का आशीर्वाद मिलता है. इसका असर उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य पर पड़ता है.

Jyotish Manyta

सूर्य-चंद्रमा की ऊर्जा भी होती है मजबूत
तेल मालिश से सिर्फ शनि ही नहीं, बल्कि सूर्य और चंद्रमा ग्रह भी मजबूत (surya chandra energy balance) होते हैं. सूर्य जीवन, आत्मविश्वास और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधि है. मालिश के बाद बच्चा न सिर्फ ऊर्जावान महसूस करता है बल्कि उसका मन भी शांत और संतुलित रहता है.

बुरी नज़र और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
भारतीय समाज में नज़र लगना एक आम मान्यता है. ज्योतिषाचार्य नरेश भट्ट मानते हैं कि तेल की परत बच्चे के शरीर पर सुरक्षा कवच की तरह काम करती है. यह कवच बाहरी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र से बचाव करता है. यही कारण है कि पुराने समय से लेकर आज तक, बच्चों को नहलाने से पहले तेल मालिश करना शुभ और जरूरी माना जाता है.

Jyotish Manyta

समृद्धि और भाग्य से जुड़ी मान्यता
ज्योतिष में यह भी कहा गया है कि बच्चों को तेल मालिश करवाने से सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं सुधरता बल्कि भाग्य और समृद्धि भी आकर्षित होती है.माना जाता है कि इससे लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती. यही वजह है कि कई घरों में इसे बच्चे की जिंदगी की शुभ शुरुआत माना जाता है. नन्हें बच्चों की तेल मालिश का चलन भले ही परंपरा के तौर पर शुरू हुआ हो, लेकिन इसके पीछे गहरी मान्यताएं और ज्योतिषीय कारण हैं. यह आदत बच्चे को शारीरिक मजबूती, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा देने के साथ-साथ जीवन भर के लिए शुभ फल देने वाली मानी जाती है.


ये भी पढ़ें: अमेरिकी टैरिफ से झटका! घटेगा भारतीय कपड़ा एक्सपोर्ट; जानें ICRA रिपोर्ट

Uttarakhand News: चेरी ब्लॉसम भूल जाइए, अब उत्तराखंड में बुरांश-पदम का रंगीन पर्व; वन विभाग का ख़ास प्लान

0
Uttarakhand News
फूलों की खुशबू में डूबेगा उत्तराखंड

देहरादून (Uttarakhand News): उत्तराखंड की वादियां अब एक नए रंग और नई पहचान के साथ पर्यटकों को अपनी ओर खींचने वाली हैं. जिस तरह जापान में चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर खींचता है, उसी तरह देवभूमि उत्तराखंड में भी अब ‘बुरांश महोत्सव’ और ‘पदम (हिमालयन चेरी) महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा. इस पहल से न केवल पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती को और निखारने का मौका मिलेगा बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.

कब और कैसे मनाए जाएंगे ये उत्सव
उत्तराखंड वन विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, बुरांश महोत्सव हर साल मार्च के दूसरे सप्ताह में मनाया जाएगा. यही वह समय है जब राज्य की पहाड़ियों पर लाल रंग के बुरांश के फूल (Uttarakhand Buransh Festival) पूरी तरह से खिल जाते हैं और पूरे एरिया को लाल चादर ओढ़ा देते हैं. वहीं, पदम यानी हिमालयन चेरी महोत्सव अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में आयोजित होगा. इस दौरान पहाड़ी इलाकों में पदम के पेड़ हल्के गुलाबी फूलों से लद जाते हैं और ऐसा नज़ारा पेश करते हैं जो किसी जादुई दुनिया से कम नहीं.

