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कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कुवाली में दो मंदिरों के सौंदर्यीकरण का किया शिलान्यास

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कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या बोलीं—विकास और विरासत साथ-साथ*

*अल्मोड़ा, 11 अप्रैल।*
सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के मजखाली मंडल अंतर्गत कुवाली गांव में शनिवार को आदि बद्रीनाथ मंदिर एवं पिपलेश्वर महादेव मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्यों का विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या मौजूद रहीं।

 

मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत संचालित इस योजना में पिपलेश्वर महादेव मंदिर के लिए 51.41 लाख रुपये तथा आदि बद्रीनाथ मंदिर के लिए 89.80 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इन कार्यों से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि भाजपा सरकार विकास और विरासत को साथ-साथ लेकर चलने के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक हमारे आस्था के केंद्र—मंदिरों का सौंदर्यीकरण भी है। सरकार का उद्देश्य है कि विकास के साथ हमारी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक धरोहर भी मजबूत हो।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि ऐसे प्रकल्पों से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

कार्यक्रम के दौरान मनचौड़ा ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह, मिटारकोट ग्राम प्रधान हंसराज आर्य, मजखाली से सूबेदार जितेंद्र सिंह अधिकारी, धनखोली ग्राम प्रधान सपना आर्या, संजय आर्य, चकुनी ग्राम प्रधान मनोज सिंह, वगुना के ग्राम प्रधान, रतगल के ग्राम प्रधान सहित सैकड़ों युवाओं एवं महिलाओं ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष दीपक बोरा, मंदिर समिति के अध्यक्ष हेम पांडे, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी, जिला पंचायत सदस्य दीपक शाह, ग्राम प्रधान कुवाली मंजू वर्मा, जिला पंचायत सदस्य हिमांशु कुमार, दीपक रावत, राज अधिकारी, मिथिलेश वर्मा, जगदीश कुमार, हेमा रावत, मंडल अध्यक्ष गणेश जलाल, दीवान सिंह जलाल, नंदन सिंह बिष्ट, हर्ष सिंह बिष्ट, दिनेश वर्मा, भगवत सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने की ऐतिहासिक पहल:  कुसुम कंडवाल

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जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय : कुसुम कंडवाल

​देहरादून: आज देहरादून में सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर उनके साथ समाजसेवी डॉ. पारुल दीक्षित एवं अधिवक्ता शिखा शर्मा बिष्ट भी उपस्थित रहीं।

​प्रेस वार्ता के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ को भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। उन्होंने विशेष रूप से 16 अप्रैल को होने वाली संसद की ऐतिहासिक बैठक का उल्लेख किया, जो इस अधिनियम को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित होगी।

अध्यक्ष ने बताया कि सितंबर 2023 में पारित यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित सुनिश्चित करता है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 में मात्र 22 थी, जो 2024 में बढ़कर 75 हुई है, लेकिन यह अभी भी आदर्श स्थिति से दूर है। यह अधिनियम इस अंतर को पाटकर महिलाओं को शासन के केंद्र में लाएगा।

कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब ‘महिलाओं के विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है”। वैश्विक शोध के अनुसार, लैंगिक अंतर कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हो सकती है।

प्रेस वार्ता में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुद्रा योजना के तहत 69% ऋण महिलाओं को दिए गए। जन धन योजना के तहत 32.29 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुले। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 80.2% तक पहुँचा। साथ ही, भारत में 43% STEM ग्रेजुएट महिलाएँ हैं। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए खोले गए।

उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ LPG कनेक्शन, जल जीवन मिशन के तहत 14.45 करोड़ घरों में नल से जल और स्वच्छ भारत मिशन ने महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन दिया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता मिली है।

जब महिलाओं को संवैधानिक अवसर मिलता है, तो वे जल, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न बुनियादी मुद्दों पर क्रांतिकारी बदलाव लाती हैं। यह अधिनियम @2047 के विकसित भारत संकल्प की आधारशिला है। भारत अब ‘महिलाओं के विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) की राह पर चल पड़ा है, जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट दृष्टि कोण रहा है कि महिला नेतृत्व वाला विकास ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है, नारी शक्ति वंदन
अधिनियम का क्रियान्वयन उसी दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासि क पहल है जो आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र और विकास मॉडल को और सशक्त बनाएगा।

