देहरादून | 07 फरवरी 2026
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के अंतर्गत परिवहन विभाग, उत्तराखंड द्वारा आज देहरादून में वाहन दुर्घटना क्रैश इन्वेस्टिगेशन (Vehicle Accident Crash Investigation) विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं अत्यंत उपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय जिलाधिकारी, देहरादून (अध्यक्ष, जिला सड़क सुरक्षा समिति) द्वारा की गई, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में माननीय कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल जी (वन, तकनीकी शिक्षा, भाषा एवं निर्वाचन विभाग) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में माननीय विधायक कैंट, सुश्री सविता कपूर जी, अपर परिवहन आयुक्त श्री सनत कुमार सिंह जी, संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री राजीव कुमार मेहरा जी सहित परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, शिक्षा, नगर निगम, एमडीडीए, वन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला सूचना अधिकारी एवं सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी के अधिकारीगण सम्मिलित हुए।
सड़क दुर्घटनाएँ – कोविड से भी अधिक गंभीर चुनौती
अपने अध्यक्षीय संबोधन में माननीय जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि आज सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या कोविड महामारी के दौरान हुई मौतों की तुलना में कहीं अधिक है, जो एक गंभीर सामाजिक चेतावनी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगर निकाय, प्रशासन सहित सभी विभागों, हितधारकों एवं स्वयं सड़क उपयोगकर्ताओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने वैज्ञानिक दुर्घटना जांच, डेटा-आधारित निर्णय और विभागीय समन्वय को सड़क सुरक्षा का आधार बताया
ओवरस्पीडिंग और हेलमेट उपयोग पर विशेष जोर
मुख्य अतिथि माननीय कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल जी ने कहा कि उत्तराखंड में जनसंख्या के साथ-साथ वाहनों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे यातायात दबाव और जाम की स्थिति बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि ओवरस्पीडिंग सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रही है।
उन्होंने दोपहिया वाहन पर चालक एवं पीछे बैठने वाले (पिलियन) दोनों के लिए हेलमेट के अनिवार्य उपयोग तथा यातायात नियमों के सख्त पालन पर विशेष बल दिया।
अतिक्रमण और मोबाइल फोन – बढ़ते खतरे
माननीय विधायक कैंट, सुश्री सविता कपूर जी ने अपने संबोधन में कहा कि घरों के सामने किया गया अनधिकृत अतिक्रमण, सड़क पर निजी सामान रखना एवं गलत स्थानों पर वाहन खड़ा करना यातायात अव्यवस्था और दुर्घटनाओं का कारण बनता है।
उन्होंने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के दुरुपयोग को अत्यंत खतरनाक बताते हुए नागरिकों से जिम्मेदार आचरण अपनाने की अपील की।
वैज्ञानिक दुर्घटना जांच ही स्थायी समाधान
अपर परिवहन आयुक्त श्री सनत कुमार सिंह जी ने कहा कि दुर्घटनाओं की जांच का उद्देश्य केवल दोष निर्धारण नहीं, बल्कि दुर्घटना के वास्तविक कारकों की पहचान कर उनका समाधान करना है।
उन्होंने बताया कि किसी भी दुर्घटना में मानव त्रुटि, वाहन इंजीनियरिंग अथवा सड़क इंजीनियरिंग — कोई एक या सभी कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
जब तक प्रत्येक दुर्घटना की गहन एवं वैज्ञानिक जांच कर मजबूत डेटाबेस विकसित नहीं किया जाएगा, तब तक दुर्घटनाओं और जनहानि पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
उन्होंने प्रत्येक जनपद में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया
*देहरादून जनपद — सड़क सुरक्षा में सुधार एवं सकारात्मक रुझान (iRAD डेटा आधारित)
Integrated Road Accident Database (iRAD) पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जनपद देहरादून में वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 (दिसंबर तक) सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार एवं सकारात्मक परिवर्तन दर्ज किया गया है।
दुर्घटनाओं में कमी
• वर्ष 2024 में कुल सड़क दुर्घटनाएँ: 511
• वर्ष 2025 में कुल सड़क दुर्घटनाएँ: 450
• कुल कमी: 61 दुर्घटनाएँ
• प्रतिशत कमी: –11.94%
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि देहरादून में प्रवर्तन, निगरानी एवं जनजागरूकता अभियानों का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
घायलों की संख्या में कमी
• वर्ष 2024 में घायल: 431
• वर्ष 2025 में घायल: 407
• कुल कमी: 24 घायल
