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मनरेगा की आत्मा को ख़त्म करना चाहती है सरकार: अंकिता भंडारी की न्याय की लड़ाई लड़ेंगे हम- कुमारी सैलजा

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आज उत्तराखंड दौरे के दौरान प्रेस को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रदेश की राजनैतिक मामलों की समिति की बैठक थी जिसमे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें महत्वपूर्ण रूप से मनरेगा और अंकिता भंडारी प्रकरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार मनरेगा की आत्मा को खत्म करना चाहती है। यहाँ सिर्फ़ नाम बदलने का मुद्दा नहीं है यहाँ बात अधिकारो को ख़त्म करने की है मनरेगा एक मांग-आधारित रोजगार का कानूनी अधिकार था, जिसमें सरकार काम देने के लिए बाध्य थी। नया कानून इसे एक आपूर्ति-आधारित योजना बनाता है, जहाँ काम की उपलब्धता केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित बजट और मापदंडों पर निर्भर करेगी, यह मापदंड प्रधानों के अधिकारों को ख़त्म कर देगा, पॉवर का विकेंद्रीकरण का स्वरूप ख़त्म हो जाएगा,मूल योजना में श्रम लागत का लगभग 90ः केंद्र सरकार वहन करती थी। नए कानून में अधिकांश राज्यों के लिए यह अनुपात 60रू40 कर दिया गया है (पूर्वाेत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90रू10)। यह बदलाव राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ डालेगा, जिससे वे काम उपलब्ध कराने से हतोत्साहित होंगे।नया कानून राज्यों को चरम कृषि मौसम (चमंा ंहतपबनसजनतंस ेमंेवद) के दौरान 60 दिनों तक काम रोकने की अनुमति देता है, ताकि खेतों में मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इससे मजदूरों की सौदेबाजी की शक्ति कम होगी और वे जमींदारों पर निर्भर होने के लिए मजबूर होंगे। पहले यह एक रोजगार गारंटी योजना थी अब ये रोजगार ना मिलना गारंटी है, उन्होंने बताया की पूरे देश में इन बदलावों को लेकर विरोध किया जाएगा जिसमे हर प्रदेश में ये एक योजना बद्ध तरीके से आयोजित होगा जिसमे एक ड्राफ्ट तैयार होगा पंपलेट जिसमे इसकी कमियां उजागर होगी जो लोकल भाषा में भी ट्रांसलेट होगा और उसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा, पूरे प्रदेश में १० जनवरी को जिलेवार प्रेस वार्ता का आयोजन किया जाएगा,११ जनवरी को धरना होगा जो गांधी जी या बाबा साहेब की प्रतिमा के समझ होगा, १२ जनवरी से २९ फरवरी तक चरणबद्ध तरीके से पंचायत स्तर पर चौपालों का आयोजन किया जाएगा।
कुमारी सैलजा ने कहा कि राज्य में अंकिता भंडारी हत्याकांड में आए नए खुलासे से पूरा देश स्तब्ध है, आक्रोशित है और जब तक पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराने की घोषणा नहीं होती कांग्रेस पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है।
पत्रकार वार्ता का संचालन पूर्व मीडिया चेयरमैंन राजीव महर्षि ने किया।
पत्रकार वार्ता में पार्टी के वरिष्ठ नेतागण प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, सीडब्लूसी सदस्य गुरदीप सप्पल, सीडब्लूसी सदस्य करन माहरा, सहप्रभारी सुरेन्द्र शर्मा, सहप्रभारी मनोज यादव, विधायक एवं राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत, विधायक ममता राकेश, मनोज तिवारी, विक्रम सिंह नेगी, पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी, पूर्व मंत्री नवप्रभात, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, महेन्द्र सिंह पाल, पूर्व मीडिया चेयरमैंन राजीव महर्षि, प्रवक्ता डॉ0 प्रतिमा सिंह, महामंत्री राजेन्द्र भंडारी, राजेन्द्र शाह, विधायक फुरकान अहमद, विरेन्द्र जाति, अनुसूचित जाति अध्यक्ष मदन लाल, महिला अध्यक्ष ज्योति रौतेला, एनएसयूआई अध्यक्ष विकास नेगी, सोशल मीडिया के विकास नेगी, नदीम अख्तर एवं अमित मसीह आदि उपस्थित थे।

मीडिया विभाग
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड:  निष्पक्ष जांच कराने से भाग रही है भाजपा सरकारः- गणेश गोदियाल

