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वनाग्नि रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर: डीएम सविन बंसल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक

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ग्राम व ब्लॉक पंचायत समितियों को सक्रिय रखने, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश*

*वनाग्नि रोकथाम में पटवारी चौकियां बने त्वरित क्रू-स्टेशन-डीएम*

*वनाग्नि सूचना आदान-प्रदान के लिए 24×7 कंट्रोल रूम और क्रू-स्टेशन रहे सक्रिय,*

*डीएम के निर्देशः वन प्रभाग में प्रत्येक रेंज स्तर पर हो मॉकड्रिल, जागरूकता और प्रशिक्षण शिविर*

*वनाग्नि पर नियंत्रण की बड़ी पहलः डीएम ने 45 लाख की उपकरण खरीद को मौके पर दी मंजूरी,*

*वन हमारी अमूल्य धरोहर, वनाग्नि रोकथाम को मिलेगा पूरा वित्तीय सहयोग-डीएम*

*देहरादून ।
जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में जनपद स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समिति की बैठक हुई। बैठक में फायर सीजन के दौरान वनाग्नि घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए। वनाग्नि प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा उपकरणों की खरीद हेतु मौके पर ही 45 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम में वन पंचायतों एवं स्थानीय समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जन सहभागिता के माध्यम से वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण हेतु एक ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर गठित समितियों को सक्रिय करते हुए उन्हें वनाग्नि रोकथाम की जिम्मेदारी के साथ नियमित रूप से क्रियाशील रखा जाए।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर वन पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं एवं महिला स्वयं सहायता समूहों की सहभागिता से व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे आमजन को वनाग्नि के दुष्परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। आरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित गुज्जर बस्तियों में विशेष जागरूकता एवं सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए गए।

वनाग्नि सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी ने विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि छात्र-छात्राओं में प्रारंभ से ही पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित हो सके। इसके साथ ही वनाग्नि से संबंधित सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान हेतु आपदा प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक स्तर पर वायरलेस संचार व्यवस्था, क्रू-स्टेशन एवं नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) को 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि वन हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वनों की रक्षा हेतु हर संभव प्रयास किए जाएंगे तथा वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यकतानुसार पूर्ण वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने राजस्व, पुलिस, फायर, जल संस्थान, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, आपदा प्रबंधन एवं दूरसंचार विभागों को फायर सीजन के दौरान आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। प्रत्येक क्रू-स्टेशन पर वनाग्नि नियंत्रण उपकरण, वाहन, संचार व्यवस्था तथा फायर वॉचर की तैनाती सुनिश्चित करने के साथ ही पटवारी चौकियों को भी क्रू-स्टेशन के रूप में सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। वन प्रभागों में प्रत्येक रेंज स्तर पर प्रशिक्षण शिविर एवं मॉक ड्रिल आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि रोकथाम में सहयोग करने वाले वन पंचायतों, समुदायों एवं व्यक्तियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि वन संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं तथा भावी पीढ़ियों के लिए हरे-भरे एवं सुरक्षित वन सुनिश्चित करने में सहयोग करें।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने अवगत कराया कि देहरादून जनपद के अंतर्गत कुल 2,25,853.27 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है, जिसमें साल, चीड़, देवदार, बांज एवं स्प्रूस के वन शामिल हैं। जनपद में कुल पांच वन प्रभाग कालसी, चकराता, मसूरी, राजाजी टाइगर रिजर्व एवं देहरादून हैं, जिनमें कालसी एवं मसूरी वनाग्नि की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। विगत पांच वर्षों में वर्ष 2021 में सर्वाधिक 189 एवं वर्ष 2024 में 183 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि वर्ष 2022 में 59, वर्ष 2023 में 50 तथा वर्ष 2025 में अब तक 21 घटनाएं घटित हुई हैं।

वनाग्नि रोकथाम हेतु प्रत्येक वन प्रभाग में अग्नि सुरक्षा पट्टियों, अश्व मार्गों, अग्नि बटिया, मोटर मार्गों का निर्माण तथा संवेदनशील एवं अति संवेदनशील क्षेत्रों में सफाई एवं कंट्रोल बर्निंग का कार्य किया जा रहा है। जनपद में कुल 127 क्रू-स्टेशन स्थापित किए गए हैं। किसी भी वन क्षेत्र में आग दिखाई देने पर तत्काल निकटस्थ वन चौकी, वन रेंज कार्यालय अथवा अग्नि क्रू-स्टेशन को हेल्पलाइन नंबर 1926 पर सूचना देने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त “फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड” मोबाइल एप और आपदा कंट्रोल रूम के दूरभाष 1077 के माध्यम से भी सूचना दी जा सकती है।

