Home Blog Page 94

काशीपुर किसान आत्महत्या की हो सीबीआई जांच आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को किया जाए निलम्बित – गोदियाल

0

काशीपुर किसान आत्महत्या की हो सीबीआई जांच आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हो निलम्बित किया जायः- गोदियाल

देहरादून 16 जनवरी:

जनपद उधमसिंहनगर के काशीपुर क्षेत्र के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की मौत के मामले में आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल एवं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कंाग्रेसजनों ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय से जुलूस निकालते हुए पुलिस मुख्यालय का घेराव कर किसान की मौत की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग की ।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सैकडों की संख्या में कांग्रेसजन प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय एकत्र हुए जहां से उन्होंने पुलिस मुख्यालय की ओर कूच किया तथा पुलिस मुख्यालय का घेराव करते हुए किसान आत्महत्या मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने को लेकर पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन दिया।
कंग्रेस पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि दिनाक 10 जनवरी 2026 को जनपद उधमसिंहनगर के काशीपुर क्षेत्र में ग्राम पैगा निवासी सुखवंत सिंह नामक किसान द्वारा पुलिस प्रताड़ना के चलते आत्महत्या किए जाने की अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक घटना सामने आई है। यह घटना न केवल अत्यंत गंभीर है, बल्कि क्षेत्र की आम जनता व किसानों में भय, असुरक्षा, असंतोष एवं आक्रोश का वातावरण भी उत्पन्न कर रही है। किसान की आत्महत्या के पीछे के कारण इंसानियत को झकझोर देने वाले हैं। मृतक किसान के परिजनों एवं स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त किसान द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के खिलाफ धोखाधड़ी करने वाले भू-माफियाओं को पुलिस द्वारा संरक्षण दिया जा रहा था तथा तहरीर देने वाले किसान को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी प्रकार राज्य पुलिस पर खनन माफियाओं को भी लगातार संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगते आ रहे है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्य में विगत लम्बे समय से कानून व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है तथा काशीपुर में किसान की आत्महत्या का मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। यह न केवल एक किसान की आत्महत्या का मामला है, अपितु राज्य सरकार और राज्य पुलिस प्रशासन के माथे पर कलंक है। पुलिस प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के अहंकार के आगे एक किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुआ तथा इस घटना से एक पूरा परिवार उजड़ गया। इस प्रकार के कृत्यों में पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता जनता को सोचने के लिए मजबूर करती है कि पुलिस कर्मी अपने परिवार के सुखचैन के लिए किसी के जीवन को खरीद रहे हैं तो यह राज्यवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसान द्वारा की गई धोखाधडी की शिकायत पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की बजाय उल्टे आरोपियों से पैसे लेकर शिकायत कर्ता किसान को ही प्रताडित करना और धमकाना शुरू किया जिसके लिए उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। किसान इस देश का अन्नदाता है और काशीपुर के पैगा ग्रामवासी किसान की आत्महत्या का मामला अत्यधिक संवेदनशील है। यदि इस मामले की गहन जांच नहीं होती, तो इससे आम जनता का कानून-व्यवस्था एवं प्रशासन पर विश्वास कमजोर होता है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि मृतक किसान द्वारा मृत्यु पूर्व घोषणा में जनपद उधमसिंहनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का नाम स्पष्ट रूप से इस आशय से लिया गया है कि इनकी भूमिका भू-माफियाओं के समर्थन में थी, जिस कारण मृतक ने अपनी जान दी। यह भी सोचनीय विषय है कि पुलिस विभाग द्वारा अभी तक उक्त आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पद से नहीं हटाया गया है तथा जिस वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा है, उसी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर पुलिस के दायित्वों की इतिश्री कर ली गई है। इससे हमें आशंका है कि उत्तराखंड पुलिस इस गंभीर मामले में संवेदनशीलता, निष्पक्षता एवं तत्परता से कार्रवाई करेगी तथा पीड़ित किसान को न्याय मिलेगा।

कार्यक्रम के उपरान्त प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल जिसमें नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक तिलकराज बेहड़, आदेश चौहान, ममता राकेश, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापडी, रवि बहादुर, विरेन्द्र जाति, जिला पचंायत अध्यक्ष श्रीमती सुखसविन्दर कौर, पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक राजकुमार, प्रदेश कोषाध्यक्ष आर्येन्द्र शर्मा, राजीव महर्षि, महामंत्री राजेन्द्र भंडारी, राजेन्द्र शाह, गोदावरी थापली ने पुलिस महानिदेशक को तीन मांगों से सम्बन्धित ज्ञापन प्रेषित किया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पुलिस महानिदेशक से मांग करते हुए कहा किः-
1. जनपद उधमसिंहनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाय।
2. किसान आत्महत्या मामले के सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाय।
3. आत्महत्या मामले की जांच सीबीआई से कराई जाय।

कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक तिलकराज बेहड़, आदेश चौहान, ममता राकेश, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापडी, रवि बहादुर, विरेन्द्र जाति, जिला पचंायत अध्यक्ष श्रीमती सुखसविन्दर कौर, पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक राजकुमार, प्रेमानन्द महाजन, प्रदेश कोषाध्यक्ष आर्येन्द्र शर्मा, महामंत्री राजेन्द्र भंडारी, राजीव महर्षि, विजय सारस्वत, अनुपम शर्मा, गोदावरी थापली, राजेन्द्र शाह, नवीन जोशी, महिला अध्यक्ष ज्योति रौतेला, किसान कांग्रेस अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह लाडी, पूर्व सैनिक अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी, अनुसूचित जाति अध्यक्ष मदन लाल, विरेन्द्र रावत, प्रभुलाल बहुगुणा, राजपाल खरोला, विरेन्द्र पोखरियाल, सुरेन्द्र रांगड, अभिनव थापर, अमरजीत ंिसह, शिवानी थपलियाल मिश्रा, नरेशानन्द नौटियाल, रॉबिन त्यागी, महेन्द्र सिंह नेगी, मानवेन्द्र सिह, टीकाराम पाण्डेय, पूरन ंिसह रावत, टीटू त्यागी, सुमेन्द्र बोरा, अश्विनी बहुगुणा, अमेन्द्र बिष्ट, यशपाल चौहान, ओमप्रकाश सती, शीशपाल बिष्ट, संदीप चमोली, कामेश्वर राणा, प्रदीप जोशी, महन्त विनय सारस्व्त, संजय शर्मा, जगदीश धीमान, नीनू सहगल, प्रशांत खंडूरी, सावित्री थापा, ऐतात खान, ललित भद्री, उर्मिला थपा, प्रणीता बडोनी, सागर मनवाल, मोहन काला, विजयपाल रावत, देवेन्द्र सिंह, आशा मनोरमा शर्मा, पुष्पा पंवार, निधि नेगी, सुन्दर लाल मुयाल, अनिल नेगी, सुलेमान अली, राजकुमार जायसवाल, अनुराधा तिवाडी, विरेन्द्र पंवार, गुल मोहम्मद, रघुवीर बिष्ट, विनीत प्रसाद भट्ट, बलवीर पंवार, सूरज क्षेत्री, महेश जोशी, नितिन बिष्ट, हुकम सिंह कठैत, स्वाति नेगी, आशीष सैनी, मदन कोली,