बुरांश और पदम की खासियत

Uttarakhand News
उत्तराखंड के पहाड़ों में खिला बुरांग का ये खूबसूरत फूल (फाइल फोटो)
  1. बुरांश (Rhododendron arboreum): यह न केवल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर भी है. बुरांश का जूस पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.
  2. पदम या हिमालयन चेरी (Prunus cerasoides): यह साल में दो बार खिलता है, मार्च-अप्रैल और अक्टूबर में. जब यह फूल पूरी तरह से खिल जाते हैं तो पेड़ गुलाबी रंग के बादल जैसे दिखाई देते हैं. इन दोनों फूलों का पारिस्थितिकी तंत्र में भी अहम योगदान है. इनके खिलने से कई पक्षी, मधुमक्खियां और परागण करने वाले जीव इन पर निर्भर रहते हैं.

महोत्सव में क्या-क्या होगा खास?
वन विभाग ने इन महोत्सवों के दौरान कई तरह की रोचक गतिविधियां रखने की योजना बनाई है. जैसे- फूलों से भरी घाटियों और ट्रेल्स तक ट्रेकिंग कार्यक्रम, स्थानीय लोगों (Eco tourism in Uttarakhand) की भागीदारी के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, बुरांश और पदम से बने (Uttarakhand forest department festivals) उत्पादों की प्रदर्शनी, फूलों पर निर्भर पक्षियों और परागण करने वाले जीवों की स्पॉटिंग और सर्वेक्षण. इस तरह यह महोत्सव सिर्फ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र नहीं होगा, बल्कि स्थानीय परंपराओं और लोककथाओं को संजोने का एक अवसर भी बनेगा.

Uttarakhand News
पदम (हिमालयन चेरी)

क्या है इसके पीछे का मकसद
इस पहल का मुख्य मकसद इन फूलों के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को उजागर करना है. साथ ही, स्थानीय समुदाय और स्कूलों को इसमें जोड़कर संरक्षण और सतत इस्तेमाल की दिशा में काम करना भी है. जब लोग इन फूलों और उनसे जुड़ी परंपराओं के बारे में जानेंगे, तो इनके संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे.

जापान और कोरिया से प्रेरणा
दुनिया में फूलों के उत्सवों की परंपरा पुरानी है. जापान में ‘हनामी’ नाम से चेरी ब्लॉसम देखने (Flower festivals in Uttarakhand) की संस्कृति सदियों पुरानी है, जहां लोग परिवार और दोस्तों के साथ चेरी के पेड़ों के नीचे पिकनिक मनाते हैं. इसी तरह दक्षिण कोरिया का जिन्हे गुनहांग्जे फेस्टिवल भी लाखों पर्यटकों को खींचता है. उत्तराखंड में होने वाले बुरांश और पदम महोत्सव भी आने वाले समय में उसी तरह पहचान बना सकते हैं.


यह भी पढ़ें: हिमाचल में बरसात का कहर, अब तक 360 लोगों की मौत, जानें कितना हुआ नुकसान?

US-India Trade War: अमेरिकी टैरिफ से झटका! घटेगा भारतीय कपड़ा एक्सपोर्ट; जानें ICRA रिपोर्ट

0
US India Trade War

नई दिल्ली (US-India Trade War): भारतीय कपड़ा उद्योग (Garment Industry) के लिए बुरी खबर आई है. रेटिंग एजेंसी ICRA ने कपड़ों के निर्यात को लेकर अपना आउटलुक Stable से घटाकर Negative कर दिया है. वजह है, अमेरिका की ओर से बढ़ाए गए टैरिफ रेट्स, जिनका सीधा असर भारतीय निर्यातकों की कमाई पर पड़ने वाला है.