प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा वनाग्नि प्रबंधन हेतु वाहनों, ईंधन, क्रू-स्टेशन के लिए फर्स्ट एड बॉक्स, लीफ ब्लोअर, वाटर बोतल, टॉर्च आदि उपकरणों की खरीद हेतु बजट की मांग रखी, जिस पर जिलाधिकारी ने वनों को आग से बचाने के लिए हर संभव वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, डीएफओ देहरादून नीरज कुमार, डीएफओ कालसी मयंक गर्ग, डीएफओ चकराता वैभव कुमार, डीएफओ मसूरी अमित कंवर, अपर जिलाधिकारी कृष्ण कुमार मिश्र, ओसी सीलिंग स्मृता परमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग राजीव कुमार, क्षेत्राधिकारी पुलिस अंकित कंडारी, एसी एसडीआरएफ सुशील रावत, एससीएफ सरिता भट्ट, एसीएफ अभिषेक मैठाणी, डीडीएओ ऋषभ कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

जिला प्रशासन के प्रयासों से शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ता सड़क पर बिखरा बचपन

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परिस्थितियों से वीरान बचपन, जरूरतमंद असहायों के अधिकारों के संरक्षण को दृढ़ संकल्प डीएम सविन , पारिवारिक परिस्थितियों से दुकान पर काम करने को मजबूर 2 बेटियां अब अपने शिक्षा के पंखों से भर सकेंगी भविष्य की उड़ान*

*जिला प्रशासन का इंटेंसिव केयर सेंटर बना रेस्क्यू बच्चों के लिए संजीवनी।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों के लिए वरदान बना जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिवकेयर सेंटर*

देहरादून । बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के अंतर्गत रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास एवं उज्ज्वल भविष्य की दिशा में प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) एक प्रभावी और मानवीय पहल के रूप में सामने आया है। यह केंद्र परिस्थितियों से वीरान हो चुके बचपन को नई दिशा, सुरक्षा और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसी क्रम में सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान एक दुकान में काम करती हुई दो नाबालिग बालिकाएं पाई गईं। तत्काल कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन की टीम द्वारा दोनों बालिकाओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू के उपरांत बालिकाओं की काउंसलिंग की गई, जिससे उनके मानसिक एवं भावनात्मक पक्ष को समझा जा सके। साथ ही उनके माता-पिता से संवाद स्थापित कर उन्हें बालश्रम के दुष्परिणामों, बच्चों के अधिकारों तथा शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

*सहस्त्रधारा रोड पर एक दुकान में काम करती हुई दो लड़कियाँ पाई गईं। उनकी काउंसलिंग की गई तथा उनके माता-पिता से बातचीत की गई। इसके बाद उनका आईसीसी में नामांकन कराया गया और उन्हें साधुराम इंटर कॉलेज में मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा गया। साथ ही उन्हें किताबें, बैग और जूते भी वितरित किए गए।* सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के पश्चात दोनों बालिकाओं का जिला प्रशासन के इंटेंसिव केयर सेंटर में नामांकन कराया गया, जहां उन्हें संरक्षण, परामर्श एवं शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके बाद बालिकाओं को साधुराम इंटर कॉलेज में नामांकित कर औपचारिक रूप से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया।
जिला प्रशासन द्वारा बालिकाओं को पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सामग्री जैसे किताबें, स्कूल बैग एवं जूते भी उपलब्ध कराए गए। यह पहल न केवल बच्चों के वर्तमान को सुरक्षित कर रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशानुसार जनपद में बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बच्चे के समग्र पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं मानसिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इंटेंसिव केयर सेंटर के माध्यम से बच्चों को योग, संगीत, खेल आदि गतिविधि से एक सुरक्षित वातावरण प्रदान कर शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी नागरिक बनाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, जबकि रेस्क्यू किए गए बच्चों को हर संभव सहायता प्रदान कर बच्चों का भविष्य संवारा जाएगा।

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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून

Medical Achievement: श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में स्तन कैंसर पीड़ित महिला का शरीर की मांसपेशियों से बनाया स्तन 