कुसुम कंडवाल ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ नारी शक्ति की भी भूमि है। राज्य महिला आयोग इस अधिनियम के सफल क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र को और अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनाए।

​”यह अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।”

​अध्यक्ष ने अंत में समस्त मातृशक्ति और समाज से इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करने का आह्वान किया।

मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दिए निर्देश: सूबे के प्रत्येक विद्यालय में हर्षोल्लास से मनाई जायेगी अम्बेडकर जयंती

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सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी

डॉ अम्बेडकर के अमूल्य योगदान से परिचित होंगे छात्र-छात्राएं

देहरादून, 11 अप्रैल 2026

विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के सभी राजकीय एवं निजी विद्यालयों में आगामी 14 अप्रैल को भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती को हर्षोल्लास से मनाया जायेगा। इस संबंध में विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक द्वारा सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं, ताकि कार्यक्रमों का सफल एवं प्रभावी आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण अवसर पर विद्यालयों में विविध शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, जिनके माध्यम से छात्र-छात्राओं को डॉ. अम्बेडकर के जीवन, संघर्ष और उनके अमूल्य योगदान से अवगत कराया जायेगा। कार्यक्रमों में छात्रों की सक्रिय एवं अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी, जिससे उनमें सामाजिक जागरूकता एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति समझ विकसित हो सके।

विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत डॉ. अम्बेडकर की जीवनी, उनके द्वारा सामाजिक समानता, न्याय, मानवाधिकार, अस्पृश्यता उन्मूलन तथा भारतीय संविधान के निर्माण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष परिचर्चा आयोजित की जायेगी। साथ ही विद्यार्थियों को उनके विचारों, आदर्शों एवं सिद्धांतों से प्रेरणा लेने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा।

इस अवसर पर भाषण, निबंध, पोस्टर निर्माण, नाटक, गायन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जायेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जायेगा, जिससे उनके आत्मविश्वास एवं रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा मिल सके।

*बयान*
आगामी 14 अप्रैल को सभी विद्यालयों में अम्बेडकर जयंती को अनिवार्य रूप से मनाया जायेगा। इसका उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को डॉ अम्बेडकर के विचारों और मूल्यों से जोड़ना है। छात्र-छात्राएं जब डॉ. अम्बेडकर के जीवन, उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में जानेंगे, तो उनमें भी समाज के प्रति सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। – *डॉ धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।*

*बॉक्स*
*प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ का दैनिक गायन अनिवार्य: डॉ धन सिंह रावत*

सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों एवं अन्य शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थानों में अब प्रत्येक दिन अनिवार्य रूप से राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय एवं यूजीसी के निर्देशों के तहत लिया गया है। इसके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। डॉ रावत ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को जन-जन की आवाज़ बनाना एवं युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को और सशक्त करना है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए डॉ रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाहएवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रभावना को समर्पित है और इस अमर गीत के प्रति सच्ची श्रद्धा भी।

*वी.पी. सिंह बिष्ट*
जनसम्पर्क अधिकारी/मीडिया प्रभारी
माननीय विद्यालयी शिक्षा मंत्री।

 

CM धामी ने डी.ए.वी. पीजी कॉलेज में आयोजित छात्रसंघ समारोह में किया प्रतिभाग: छात्र-छात्राओं को किया संबोधित