FY26 में 6-9% तक घट सकती है कमाई
ICRA के मुताबिक, अगर हालात ऐसे ही रहे तो वित्त वर्ष 2026 (FY26) में भारत के कपड़ा निर्यात की कमाई 6-9% तक घट सकती है. हालांकि, यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और कुछ हद तक नए बाज़ारों में सप्लाई डायवर्ट करने से थोड़ी राहत मिल सकती है. सिर्फ एक्सपोर्ट ही नहीं, बल्कि प्रॉफिट पर भी असर दिखेगा. रिपोर्ट कहती है कि इंडस्ट्री का ऑपरेटिंग मार्जिन FY25 के 10% से गिरकर FY26 में करीब 7.5% रह सकता है. दरअसल, साल की दूसरी छमाही में ऑर्डर घटने से फैक्ट्रियों की ऑपरेशन एफिशिएंसी भी कम हो जाएगी. यानी कमाई गिरेगी और कंपनियों को कैश फ्लो मैनेज करने में मुश्किल होगी.

अमेरिकी मार्केट सबसे बड़ा रिस्क
भारत के कपड़ा निर्यात में अमेरिका का हिस्सा करीब एक-तिहाई है. फिलहाल भारत की हिस्सेदारी US गारमेंट इम्पोर्ट मार्केट में सिर्फ 6% है. ऐसे में नए टैरिफ के बाद अपना शेयर बचाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी. अगर यह हिस्सा घटा तो आने वाले सालों में रिकवरी और भी मुश्किल हो जाएगी. ICRA का कहना है कि सभी ऑर्डर तुरंत लो-टैरिफ वाले देशों (जैसे बांग्लादेश, वियतनाम) में शिफ्ट करना आसान नहीं है. वजह है, हर देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता अलग है और नई कैपेसिटी बनाने में समय लगता है. इसलिए अमेरिकी खरीदारों के लिए अभी तुरंत भारत से ऑर्डर हटाना मुश्किल है, लेकिन धीरे-धीरे यह रिस्क बढ़ सकता है.

US-India Trade War
अमेरिकी टैरिफ का दिखने लगा असर?

पिछले पांच सालों का हाल
1. पिछले पांच सालों में भारत का कपड़ा निर्यात लगभग फ्लैट रहा है.
2. डिमांड कमजोर रही.
3. UK और UAE जैसे देशों से ऑर्डर कम हुए.
4. सोर्सिंग धीरे-धीरे बांग्लादेश और वियतनाम की तरफ शिफ्ट हुई. हालांकि इसी दौरान अमेरिका को निर्यात 4.8% बढ़ा, क्योंकि भारतीय कंपनियों ने वहां वॉल्यूम पर फोकस किया.

नया टैरिफ, नई मुश्किलें
अमेरिका ने 27 अगस्त 2025 से 50% ज्यादा टैरिफ लागू कर दिया है. टैरिफ लागू होने से पहले भारतीय कंपनियों ने जल्दी-जल्दी शिपमेंट भेजकर आंकड़े मजबूत दिखाए. लेकिन ICRA का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी राहत है. FY26 की दूसरी छमाही में जब टैरिफ का पूरा असर दिखेगा, तब निर्यात सबसे ज्यादा दबाव में आ सकता है. ICRA के अनुसार, FY26 में भारतीय कपड़ा निर्यातकों को काफी दिक्कत होगी. लेकिन FY27 में तस्वीर थोड़ी बदल सकती है. यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ FTA का असर नजर आने लगेगा. सप्लाई नए बाज़ारों में डायवर्ट होगी. H1 FY26 में हुए एडवांस शिपमेंट्स सालाना गिरावट को थोड़ा संभाल लेंगे.

भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री के लिए FY26 आसान नहीं होगा. अमेरिका के नए टैरिफ से निर्यात और प्रॉफिट दोनों दबाव में रहेंगे. ICRA की रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि अब कंपनियों को नए मार्केट्स और प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस करना पड़ेगा. वरना अमेरिका पर ज़्यादा निर्भरता लंबे समय में नुकसानदेह साबित हो सकती है.