राजीव महर्षि
मीडिया विभाग
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी

पांवटा साहिब – बल्‍लूपुर फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना: सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण कदम

0

 

एनएच-07 कॉरिडोर से देहरादून को यातायात जाम से राहत, यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी और उत्तराखंड–हिमाचल के बीच सुदृढ़ संपर्क*
पांवटा साहिब–देहरादून कॉरिडोर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री, औद्योगिक तथा वाणिज्यिक वाहन आवागमन करते हैं। वर्तमान में देहरादून राजधानी एवं पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर कॉरिडोर से जुड़े पर्यटन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन भारी यातायात दबाव देखा जा रहा है, जिसके कारण अत्यधिक यात्रा समय, ईंधन की खपत और यातायात अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है।
बढ़ते यातायात दबाव, सीमित सड़क चौड़ाई, रिबन डेवलपमेंट तथा तीव्र शहरी विस्तार के कारण यह मार्ग लंबे समय से जाम एवं सड़क सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा था। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, भारत (एनएचएआई) द्वारा पांवटा साहिब – बल्‍लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (एनएच-07) को स्वीकृति प्रदान की गई।
*परियोजना का संक्षिप्त विवरण*
पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर परियोजना के अंतर्गत एनएच-07 के कुल 44.800 किलोमीटर लंबे खंड का उन्नयन एवं चार-लेनीकरण किया जा रहा है, जो पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) से प्रारंभ होकर बल्‍लूपुर चौक, देहरादून (उत्तराखंड) तक विस्तारित है। यह मार्ग दैनिक यात्रियों, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक यातायात के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है तथा चारधाम यात्रा के प्रथम धाम, यमुनोत्री, तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है।
मौजूदा पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर सड़क की कुल लंबाई लगभग 52 किलोमीटर है, जो किमी 97.00 (पांवटा साहिब) से किमी 148.80 (बल्‍लूपुर चौक, देहरादून) तक फैली हुई है। प्रस्तावित चार-लेन परियोजना के अंतर्गत लगभग 25 किलोमीटर ग्रीनफील्ड हाईवे विकसित किया गया है, जो पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुधोवाला जैसे भीड़भाड़ वाले कस्बों को बायपास करता है।
इस ग्रीनफील्ड बायपास से मार्ग की लंबाई में लगभग 7 किलोमीटर की कमी आई है, जिससे यात्रा समय एवं ईंधन खपत में उल्लेखनीय बचत होगी और सड़क उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित एवं सुगम ड्राइविंग अनुभव प्राप्त होगा।
पूर्व में दो-लेन सड़क बढ़ते यातायात दबाव एवं सुरक्षा सीमाओं के कारण अपर्याप्त हो चुकी थी। उन्नत चार-लेन विन्यास को उच्च क्षमता, बेहतर सड़क सुरक्षा और दीर्घकालिक यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।
*दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर से एकीकरण*
यातायात जाम की समस्या के समाधान हेतु एनएचएआई द्वारा इस कॉरिडोर के उन्नयन के साथ-साथ एक ग्रीनफ़ील्ड हाईवे का भी विकास किया जा रहा है, जो दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर का विस्तार होगा। यह इकोनोमिक कॉरिडोर वर्तमान में उन्नत अवस्था में है। इस एकीकरण से देहरादून शहर में प्रवेश करने वाले थ्रू-ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे शहर को यातायात जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
*परियोजना विभाजन एवं लागत*
परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) के अंतर्गत दो पैकेजों में क्रियान्वित किया जा रहा है—
*पैकेज-I: पांवटा साहिब से मेदनीपुर (18.700 किमी)*
इस पैकेज की लागत ₹553.21 करोड़ है। इसके अंतर्गत 1,175 मीटर लंबा चार-लेन यमुना नदी पुल निर्मित किया गया है, जो परियोजना की एक प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धि है।
*पैकेज-II: मेदनीपुर से बल्‍लूपुर, देहरादून (26.100 किमी)*
इस पैकेज की लागत ₹1,093 करोड़ है। इसमें अनेक अंडरपास, सर्विस रोड तथा शहरी बायपास खंड शामिल हैं, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात सुचारु रूप से संचालित हो सके।
परियोजना की कुल लागत ₹1,646.21 करोड़ है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति एवं यूटिलिटी शिफ्टिंग की लागत भी सम्मिलित है। परियोजना से कुल 25 गांव प्रभावित हैं, जिनमें 21 गांव उत्तराखंड तथा 4 गांव हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं।