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को डी०ए०वी० पीजी कॉलेज, देहरादून में आयोजित छात्रसंघ समारोह में प्रतिभाग करते हुए छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान भी हैं। उनकी ऊर्जा, संकल्प और नवाचार की सोच ही भारत के विकास की दिशा निर्धारित करती है। उन्होंने छात्र राजनीति को नेतृत्व विकास, संगठन क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों से जुड़कर युवाओं में राष्ट्र सेवा, चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि परिषद के कार्यकर्ता, शिक्षा संस्थानों से लेकर देश की सीमाओं तक राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने महान समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण करना भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में युवाओं को केंद्र में रखकर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें ‘मेक इन इंडिया’, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलें शामिल हैं, जिन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डी०ए०वी० पीजी कॉलेज के अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शैक्षणिक ब्लॉक की छत पर दो अतिरिक्त तल (प्रथम एवं द्वितीय) के निर्माण की घोषणा भी की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, रामसिंह कैड़ा, विधायक उमेश कुमार, प्राचार्य डी.ए.वी पीजी कॉलेज प्रो. कौशल कुमार, छात्र संघ अध्यक्ष ऋषभ मल्होत्रा, महामंत्री करन नेगी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

 

 डीएम के आदेश:  PM मोदी के आगमन पर 14 अप्रैल को लच्छीवाला टोल प्लाजा, आशा रोडी बैरियर रहेगा टोल मुक्त

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लच्छीवाला टोल प्लाजा व आशा रोडी बैरियर को खुला रखने के डीएम ने जारी किए आदेश

देहरादून दिनांक 11 अप्रैल 2026,

देहरादून दिल्ली एक्सप्रेस वे के लोकार्पण एवं देहरादून में जसवंत सिंह ग्राउंड गढी कैंट परिसर में आयोजित मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम में भारी संख्या में जनमानस के प्रतिभाग करने की संभावना के दृष्टिगत जिला प्रशासन देहरादून चाक चौबंद व्यवस्थाएं करने में जुटा है। माननीय प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आने वाले वाहनों शहर तथा आसपास जाम की स्थिति न बने इसके लिए जिलाधिकारी ने लच्छीवाला टोल प्लाजा को 14 अप्रैल को प्रातः 5:00 बजे से सांय 8:00 बजे तक खुला रखने के आदेश दिए । जिसके फलस्वरुप इस दौरान किसी भी निजी, कमर्शियल व अन्य वाहनों का टोल टैक्स नहीं काटा जाएगा। मंगलवार प्रातः 05 बजे से लेकर शाम 08 बजे तक टोल प्लाजा से वाहनों का नि:शुल्क आवागमन रहेगा।

जिला प्रशासन द्वारा टोल प्लाजा को नि:शुल्क रखने के आदेश दिए हैं । माननीय प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान सीमावर्ती व पर्वतीय जनपदों से बसे एवं निजी वाहनों के अधिक संख्या में कार्यक्रम स्थल पहुंचने की संभावना के चलते टोल प्लाजा पर जाम की स्थिति न बने तथा शहर को जाममुक्त रखने तथा कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये जाने को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुबह 05 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक टोल प्लाजा को नि:शुल्क रूप से खुला रखने के आदेश दिए हैं । इस अवधि में फास्ट टैग से भी किसी प्रकार का कोई टोल नहीं वसूला जाएगा है।

 

NALSA एवं उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा “Enhancing Access to Justice” पर सम्मेलन आयोजित

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NALSA के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन

माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के तत्वाधान में, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा आयोजित नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज दिनांक 11 अप्रैल 2026 को भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” रखा गया है, जिसकी मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” है।

इस गरिमामय अवसर पर उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के माननीय न्यायमूर्ति श्री जे. के. माहेश्वरी, श्री एन. कोटेश्वर सिंह एवं श्री संदीप मेहता, साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता की विशेष उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार तिवारी, उत्तराखंड लीगल सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति श्री आलोक कुमार वर्मा तथा उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से पधारे माननीय न्यायमूर्तिगण भी उपस्थित रहे।

सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने हेतु अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।
आज आयोजित दो प्रमुख सत्रों में, प्रथम सत्र में वन समुदायों के अधिकारों एवं वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें वन गुज्जर समुदाय के प्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही। द्वितीय सत्र में जेल सुधार (Prison Reforms) पर विशेष चर्चा करते हुए बंदियों के अधिकार, न्याय तक उनकी पहुँच तथा सुधारात्मक उपायों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।

यह सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य को सुदृढ़ करता है।

(सीमा डुँगराकोटी)
सचिव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
देहरादून