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देहरादून 7 जनवरी:
आज कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा की कल जिस तरह से एक अन्य मुद्दे पर प्रेस को संबोधित करने आए थे मुख्यमंत्री जी और जब पत्रकारों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में नए तथ्यों के खुलासे पर सवाल पूछा तो काफ़ी असहज नज़र आए और मीडिया से ही उल्टा सवाल करने लगे ये उनकी नियति को दर्शा रहा है,उन्होंने मीडिया बंधुओं का धन्यवाद दिया कि उन्होंने इस मुद्दे को उनके समझ रखा उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बात पर अपनी बात रखने से पहले मैं अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कुछ तथ्यों को सामने रखना चाहता हूँ जिस दिन अंकिता भंडारी की हत्या हुई उससे दो दिन पहले रिसोर्ट मालिक के द्वारा पटवारी चौकी में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया और अंकिता के पिता पर चौकी में भी दबाव बनाने की कोशिश की गई कि वे इस बात को मान जायें कि उनकी बेटी भाग गई है, पर उन्होंने ऐसा नहीं माना फिर पटवारी आया उन पर किसी पेपर पर हस्ताक्षर कराने पर ये कोशिश परवान नहीं चढ़ पायी पर उसका शव बरामद हुआ और मीडिया ने अंकिता और उसके मित्र ने उसके और अंकिता के बीच के संदेशों के आदान प्रदान को सार्वजनिक किया तब लोकल मीडिया ने ये बात उठाई तब ये बात उठी की उसने अपनी जान के खतरे का अंदेशा पहले ही जता दिया था, तब सरकार पर दबाव बना जब काफ़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए सरकार ने उन लोगों पर भी बल का प्रयोग किया, उन्होंने कहा कि ये बात वो इसलिए बोल रहे हैं क्यूंकि वो सरकार पर साफ़ आरोप लगा रहे हैं कि सरकार को पहले से ही पता था कि अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई है और हत्या की वजह भी उन्हें पता थी, पहले दिन से ही सरकार वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। उसके बाद से सरकार ने सबूतों को नष्ट करने का कार्य शुरू किया उन्होंने कहा की मैं पूछना चाहता हूँ सरकार से कि क्या सरकार की एस आई टी ने यमकेध्वर विधायक रेणु बिष्ट से पूछताछ की क्या उनसे ये पूछा की किसके बोलने पर उन्होंने रिसोर्ट को तुड़वा दिया और तो और अंकिता के कमरे की हर चीज़ को जला दिया और कोई सबूत बच ना जाये तो राख तक तो पानी में डलवा दिया, उसके बाद सबने इसका श्रेय लेना शुरू कर दिया पर सच तो ये है की ये सब प्रायोजित घटनाक्रम था जो सिर्फ़ वीआईपी को बचाने के लिए रचा गया था,पौड़ी पुलिस से लेकर तत्कालीन डी जी पी तक ने ट्वीट करके ये बताया कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार रिसोर्ट को तुड़वा दिया गया है, ये एक षड्यंत्र था जो सरकार ने रचा था, आज जो नए तथ्य सामने आए हैं उन तथ्यों के मद्देनजर सरकार सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है उन्होंने कहा की ये सरकार शुरू से ही जांच को अलग दिशा में ले जाने का कार्य कर रही है,उनके पूर्व विधायक की धर्म पत्नी अपने और अपने पति के बीच की वार्तालाप को सबके समक्ष लेकर अति जिसने किसी गट्टू का नाम वीआईपी के तौर पर सामने आया और गट्टू और कोई नहीं भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ही है जिसके बाद महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे को जाति धर्म में बाटने का कार्य किया पर वो दांव उन्हें उल्टा पड़ा और उनकी भी कलाई खोलने का कार्य उस महिला ने किया, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बोल रहे थे की जांच होगी मैं पूछना चाहता हूँ की कब होगी, उन्होंने प्रदेश के लोगों का आभार जताया जो इस लड़ाई में एक जुट होकर खड़े रहे उस बच्ची के साथ प्रदेश की देव तुल्य जनता चाहे वो किसी भी धर्म का हो जाति का हो चित्र का हो इन बातों से ऊपर उठकर अंकिता की लड़ाई में साथ दे रहे हैं आए आज सबकी यही माँग है की उच्चतम न्यायालय के सिटिंग या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में ही ये जाँच हो, जानता आज न्याय की माँग कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अब तक अंकिता के परिवार को दिए हुए आश्वासन तक पूरे नहीं किये ये उनकी जिम्मेदारी है कोई एहसान नहीं है, उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ सवाल अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था से पूछे थे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से एकबार फिर से अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई किये जाने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने एक बार फिर से पत्रकार वार्ता के माध्यम से अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था से उन अनुत्तरित सवालों का जवाब मांगा जो उन्होंने अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था से 10 दिन पूर्व पूछे थे कि अंकिता भंडारी का पार्थिव शरीर नहर से निकालने की अगली रात को वनन्तरा रिसॉर्ट पर बुल्डोजर किसके आदेश पर चलवाया गया? राज्य सरकार द्वारा गठित एस.आई.टी. ने यदि बुल्डोजर चलाने वालों के बयान दर्ज किये हों, तो उत्तराखंड के नागरिकों को यह भी बताने का कष्ट करें कि एस.आई.टी. की रिपोर्ट में उपरोक्त पैरा-1 के सम्बन्ध में क्या तथ्य सामने आये? क्या जांच ऐजेंसी या एस.आई.टी. इस तथ्य से विज्ञ है कि रात्रि 2ः30 बजे अंकिता भंडारी के वनन्तरा रिसॉर्ट स्थित निवास कक्ष को बुल्डोजर द्वारा ध्वस्त करने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा यह स्वीकार किया गया कि उनके द्वारा रिसॉर्ट का ध्वस्तीकरण कराया गया है, जिसका उनके द्वारा श्रेय लेने की कोशिश की गई? क्या एस.आई.टी. द्वारा अपनी जांच में मुख्यमंत्री जी की इस बात का उल्लेख किया गया है? क्या एस.आई.टी. ने अंकिता भंडारी एवं उसके मित्र के बीच हुई व्हाट्सअप बातचीत संदेशों की गहनता से जांच की गई जिसमें अंकिता के द्वारा स्पष्ट रूप से यह बताया गया था कि किसी वी.आई.पी. को विशेष सेवायें देने का उस पर भारी दबाव है? आपके द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण में बताया गया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की सी.बी.आई. जांच इसलिए संभव नहीं है कि मा0 न्यायालय द्वारा इसे अमान्य कर दिया गया है। इस सम्बन्ध में आपसे स्पष्टीकरण की अपेक्षा है कि सभी पक्षकारों द्वारा सी.बी.आई. जांच की मांग के उपरान्त सरकार द्वारा इसका विरोध क्यों किया जा रहा है? भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की अंकिता भंडारी के शयन कक्ष को ध्वस्त करने में जो भूमिका थी, क्या जांच ऐजेंसी/एस.आई.टी. द्वारा इसका संज्ञान लिया गया है? यदि जांच ऐजेंसी ने इसका संज्ञान लिया तो जांच ऐजेंसी की खोज के परिणाम क्या थे?
श्री गणेश गोदियाल ने यह भी कहा कि अंकिता भंडारी के पिता ने अनेकों बार तथा अभी कुछ दिन पहले एक चैनल को दिये गये साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा है कि अंकिता भंडारी की गुमशुदगी के बाद जब वे पहली बार पटवारी चौकी में पहुंचे तो पटवारी द्वारा उन्हें धमकाकर चुप कराने की कोशिश की गई और उनके इन आरोपों पर (जिसमें उन्होंने यह कहा कि पटवारी द्वारा मुझ पर दबाव बनाया गया कि मैं आपरोपियों के पक्ष में बातें कहूं और अंकिता की हत्या को आत्महत्या मान लूं यही नहीं आरोपी पक्ष द्वारा भी उन्हें डाराया-धमकाया गया) अभी तक जांच ऐजेंसी/एस.आई.टी. द्वारा कोई समाधान कारक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। पुलिस विभाग का बार-बार यह कहना कि किसी के पास हत्याकांड के प्रमाण हो तो पुलिस को उपलब्ध कराये, संदेह को और गहराता है। यह जानते हुए भी कि सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा हत्याकांड के सबूत नष्ट किये गये और इसकी सच्चाई सत्तापक्ष के सबूत नष्ट करने वाले लोग ही जानते हैं, इसके बावजूद उन्हें जांच के घेरे में न लाने वाली स्थिति पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कांग्रेस पार्टी के सवाल आज भी अनुत्तरित हैं और भाजपा सरकार के मुखिया, भाजपा के पदाधिकारी पत्रकार वार्ता आयोजित कर केवल जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक मनोज रावत, निवर्तमान मीडिया चेयरमैंन राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, प्रवक्ता डॉ0 प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष डॉ0 जसविन्दर सिंह गोगी उपस्थित थे।