*वर्तमान स्थिति एवं यातायात प्रबंधन*
दोनों पैकेजों के अंतर्गत सभी प्रमुख पुल, अंडरपास एवं संरचनात्मक कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। सीमित हिस्सों में आरई वॉल (Reinforced Earth Wall) एवं अंतिम चरण का पेवमेंट कार्य प्रगति पर है, जिसे फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने हेतु सड़क सुरक्षा ऑडिट के उपरांत परियोजना राजमार्ग के पूर्ण किए गए 31.50 किलोमीटर खंड पर वाणिज्यिक संचालन के लिए यातायात प्रारंभ कर दिया गया है।
*प्रमुख इंजीनियरिंग एवं सड़क सुरक्षा विशेषताएं*
परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक एवं उच्च स्तरीय सड़क सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
• 1,175 मीटर लंबा चार-लेन यमुना नदी पुल
• 105 मीटर लंबा चार-लेन आसन नदी पुल
• ऊंचे तटबंधों पर थ्री बीम (Thrie Beam) क्रैश बैरियर
• हेडलाइट ग्लेयर को रोकने हेतु एंटी-ग्लेयर स्क्रीन
• 24×7 PTZ कैमरों के माध्यम से निगरानी
• उन्नत साइनएज, रोड मार्किंग एवं आधुनिक प्रकाश व्यवस्था
• बिटुमिन की खपत कम करने हेतु टेंसर तकनीक का उपयोग
• ढलान सुरक्षा एवं व्यापक पौधारोपण द्वारा हरित एवं टिकाऊ कॉरिडोर का विकास
परियोजना पर स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराए गए हैं तथा सभी अनुशंसाओं को लागू किया गया है।
*जनसामान्य को मिलने वाले लाभ एवं भविष्य की कनेक्टिविटी*
परियोजना के पूर्ण होने के उपरांत—
• पांवटा साहिब से देहरादून का यात्रा समय लगभग 2 घंटे से घटकर करीब 35 मिनट रह जाएगा
• देहरादून शहर को यातायात जाम से बड़ी राहत मिलेगी
• दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर से बेहतर संपर्क स्थापित होगा
• पर्यटन, व्यापार, उद्योग एवं रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहन मिलेगा
• स्थानीय एवं अंतरराज्यीय यातायात को सर्वमौसम, विश्वसनीय कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी
दीर्घकाल में यह कॉरिडोर प्रस्तावित देहरादून–मसूरी कनेक्टिविटी से भी जुड़ेगा, जिससे मसूरी के लिए सीधे आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी और शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव कम होगा।
एनएचएआई सुरक्षित, स्थायी एवं भविष्य-उन्मुख राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। पांवटा साहिब – बल्‍लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करने, सड़क सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने तथा आमजन को सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी उपलब्धि के रूप में स्थापित होगी।

सीएम धामी ने वर्चुअल रूप से IIT रूड़की में हिमालयी सुरक्षा और आपदा जोखिम पर आयोजित कार्यशाला में किया प्रतिभाग 

0

कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, आपदा-प्रतिक्रिया एजेंसियों तथा शिक्षाविदों ने लिया भाग

कार्यशाला को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्चुअल रूप से किया गया गरिमामंडित

– उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र सहित आपदा-प्रवण क्षेत्रों में तैयारी और लचीलेपन को सुदृढ़ करने पर हुआ विचार-विमर्श

– “उत्तराखंड के लिए विज्ञान-आधारित और प्रौद्योगिकी-सक्षम आपदा-तैयारी विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है- सीएम धामी

शुक्रवार को आईआईटी रुड़की के ओ.पी. जैन सभागार में श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की द्वारा आपदा जोखिम लचीलापन एवं न्यूनीकरण विषय पर एक-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, आपदा-प्रतिक्रिया एजेंसियों तथा शिक्षाविदों ने भाग लिया और विशेष रूप से उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र सहित आपदा-प्रवण क्षेत्रों में तैयारी और लचीलेपन को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्चुअल रूप से गरिमामंडित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने की। मंचासीन विशिष्ट अतिथियों में प्रो. यू. पी. सिंह, उप निदेशक, आईआईटी रुड़की; प्रो. संदीप सिंह, विभागाध्यक्ष, पृथ्वी विज्ञान विभाग, आईआईटी रुड़की एवं कार्यशाला के संयोजक; श्री भगवती प्रसाद राघव जी, क्षेत्रीय संयोजक (उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश) एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, प्रज्ञा प्रवाह; उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी; तथा राष्ट्रीय आपदा-प्रतिक्रिया एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।

अपने स्वागत संबोधन में कार्यशाला की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए प्रो. संदीप सिंह ने आपदा प्रबंधन को केवल प्रतिक्रिया-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर पूर्वानुमान-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम लचीलापन अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा इसमें भू – विज्ञान, रियल-टाइम डेटा और अंतर्विषयी शोध की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने हिमालय-केंद्रित अनुसंधान और ज्ञान प्रसार को आगे बढ़ाने में श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान के साथ सहयोग को भी सराहा। इस दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए, आईआईटी रुड़की ने डेढ़ शताब्दी से अधिक की इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक उत्कृष्टता पर आधारित अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके अंतर्गत भूकंप विज्ञान, भूस्खलन एवं बाढ़ जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ, आपदा-रोधी अवसंरचना तथा क्षमता-निर्माण में सतत योगदान दिया जा रहा है, जो उत्तराखंड और देश के अन्य आपदा-प्रवण क्षेत्रों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने इस बात पर बल दिया कि आपदा-लचीलापन को सतत विकास की आधारशिला के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना तथा सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों जैसे वैश्विक ढाँचों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि आईआईटी रुड़की सरकार, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर स्केलेबल प्रौद्योगिकियों की तैनाती, अंतर्विषयी अनुसंधान को बढ़ावा देने और आपदा-रोधी अवसंरचना एवं समुदायों के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

“आईआईटी रुड़की की जिम्मेदारी केवल ज्ञान सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान के प्रभावी अनुप्रयोग तक विस्तारित है। उन्नत विज्ञान, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और नीतिगत सहभागिता को एकीकृत करते हुए, हम उत्तराखंड और देश को आपदा-प्रतिक्रिया से दीर्घकालिक लचीलेपन की ओर अग्रसर करने के साथ-साथ जोखिम न्यूनीकरण में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं में भी योगदान देना चाहते हैं,” प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा।

अपने ऑनलाइन संबोधन के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री धामी ने उत्तराखंड की भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, हिमस्खलन और वनाग्नि जैसी आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को रेखांकित किया और राहत-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर विकास नियोजन में अंतर्निहित, एकीकृत और प्रौद्योगिकी-आधारित आपदा-लचीलापन अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से भूकंप प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, एआई-आधारित पूर्वानुमान, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस-आधारित मॉडलिंग तथा नीति-निर्माण और जमीनी क्रियान्वयन में वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्र में आईआईटी रुड़की के राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।

अपने संबोधन में सीएम श्री धामी ने कहा- “उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए विज्ञान-आधारित और प्रौद्योगिकी-सक्षम आपदा-तैयारी कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। आईआईटी रुड़की प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, वैज्ञानिक मानचित्रण और क्षमता-निर्माण को सुदृढ़ करने में एक प्रमुख राष्ट्रीय भागीदार के रूप में उभरा है, और राज्य सरकार एमओयू-आधारित सहयोग को और गहन करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है, ताकि शोध के परिणाम वास्तविक समय में जीवन और आजीविका की सुरक्षा में परिवर्तित हो सकें,”

विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए श्री भगवती प्रसाद राघव जी ने आपदा-तैयारी में सामूहिक सामाजिक सहभागिता, नैतिक नेतृत्व और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया, जो प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों को सामाजिक जागरूकता और संस्थागत समन्वय से पूरक बनाता है।

“वास्तविक लचीलापन तब उभरता है जब प्रौद्योगिकी, नीति और सामुदायिक कार्रवाई एक साथ आती हैं। इस प्रकार की कार्यशालाएँ वैज्ञानिक क्षमता को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संरेखित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं,” श्री भगवती प्रसाद राघव जी, क्षेत्रीय संयोजक (उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश), प्रज्ञा प्रवाह ने कहा।
तकनीकी सत्रों के अंतर्गत विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ “प्रतिक्रिया से लचीलेपन की ओर: प्रौद्योगिकी, नीति और सामुदायिक कार्रवाई के माध्यम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ करना” विषय पर एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई। इन सत्रों में अग्रणी वैज्ञानिकों, वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान के निदेशक, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के वरिष्ठ अधिकारियों, रक्षा इंजीनियरिंग प्रतिष्ठानों तथा राष्ट्रीय शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चाओं का केंद्र प्रारंभिक चेतावनी प्रसार, पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा-रोधी अवसंरचना, जलवायु-संबद्ध आपदा जोखिम और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र रहे। कार्यशाला का समापन आईआईटी रुड़की द्वारा सहयोगात्मक अनुसंधान, पायलट परियोजनाओं, क्षमता-निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु नीतिगत समर्थन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के साथ हुआ, जिससे उत्तराखंड में लचीलापन सुदृढ़ हो, राष्ट्रीय तैयारी में योगदान मिले और वैश्विक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से अधिक सुरक्षित एवं लचीले समाजों का निर्माण हो सके।

कार्यशाला में एनआईएच, सीएसआईआर–सीबीआरआई, डब्ल्यूआईएचजी, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, जीबीपीआईईटी, आईसीएफएआई विश्वविद्यालय, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, एनआईएचई और जेबीआईटी देहरादून सहित प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ नेतृत्व एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसके साथ ही एसडीआरएफ और भारतीय सेना (बीईजी एंड सेंटर, रुड़की) के वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता ने आपदा-लचीलापन पर वैज्ञानिक, नीतिगत और परिचालन दृष्टिकोण से चर्चाओं को और समृद्ध किया। कार्यक्रम का समापन प्रो. यू. पी. सिंह, उप निदेशक, आईआईटी रुड़की के संबोधन के साथ हुआ।

कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन स्टॉल भी शामिल थे, जिनमें आपदा तैयारी हेतु एआई-आधारित भीड़ निगरानी और वीडियो एनालिटिक्स (पारिमित्रा प्रा. लि.); लचीली विद्युत प्रणालियों के लिए सोडियम-आयन बैटरी-आधारित ऊर्जा भंडारण समाधान (इंडी एनर्जी); बाढ़ निगरानी के लिए नॉन-कॉन्टैक्ट जल-स्तर मापन प्रणालियाँ; खतरा मानचित्रण और जोखिम आकलन के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियाँ (भूमिकैम प्रा. लि., सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी रुड़की); तथा सिसमिक हैजार्ड एंड रिस्क इंवेस्टिगेशन प्राइवेट लिमिटेड (एसएचआरआई) द्वारा अपनी एआई भागीदार कंपनी NanoAI के सहयोग से विकसित उन्नत एवं स्वदेशी आपदा जोखिम न्यूनीकरण तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। सामूहिक रूप से, इन प्रदर्शनों ने प्रारंभिक चेतावनी, अवसंरचना लचीलापन तथा आपातकालीन तैयारी को सुदृढ़ करने वाले व्यावहारिक और स्केलेबल नवाचारों को उजागर किया।इन प्रदर्शनों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण, अवसंरचना लचीलापन और आपातकालीन तैयारी को सशक्त बनाने वाली व्यावहारिक और स्केलेबल नवाचारों को उजागर किया।

उत्तरांचल प्रेस क्लब की नवनियुक्त कार्यकारिणी ने डीएम सविन बांसल से की मुलाकात

0

 

देहरादून, दिनांक 16 जनवरी 2026, उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष्य अजय राणा ने प्रेस क्लब की नवनियुक्त कार्यकारिणी संग जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल से शिष्टाचार भेंट की। भेंट के दौरान नवनियुक्त कार्यकारिणी ने जिले में पत्रकारों के हितों के संरक्षण, उनकी सुरक्षा एवं कार्यस्थितियों को सुदृढ़ करने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
कार्यकारिणी ने जिलाधिकारी के समक्ष यह मांग प्रमुखता से रखी कि पत्रकारिता के नाम पर गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों/समूहों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और वास्तविक पत्रकारों की साख प्रभावित न हो। साथ ही, पत्रकारों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने उत्तरांचल प्रेस क्लब की नवनियुक्त कार्यकारिणी को शुभकामनाएं देते हुए आश्वस्त किया कि पत्रकारों के हितों के संरक्षण हेतु प्रशासन द्वारा प्रभावी और व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, जिम्मेदार और तथ्यपरक पत्रकारिता लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। साथ ही, उन्होंने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं शासन-प्रशासन द्वारा किए जा रहे जनहितकारी कार्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार में मीडिया से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
भेंट सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई तथा भविष्य में प्रशासन और प्रेस क्लब के बीच समन्वय एवं सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की गई।
इस अवसर पर उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजय राणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेंद्र सिंह नेगी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सोबन सिंह गुसाईं, महामंत्री योगेश सेमवाल, संयुक्त मंत्री शिवेश शर्मा, कोषाध्यक्ष मनीष डंगवाल, संप्रेक्षक विजय जोशी सहित वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन लखेड़ा, जयप्रकाश जोशी, द्वारिका थपलियाल,सुलोचना पयाल एवं रश्मि खत्री उपस्थित रहे।
—0—

सुआखोली में प्रशासन गांव की ओर के तहत बहुउद्देशीय शिविरः 611 लाभार्थियों को मिला सेवाओं का लाभ