DM के हस्तक्षेप से वर्षों से लटके भूमि विवाद प्रकरण में सीमांकन पूर्ण

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जनता दर्शन में फरियादी के पुनः पंहुचने पर डीएम ने पत्रावली की तलब

डीएम जनदर्शन; न्याय; शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, रोजगार से लेकर बिल एवं ऋणमाफी तक एक छत के नीचे मौके पर ही

देहरादून दिनांक 10 अप्रैल 2026 (सूवि) जिलाधिकारी सविन बसंल की अध्यक्षता में आयोजित जन दर्शन/ जनता दरबार में फरियादी उम्मेद सिंह द्वारा अपने पुत्र उत्पल सिंह की निजी भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायत करते हुए भूमि सीमांकन का अनुरोध किया गया था जिस पर जिलाधिकारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्यावाही के निर्देश दिए थे। फरियादी उम्मेद सिंह द्वारा 06 अपै्रल को पुनः जन दर्शन में फरियाद लगाई कि उनके भूमि सीमांकन में किसी प्रकार का निर्णय नही हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा यह शिकायत की गई कि सीमांकन कार्य में विलंब किया जा रहा है तथा अपेक्षित सहयोग नहीं दिया जा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जिस पर जिलाधिकारी ने तहसील प्रशासन डोईवाला को तलब करते हुए 07 अपै्रल 2026 तक प्रकरण पर पूर्व में दिए गए निर्देशों के परिपालन में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में अवगत कराया है कि उत्पल सिंह द्वारा 22.04.2025 को धारा 41 एल.आर. एक्ट के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसके क्रम में तहसीलदार, डोईवाला द्वारा 26.07.2025 को जांच आख्या प्रस्तुत की गई थी। इसके उपरांत पत्र 25.09.2025 के माध्यम से दोनों पक्षों को सूचित किया गया था कि फसल कटाई के उपरांत नियमानुसार सीमांकन की कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।
उप जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि राजस्व विभाग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही करते हुए राजस्व निरीक्षक द्वारा 11.03.2026 को मौजा बक्सरवाला स्थित खसरा संख्या 132क, 138ख एवं 139 का सीमांकन कार्य संपन्न किया गया है। प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार खसरा संख्या 139, रकबा 0.4120 हेक्टेयर भूमि 04.03.1993 को क्रय की गई थी। प्रकरण में जिला शासकीय अधिवक्ता (दीवानी), देहरादून की विधिक राय भी प्राप्त हुई है, जिसमें संबंधित प्रकरण के निस्तारण हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा चिन्हांकन/निशानदेही सुनिश्चित करने एवं आवश्यकतानुसार पुलिस प्रशासन के माध्यम से विधिक कार्यवाही किए जाने का सुझाव दिया गया है।

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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून

 

चारधाम यात्रा-2026 से पहले देहरादून में मेगा मॉक ड्रिल:  आपदा प्रबंधन की तैयारियों का लिया गया व्यापक जायजा

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एनडीएमए-यूएसडीएमए के तत्वाधान में देहरादून के चार प्रमुख स्थलों पर एक साथ मॉक अभ्यास

*टीमों के प्रदर्शन की सराहना, समन्वय, संचार और निर्णय क्षमता को सशक्त बनाने पर जोर*

*देहरादून 10 अप्रैल,2026 (सू.वि),*
चारधाम यात्रा-2026 के दृष्टिगत संभावित आपदाओं एवं आकस्मिक परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शुक्रवार को जनपद देहरादून में व्यापक स्तर पर मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के तत्वावधान में चार प्रमुख स्थानों पर एक साथ संचालित किया गया।

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से सुबह 9ः45 बजे विभिन्न आपदा परिदृश्यों की सूचना प्रसारित की गई। इसके अंतर्गत ऋषिकेश यात्रा ट्रांजिट कैंप में आग लगने, मौसम विभाग द्वारा रेड अलर्ट जारी होने के बाद तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ जुटने तथा देहरादून स्थित रिस्पना नदी में बादल फटने से आई बाढ़ के कारण सपेरा बस्ती क्षेत्र में जनहानि व क्षति की सूचना शामिल रही। साथ ही गांधी शताब्दी अस्पताल में घायलों के उपचार संबंधी व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया।