डॉ0 प्रतिमा सिंह
मीडिया विभाग
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी

सीएम धामी ने दो दिवसीय माल्टा महोत्सव कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

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सीएम धामी ने विभिन्न जिलों से कृषकों से मुलाकात कर नींबू की खटाई का लिया स्वाद

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ITBP स्टेडियम सीमा द्वार, देहरादून में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय माल्टा महोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से आए कृषकों से मुलाकात कर माल्टा और नींबू की खटाई का स्वाद लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में माल्टा उत्पादन की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में ठोस पहल करते हुए माल्टा मिशन शुरू करने की घोषणा की गई है, जिसके माध्यम से माल्टा के उत्पादन, विपणन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस मिशन से पहाड़ी क्षेत्रों के कृषकों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय फलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार माल्टा के साथ-साथ कीवी, सेब, आडू, पुलम, नींबू प्रजाति के फल एवं अन्य स्थानीय फलों के उत्पादन को भी बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा माल्टा महोत्सव जैसे आयोजन, किसानों को सीधे उपभोक्ताओं और बाजार से जोड़ने का कार्य करते हैं।

इस अवसर पर आईजी आईटीबीपी संजय गुंज्याल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

 

हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन है आवश्यक: पर्यावरणीय क्षरण से जीवन और आजीविका होती है प्रभावित : राज्यपाल

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हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक प्रणाली है : राज्यपाल

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) द्वारा आज क्लेमेंट टाउन, देहरादून में *“फोर्टिफाइंग द हिमालयाजः ए प्रोएक्टिव मिलिट्री-सिविल-सोसाइटी फ्यूजन स्ट्रेटजी इन द मिडिल सेक्टर”* विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में प्रतिभाग किया गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू-आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि मध्य सेक्टर को परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांत माना जाता रहा है, किंतु वर्तमान परिस्थितियाँ सतत सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र, विशेष रूप से भारत-चीन सीमा के मध्य सेक्टर में, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सैन्य, नागरिक प्रशासन और समाज के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

राज्यपाल ने कहा कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियाँ अब केवल प्रत्यक्ष सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाइब्रिड वारफेयर, ग्रे-जोन गतिविधियों, द्वि-उपयोगी आधारभूत संरचना, और सीमा क्षेत्रों में निरंतर दबाव जैसे कारकों से भी आकार ले रही हैं। ऐसे परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्रों की दीर्घकालिक सुरक्षा केवल सैन्य तैयारियों से नहीं, बल्कि नागरिक प्रशासन, स्थानीय समुदायों और प्रौद्योगिकी के साथ प्रभावी समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।

उन्होंने सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सीमाई सुरक्षा के सहभागी और बलवर्धक हैं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसे कार्यक्रम सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या स्थिरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति को भी सुदृढ़ करते हैं।

राज्यपाल ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधारभूत संरचना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सड़कें, सुरंगें, पुल, हवाई संपर्क और दूरसंचार सुविधाएँ परिचालन तत्परता के अनिवार्य घटक हैं। उन्होंने चारधाम परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाती है, बल्कि रणनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती प्रदान करती है।

उन्होंने आधुनिक प्रौद्योगिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ड्रोन, उन्नत निगरानी प्रणालियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म परिस्थितिजन्य जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया में सहायक हैं, किंतु तकनीक नेतृत्व, विवेक और संस्थागत मजबूती का विकल्प नहीं हो सकती।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन का सीधा संबंध परिचालन क्षमता से है। पर्यावरणीय क्षरण से न केवल जीवन और आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि लॉजिस्टिक्स, संचार और आपदा प्रबंधन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