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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में पांच घंटे चली जटिल सर्जरी में हुआ टोटल मैस्टेक्टमी विद ऑटोलॉगस होल ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन

देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने स्तन कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उत्तराखंड में पहली बार मल्टी-सेंट्रिक्स ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला का पूरा स्तन हटाने के बाद उसी के शरीर की मांसपेशियों और त्वचा से नया स्तन बनाकर सफल पुनर्निर्माण किया गया। यह जटिल सर्जरी अस्पताल के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. अजीत तिवारी के नेतृत्व में की गई।


मेडिकल साइंस में इस बीमारी को मल्टी-सेंट्रिक्स ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है, जिसमें स्तन के अलग-अलग हिस्सों में एक से अधिक कैंसर ग्रंथियां विकसित हो जाती हैं। ऐसे मामलों में आंशिक सर्जरी संभव नहीं होती और टोटल मैस्टेक्टमी (पूरा स्तन हटाना) आवश्यक होती है। इस केस में टोटल मैस्टेक्टमी के साथ ऑटोलॉगस होल ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन किया गया, जिसमें मरीज के अपने शरीर के ऊतकों (टिश्यू) का उपयोग कर नया स्तन बनाया गया।
लगभग पाँच घंटे तक चली इस अत्यंत जटिल सर्जरी में स्तन के आकार, संतुलन और प्राकृतिक बनावट को विशेष ध्यान में रखते हुए पुनर्निर्माण किया गया। उल्लेखनीय है कि अब तक इस प्रकार की सर्जरी में प्रायः सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट का उपयोग किया जाता रहा है, जिनसे संक्रमण, इम्प्लांट फेलियर, स्तन का सख्त हो जाना, दर्द और भविष्य में दोबारा सर्जरी की आवश्यकता जैसी जटिलताएँ सामने आती थीं।
डॉ. अजीत तिवारी के अनुसार, “मरीज के अपने शरीर से किए गए स्तन पुनर्निर्माण में इम्प्लांट से जुड़ी जटिलताओं की आशंका काफी कम हो जाती है। इससे स्तन अधिक प्राकृतिक दिखाई देता है, संवेदनशीलता बेहतर रहती है और लंबे समय तक सुरक्षित परिणाम मिलते हैं।” यह सर्जरी अत्यंत उच्च स्तर की विशेषज्ञता की मांग करती है, जिसमें गहन एनाटॉमी ज्ञान, माइक्रो-सर्जिकल स्किल्स और अत्यधिक सटीकता आवश्यक होती है। देश के गिने-चुने चिकित्सा केंद्रों में ही इस स्तर की उन्नत ब्रेस्ट कैंसर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी उपलब्ध है।
यह तकनीक विशेष रूप से युवा महिला रोगियों के लिए आशा की नई किरण है, जो कैंसर से मुक्ति के बाद भी सामान्य और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जीना चाहती हैं।
डाॅ अजीत तिवारी का मानना है कि रिकंस्ट्रक्टिव ब्रेस्ट सर्जरी केवल शारीरिक उपचार नहीं, बल्कि महिला के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और सामाजिक आत्मविश्वास से भी सीधे जुड़ी होती है। आधुनिक स्तन कैंसर उपचार अब जीवन रक्षा के साथ-साथ महिला की जीवन गुणवत्ता (Quality Of Life) को भी प्राथमिकता देता है।
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की यह उपलब्धि रोगी-केंद्रित, आधुनिक और मानवीय कैंसर उपचार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में उत्तराखंड की अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा और विश्वास का स्रोत बनेगी।

विजन 2047: विकसित राष्ट्र का लक्ष्य प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा विकसित उत्तराखंड का विजन: सीएम धामी

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सीएम धामी ने चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन -2047 में अधिकारियों को किया संबोधित