यह भी पढ़ें: बार-बार भूलने की आदत! तो ये बात आपके लिए ज़रूरी; रिसर्च में खुलासा

Alzheimer Prevention diet : बार-बार भूलने की आदत! तो ये बात आपके लिए ज़रूरी; रिसर्च में खुलासा

0
Alzheimer revention diet
जेनेटिक रिस्क वालों को सबसे ज्यादा फायदा

वॉशिंगटन: आजकल बढ़ती उम्र के साथ सबसे बड़ा डर होता है याददाश्त खोने का. अक्सर आपने सुना होगा–बुज़ुर्गों को भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया या अल्ज़ाइमर हो गया है. यह बीमारी धीरे-धीरे इंसान की सोचने और याद रखने की ताकत को कम कर देती है. लेकिन हाल ही में आई एक इंटरनेशनल स्टडी (Alzheimer Prevention diet) ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है. रिसर्च में सामने आया है कि अगर लोग मेडिटेरेनियन डाइट (Mediterranean Diet) को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें तो अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है.

मेडिटेरेनियन डाइट क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो ये डाइट मेडिटेरेनियन देशों (जैसे इटली, ग्रीस) की खाने की आदतों पर आधारित है. इसमें ताज़े फल-सब्ज़ियां, साबुत अनाज, दालें, मछली, ऑलिव ऑयल और ड्राई फ्रूट्स को ज्यादा जगह दी जाती है. रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड बहुत कम मात्रा में लिया जाता है. मतलब साफ है, हेल्दी और नेचुरल फूड पर फोकस.

जेनेटिक रिस्क वालों को सबसे ज्यादा फायदा
ये स्टडी Nature Medicine जर्नल में पब्लिश हुई है. रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में अल्ज़ाइमर का खतरा जेनेटिक तौर पर ज्यादा है, उन्हें मेडिटेरेनियन डाइट से सबसे ज्यादा फायदा हुआ. खासकर जिन लोगों में APOE4 जीन के दो कॉपी (हाई रिस्क फैक्टर) पाए गए, उनमें भी डिमेंशिया का रिस्क (natural ways to reduce Alzheimer’s risk) काफी कम हो गया. अगर आपके परिवार में किसी को अल्ज़ाइमर रहा है और आपको डर है कि आपको भी यह प्रॉब्लम हो सकती है, तो मेडिटेरेनियन डाइट आपके लिए डिफेंस की तरह काम कर सकती है.

Alzheimer Prevention diet

स्टडी में क्या हुआ?
1. रिसर्चर्स ने करीब 4,200 महिलाओं और 1,500 पुरुषों का डाटा एनालाइज किया.
2. ये सभी हेल्थ प्रोफेशनल्स और नर्सिंग स्टडीज का हिस्सा थे.
3. सालों तक उनकी डाइट, ब्लड सैंपल और जेनेटिक डाटा को ट्रैक किया गया.
4. नतीजा यह निकला कि जो लोग मेडिटेरेनियन डाइट फॉलो कर रहे थे, उनमें याददाश्त कमजोर होने और डिमेंशिया के केस कम पाए गए.

कैसे काम करती है यह डाइट?
रिसर्चर्स के मुताबिक, मेडिटेरेनियन डाइट बॉडी के मेटाबॉलिज़्म को बैलेंस करती है. ब्लड में मौजूद छोटे-छोटे मॉलेक्यूल (metabolites) को पॉजिटिव तरीके से बदलती है. इसका सीधा असर (Alzheimer’s prevention diet) दिमाग पर पड़ता है और ब्रेन हेल्थ बेहतर रहती है.डॉक्टर्स और साइंटिस्ट्स का कहना है कि यह डाइट किसी एक के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए फायदेमंद है. लेकिन खासकर उनके लिए जरूरी है जो अल्ज़ाइमर के जेनेटिक रिस्क में आते हैं.

ये बातें का रखें विशेष ध्यान
1. हर दिन फ्रूट्स और सब्ज़ियां खाएं.
2. रेड मीट, पैकेज्ड फूड और शुगर को लिमिट करें.
3. डाइट में नट्स, सीड्स, मछली और ऑलिव ऑयल जैसी हेल्दी फैट वाली चीज़ें शामिल करें.
ज्यादा से ज्यादा नेचुरल और होममेड खाना खाएं.