अपने संबोधन के समापन पर राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी सीमाओं की वास्तविक शक्ति शांत तैयारी, संस्थागत समन्वय और सामाजिक विश्वास में निहित है। जब सैन्य बल, नागरिक प्रशासन और समाज एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब हिमालयी सीमाएँ अधिक सुदृढ़, स्थिर और सुरक्षित बनती हैं।

*सीमांत क्षेत्रों में सामुदायिक एवं अवसंरचनात्मक विकास पर फोकस किया जा रहा है- मुख्यमंत्री*

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सैन्य नागरिक से जुड़े विषय पर सेमिनार का होना अति महत्वपूर्ण है। कहा कि सेमिनार से निकले सुझाव हमारी सामरिक नीति को सुदृढ़ बनाने में सहायक एवं हिमालयी क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित जनसंख्या जैसी चुनौतियों को देखते हुए सेना, नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। हिमालयी क्षेत्रों में सीमाओं के आस-पास निवास करने वाले नागरिक देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जो वास्तव में देश के आँख और कान बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा करना सेना के साथ साथ प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सीमांत गांव माणा जैसे दूरस्थ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने ही माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और नागरिकों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने मध्य क्षेत्र के बॉर्डर की चुनौतियों, नागरिक समाज के सशक्तीकरण और तकनीक के अपग्रेडेशन के साथ ही अवसंरचनात्मक विकास के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) सहित संबंधित उपस्थित थे।

 

FICCI FLO Convention 2026 का भव्य शुभारंभ: महिला उद्यमिता को मिली उड़ान

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‘The Power to Empower’ के साथ महिला नेतृत्व एवं उद्यमिता को मिला नया आयाम

देहरादून, उत्तराखंड | FICCI Ladies Organisation (FICCI FLO) उत्तराखंड चैप्टर द्वारा FICCI FLO Convention 2026 का शुभारंभ आज 7 जनवरी 2026 को देहरादून में अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार किसी अपरिहार्य कारणवश कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, किंतु उन्होंने सम्मेलन के लिए एक प्रेरणादायी वीडियो संदेश प्रेषित किया, जिसमें महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता एवं विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर बल दिया गया।
दो दिवसीय इस सम्मेलन की थीम “The Power to Empower” निर्धारित की गई है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल सशक्तिकरण, उद्यमिता विकास, सरकारी सहभागिता तथा सतत आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।

सम्मेलन के प्रथम दिवस (7 जनवरी 2026) की शुरुआत एक भव्य उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें
श्री सुबोध उनियाल, माननीय कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार, ने विशेष अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, स्टार्ट-अप संस्कृति तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

इसी क्रम में माननीय गणेश जोशी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं ने सदैव समाज एवं विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताते हुए FICCI FLO जैसे मंचों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर FICCI FLO उत्तराखंड चैप्टर की चेयरपर्सन डॉ. गीता खन्ना ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में महिला उद्यमिता को राज्य एवं देश के आर्थिक विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि “The Power to Empower” केवल एक थीम नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, सक्षम एवं नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में एक सशक्त आंदोलन है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं उद्यमिता से जुड़ती हैं, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राष्ट्र को भी सशक्त बनाती हैं।

इसके उपरांत सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया—

तकनीकी सत्र – 01: डिजिटल साक्षरता

इस सत्र में “Cyber Awareness Matters: Let’s Learn Why and How We Can Escape” विषय पर
श्री अंकुश मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (इंटेलिजेंस एवं सिक्योरिटी), उत्तराखंड,
ने साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सुरक्षा एवं साइबर जागरूकता पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
इसी सत्र में “AI for Building Marketing Business” विषय पर
सुश्री जूही खन्ना (विशेषज्ञ) एवं सुश्री करिश्मा डिंगरा
ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से व्यवसाय एवं मार्केटिंग को सशक्त बनाने के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्र – 02: सरकारी साझेदारी – पीएम विज़न को साकार करने की दिशा में

“Women as Architects of Viksit Bharat” विषय पर आधारित इस सत्र में उत्तराखंड सरकार द्वारा महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न उद्यमिता प्रोत्साहन योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर विषय-विशेषज्ञों के साथ एक पैनल चर्चा का आयोजन भी किया गया।

तकनीकी सत्र – 03: From Soil to Shelf

इस सत्र में उत्तराखंड में जैविक खेती, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा की गई, जो महिला उद्यमियों के लिए आजीविका सृजन एवं आर्थिक समृद्धि के नए अवसर प्रदान कर सकती हैं। विशेषज्ञों द्वारा आयोजित पैनल चर्चा में महिला सहभागिता एवं सतत विकास पर विशेष बल दिया गया।

FICCI FLO उत्तराखंड चैप्टर द्वारा आयोजित यह सम्मेलन महिलाओं को ज्ञान, नेटवर्किंग एवं नए अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में महिला नेतृत्व, नवाचार एवं आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सुरेख डंगवाल, श्रीमती मधु भट्ट एवं श्रीमती कुसुम कंडवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने महिलाओं को एक विशिष्ट पहचान दिलाने तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को और अधिक सशक्त करने पर बल दिया।

डोईवाला में रीप परियोजना की सफलताः मसाला यूनिट से महिलाओं को मिली बाजार में नई पहचान

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30 लाख के टर्नओवर से बदली तस्वीर, समूह की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर*

*मसाला यूनिट से समूह की 700 से अधिक महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार*