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस दो दिवसीय शिविर के माध्यम से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार की जाएगी। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र विकास से जुड़े सभी प्रमुख क्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। जिससे राज्य के भविष्य के लिए एक स्पष्ट, व्यवहारिक और समयबद्ध दिशा निर्धारित की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प तभी साकार हो सकता है जब देश का प्रत्येक राज्य समान रूप से विकसित हो। इसके लिए उत्तराखण्ड को भी अपने संसाधनों, क्षमताओं और विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की एक स्पष्ट और दीर्घकालिक दिशा तय करनी होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “विकसित भारत” का संकल्प किसी एक सरकार, किसी एक कार्यकाल या किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा व्यापक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, जिसमें भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, सामरिक तथा सांस्कृतिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प निहित है। इस विज़न की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें विकास को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे मानव केंद्रित, समावेशी और सतत बनाया गया है। विकसित भारत का अर्थ एक ऐसे भारत का निर्माण है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों, जहाँ शासन व्यवस्था पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति निर्माण से लेकर उसके क्रियान्वयन और अंतिम सफलता तक प्रशासन की सक्रियता, संवेदनशीलता और दक्षता ही ये तय होती है। इसलिए इस विज़न को साकार करने में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमारे प्रशासन को न केवल तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा, बल्कि प्रत्येक नीति, निर्णय और योजना को ‘लक्ष्य आधारित’ एवं ‘जन-केंद्रित’ दृष्टि से लागू करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आप लोग अपने कार्यों को केवल आदेश देने या मीटिंग करने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दायरे में आने वाले प्रत्येक कार्य को नवाचार, पारदर्शिता, समयबद्ध और परिणाम केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तत्परता और जवाबदेही के साथ पूर्ण करें।

सीएम धामी ने कहा कि आज हम विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का रोडमैप बना रहे हैं। इसका अर्थ केवल योजनाएं और नीतियां बनाने या लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें ये ये देखना होगा कि हमारी योजनाओं और नीतियों से आम नागरिकों के जीवन में क्या बदलाव आएगा। इसके लिए हमें, किसानों की आय वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार सृजन, महिलाओं के लिए समान अवसर जैसे मानकों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति ही विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत की वास्तविक कसौटी तय करेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के नाते हमारे सामने कुछ विशेष चुनौतियाँ भी हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों के भीतर अनेकों अवसर छिपे हुए हैं। यदि हम अपनी नीतियों और योजनाओं को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालें, तो उत्तराखण्ड इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित कर देश में विकास को नई दिशा दे सकता है। इसके लिए हमें तय करना होगा कि वर्ष 2047 में हमारा राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, तकनीक और सुशासन जैसे क्षेत्रों में किस स्तर तक पहुँचना चाहिए। साथ ही साथ विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर विजन 2047 को साकार करने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगामी पच्चीस वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमें “सोलो प्लेयर” वाली मानसिकता से ऊपर उठकर निकलकर “टीम उत्तराखंड” के रूप में कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिस स्थान से आपने अपनी सेवा शुरु की है वहां के विकास पर विशेष ध्यान दें, साथ ही जन जन की सरकार, जन जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाली जनसमस्याओं को डायरी में नोट करते हुए, उनके निराकरण करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखंड की नींव सुशासन, तकनीक एवं नवाचार और जन केंद्रित सतत एवं संतुलित विकास के तीन स्तंभों पर टिकी है। सुशासन का अर्थ केवल नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना नहीं बल्कि हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हर निर्णय समय पर हो, हर योजना पारदर्शी हो और हर अधिकारी अपने दायित्व के प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि हमें ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके शासन को और अधिक प्रभावी, तेज और पारदर्शी बनाना होगा। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और सीमांत गाँवों तक भी पहुँचे। इसके साथ ही, हमारी नीतियों और योजनाओं के केंद्र में आम नागरिकों का कल्याण सर्वाेपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे बनाए रखना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आपदा प्रबंधन को हमें विकास योजना का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

सीएम धामी ने कहा कि अधिकारियों को प्रत्येक योजना का स्पष्ट आउटपुट और आउटकम निर्धारित करना होगा। केवल रुपया व्यय हो जाना ही किसी योजना की सफलता का पैमाना नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपका प्रत्येक निर्णय केवल आज को प्रभावित नहीं करता, बल्कि आने वाले भविष्य की दिशा भी तय करता है। बतौर प्रशासनिक अधिकारी आपके निर्णय, कार्य और नीतियों से जनता के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, वही भविष्य में आपकी वास्तविक पहचान बनेंगे। इसलिए अपने दायित्वों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का अवसर मानकर निभाएँ। उन्होंने कहा कि कभी कभी देखने में आता है कि जनता की बात अनसुनी रह जाती है, कभी लालफीताशाही कार्यों में देरी लाती है ये स्थितियाँ प्रशासन पर जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड की ये यात्रा लंबी है, यदि हमारी दिशा सही रहेगी, हमारी नीति स्पष्ट रहेगी, हमारी नीयत साफ रहेगी और हमारा संकल्प अडिग रहेगा तो हम अपने लक्ष्य को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।

सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उद्घाटन सत्र के बाद भी काफी देर तक शामिल हुए। प्रथम सत्र में संबोधन के बाद, मुख्यमंत्रीधामी मंच के नीचे हॉल की प्रथम पंक्ति में बैठ गए। इस दौरान मंच पर विभिन्न विषयों पर मंथन और संवाद चलता रहा, सीएम पुष्कर सिंह धामी इस दौरान हॉल में बैठकर, परिचर्चा को सुनते रहे, साथ ही संवाद के प्रमुख बिंदुओं और सुझावों को नोट भी करते रहे।

इस अवसर पर सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग से प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल, आईएएस अधिकारी एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मौजूद थे।

Big Achievement: एसजीआरआर बिंदाल बना उत्तराखण्ड का पहला रियायंस जियो AI रेडी सर्टिफाइड स्कूल

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श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय जियो के संयुक्त तत्वावधान में बड़ी उपलब्धि

स्कूल के 100 से अधिक छात्रों को एक साथ सर्टिफिकेशन मिलने से हासिल हुई यह उपलब्धि

अब तक एसजीआरआर पब्लिक स्कूल बिंदाल के 500 से अधिक छात्र-छात्राएं हुईं पंजीकृत

देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय एवम् जियो के संयुक्त तत्वावधान में श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, बिंदाल ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करते हुए उत्तराखंड का पहला स्कूल बनने का गौरव प्राप्त किया है, जहां एक साथ 100 विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया। कोर्स पूर्ण करने के बाद विद्यार्थियों को यह उपलब्धि हासिल हुई, जिससे स्कूल और छात्रों दोनों का नाम रोशन हुआ है। यह प्रमाण पत्र रिलायंस जियो कंपनी की ओर से जारी किए गए हैं।

श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय ने यह पहल करते हुए पहले स्कूली शिक्षा और फिर उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को एआई इनेबल्ड बनाने की मुहिम शुरू की है। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय का यह उद्देश्य है कि एसजीआरआर ग्रुप के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं ए आई टैक्नीक से रूबरू हो सकें और आर्टिफिशियल इंटेलीजैंस की तकनीकों को समझ सकें। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसीडेंट श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने सभी छात्र-छात्राओं और अध्यापकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
इस एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत एसजीआरआर पब्लिक स्कूल, बिंदाल शाखा के अब तक 500 से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हो चुके हैं। प्रशिक्षण जियो यूनिवर्सिटी के अनुभवी एआई प्रोफेशनलों द्वारा दिया जा रहा है। खुले बाजार में इस कोर्स की कीमत लगभग 15 हजार रुपये है, लेकिन रिलायंस जियो इंफोकॉम द्वारा यह कोर्स विद्यार्थियों को पूरी तरह निःशुल्क कराया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद स्कूल को ‘एआई रेडी स्कूल’ का सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत गूगल जेमिनाई एआई द्वारा स्कूल के बच्चों और अध्यापकों को निःशुल्क एआई ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके साथ ही रिलायंस जियो इंफोकॉम की ओर से प्रत्येक जियो कस्टमर को गूगल जेमिनाई एआई टूल 18 माह के लिए मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 35,100 रुपये बताई जा रही है।
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में एसजीआरआर पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती गरिमा शर्मा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने प्रशिक्षण के पहले ही दिन 40 से अधिक अध्यापकों को इस एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम से जोड़ा, जिससे शिक्षक भी आधुनिक तकनीक से परिचित हो सकें और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।
रिलायंस जियो इंफोकॉम का सपना है कि देश के हर स्कूल को एआई इनेबल्ड बनाया जाए और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार किया जाए। इसी दिशा में इस अभियान की शुरुआत की गई है।
रिलायंस जियो इंफोकॉम उत्तराखंड के जनरल मैनेजर श्री सुशील कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि इस मुहिम की शुरुआत दिसंबर माह में की गई थी और अब तक 10 हज़ार स्कूलों को इस मुहिम से जोड़ा जा चुका है। लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश के हर स्कूल तक यह एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम पहुंचे।
यह चार सप्ताह का एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जिसमें स्कूल की लैब में प्रशिक्षण दिया जाता है और विद्यार्थी घर से ऑनलाइन क्विज भी कर सकते हैं। कक्षा 6 से 12 तक के छात्र-छात्राएं इस प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं। एसजीआरआर पब्लिक स्कूल, बिंदाल की यह पहल न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए भविष्य की शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।