0

प्रशासन गांव की ओरः न्याय पंचायत सुआखोली में कैबिनेट मंत्री ने सुनी जन समस्याएं, 33 में से 14 शिकायतों का मौके पर निस्तारण’*

*शिविर में बड़ी सौगातः किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर 02 पावर वीडर*

*शिविर में त्वरित सेवा, 02 वृद्धावस्था पेंशन, 05 दिव्यांग प्रमाण पत्र, 07 आयुष्मान, 55 आधार कार्ड अपडेशन मौके पर,*

*वयोश्री योजना के तहत 52 बुजुर्गों को मिले 206 सहायक उपकरण*

*जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान से जनता को मिल रहा त्वरित समाधान- गणेश जोशी*

*देहरादून।
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को रायपुर ब्लॉक के दूरस्थ न्याय पंचायत सुआखोली में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 33 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 14 शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया।

कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से दो महिलाओं को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट तथा पांच लाभार्थियों को किशोरी किट प्रदान की। कृषि विभाग के माध्यम से 80 प्रतिशत अनुदान पर दो पावर वीडर तथा स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से आशा कार्यकत्रियों को जैकेट प्रदान की।

  1. शिविर में मौके पर ही 05 दिव्यांग प्रमाण पत्र, 07 आयुष्मान कार्ड तथा 55 आधार कार्ड अद्यतन किए गए। समाज कल्याण विभाग द्वारा वयोश्री योजना के अंतर्गत 52 वरिष्ठ नागरिकों को कुल 206 सहायक उपकरण निःशुल्क वितरित किए गए। साथ ही, दो लाभार्थियों की वृद्धावस्था पेंशन भी मौके पर ही स्वीकृत की गई। इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा ग्रामीणों को केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।

कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि जनता का हित सर्वाेपरि है तथा जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर मौके पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान की शुरुआत के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों के माध्यम से जहां एक ओर ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उनकी समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इसका नाम परिवर्तित कर VB—G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) किया गया है। योजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत 100 कार्यदिवस निर्धारित थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 125 कार्यदिवस कर दिया गया है। साथ ही, पहले 15 दिनों में भुगतान की व्यवस्था थी, जिसे संशोधित करते हुए अब साप्ताहिक भुगतान प्रणाली लागू की गई है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा VB—G RAM G योजना को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के उद्देश्य से लागू किया गया है, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनहित में निरंतर सकारात्मक एवं प्रभावी कार्य कर रही है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि शिविर में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इस दौरान 32 शिकायतों में से 14 शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया।

शिविर के दौरान ग्रामीणों द्वारा विभिन्न जनसमस्याएँ रखी गईं। सुआखोली में पार्किंग व्यवस्था, बैंक शाखा एवं एटीएम स्थापना, ग्राम नालीकला में सामुदायिक भवन एवं आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना तथा ग्राम मोटीधार में आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल मार्गों के सुधारीकरण एवं झूलते विद्युत तारों व पोलों को स्थानांतरित किए जाने की मांग प्रमुख रही।

ग्रामीणों ने मोटीधार-ल्वारीगढ़, मोटीधार-मसराना, कालीगढ़-दुर्मा एवं सुआखोली-नालीकला मोटर मार्गों के निर्माण में हो रही देरी तथा चमासारी मोटर मार्ग का मलवा अन्य संपर्क मार्गों पर आने की समस्या भी उठाई। इसके साथ ही चामासारी पम्पिंग योजना से पेयजल आपूर्ति प्रारंभ न होने की शिकायत दर्ज की गई। जल संस्थान द्वारा अवगत कराया गया कि आपदा से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन के सुधारीकरण हेतु आंगणन तैयार कर लिया गया है। चामासारी वन क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण नए खालों के बनने से खेतों में पानी आने की शिकायत पर वन एवं कृषि विभाग को त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए। शिविर के दौरान ग्रामीणों की अन्य समस्याओं का भी मौके पर ही समाधान किया गया।

बहुउद्देशीय शिविर में कुल 611 लोगों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 63, होम्योपैथिक विभाग द्वारा 23 तथा आयुर्वेद विभाग द्वारा 35 लोगों की स्वास्थ्य जाँच कर निःशुल्क दवाइयाँ वितरित की गईं। पशुपालन विभाग ने 05 कृषकों को पशु औषधियां उपलब्ध कराईं। राजस्व विभाग द्वारा आय, हैसियत, चरित्र प्रमाण पत्र एवं प्रधानमंत्री किसान योजना से संबंधित कुल 109 प्रमाण पत्र जारी किए गए। कृषि विभाग द्वारा 08 तथा उद्यान विभाग द्वारा 37 किसानों को कृषि यंत्र, बीज एवं पीएम किसान निधि का लाभ प्रदान किया गया। समाज कल्याण विभाग द्वारा वयोश्री योजना के अंतर्गत 52 वरिष्ठ नागरिकों को 206 सहायक उपकरण निशुल्क वितरित के साथ 02 लोगों की वृद्धावस्था पेंशन मौके पर स्वीकृत की गई। जिला पूर्ति विभाग द्वारा 16 राशन कार्ड धारकों की केवाईसी कराई गई। इसके अतिरिक्त पंचायती राज द्वारा किसान, दिव्यांग, विधवा पेंशन व परिवार रजिस्टर के 65, मत्स्य 15, एनआरएलएम के अंतर्गत 04, विद्युत विभाग के 11, उरेडा 40 तथा डेयरी 30 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्य मंत्री डा. देवेन्द्र वसीम, मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, जिप सदस्य वीर सिंह चौहान, मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल, सिल्ला क्षेत्र पंचायत सदस्य रामकली, बुरासखंडा क्षेत्र पंचायत सदस्य अंशिका, ग्राम प्रधान बुरासखंडा पूनम, ग्राम प्रधान नालीकला अरविन्द राणा, ग्राम प्रधान मोटीधार प्रेम कोली, ग्राम प्रधान सिल्ला मगन उनियाल, ग्राम प्रधान क्यारा रविन्द्र सिंह अन्य जनप्रतिनिधियों सहित मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, खंड विकास अधिकारी अपर्णा ढौंडियाल, एबीडीओ सुनील उनियाल, ई-डिस्ट्रक्ट मैनेजर हरेन्द्र सिंह एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

बड़ी खबर: धामी कैबिनेट में कई अहम प्रस्तावों पर लगी मोहर, उपनल कर्मियों को दी सौगात