*यूनिट में महिलाए जल्द ही मसालो की अन्य वैरायटीं का करेंगी विस्तार*

*देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाएँ अब केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सशक्त मिसाल बन रही हैं। इसका सटीक उदाहरण राजधानी देहरादून के डोईवाला ब्लॉक में देखने को मिल रहा है, जहाँ ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित मसाला यूनिट न केवल स्वरोज़गार का माध्यम बनी है, बल्कि हिलान्स ब्रांड के अंतर्गत आधुनिक पैकेजिंग और प्रभावी मार्केटिंग के साथ नए आयाम स्थापित कर रही है।

डोईवाला ब्लॉक के दूधली गाँव में सफलता मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाओं ने ग्रामोत्थान रीप परियोजना के अंतर्गत मसाला यूनिट की स्थापना कर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ाया है। वर्ष 2023 में स्थापित इस यूनिट ने अब तक लगभग 30 लाख रुपये का कारोबार किया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यूनिट ने 10 लाख रुपये, जबकि वर्ष 2024-25 में 20 लाख रुपये का टर्नओवर दर्ज किया है।

मसाला यूनिट में चार महिलाएँ प्रत्यक्ष रूप से मसालों के निर्माण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग का कार्य कर रही हैं, जबकि 45 महिलाएँ विभिन्न स्थानों से मसालों का कच्चा माल एकत्र कर यूनिट तक पहुँचाने का कार्य कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, फेडरेशन से जुड़ी 700 से अधिक महिलाएँ अलग-अलग क्षेत्रों से हल्दी, मिर्च, धनिया एवं अन्य मसालों का कच्चा माल उपलब्ध करा रही हैं।

वर्ष 2023 में रीप परियोजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये की लागत से इस मसाला यूनिट की शुरुआत की गई थी। इसमें 6 लाख रुपये ग्रामोत्थान रीप परियोजना, 3 लाख रुपये बैंक ऋण तथा 1 लाख रुपये फेडरेशन की महिलाओं द्वारा स्वयं के योगदान के रूप में निवेश किया गया।

सफलता मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित इस मसाला यूनिट में अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा और बेसन का निर्माण किया जाता है। तैयार मसालों को हिलान्स ब्रांड की आकर्षक और आधुनिक पैकेजिंग के साथ बाज़ार में उतारा जाता है। महिलाओं को मशीनों के संचालन के साथ-साथ पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

बढ़ती मांग को देखते हुए समूह की महिलाएँ अब गरम मसाला, चिकन मसाला, फिश करी मसाला, मैगी मसाला सहित अन्य नई किस्मों के विकास पर भी कार्य कर रही हैं। शुद्धता, स्वच्छता और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किए जा रहे ये मसाले स्थानीय बाज़ार में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।

सफलता मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन की अध्यक्ष आरती पांडे ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ग्रामोत्थान रीप की योजनाएँ ग्रामीण महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मसाला यूनिट की स्थापना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसान महिलाओं को रोज़गार उपलब्ध कराना है, ताकि वे हल्दी, मिर्च और धनिया जैसे कच्चे माल की आपूर्ति कर आत्मनिर्भर बन सकें और अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें।

वहीं, जिला परियोजना प्रबंधक (रीप) कैलाश भट्ट ने बताया कि सफलता मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन की कम्युनिटी बेस्ड ऑर्गनाइज़ेशन (सीबीओ) एंटरप्राइज़ के माध्यम से दूधली गाँव में यह मसाला यूनिट संचालित की जा रही है, जिससे लगभग 700 महिलाएँ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि यूनिट अब तक 30 लाख रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी है और आने वाले समय में मसालों की नई श्रृंखला बाज़ार में उतारने की तैयारी की जा रही है।

यह मसाला यूनिट न केवल ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है, बल्कि सीमित संसाधनों में भी सामूहिक प्रयास से बड़ी सफलता हासिल करने की प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत कर रही है।

 

ग्रीन बिल्डिंग की सुस्त रफ्तार पर भड़के डीएम सविन: स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को लगाई फटकार

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प्रोजेक्ट को तमाशा न बनाएं कार्यदायी संस्था; वर्क चार्ट, लेवर प्लान पूछने पर बगलें झांकते नजर आए अधिकारी*

*स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को फटकार, फाइल पर चिड़िया बिठाने तक सीमित न रहे; धरातल पर करें मॉनिटरिंग*

*डेडलाइन जून 2026 तक निर्माण पूर्ण करने का दिया अल्टीमेटम,*

*मा0 मुख्यमंत्री व राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ग्रीन बिल्डिंग निर्माण कार्यों में कोताही क्षम्य नहीः डीएम*

*लेबर चार्ट के अनुसार श्रमिक तैनात कर निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करें निर्माण कार्य*

*उच्च गुणवत्ता, पर्यावरण अनुकूल तकनीक एवं सुरक्षा मानकों का विशेष रूप से पालन करें सुनिश्चित*

*मैन, मटिरियल व थर्ड पार्टी गुणवत्ता की तलब की रिपोर्ट; पर्ट चार्ट बनाने के निर्देश,*

*देहरादून ।
हरिद्वार रोड स्थित स्मार्ट सिटी लिमिटेड परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन ग्रीन बिल्डिंग कार्यों की प्रगति को लेकर बुधवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने ऋषिपर्णा सभागार में विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए परियोजना से जुड़े अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा जून 2026 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए।