जिलाधिकारी/रिस्पांसिबल ऑफिसर सविन बंसल के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा ने कंट्रोल रूम की कमान संभालते हुए सभी इंसीडेंट कमांडरों को तत्काल स्टेजिंग एरिया से रेस्क्यू टीमों को घटना स्थल के लिए रवाना करने के निर्देश दिए। निर्देशों के अनुरूप टीमें त्वरित गति से घटनास्थलों पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया गया।

ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग की घटना के दौरान पूरे कैंप को सुरक्षित रूप से खाली कराया गया। अभ्यास के तहत पांच यात्रियों को गंभीर रूप से घायल दर्शाया गया, जिन्हें एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेजा गया, जबकि 12 अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। अग्निशमन विभाग ने तत्परता से आग पर काबू पाकर स्थिति सामान्य की।

दूसरी ओर, रेड अलर्ट के चलते ट्रांजिट कैंप में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यात्रियों को राहत शिविरों, होटलों एवं धर्मशालाओं में व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित किया गया, जिससे स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सका।

तीसरे परिदृश्य में रिस्पना नदी में आई बाढ़ के दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस दौरान चार लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया तथा प्रभावितों को राहत शिविरों में ठहराकर भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। लोगों को नदी से दूर रहने की हिदायत भी दी गई। जबकि गांधी शताब्दी अस्पताल में घायलों को त्वरित उपचार पहुंचाने के संबंध में तैयारियों को परखा गया।

मॉक अभ्यास के उपरांत इंसीडेंट कमांडरों द्वारा रेस्क्यू टीमों की ब्रीफिंग कर भविष्य में और अधिक सतर्कता एवं समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान आब्जर्वरों ने अभ्यास में सामने आई कमियों को दूर करने पर विशेष बल दिया।

एनडीएमए के विशेषज्ञों ने मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि सभी टीमों ने अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन में निरंतर सुधार, बेहतर समन्वय, सुदृढ़ संचार व्यवस्था एवं त्वरित निर्णय क्षमता को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मॉक अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम में अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल, सीईओ वीके ढ़ौडियाल, डीपीओ जीतेन्द्र कुमार, डीआईओ एनआईसी अंकुश पांडेय, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित आर्मी, आईटीबीपी, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, होमगार्ड एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

 

नाबार्ड एवं NABCONS की पहल पर कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं को लेकर उत्तराखंड में उठाया महत्वपूर्ण कदम

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नाबार्ड एवं NABCONS की पहल पर कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं को लेकर उत्तराखंड में उठाया महत्वपूर्ण कदम

*देहरादून।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) एवं NABCONS की पहल पर कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं को लेकर उत्तराखंड में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिनांक 9 अप्रैल 2026 को सचिव, जलागम के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें माह फरवरी में सारा जलागम के साथ कार्बन क्रेडिट की फिजिबिलिटी स्टडी हेतु हुए अनुबंध के क्रम में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

बैठक में सचिव श्री जावलकर ने निर्देशित किया कि उत्तराखंड राज्य में प्रथम बार सारा के अंतर्गत देहरादून एवं टिहरी जनपद की सॉंग नदी पर कृषकों की आय बढ़ाने हेतु कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं एवं उसके विपणन (मार्केटिंग) पर एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट इस प्रकार तैयार की जाए कि इसे संबंधित विभागों के लिए एक न्यूनतम प्रोटोकॉल एवं दिग्दर्शिका के रूप में अपनाया जा सके तथा आवश्यक कार्यवाही के तहत व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सके।

इस अवसर पर नाबकॉन्स दिल्ली टीम, नाबार्ड देहरादून के डीजीएम, सारा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती कहकशाँ, उपनिदेशक सारा डॉ. डी.एस. रावत, विषय विशेषज्ञों सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त, दिनांक 10 अप्रैल को टिहरी जनपद के रिंगलगढ़ क्षेत्र में देहरादून जिला सारा के विषय विशेषज्ञों एवं नाबकॉन्स की टीम द्वारा संयुक्त क्षेत्र भ्रमण किया गया। इस दौरान पिरुल (चीड़ की पत्तियों) से निर्मित बायोचार में उपलब्ध कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं तथा सॉंग नदी बेसिन में इसके व्यापक उपयोग एवं लाभों के अध्ययन के उद्देश्य से ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित किया गया।

यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

*सॉंग नदी बेसिन में कार्बन क्रेडिट की संभावनाएँ*

उत्तराखंड के सॉंग नदी बेसिन में कार्बन क्रेडिट के माध्यम से किसानों और ग्रामीण समुदाय की आय बढ़ाने की दिशा में एक व्यापक अध्ययन प्रारम्भ किया गया है। यह अध्ययन विशेष रूप से एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी), बायोचार, मृदा कार्बन (SOC) तथा पिरुल आधारित ब्रिकेट्स जैसे उपायों पर केंद्रित है, जिनके माध्यम से जलवायु परिवर्तन शमन के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ किया जा सकता है।

1. एग्रोफॉरेस्ट्री (Agroforestry) में कार्बन क्रेडिट की संभावनाएँ

एग्रोफॉरेस्ट्री के अंतर्गत खेतों की मेड़ों, परती भूमि तथा कृषि भूमि में पेड़-पौधों का रोपण किया जाता है। यह प्रणाली दोहरे लाभ प्रदान करती है—एक ओर किसानों को लकड़ी, फल, चारा एवं अन्य उत्पाद प्राप्त होते हैं, वहीं दूसरी ओर पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर उसे अपने जैवभार में संग्रहीत करते हैं।

सॉंग नदी बेसिन में शीशम, सागौन, बांस, फलदार वृक्ष (आम, लीची, अमरूद) जैसे प्रजातियों के माध्यम से प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष 2 से 8 टन CO₂ तक कार्बन अवशोषण की संभावना आंकी जा रही है। इस संचित कार्बन को अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार में क्रेडिट के रूप में बेचकर किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।

2. मृदा कार्बन (SOC – Soil Organic Carbon) का महत्व

मृदा कार्बन (SOC) खेती की उत्पादकता और कार्बन संचयन दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैविक खेती, हरी खाद, फसल अवशेष प्रबंधन और कम जुताई (minimum tillage) जैसी तकनीकों से मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

SOC में वृद्धि से:
• मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
• जल धारण क्षमता में सुधार होता है
• कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होते हैं

सॉंग नदी बेसिन में यदि बड़े स्तर पर SOC सुधार कार्यक्रम लागू किए जाएँ, तो हजारों किसानों को सामूहिक रूप से कार्बन क्रेडिट का लाभ मिल सकता है।

3. बायोचार (Biochar) के माध्यम से कार्बन क्रेडिट

बायोचार एक स्थायी कार्बन रूप है, जिसे कृषि अपशिष्ट या पिरुल (चीड़ की सूखी पत्तियों) को नियंत्रित ताप पर जलाकर बनाया जाता है। इसे मिट्टी में मिलाने से कार्बन सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रहता है।

बायोचार के लाभ:
• मिट्टी की उर्वरता एवं नमी धारण क्षमता बढ़ाता है
• फसल उत्पादन में सुधार करता है
• दीर्घकालिक कार्बन संचयन सुनिश्चित करता है

सॉंग नदी बेसिन में पिरुल की उपलब्धता अधिक होने के कारण बायोचार उत्पादन एक बड़े स्तर का कार्बन क्रेडिट मॉडल बन सकता है। प्रत्येक टन बायोचार लगभग 2–3 टन CO₂ के समतुल्य कार्बन को स्थायी रूप से संग्रहित कर सकता है, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।

4. पिरुल आधारित ब्रिकेट्स (Pine Briquettes)

पिरुल से ब्रिकेट्स (ईंधन के ठोस ब्लॉक) बनाना एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक आजीविका स्रोत है।

इसके प्रमुख लाभ:
• जंगलों में आग की घटनाओं में कमी
• पारंपरिक ईंधन (लकड़ी/कोयला) पर निर्भरता में कमी
• स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प
• कार्बन उत्सर्जन में कमी, जिससे कार्बन क्रेडिट प्राप्ति की संभावना