0

 

बैठक में निर्णय लिया गया कि 2015 से पहले नियुक्त उपनल कर्मियों को समान वेतन, 4 जिलों में बनेंगे 6 विशेष न्यायालय

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज सचिवालय में कैबिनेट की अहम बैठक संपन्न हुई जिसमें कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। बैठक में कर्मचारियों और न्यायिक ढांचे से जुड़े फैसलों को खास महत्व दिया गया। इसके साथ ही उपनल कर्मचारी को लेकर हम निर्णय लिया गया।

करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में कुल 19 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें उपनल कार्मिकों और न्यायालयों से जुड़े निर्णय प्रमुख रहे।

कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए वर्ष 2015 से पहले नियुक्त किए गए उपनल कार्मिकों को समान कार्य के बदले समान वेतन देने का निर्णय लिया है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 7000 उपनल कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर अब अंतिम निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपनल के तहत नियुक्तियों में पूर्व सैनिकों (एक्स-सर्विसमैन) को पहले की तरह प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि उपनल की मूल भावना के तहत पूर्व सैनिकों के हित सुरक्षित रहेंगे।

न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने 4 जिलों में 6 विशेष न्यायालय स्थापित करने को मंजूरी दी है। इन न्यायालयों के संचालन के लिए 7 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) और 9 एसीजेएम (ACJM) के पद सृजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है।

इस दौरान कैबिनेट बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत और सौरभ बहुगुणा बैठक में मौजूद रहे। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में उपस्थिति रही। सभी मंत्रियों ने प्रस्तावों पर चर्चा में हिस्सा लिया।

उत्तराखंड शासन एवं आईटीबीपी के मध्य स्वस्थ सीमा अभियान के अंतर्गत एक हुआ MoU

0

सुदृढ़:  सीमावर्ती गांवों में सुरक्षा और स्थायित्व को भी देगा बढ़ावा  : मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड शासन एवं भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के मध्य स्वस्थ सीमा अभियान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा भी उपस्थित रहे।

इस एमओयू का उद्देश्य पिथौरागढ़, चमोली एवं उत्तरकाशी जनपदों के अंतर्गत स्थित 108 सीमावर्ती गांवों में निवासरत नागरिक आबादी को एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह अभियान चरण–1 के रूप में प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दुर्गम एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुनिश्चित किया जाएगा।

एमओयू के तहत भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), मुख्यालय उत्तरी सीमांत, देहरादून को प्रथम पक्ष तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड सरकार को द्वितीय पक्ष के रूप में नामित किया गया है | समझौते के अनुसार, आईटीबीपी द्वारा योग्य चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ तथा उपलब्ध एमआई रूम एवं टेली-मेडिसिन सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीमावर्ती गांवों का नियमित भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। साथ ही लाभार्थियों के मेडिकल हेल्थ कार्ड/रिकॉर्ड का रख-रखाव एवं उपकरणों, दवाइयों तथा उपभोग्य सामग्रियों का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।

वहीं उत्तराखंड सरकार द्वारा संबंधित गांवों के जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक चिकित्सा उपकरण प्रदान किए जाएंगे। उपभोग के आधार पर प्रत्येक छह माह में दवाइयों एवं अन्य सामग्रियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। आपातकालीन परिस्थितियों में निकासी, दूरसंचार सहायता तथा उपकरणों के स्वामित्व एवं आवश्यक प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार द्वारा निभाई जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि स्वस्थ सीमा अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। यह न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सीमावर्ती गांवों में विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह एमओयू उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर आईटीबीपी अधिकारियों ने जानकारी दी कि आई टी बी पी एवं उत्तराखंड सरकार के मध्य में पूर्व में स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति हेतु किए गए एमओयू की वर्तमान स्थिति के अनुसार नवंबर 2024 से 25 प्रतिशत आपूर्ति ट्रायल आधार पर तथा मार्च 2025 से 100 प्रतिशत आपूर्ति प्रारंभ की गई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जीवित भेड़/बकरी, जीवित मुर्गा, हिमालयन ट्राउट मछली, ताजा दूध, पनीर एवं टीपीएम जैसे उत्पादों की खरीद विभिन्न सहकारी संस्थाओं के माध्यम से की जा रही है। अब तक लगभग 3,79,650.23 किलोग्राम एवं 3,25,318.72 लीटर उत्पादों की खरीद की जा चुकी है, जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹11.94 करोड़ से अधिक है। इस पहल से राज्य के पशुपालकों, मत्स्य पालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है, साथ ही स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायता मिल रही है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय नागरिकों को आजीविका से जोड़ने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में स्थायित्व सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में वाइब्रेट / बॉर्डर ग्रामों से वर्ष 2026 के लिए स्थानीय उत्पादों की प्रस्तावित खरीद का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसके अंतर्गत जीवित भेड़/बकरी की 4,00,000 किलोग्राम मात्रा की खरीद 13 करोड़ रुपये में, जीवित मुर्गे की 2,50,000 किलोग्राम खरीद 4 करोड़ रुपये में तथा हिमालयन ट्राउट मछली की 82,000 किलोग्राम खरीद 3.90 करोड़ रुपये में प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त 21,302 किलोग्राम पनीर की खरीद 0.79 करोड़ रुपये, 4,73,532 लीटर ताजे दूध की खरीद 3.3 करोड़ रुपये तथा 1,40,018 लीटर टीपीएस की खरीद 1.5 करोड़ रुपये में की जाएगी। MoU के उपरांत 9,85,391 किलोग्राम सब्जियों की खरीद 2.77 करोड़ रुपये तथा 6,20,228 किलोग्राम फलों की खरीद 3.50 करोड़ रुपये अनुमानित है। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 7,53,302 किलोग्राम, 6,13,550 लीटर तथा MoU के उपरांत 16,05,619 किलोग्राम उत्पादों की खरीद की जाएगी, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 32.76 करोड़ रुपये है।

एमओयू एवं प्रस्तावित समझौतों के अंतर्गत, स्थानीय पशुपालकों से नॉन-वेज उत्पादों की सीधी खरीद प्रक्रिया को सुदृढ़ करने हेतु समझौता किया जाना प्रस्तावित है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका समाप्त हो सके और उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो। इसके साथ ही उत्तराखंड टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ किए गए हेलीपैड समझौते के अंतर्गत अब तक कुल 221 हेली लैंडिंग सफलतापूर्वक कराई जा चुकी हैं, जिससे सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है।