लेकिन कुछ लिमिटेशन भी हैं
रिसर्च टीम ने माना कि उनका स्टडी ग्रुप ज्यादातर यूरोपियन बैकग्राउंड के लोग थे और अच्छी-खासी एजुकेटेड पॉपुलेशन थी. इसलिए इसे सब पर लागू करने से पहले और रिसर्च की जरूरत है. इसके अलावा, हर इंसान को अपना जेनेटिक रिस्क पता नहीं होता. इसलिए डॉक्टर्स कहते हैं कि इसे अभी प्रैक्टिकल (Mediterranean diet for brain health) गाइडलाइन की तरह नहीं बल्कि एक हेल्दी लाइफस्टाइल ऑप्शन की तरह लें. हम सब जानते हैं (Alzheimer’s genes) कि आप वही हैं जो आप खाते हैं. अगर आपकी डाइट हेल्दी होगी तो दिमाग और शरीर दोनों मजबूत रहेंगे. अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी अभी पूरी तरह से क्योर नहीं हो सकती, लेकिन रिसर्च बता रही है कि सही खानपान से इसके रिस्क को कम किया जा सकता है.


यह भी पढ़ें: 7 दिनों तक पिएं इनमें से कोई 1 ड्रिंक! चेहरे पर आएगा निखार; लोग कहेंगे- वाह…

Ghar Par Vastu Dosh: घर में इन 5 चीज़ों को रखने से लगता है वास्तु दोष, जानिए क्या हैं इनके असर

0
Remove negative energy from home
भूलकर भी न रखें घर पर ये सब चीज़ें

Ghar Par Vastu Dosh : अक्सर हम घर की सजावट और रख-रखाव में छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. कई बार पुरानी या टूटी-फूटी चीज़ें यूं ही कोनों में पड़ी रहती हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के मुताबिक, यह लापरवाही घर की खुशहाली और तरक्की पर (Remove negative energy from home) असर डाल सकती है. कहा जाता है कि हर वस्तु की अपनी ऊर्जा होती है और जब यह गलत जगह या खराब हालत में रखी जाती है, तो सकारात्मक ऊर्जा रुक जाती है और नकारात्मकता हावी होने लगती है. आइए जानते हैं (Vastu tips for house) वो पाँच चीज़ें, जिन्हें घर में इधर-उधर रखने से वास्तु दोष लगता है.

टूटा हुआ शीशा या कांच

Ghar Par Vastu Dosh

घर में टूटा हुआ आईना या कांच रखना वास्तु शास्त्र में बेहद अशुभ माना जाता है. आईना ऊर्जा का परावर्तन करता है और जब वह टूटा (Broken mirror Vastu effect) होता है, तो उसका असर नकारात्मक रूप में सामने आता है. मान्यता है कि टूटा हुआ शीशा परिवार में तनाव, झगड़े और मानसिक अशांति ला सकता है. यही कारण है कि घर में टूटा हुआ आईना, ग्लास या शो-पीस जैसी चीज़ें तुरंत हटा देनी चाहिए.


सूखे और मरे हुए पौधे

Ghar Par Vastu Dosh

हरियाली घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, लेकिन अगर पौधे सूख जाएं या मुरझा जाएं, तो वे नकारात्मकता फैलाने लगते हैं. खासतौर पर बालकनी या गार्डन में सूखे पौधे रखना अशुभ माना जाता है. वहीं, कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) को भी घर में न रखने की सलाह दी जाती है. अगर आप चाहते हैं कि घर में हमेशा तरक्की और ताज़गी बनी रहे, तो हरे-भरे और फूलों वाले पौधे लगाएं.