ग्रामीण स्वयं सहायता समूह (SHGs) और किसान उत्पादक संगठन (FPOs) पिरुल ब्रिकेट्स के उत्पादन और विपणन के माध्यम से आय अर्जित कर सकते हैं।

5. ग्रामीणों के लिए समग्र लाभ

इन सभी गतिविधियों (एग्रोफॉरेस्ट्री, बायोचार, SOC सुधार, पिरुल ब्रिकेट्स) को एकीकृत कर सॉंग नदी बेसिन में एक “कार्बन क्रेडिट क्लस्टर मॉडल” विकसित किया जा सकता है। इसके अंतर्गत:
• किसानों को प्रत्यक्ष कार्बन क्रेडिट से आय
• स्थानीय रोजगार के अवसर
• पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु अनुकूलन
• महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी

6. मार्केटिंग एवं क्रियान्वयन

कार्बन क्रेडिट को बेचने के लिए सत्यापन (MRV – Monitoring, Reporting, Verification) प्रणाली विकसित करनी होगी। इसके लिए तकनीकी एजेंसियों के सहयोग से एक मानक प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है, ताकि किसानों को पारदर्शी और सुनिश्चित लाभ मिल सके।

निष्कर्ष:
सॉंग नदी बेसिन में कार्बन क्रेडिट आधारित यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बनेगी, बल्कि उत्तराखंड को जलवायु परिवर्तन के प्रति एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

पलायन रोकने के लिए श्रमिकों को स्थानीय आवश्यकता के अनुसार दिया जाए कौशल प्रशिक्षण: सीएम धामी 

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सीएम धामी ने 8005 श्रमिकों के खाते में 17 करोड़ से अधिक की धनराशि डीबीटी के माध्यम से की हस्तांतरित

सीएम धामी ने किया उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकापर्ण करने के साथ ही 8005 श्रमिकों के खाते में 17 करोड़ से अधिक राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तातंरण किया।

मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड को अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि, अनुदान वितरण में पारदर्शिता बरते जाने के क्रम में ऑफलाईन अनुदान वितरण बन्द कर ऑनलाईन निस्तारण एवं डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि का हस्तांतरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए अब तक 11828 लाभार्थियों को कुल 29.89 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। आज 8005 लाभार्थियों को कुल 17.25 करोड़ की धनराशि वितरित की जा रही है। इस प्रकार विगत 06 माह में अब तक कुल 19833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है।

 

मुख्यमंत्री ने बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय श्रमिकों को पलम्बर, इलैक्ट्रिशियन, मिस्त्री, कारपेन्टर आदि क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाए। इसी तरह योगा एंव वेलनेस में रोजगार की सम्भावना को देखते हुए आगामी सत्र में श्रमिकों के बच्चों को योग एवं वेलनेस में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड निर्माण श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को कौशल प्रशिक्षण उपरान्त विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास करे। इसके लिए विदेश मंत्रालय भारत सरकार में पंजीकृत एजेन्सी के माध्यम कार्यवाही की जाए। साथ ही श्रमिकों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनका समय- समय पर स्वास्थ्य परीक्षण पर भी ध्यान दिया जाए। इस हेतू श्रमिकों के कार्य स्थल पर ही चिकित्सा परीक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके रोजगार में व्यवधान उपलब्ध न हो।

 

इस मौके पर श्रमायुक्त श्री पीसी दुम्का ने बताया कि UKLCCMS Portal पोर्टल के माध्यम से अब तक 16000 अधिष्ठानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके जरिए शुल्क के रूप में 80,00000.00 (रूपये अस्सी लाख मात्र) धनराशि जमा हो चुकी है, साथ ही बोर्ड के पास अब तक कुल 324 करोड़ की धनराशि सेस के रूप में जमा हो चुकी है। जिसे श्रमिकों के कल्याण में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिकों के बीच सामग्री वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। जिससे लाभार्थियों का लाईव फोटो एवं जियो ट्रेकिंग द्वारा सामग्री वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। इस मौके पर उपायुक्त विपिन कुमार सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।