भविष्य में किए जाने वाले अन्य समझौतों के तहत, भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा उत्तराखंड राज्य में प्रथम चरण में 108 सीमावर्ती गांवों की पहचान की गई है। इन गांवों में पब्लिक हेल्थ सेंटर (पीएचसी) एवं पशु चिकित्सा केंद्रों की दूरी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्थानीय किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु स्थानीय फल एवं सब्जियों की खरीद के लिए एमओयू किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही राज्य की सहकारी चीनी मिलों से उत्तम गुणवत्ता की चीनी की खरीद हेतु भी समझौता प्रस्तावित है। दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित एवं प्रभावी आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आईटीबीपी द्वारा UCADA हेलीकॉप्टर सेवाओं के उपयोग हेतु एमओयू किया जाना भी प्रस्तावित है।

सीएम धामी ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को प्रभावी रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को व्यवहारिक धरातल पर साकार कर रही है। Point to Point Model के माध्यम से किसानों से सीधी खरीद सुनिश्चित की गई है, जिससे 550 से अधिक सीमावर्ती निवासी लाभान्वित हुए हैं और ठेकेदार एवं दलाल प्रणाली को पूर्णतः समाप्त करते हुए किसी भी प्रकार के middle man की भूमिका नहीं रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है तथा पूरे वर्ष ऑर्गेनिक, ताज़ी एवं निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिसमें बरसात एवं सर्दियों जैसे कठिन मौसम भी शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले नॉन-वेज, फल, सब्ज़ी एवं दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता से न केवल उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, बल्कि उत्पादकों की आय में भी वृद्धि हुई है।इसके साथ ही यह पहल रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध हो रही है, क्योंकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह व्यवस्था अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है। समग्र रूप से यह पहल 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में से 10 लक्ष्यों की सफल प्राप्ति में योगदान देती है, जो इसे सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से एक प्रभावशाली और सतत मॉडल बनाती है।

इस अवसर पर सचिव डॉ बी वी आर सी पुरुषोत्तम, आई जी आईटीबीपी श्री संजय गुंज्याल व आईटीबीपी के अधिकारी उपस्थित रहे |

गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर डीएम ने ली महत्वपूर्ण बैठक: विभागों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश 

0

 

देहरादून । जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने गणतंत्र दिवस को गरिमामय एवं सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराने हेतु सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ चाक-चौबंद व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी शासकीय कार्यालयों में प्रातः 9ः30 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम परेड ग्राउंड में माननीय राज्यपाल द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को मुख्य कार्यक्रम स्थल पर मंच निर्माण, बैरिकेडिंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। विद्युत विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक प्रबंध करने को कहा गया। पेयजल व्यवस्था के लिए संबंधित विभाग को समुचित इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नगर निगम को कार्यक्रम स्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में सफाई एवं स्वच्छता की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। एमडीडीए को शहर के प्रमुख स्थलों एवं शासकीय भवनों पर सौंदर्यीकरण एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। संस्कृति विभाग को शहीद स्थल पर विशेष सफाई एवं प्रकाश व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। सूचना, वन, ग्राम्य विकास, पर्यटन, शिक्षा, उर्जा, उरेडा, बालविकास, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति आदि विभागों की झांकी आयोजित करने के सम्बन्ध में समय से सूचना प्रेषित करते हुए कार्यवाही प्रारम्भ करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्य कार्यक्रम स्थल पर प्रोटोकॉल के अनुरूप अतिथियों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त, समस्त उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं उनके आश्रितों का सम्मान सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि 25 एवं 26 जनवरी को सभी प्रमुख चौक-चौराहों एवं शासकीय भवनों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, 25 जनवरी को सायं 6 बजे से 9 बजे तक तथा 26 जनवरी को प्रातः 6 बजे से प्रातः 11 बजे तक प्रमुख चौराहों पर देशभक्ति गीतों का प्रसारण किया जाएगा। सस्कृति विभाग द्वारा 25 जनवरी को नगर निगम के टाउनहॉल में कवि सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरी, उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं व्यापार मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
—-0—-
कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार, सहसपुर के भुड्डी न्याय पंचायत में लगा बहुउद्देशीय शिविर

0

 

जनहित सर्वोपरिः विधायक पुंडीर का अल्टीमेटम, 15 दिन में हो समस्या का समाधान*

*शिविर में त्वरित राहत, 09 आयुष्मान, 11 आधार अपडेट, दिव्यांग पेंशन स्वीकृत*

*शिविर में उमड़ा जन सैलाब, 79 शिकायतों में से 45 का मौके पर निस्तारण*

*ग्रामीणों के द्वार पर सरकारः भुड्डी में 1467 लाभार्थियों को मिला योजनाओं का लाभ।*

*देहरादून।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार, प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत गुरुवार को सहसपुर ब्लॉक के न्याय पंचायत भुड्डी में उप जिलाधिकारी विनोद कुमार की अध्यक्षता में बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किया गया। शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया गया और विभिन्न विभागों की योजनाओं के माध्यम से 1467 लोगों को लाभ प्रदान किया गया। इस अवसर पर विधायक श्री सहदेव सिंह पुण्डीर सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

शिविर में ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी के समक्ष 79 शिकायतें प्रस्तुत की, जिनमें से 45 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। उप जिलाधिकारी ने विभागों से संबंधित शिकायतों को अग्रसारित करते हुए निर्देश दिए कि शेष शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।

सहसपुर के विधायक सहदेव सिंह पुंडीर ने कहा कि जन-जन की सरकार कार्यक्रम के माध्यम से सभी पात्र नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सरल एवं सुगम रूप से पहुँचाया जा रहा है तथा जनता की शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया जा रहा है। इस कार्यक्रम से आमजन को बड़ी राहत मिल रही है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

विधायक सहदेव सिंह पुंडीर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर में प्राप्त सभी शिकायतों का निस्तारण 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए तथा इसकी जानकारी संबंधित शिकायतकर्ता एवं जनप्रतिनिधियों को भी दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सबका साथ, सबका विश्वास और सबका विकास के मूल मंत्र के साथ जनहित से जुड़े कार्यों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस अवसर पर विधायक ने शिविर में लगाए गए विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा पात्र लाभार्थियों को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट का वितरण भी किया।