Achievement: ग्राफिक एरा अस्पताल ने रचा चिकित्सा इतिहास, बिना ऑपरेशन बदला वृद्धा के दिल का वाल्व

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Achievement: ग्राफिक एरा अस्पताल ने रचा चिकित्सा इतिहास, बिना ऑपरेशन बदला वृद्धा के दिल का वाल्व

देहरादून। ग्राफिक एरा अस्पताल ने हृदय रोग चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 76 वर्षीय वृद्धा के दिल का वाल्व बिना चीर-फाड़ किए सफलतापूर्वक बदल दिया। यह उत्तराखंड और आसपास के राज्यों में अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक से मरीज की जान बचाई गई।

अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, मरीज वर्ष 2014 में ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान वाल्व बदलवा चुकी थीं, लेकिन करीब 11 वर्षों बाद वही वाल्व खराब हो गया था। पिछले छह महीनों से उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। सांस फूलना, पैरों में सूजन और हार्ट फेल्योर के लक्षणों के चलते उन्हें ग्राफिक एरा अस्पताल लाया गया।
हृदय रोग विभाग के एचओडी एवं वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राज प्रताप सिंह ने बताया कि मरीज की दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी संभव नहीं थी। वहीं, ट्रांसकैथिडर माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया में भी गंभीर जोखिम था, क्योंकि इससे दूसरा वाल्व बंद होने का खतरा था। ऐसे में मरीज की जान बचाने का एकमात्र विकल्प ‘लैम्पून प्रोसीजर’ अपनाना था।

विशेषज्ञ टीम ने पहले पुराने वाल्व को काटकर नया मार्ग बनाया और फिर पैर की नस के जरिए नया वाल्व स्थापित किया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी चीर-फाड़ के संपन्न हुई। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डॉ. राज प्रताप सिंह ने बताया कि इस तकनीक से वाल्व बदलने का यह पहला मामला है। देश में भी इस तरह के मामलों की संख्या बेहद कम है, जिससे यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस सफल प्रक्रिया में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु राणा और डॉ. अभिषेक, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. एस.पी. गौतम और डॉ. पराग कुमार, हृदय रोग के सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ अखिलेश पांडेय शामिल थे।

गौरतलब है कि ग्राफिक एरा अस्पताल पहले भी बिना ऑपरेशन हार्ट वाल्व बदलने, कुशिंग रोग के दुर्लभ मामले में बिना मस्तिष्क सर्जरी इलाज, छोटे बच्चे में तीसरा पेसमेकर लगाने और बंद आहार नली बिना ऑपरेशन खोलने जैसी कई जटिल चिकित्सा उपलब्धियां हासिल कर चुका है।

ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने इस ऐतिहासिक सफलता पर विशेषज्ञ टीम को बधाई देते हुए कहा कि मानव सेवा को मिशन मानकर ग्राफिक एरा अस्पताल अत्याधुनिक तकनीकों और अनुभवी चिकित्सकों के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं में लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है।

MDDA Action: अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए सख़्त, देहरादून–ऋषिकेश में सीलिंग और ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई

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बिना नक्शा मंजूरी निर्माणों पर सीलिंग,अवैध प्लॉटिंग पर MDDA का‌ बुलडोजर एक्शन

मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत अवैध निर्माणों और अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई निरंतर जारी है। प्राधिकरण द्वारा स्पष्ट किया गया है कि बिना मानचित्र स्वीकृति एवं नियमों के विरुद्ध किए जा रहे किसी भी निर्माण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में एमडीडीए की टीम द्वारा देहरादून एवं ऋषिकेश क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर चिन्हित अवैध निर्माणों एवं अवैध प्लॉटिंग पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान संबंधित निर्माणों को सील करने के साथ-साथ जहां आवश्यक हुआ, वहां ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया भी अपनाई गई।

