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Putin Modi Car Diplomacy: पुतिन-मोदी की ‘कार कूटनीति’! बंद गाड़ी में 45 मिनट बातचीत; अमेरिका के भी उड़ें होश!

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पुतिन-मोदी ने बंद कार में की 45 मिनट मीटिंग

नई दिल्ली/तियानजिन: अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद (US-India tariff tensions) ग्लोबल पॉलिटिक्स में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बदलते समीकरणों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जापान दौरे के बाद सीधे चीन के तियानजिन पहुंचना और वहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होना कई बड़े संकेत दे रहा है। हालांकि, इस बीच भारत और रूस की दोस्ती का एक अलग ही (Putin Modi Car Diplomacy) नज़ारा दुनिया के सामने आया जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी का न केवल गर्मजोशी से स्वागत किया बल्कि उनके साथ अपनी लग्ज़री Aurus Senat लिमोज़ीन में सफर करने की इच्छा भी जताई. गौरतलब है कि दोनों के बीच हुई बाचीत को लेकर अब अंतरर्राष्ट्रीय मी

पुतिन ने किया 10 मिनट इंतज़ार
सूत्रों के मुताबिक, SCO सम्मेलन स्थल से द्विपक्षीय बैठक स्थल तक जाने के लिए पुतिन ने विशेष तौर पर इंतज़ार किया। लगभग 10 मिनट तक उन्होंने मोदी का इंतज़ार किया ताकि दोनों नेता एक ही कार से साथ यात्रा कर सकें। यह कदम इस बात का प्रतीक माना जा रहा है कि रूस भारत को एक ‘स्पेशल पार्टनर’ की तरह देखता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सोशल मीडिया अकाउंट में साझा की तस्वीर

45 मिनट लंबी कार डिप्लोमेसी
दोनों नेता सम्मेलन स्थल से होटल तक कार में सफर करते रहे और विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। दिलचस्प बात यह रही कि होटल पहुंचने के बाद भी वे करीब 45 मिनट तक कार में ही बैठे रहे और चर्चा जारी रखी। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को केवल एक ‘ट्रैवलिंग मोमेंट’ नहीं बल्कि रिश्तों में गहराई और विश्वास का प्रतीक मान रहे हैं. बैठक में दोनों नेताओं ने आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके अलावा व्यापार, खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, अंतरिक्ष और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-रूस का ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता का भी एक अहम स्तंभ है.

यूक्रेन संकट पर चर्चा
दोनों नेताओं ने यूक्रेन मुद्दे पर भी बातचीत की। पीएम मोदी ने हाल ही में उठाए गए शांति पहल की सराहना की और ज़ोर दिया कि अब संघर्ष को रोककर एक टिकाऊ शांति समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। वहीं पुतिन ने भी भारत की भूमिका को ‘संतुलित’ और ‘रचनात्मक’ बताया. इस पूरे घटनाक्रम ने (India Russia bilateral talks) साफ कर दिया है कि भारत और रूस की साझेदारी अब सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ‘निजी विश्वास और राजनीतिक भरोसे’ की नई मिसाल गढ़ रही है. अमेरिका और पश्चिमी देशों की निगाहें जहां इस रिश्ते पर टिकी हैं, वहीं SCO में दिखा यह नजारा आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को नया मोड़ दे सकता है.