शिविर में अल्कापुरी, देवलोक एवं मिंगवाल कॉलोनी के निवासियों ने अभी तक पेयजल कनेक्शन न दिए जाने की शिकायत प्रमुखता से रखी। साथ ही कॉलोनी के संपर्क मार्गो का सुधारीकरण एवं रात्रि में प्रकाश व्यवस्था हेतु स्ट्रीट लाइट की मांग रखी। ग्राम प्रधान बुड्ढी ने आधार कार्ड सेंटर खोलने, राजस्व ग्राम का आदेश पारित करने, चकमनसा गांव वासियों की खतौनी न मिलने की समस्या रखी। विधायक ने अधिकारियों को शिविर में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बहुउद्देशीय शिविर में स्वास्थ्य विभाग ने एलोपैथिक में 297, होम्योपैथिक में 158 और आयुर्वेदिक में 78 लोगों की जांच कर निःशुल्क दवाइयां वितरित की। शिविर में 09 आयुष्मान, 11 आधार कार्ड अपडेशन तथा एक दिव्यांग पेंशन मौके पर स्वीकृत की गई। पशुपालन विभाग ने 35 पशुपालकों को पशु दवाएं उपलब्ध कराई। राजस्व विभाग ने 56 प्रमाण पत्र जारी किए। डेयरी 75, कृषि विभाग ने 98, उद्यान विभाग ने 79 किसानों को कृषि यंत्र, बीज और पीएम किसान निधि प्रदान की। समाज कल्याण विभाग ने 28 पात्र लोगों को पेंशन स्वीकृत की। जिला पूर्ति विभाग ने 19 राशन कार्ड धारकों की केवाईसी करवाई। इसके अतिरिक्त बाल विकास 21, पंचायती राज विभाग ने 58 मामलों का निस्तारण किया। श्रम विभाग ने 14 श्रमिक पंजीकरण योजना के तहत लाभान्वित किया गया। बाल विकास, एनआरएलएम, श्रम, मत्स्य, विद्युत, पेयजल निगम, शिक्षा, रीप, डेयरी और ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से भी कई लाभार्थियों को लाभ पहुँचाया गया।

शिविर में सहसपुर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, जिला अध्यक्ष मीता सिंह, उपाध्यक्ष दयानंद जोशी, महामंत्री यशपालन नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य एकता, ग्राम प्रधान तज्जमुल हुसैन, सोनू कश्यप, अजय पैन्युली अन्य जन प्रतिनिधियों सहित तहसीलदार विवेक राजौरी, खंड विकास अधिकारी मुन्नी शाह सहित अन्य विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वारा कार्यक्रम के तहत थानो में बहुउद्देशीय शिविर का हुआ आयोजन 

0

जनसमस्याओं का समाधान मौके पर, थानो शिविर में 65 शिकायतें*

*ग्रामीणों के द्वार पर सरकारः न्याय पंचायत थानों में 808 लाभार्थियों को मिला योजनाओं का लाभ।*

*ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान से ही संभव है गांवों का विकास-एसडीएम*

*देहरादून ।
जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वारा कार्यक्रम के अंतर्गत बृहस्पतिवार को उप जिलाधिकारी अपर्णा ढ़ौडियाल की अध्यक्षता में राजकीय इंटर कॉलेज थानों में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्षेत्रवासियों द्वारा कुल 65 समस्याएँ प्रस्तुत की गईं, जिनमें से अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।

इस अवसर पर डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला एवं उप जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और कृषि विभाग के माध्यम से 80 प्रतिशत अनुदान पर एक आटा चक्की एवं दो पावर फीडर वितरित किए गए। वहीं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से पाँच महिलाओं को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट प्रदान की गई। शिविर के दौरान विभागों द्वारा ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

उप जिलाधिकारी अपर्णा ढौंडियाल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान से ही गाँवों का समग्र विकास संभव है। जनता की समस्याओं का निस्तारण करना प्रशासन का कर्तव्य है तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वारा कार्यक्रम के अंतर्गत थानो न्याय पंचायत के साथ-साथ कोटी मेहचक, लडवाकोट, सिंधवाल गांव, सनगांव, धारकोट एवं भडेरना के ग्रामीणों ने भूमि, सड़क, पेयजल, पेंशन एवं विद्युत से संबंधित समस्याएँ प्रस्तुत कीं। शिविर में जिला पंचायत की 2, राजस्व विभाग की 10, विद्युत विभाग की 11, पेयजल विभाग की 8, लोक निर्माण विभाग की 6, दूरसंचार विभाग की 2, सिंचाई विभाग की 4, शिक्षा विभाग की 3, परिवहन विभाग की 1, उरेडा की 6, वन विभाग की 4, स्वास्थ्य विभाग की 2, समाज कल्याण विभाग की 1, पंचायती राज विभाग की 1, कृषि विभाग की 1, नागरिक आपूर्ति विभाग की 1, पीएमजीएसवाई की 1 तथा बाल विकास विभाग की 1 शिकायत प्राप्त हुई।

बहुउद्देशीय शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा एलोपैथिक पद्धति से 437 तथा होम्योपैथिक पद्धति से 60 लोगों की स्वास्थ्य जांच कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग से 35, उद्यान विभाग से 32, डेयरी विभाग से 30, पशुपालन विभाग से 20, सहकारिता विभाग से 15, राजस्व विभाग से 20, जिला सैनिक कल्याण विभाग से 7, विद्युत विभाग से 6, सेवायोजन विभाग से 12, बाल विकास विभाग से 15, एनआरएलएम से 28, एलडीएम बैंक से 12, समाज कल्याण विभाग से 8, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से 12, श्रम विभाग से 16, पंचायती राज विभाग से 46 तथा रेशम विभाग से 2 लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

बहुउद्देशीय शिविर में डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला, दर्जा राज्य मंत्री मधु भट्ट, थानो प्रधान चंद्रप्रकाश तिवाड़ी, प्रधान कोटी मेहचक शिवानी, प्रधान लंडवाकोट शिवानी कंडारी, प्रधान सिंधवाल गांव तान्या पंवार, प्रधान सनगांव हेमनती रावत प्रधान धारकोट पूजा, भड़ेरना शीला अन्य जनप्रतिनिधियों समेत खंड विकास अधिकारी अपर्णा ढौडियाल, एबीडीओ सुनील उनियाल अन्य विभागीय अधिकारी एवं बडी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।