ऋषिकेश क्षेत्र में निर्मल बाग बी-ब्लॉक मार्ग, लेन नंबर–10 के समीप किए जा रहे अवैध निर्माण पर प्राधिकरण की टीम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई की गई। निर्माण कार्य बिना आवश्यक अनुमति के किए जाने पर यह कार्रवाई की गई।

तुलसी देवी द्वारा ओल्ड पोस्ट ऑफिस, बनखंडी क्षेत्र, ऋषिकेश में किए जा रहे अवैध निर्माण को भी नियमों के उल्लंघन के चलते सील कर दिया गया। इसके अतिरिक्त ऋषिकेश क्षेत्र में सुनील सोनी द्वारा किए जा रहे अवैध बहुमंजिले भवन पर एमडीडीए द्वारा सख्त रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। यह भवन बिना स्वीकृत मानचित्र एवं नियमानुसार अनुमति के निर्माणाधीन था। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता अमित भारद्वाज, पूनम सकलानी सहित पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित रूप से संपन्न कराई जा सके।

देहरादून क्षेत्र में भी अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए फुरकान अन्य आदि द्वारा आसन विहार, हरभजवाला क्षेत्र में लगभग 20 से 25 बीघा भूमि पर की गई अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के क्रम में की गई। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता अभिजीत सिंह थलवाल एवं सुपरवाइजर मौके पर उपस्थित रहे। एमडीडीए द्वारा दोहराया गया कि अवैध प्लॉटिंग न केवल शहरी नियोजन को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भविष्य में गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न करती है। प्राधिकरण आम जनता से अपील करता है कि किसी भी प्रकार की भूमि खरीदने या निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति एवं मानचित्र स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें।प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी अवैध निर्माणों एवं प्लॉटिंग के विरुद्ध ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

*उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी जी का बयान*
उपाध्यक्ष, मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध एमडीडीए की कार्रवाई पूरी सख़्ती के साथ लगातार जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना स्वीकृत मानचित्र एवं नियमों के विरुद्ध किए जा रहे किसी भी निर्माण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अवैध प्लॉटिंग शहरी नियोजन, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि भूमि क्रय या निर्माण से पूर्व संबंधित प्राधिकरण से अनुमति अवश्य लें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

*सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान*
सचिव, मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि अवैध निर्माणों और प्लॉटिंग के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई नियमानुसार और चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की टीमें लगातार क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं और जहां भी अनियमितता पाई जा रही है, वहां तत्काल सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। आमजन के हितों की रक्षा एमडीडीए की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

CM धामी के नेतृत्व में डोईवाला क्षेत्र में सड़क नेटवर्क मजबूत: एमडीडीए के कार्यों से आमजन को मिलेगी राहत

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मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देहरादून शहर एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वार्डों और ग्राम क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं आंतरिक मार्गों के विकास से जुड़े कार्यों का आज स्थानीय विधायक बृजभूषण गैरोला द्वारा संबधित वार्डों के पार्षदों के साथ एमडीडीए अधिकारियों की मौजूदगी में शिलान्यास किया गया। विधायक ने कहा इन विकास कार्यों से स्थानीय नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा के साथ-साथ सुरक्षित और सुचारु यातायात का लाभ मिलेगा। डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में किए गए इन सड़क निर्माण कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों को मजबूत कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जिससे स्थानीय निवासियों, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और व्यापारियों को दैनिक आवागमन में सुविधा हो सके। विधायक डोईवाला विधानसभा बृजभूषण गैरोला के मार्गदर्शन में तथा क्षेत्रीय पार्षदों के सहयोग से इन विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर यथाशीघ्र गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जायेगा।

डोईवाला के वार्ड संख्या-08 अठुरवाला क्षेत्र में निर्मल डिमरी के आवास से दीपक पंवार के आवास तक सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। इसके साथ ही वार्ड संख्या-07 जोग्याणा में भी सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। इन कार्यों में स्थानीय पार्षद रमेश बिष्ट की सक्रिय भूमिका रही।

इसके अतिरिक्त डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बुल्लावाला मारखमग्रांट मार्ग पर सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। वार्ड संख्या-17 कुड़कावाला में हरजिंदर सिंह के आवास से खुशहाल सिंह के आवास तक सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। इन कार्यों में पार्षद विनीत राजपूत की सक्रिया भूमिका रही।