मुख्य द्वार पर बिखरे जूतें-चप्पल

Ghar Par Vastu Dosh

वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर का सबसे अहम हिस्सा माना गया है, क्योंकि यही से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है. अगर दरवाजे के पास अव्यवस्थित तरीके से जूतें-चप्पल पड़े हों, तो यह घर की समृद्धि पर असर डालता है. माना जाता है कि ऐसे में घर में लक्ष्मी प्रवेश नहीं करती। बेहतर होगा कि जूतों के लिए अलग से रैक बनवाएं और मुख्य दरवाजे को हमेशा साफ-सुथरा रखें.


टूटी मूर्तियां और फटे धार्मिक चित्र

Ghar Par Vastu Dosh

कई बार पूजा घर या मंदिर में रखी मूर्तियां टूट जाती हैं या धार्मिक चित्र (Broken idols Vastu Dosh) फट जाते हैं. लोग इन्हें अनदेखा कर देते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार यह बहुत अशुभ होता है. टूटी मूर्तियां या फटे पोस्टर-चित्र घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और परिवार के सदस्यों के जीवन पर बुरा असर डाल सकते हैं. ऐसे में जरूरी है कि इन्हें सम्मानपूर्वक विसर्जित कर दिया जाए और उनकी जगह नई व सुंदर मूर्तियां लगाई जाएं.


कबाड़ और बेकार सामान

Ghar Par Vastu Dosh

अक्सर घर के स्टोररूम या अलमारी में पुराने कपड़े, टूटी-फूटी चीज़ें और कबाड़ जमा हो जाता है. लोग सोचते हैं कि कभी काम (Things not to keep at home as per Vastu) आ जाएगा, लेकिन वास्तु शास्त्र के हिसाब से यह घर की ऊर्जा को रोक देता है. कबाड़ जमा करने से आर्थिक संकट और मानसिक बोझ बढ़ सकता है. इसलिए घर को हमेशा अनावश्यक सामान से मुक्त रखें और समय-समय पर सफाई करते रहें.

वास्तु शास्त्र सिर्फ मान्यता भर नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली और मानसिक शांति (Remove negative energy from home) से भी जुड़ा है. जब घर साफ-सुथरा और व्यवस्थित होता है, तो अपने आप ही सकारात्मकता का माहौल बनता है. इसलिए इन पांच चीज़ों को घर में रखने से बचें और अगर मौजूद हों, तो तुरंत हटा दें. याद रखें, छोटा सा बदलाव भी आपके घर की खुशहाली और तरक्की में बड़ा फर्क ला सकता है.


यह भी पढ़ें: 7 दिनों तक पिएं इनमें से कोई 1 ड्रिंक! चेहरे पर आएगा निखार; लोग कहेंगे- वाह…

Lunar Eclipse 2025: 48 मिनट तक खून सा लाल दिखा चांद! आज रात दिखा खगोलीय चमत्कार; कब तक रहेगा चंद्रग्रहण?

0
Lunar Eclipse 2025
भारत समेत कई देशों में दिखेगा नज़ारा

Lunar Eclipse 2025: आसमान आज रात एक बेहद खास खगोलीय नज़ारे का गवाह बना. देशभर में पूर्ण चंद्र ग्रहण देखने को मिला. खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना लंबे समय तक चलेगी और भारत समेत कई देशों में इसका शानदार दृश्य देखा गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ग्रहण नग्न (Total Lunar Eclipse Indian Time) आंखों से भी स्पष्ट रूप से दिखेगा, बशर्ते आसमान में बादल न हों.