जिलाधिकारी ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों से आज ही पर्ट चार्ट (प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू टेक्नीक), रिवाइज्ड मटीरियल प्लान एवं लेबर प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि संशोधित पर्ट चार्ट के अनुरूप रिवाइज्ड मटीरियल और लेबर प्लान के आधार पर डबल शिफ्ट में कार्य सुनिश्चित किया जाए। डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो विभागीय स्तर से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किए जाएं। साथ ही पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के उपयोग एवं श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की प्रगति की साप्ताहिक रिपोर्ट अनिवार्य रूप से जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए, ताकि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा सके।

श्रमिकों की उपलब्धता की समीक्षा के दौरान कार्यदायी संस्था सीपीडब्लूडी के अधिकारियों ने अवगत कराया कि निर्धारित 175 श्रमिकों के सापेक्ष वर्तमान में केवल 125 श्रमिक ही कार्यरत हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक ग्रीन बिल्डिंग का लगभग 36 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि विगत एक माह में निर्माण कार्यों में मात्र 10 प्रतिशत की प्रगति दर्ज की गई है।

इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए श्रमिकों की संख्या तत्काल बढ़ाने और डबल शिफ्ट में कार्य कराते हुए निर्माण कार्य की गति तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी स्थिति में जून 2026 की समयसीमा से आगे कार्य नहीं जाना चाहिए और इसके लिए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करें।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तीरथ पाल सिंह, मुख्य अभियंता सीपीडब्ल्यूडी, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कृष्णा चमोला, चीफ इंजीनियर देवेंद्र प्रकाश, वित्त नियंत्रक सैफाली रानी सहित कार्यदायी संस्था सीपीडब्लूडी के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

 

राजकीय इंटर कालेज त्यूनी में आयोजित शिविर में भारी उत्साह के साथ उमड़े लोग

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जन-जन के द्वार पहुंची सरकारः सुदूरवर्ती गांव त्यूनी में प्रशासन ने सुनीं जन समस्याएं

त्यूनी बहुउद्देशीय शिविरः 761 से अधिक लाभार्थियों को मिला सेवाओं का लाभ

*लाभ भी, समाधान भीः 428 निःशुल्क स्वास्थ्य जांच से लेकर औषधि वितरण, शिविर में मिला संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ,*

*शिविर में दर्ज 51 में से 06 शिकायतें मौके पर निस्तारित,*

मुख्यमंत्री का संकल्प, ज़मीनी अमलः त्यूनी जनसेवा शिविर से मिली जनता को राहत*

*देहरादून । प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार, प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत बुधवार को चकराता ब्लॉक की सुदूरवर्ती क्षेत्र राजकीय इंटर कॉलेज त्यूनी में उप जिलाधिकारी प्रेम लाल की अध्यक्षता में जनसेवा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया गया तथा विभागीय योजनाओं के माध्यम से 761 से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया।

एसडीएम ने कहा कि जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान से सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को इन शिविरों में जनकल्याणकारी योजनाओं से मौके पर ही लाभान्वित किया जाए। ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनका प्राथमिकता पर निस्तारण हो। एसडीएम ने कहा कि शिविरों में लोगों के सभी जरूरी प्रमाण पत्र भी बनाए जा रहे हैं।

शिविर में ग्रामीणों द्वारा कुल 51 शिकायतें दर्ज कराई गईं, इनमें से 06 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को अग्रसारित करते हुए समयबद्ध ढंग से निस्तारण के निर्देश दिए गए। जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों द्वारा प्रमुख रूप से पेयजल, विद्युत, सिंचाई, प्रधानमंत्री आवास योजना, अवैध खनन एवं अतिक्रमण से संबंधित समस्याएँ उठाई गईं। शिकायतों में लोक निर्माण विभाग की 05, राजस्व विभाग की 12, ग्राम विकास विभाग की 09, वन विभाग की 04, जल संस्थान की 05, पुलिस विभाग की 02, शिक्षा विभाग की 03, उद्यान विभाग की 03, जबकि पूर्ति विभाग, विद्युत विभाग, बाल विकास विभाग एवं कौशल विकास विभाग से संबंधित 01-01 शिकायत शामिल रही।

ग्राम अणु निवासी गंगा राम द्वारा अणु चिल्हाड़ मोटर मार्ग निर्माण से क्षतिग्रस्त कृषि भूमि के लिए बीते 20 वर्षों से लंबित प्रतिकर भुगतान की समस्या उठाई गई। इस पर लोक निर्माण विभाग, चकराता के अधिकारियों को पत्रावली का निरीक्षण कर शीघ्र प्रतिकर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

धामिच गांव निवासी मोर सिंह एवं दलिप सिंह ने मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत वर्ष 2021 में स्वीकृत धामिच सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण न होने के कारण कार्य अधर में लटके होने की समस्या रखी, जिस पर विभागीय अधिकारियों द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया। स्थानीय व्यवसायी हरीश कुमार ने आवारा पशुओं के लिए गौशाला निर्माण तथा अस्पताल रोड के किनारे लगे कूड़े के ढेर के निस्तारण की मांग रखी।

पूर्व प्रधान लायक राम शर्मा ने त्यूणी मोरी हनोल मोटर मार्ग से अतिक्रमण हटाने के नाम पर स्थानीय लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने तथा पूर्व में लोक निर्माण विभाग द्वारा नाम हुई रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे सड़क चौड़ीकरण के विरोध में नहीं हैं, किंतु विभाग द्वारा प्रभावितों को भूमि कटिंग का उचित मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए।

निर्माण कार्यों के दौरान भूठ क्षेत्र में तीन युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में पीड़ित परिजनों एवं ग्रामीणों ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस संबंध में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ने बताया कि प्रकरण की जांच हेतु मामला नियमित पुलिस को हस्तांतरित कर दिया गया है।

अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष प्रभाकर जोशी ने वन विभाग द्वारा भवन निर्माण के लिए आठ माह पूर्व प्रकाशित माफी को निरस्त करने के आदेश जारी न किए जाने का मामला उठाया, जिस पर उप प्रभागीय वनाधिकारी विभु चौहान ने एक सप्ताह के भीतर निस्तारण का आश्वासन दिया।

पूर्व प्रधान रमेश डोभाल ने मेन्द्रथ क्षेत्र में अवैध रूप से पेट्रोल एवं डीज़ल बेचे जाने की शिकायत दर्ज कराई, जिस पर प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। सोनू नायक एवं रमेश डोभाल द्वारा मेन्द्रथ में वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला भी उठाया गया, जिस पर वन विभाग ने अवगत कराया कि प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।

रोशनी देवी, संती देवी, कविता देवी एवं रेखा देवी ने भाटगढ़ी ग्राम पंचायत के खेडा-पटाला स्थित अनुसूचित जाति बस्ती में निवासरत 45 परिवारों के लिए पेयजल संकट की समस्या रखी। इस पर जल संस्थान के अवर अभियंता को स्थायी समाधान होने तक टैंकर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बहुउद्देशीय शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एलोपैथिक में 216, होम्योपैथिक में 30 तथा आयुर्वेदिक में 182 लोगों की जांच कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। राजस्व विभाग ने 40 हिस्सा प्रमाण पत्र, 25 उद्यान कार्ड, 15 पीएम किसान, 05 केवाईसी की गई। कृषि विभाग ने 63 एवं उद्यान विभाग ने 15 किसानों को कृषि यंत्र, बीज एवं पीएम किसान निधि का लाभ प्रदान किया। समाज कल्याण विभाग द्वारा पेंशन संबंधित प्रकरणों का निस्तारण किया गया। जिला पूर्ति विभाग द्वारा 23 यूनिट वृद्धि के आवेदन, 05 नए राशन कार्ड, 11 राशन कार्ड ट्रांसफर सहित 13 राशन कार्ड की केवाईसी करवाई गई। पंचायती राज विभाग द्वारा 22 परिवार रजिस्टर की नकल, 02 जन्म, 02 मृत्यु, 20 किसान सम्मान निधि, 06 टीएसपी फार्म, 02 वृद्धावस्था, 04 दिव्यांग, 02 यूसीसी तथा 15 राशन कार्ड का सत्यापन किया गया। त्यूनी गैस सर्विस द्वारा 27 कनेक्शन की केवाईसी कराई गई। इसके अतिरिक्त बाल विकास विभाग ने 20, एनआरएलएम ने 17 तथा श्रम विभाग ने 11 लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ पहुंचाया।

शिविर में भाजपा मंडल अध्यक्ष नीरज शर्मा, गढ़वाल संयोगक रत्न चौहान, अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभाकर जोशी, प्रधान ग्राम पंचायत वृनाड़ बास्तिल रेखा राणा, राम लाल सेमवाल, साधु राम डोभाल, खंड विकास अधिकारी राकेश विष्ट, एसडीओ वन विभु चौहान, रेंज अधिकारी एसपी गैरोला, नायब तहसीलदार सरदार सिंह राणा, खंड शिक्षा अधिकारी बुशरा अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

 

सीएम धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए की बड़ी पहल: स्कूलों में बनेंगे आधुनिक खेल कोर्ट

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खेलों से संवरेगा छात्रों का भविष्य, देहरादून के सरकारी स्कूलों में 484 लाख रुपये खर्च करेगा एमडीडीए

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन एवं प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के कुशल नेतृत्व में निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। जनपद देहरादून में समग्र विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए एमडीडीए द्वारा शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जनपद देहरादून में विद्यमान विभिन्न राजकीय विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में खेल-कूद गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एमडीडीए द्वारा देहरादून जनपद के 08 राजकीय विद्यालयों में बैडमिंटन एवं वॉलीबॉल कोर्ट के निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल रु. 484.00 लाख की धनराशि व्यय की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास के साथ-साथ स्थानीय जनसामान्य को भी आधुनिक खेल सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का मानना है कि खेल अधोसंरचना केवल प्रतियोगी खेलों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है। इसी दृष्टि से विद्यालय स्तर पर खेल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि भविष्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ी प्रारंभिक स्तर से ही बेहतर संसाधनों के साथ आगे बढ़ सकें।

*प्राधिकरण द्वारा जिन विद्यालयों में खेल कोर्ट का निर्माण कराया जा रहा है, उनका विवरण निम्नवत् है—*

1- राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी), मियावाला, देहरादून में प्रस्तावित आउटडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

2- राजकीय इंटर कॉलेज / राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीआईसी/जीजीआईसी), रानीपोखरी, देहरादून में प्रस्तावित आउटडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

3- डोईवाला स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, देहरादून में प्रस्तावित आउटडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

4- राजकीय इंटर कॉलेज, सेलाकुई, सहसपुर, देहरादून में प्रस्तावित आउटडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

5- राजकीय इंटर कॉलेज, हर्बर्टपुर, देहरादून में प्रस्तावित आउटडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

6- राजकीय इंटर कॉलेज, सौदासरोली, देहरादून में प्रस्तावित इंडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

7- राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड, देहरादून में प्रस्तावित इंडोर बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण।

8- राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कौलागढ़, देहरादून में प्रस्तावित इंडोर बैडमिंटन कोर्ट के साथ-साथ आउटडोर वॉलीबॉल कोर्ट का निर्माण।

इन सभी परियोजनाओं को गुणवत्तापूर्ण मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शीघ्र ही छात्र-छात्राएँ एवं स्थानीय नागरिक इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

*उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान*

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्राधिकरण का प्रयास है कि शहरी विकास के साथ-साथ सामाजिक विकास को भी समान महत्व दिया जाए। विद्यालयों में खेल अधोसंरचना का विकास भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है। खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का आधार होते हैं। एमडीडीए द्वारा देहरादून जनपद के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में बैडमिंटन एवं वॉलीबॉल कोर्ट का निर्माण इसी सोच का परिणाम है। इन सुविधाओं से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा और स्थानीय जनसामान्य को भी स्वस्थ गतिविधियों के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध होंगे। हमारा लक्ष्य है कि आने वाले समय में एमडीडीए विकास कार्यों के साथ-साथ शिक्षा, खेल और पर्यावरण के क्षेत्र में भी नई मिसाल कायम करे।

*सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान*

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा सभी प्रस्तावित खेल परियोजनाओं को तकनीकी मानकों के अनुसार क्रियान्वित किया जा रहा है। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इन खेल कोर्ट्स के निर्माण से विद्यालयों में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायता मिलेगी। एमडीडीए भविष्य में भी जनहित से जुड़े ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देता रहेगा।
एमडीडीए की यह पहल न केवल शैक्षणिक परिसरों को आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगी, बल्कि देहरादून जनपद में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

उत्तराखंड की जनता अंकिता को न्याय दिलाये‌ बिना नहीं बैठेगी चुप : सबूत मिटाने वाली सरकार आज सबूत मांग रही  –गणेश गोदियाल

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चमोली में अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस प्रदेश  अध्यक्ष के नेतृत्व में हुआ जन आदोलन

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पिछले एक हफ्ते से उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के
श्रीनगर, गौचर, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली, नंदप्रयाग, चमोली और गोपेश्वर में “अंकिता भंडारी को न्याय दो”पदयात्रा पर निकले हुए हैं।जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की आत्मा जाग चुकी है।
पदयात्रा के दौरान गोदियाल ने कहा कि आज उत्तराखंड की देवतुल्य जनता के सामने यह सच्चाई रखना जरूरी है कि राज्य में सत्ता न केवल निरंकुश हो चुकी है, बल्कि अब वह अपराध के सबूत मिटाकर खुद को बचाने की राजनीति पर उतर आई है।
इस सत्ता को आइना दिखाना कांग्रेस का राजनीतिक दायित्व है और जनता का सामाजिक कर्तव्य।
गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जो हुआ, वह न्याय नहीं बल्कि साक्ष्य विनाश का संगठित अपराध था।
सबूत नष्ट करने के लिए रिसोर्ट में बुलडोजर चलाया गया। दो-दो बार पुलिस कस्टडी में उसी रिसोर्ट में आगजनी हुई।
और आज वही धामी सरकार, उसके मंत्री और सांसद जनता और विपक्ष से “साक्ष्य” मांग रहे हैं।
यह सत्ता का दोहरा चरित्र है?
जिन लोगों ने सबूत मिटाए, वही आज सबूतों की दुहाई दे रहे है।
धामी सरकार और भाजपा संगठन के पास कांग्रेस के सवालों का कोई तार्किक जवाब नहीं है।इसीलिए अब मनगढ़ंत नॉरेटिव गढ़ने के लिए नेताओं को लाइन से प्रेस वार्ता करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
गोदियाल ने स्पष्ट मांग करते। हुए कहा
उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर की टेलिफोनिक बातचीत की सत्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जब सरकार खुद पाक-साफ है तो CBI से डर क्यों?
गोदियाल जी ने यह भी याद दिलाया कि सत्र न्यायालय ने स्वयं माना है कि हत्या का मोटिव वह वीआईपी था जिसको स्पेशल सर्विस देने के लिए अंकिता भंडारी पर दबाव डाला जा रहा था।फिर सवाल उठता है
उस वी आई पी को अब तक बचाया क्यों जा रहा है?
गोदियाल ने कहा कि आज भाजपा सरकार और संगठन इस हद तक घबराए हुए हैं कि उनके पास प्रवक्ताओं का भी टोटा पड़ गया है।
अब पुलिस अधिकारियों को प्रेस में उतारकर सरकार अपना बचाव करा रही है, वह भी बिना किसी प्रोटोकॉल के।
जब राज्य का कैबिनेट मंत्री या ADG प्रेस वार्ता कर चुका हो,
तो उसके बाद एडिशनल एसपी से प्रेस वार्ता कराने का क्या औचित्य है?
यह साफ दर्शाता है कि अंकिता भंडारी के मुद्दे पर सरकार बिखरी हुई है,
जांच दिशाहीन है,
और सत्ता सच्चाई से डर रही है।
इन्हीं सवालों और जनता की आवाज़ को लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेशभर में
“अंकिता भंडारी को न्याय दो” पदयात्रा कर रहे हैं।
यह पदयात्रा राजनीतिक नहीं, बल्कि न्याय की जनआंदोलन है।
कांग्रेस की मांग एकदम स्पष्ट है अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच CBI से हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, और सभी संदिग्धों का नार्को टेस्ट कराया जाए।
जबतक वी आई पी बेनकाब नहीं होता,
सबूत मिटाने वालों पर कार्रवाई नहीं होती,
और अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलता,
तब तक कांग्रेस का संघर्ष सड़क से अदालत तक जारी रहेगा।
अंकिता सिर्फ एक पीड़िता नहीं,
अंकिता उत्तराखंड की बेटी है,
और बेटी के न्याय पर कोई समझौता नहीं होगा।

गरिमा मेहरा दसौनी