वार्ड संख्या-08 अठुरवाला के सुरकंडा विहार क्षेत्र में आंतरिक सड़क निर्माण कार्य का भी शिलान्यास किया गया। उक्त कार्य में पार्षद संदीप सिंह नेगी की भूमिका सराहनीय रही।

इसी क्रम में वार्ड संख्या-10 भानियावाला क्षेत्र में जगदम्बा चमोली के आवास से रौथाण मार्ट तक सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। इसी क्रम में वार्ड नंबर-10 बौराड़ी में निर्मल जुयाल के घर से शीशपाल नेगी के घर तक सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। वार्ड 10 की आंतरिक सड़कों के निर्माण कार्यों का भी शिलान्यास किया गया। इन सभी विकास कार्यों में पार्षद ईश्वर सिंह रौथाण द्वारा सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।

*उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी जी का बयान*
उपाध्यक्ष, बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देहरादून एवं आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एमडीडीए लगातार कार्य कर रहा है। डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न वार्डों में सड़क निर्माण कार्य आमजन की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। बेहतर सड़कों से आवागमन सुगम होगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और स्थानीय विकास को गति मिलेगी। प्राधिकरण का प्रयास है कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।

*सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान*
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि भविष्य में भी क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप सड़क, जल निकासी एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्य निरंतर जारी रहेंगे। एमडीडीए का लक्ष्य आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और टिकाऊ अधोसंरचना उपलब्ध कराना है, जिससे देहरादून शहर और आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

श्रीराम शर्मा आचार्य ने “व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण” के विचार को जन-जन तक पहुंचाया : अमित शाह

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हरिद्वार। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हरिद्वार में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष समारोह में प्रतिभाग किया। उन्होंने गायत्री परिवार द्वारा किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों की सराहना करते हुए आचार्य श्रीराम शर्मा के योगदान का स्मरण किया।

गृह मंत्री ने कहा कि श्रीराम शर्मा आचार्य ने सनातन धर्म में व्याप्त विकृतियों को दूर कर आध्यात्मिकता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा तथा समानता, संस्कृति, एकता और अखंडता के मूल्यों को सुदृढ़ किया। उन्होंने “व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण” के विचार को व्यवहार में उतारने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने आचार्य के संदेश “हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” को मानव कल्याण का मूल मंत्र बताते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

गृह मंत्री ने कहा कि बीते दस वर्षों में देश की कार्य-संस्कृति और सोच में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आया है। आज भारत को उसकी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और मूल्यों के संदर्भ में आदर भाव से देखा जा रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष जैसे युगपुरुषों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के उत्कर्ष से मानवता का उत्कर्ष सुनिश्चित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार एक वटवृक्ष के समान है, जो आध्यात्मिक चेतना का प्रचार-प्रसार करते हुए समाज को शांति और सकारात्मकता की छाया प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को नए स्वरूप में पुनः स्थापित कर रहा है और सनातन संस्कृति का यह विराट संदेश विश्व तक पहुँचे, इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पांड्या ने कहा कि यह संस्थान प्राचीन वेद, उपनिषद और गीता से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक तकनीक को आत्मसात कर शिक्षा, प्रशिक्षण और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला, राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री श्री दया शंकर सिंह, विधायक श्री मदन कौशिक सहित देश-विदेश से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।

यूसीसी दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन को लेकर तैयारियां तेज: सीडीओ ने किया कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण

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*देहरादून ।समान नागरिक संहिता दिवस (यूसीसी) पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने गुरुवार को संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम), नीबूंवाला, देहरादून में प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संबंधित नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम का आयोजन समयबद्ध, सुव्यवस्थित एवं गरिमामय ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी तथा सभी व्यवस्थाएं पूर्व निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण की जाएं।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगामी 27 जनवरी 2026 को ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह, नीबूंवाला, देहरादून में एक भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगे। कार्यक्रम में विधि महाविद्यालयों के छात्र, बार काउंसिल के प्रतिनिधि एवं स्थानीय बार एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारी भी सहभागिता करेंगे।

मुख्य विकास अधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को मंच, सभागार, साउंड सिस्टम, एलईडी स्क्रीन एवं टेंटेज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कार्यक्रम दिवस पर सूक्ष्म जलपान, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, परिवहन एवं स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समय पर सुनिश्चित करने हेतु संबंधित नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया गया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं वाहन पार्किंग की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह सहित विभिन्न व्यवस्थाओं से संबंधित नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।