कब और कैसे दिखेगा ग्रहण?
स्पेस साइंटिस्ट डॉ. सुवेंदु पटनाइक के मुताबिक, चंद्र ग्रहण की शुरुआत रात 9:37 बजे शुरु हुआ. करीब 11 बजे चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाएगा और लाल रंग का नज़ारा दिखेगा, जिसे लोग ‘ब्लड मून’ कहते हैं. यह स्थिति रात 12:22 बजे तक बनी रहेगी. उन्होंने बताया कि अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse Time India) अब 3 मार्च 2026 को होगा. वहीं नेहरू प्लैनेटेरियम के सीनियर इंजीनियर ओपी गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में ग्रहण (chandra grahan aaj rat) का पेनुम्ब्रल फेज़ (आरंभिक चरण) रात 8:58 बजे शुरू हुआ, आंशिक ग्रहण 9:57 बजे से दिखा और रात 11:48 बजे इसका चरम होगा. यह स्थिति लगभग 48 मिनट तक रहेगी और रात 1:26 बजे ग्रहण पूरी तरह समाप्त होगा.

Lunar Eclipse 2025

भारत ही नहीं, कई देशों में दिखेगा नज़ारा
वैज्ञानिकों के अनुसार यह चंद्र ग्रहण सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी साफ दिखाई देगा. एमपी बिड़ला प्लैनेटेरियम के पूर्व निदेशक डॉ. देवी प्रसाद ने इसे वैश्विक अद्भुत दृश्य बताया और कहा कि हर (chandra grahan 2025) किसी को इसे ज़रूर देखना चाहिए क्योंकि यह हमें सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के संबंध की याद दिलाता है. नेहरू प्लैनेटेरियम के सीनियर इंजीनियर ओपी गुप्ता ने कहा कि ग्रहण को देखने से आंखों को कोई नुकसान नहीं होता. लोग आराम से इसे देख सकते हैं. उन्होंने बताया कि खाने-पीने पर रोक जैसी बातें सिर्फ अंधविश्वास हैं, इसका विज्ञान से कोई संबंध नहीं. उन्होंने कहा कि ग्रहण के दौरान लोग भोजन और पानी सामान्य रूप से ले सकते हैं.

पुरानी मान्यताएं और धार्मिक दृष्टिकोण
दूसरी ओर, पुजारी महेंद्र नाथ का कहना है कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से शुरू हो गया है. उनके अनुसार रात 9:57 बजे ग्रहण का स्पर्श होगा और 1:26 बजे इसका मोक्ष. धार्मिक मान्यता के मुताबिक ग्रहण के दौरान बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर बाकी लोगों को भोजन नहीं करना चाहिए. ज्योतिषीय दृष्टि से उन्होंने बताया कि यह ग्रहण कुंभ राशि पर पड़ रहा है, इसलिए कुंभ राशि वालों को (Chandra Grahan 2025) सावधानी बरतनी चाहिए. उन्हें महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है. वहीं मेष, वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए यह ग्रहण शुभ माना जा रहा है.

चंद्र ग्रहण क्या होता है?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और उसकी चमक कम हो जाती है. कभी-कभी चंद्रमा पूरी तरह लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है. ऐसा तब होता है जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है और चंद्रमा तक पहुंचती है. चंद्र ग्रहण सिर्फ पूर्णिमा के दिन ही संभव है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाएं। यह घटना लगभग हर छह महीने पर किसी न किसी रूप में घटित होती है. ग्रहण की अवधि और प्रकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की छाया के कितने करीब से गुजर रहा है.

Lunar Eclipse 2025

निहारने का सुनहरा अवसर
यह इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण है. इससे पहले मार्च 2025 में भी ग्रहण लगा था. वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों का कहना है कि यह अवसर दुर्लभ है और लोगों को इसे ज़रूर देखना चाहिए. आज रात का आसमान हर किसी को प्रकृति की उस अद्भुत लीला से रूबरू कराएगा, जिसमें सूर्य-पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आकर हमें याद दिलाते हैं कि ब्रह्मांड में हमारी जगह कितनी अद्भुत है.


यह भी पढ़ें: जापान के प्रधानमंत्री इशिबा शिगेरू का इस्तीफ़ा? सत्तारूढ़ दल में सियासी भूचाल; जानें वजह…