• प्रतिशत कमी: –5.57%
दुर्घटनाओं की गंभीरता में कमी यह संकेत देती है कि स्पीड कंट्रोल, हेलमेट/सीट बेल्ट अनुपालन एवं त्वरित आपात प्रतिक्रिया में सुधार हुआ है।
⸻
मृतकों की संख्या — सतर्कता की आवश्यकता
• वर्ष 2024 में मृतक: 209
• वर्ष 2025 में मृतक: 229
• वृद्धि: +20
• प्रतिशत वृद्धि: +9.57%
यह दर्शाता है कि यद्यपि कुल दुर्घटनाएँ कम हुई हैं, परंतु कुछ दुर्घटनाएँ अब भी अत्यधिक गंभीर प्रकृति की हैं, जिनमें ओवरस्पीडिंग, हेलमेट/सीट बेल्ट न पहनना एवं देर से चिकित्सा सहायता जैसे कारक प्रभावी हो सकते हैं।
समग्र विश्लेषण (Official Narrative Line)
“जनपद देहरादून में वर्ष 2025 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं एवं घायलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जो प्रवर्तन, यातायात प्रबंधन, जनजागरूकता एवं विभागीय समन्वय के सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है।
हालाँकि, मृतकों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि गंभीर दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु ओवरस्पीडिंग नियंत्रण, हेलमेट/सीट बेल्ट अनुपालन और त्वरित आपात प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।”
⸻
• *“देहरादून में सड़क दुर्घटनाओं में 11.94% की कमी, घायलों की संख्या भी घटी — प्रवर्तन और जागरूकता के सकारात्मक परिणाम”*
iRAD डेटा से सामने आए चिंताजनक तथ्य
कार्यक्रम में Integrated Road Accident Database (iRAD) के माध्यम से प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में उत्तराखंड में कुल 1846 सड़क दुर्घटनाएँ, 1242 मृतक एवं 2056 घायल दर्ज किए गए।
यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वित, वैज्ञानिक एवं निरंतर प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। 
⸻
जेपीआरआई विशेषज्ञ द्वारा क्रैश इन्वेस्टिगेशन प्रशिक्षण
इस अवसर पर कार्यक्रम के दूसरे सत्र में JPRI Pvt. Ltd. (Jaya Padmanabhan Research India Pvt. Ltd.) के विशेषज्ञ श्री सुमित ढुल द्वारा वाहन दुर्घटनाओं की क्रैश इन्वेस्टिगेशन विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने वाहन दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक पद्धति से जाँच करने की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सभी स्टेकहोल्डर विभागों से इस दिशा में गंभीरता से कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने दुर्घटनाओं के प्रत्येक पहलू की गहन जाँच की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इसके अतिरिक्त, सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी से श्री नरेश संगल द्वारा विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यों एवं प्रयासों के संबंध में प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया गया।
साथ ही जिला सड़क सुरक्षा समिति की भूमिका एवं दायित्वों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया, जिससे विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों की स्पष्ट समझ प्राप्त है।
कार्यक्रम के अंत में संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री राजीव कुमार मेहरा जी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने माननीय मुख्य अतिथि, अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक, सभी विभागों के अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिवहन विभाग भविष्य में भी सड़क सुरक्षा, वैज्ञानिक दुर्घटना जांच, प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
आरटीओ प्रवर्तन एवं सड़क सुरक्षा, देहरादून — वक्तव्य
“राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
आज सड़क दुर्घटनाएँ केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक दुर्घटना के पीछे एक परिवार, एक भविष्य और एक जीवन जुड़ा होता है।
देहरादून जैसे तेजी से विकसित होते शहर में यातायात दबाव, अव्यवस्थित पार्किंग, ओवरस्पीडिंग तथा यातायात नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण बन रहे हैं। ऐसे में केवल प्रवर्तन ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दुर्घटना जांच, डेटा-आधारित विश्लेषण और जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
परिवहन विभाग, उत्तराखंड ने इस अवसर पर यह संकल्प दोहराया कि वैज्ञानिक जांच, विभागीय समन्वय, डेटा-आधारित नीति एवं जनभागीदारी के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाते हुए उत्तराखंड को सुरक्षित, स्वच्छ एवं जिम्मेदार परिवहन व्यवस्था वाला राज्य बनाया जाएगा।




