ललित जोशी ने युवाओं से नशे से दूर रहकर संस्कारों व राष्ट्र निर्माण से जुड़ने का किया आह्वान
प्रदेश के विद्यालयों में निरंतर नशा उन्मूलन का अभियान चला रही मानवाधिकार संरक्षण एवं भ्रष्टाचार निवारक समिति, उत्तराखण्ड ने अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को देहरादून स्थित सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराकर उन्हें एक स्वस्थ, सशक्त, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान समिति के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए नशे के सामाजिक, शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का नशा व्यक्ति को भीतर से खोखला कर देता है और उसकी सोच, लक्ष्य व भविष्य तीनों को प्रभावित करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस देश का युवा नशे की गिरफ्त में होता है, उस देश के सशक्त और समृद्ध भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती।
एडवोकेट जोशी ने चेताया कि आज कुछ विदेशी ताक़तें हमारे देश के युवाओं को नशा रूपी जाल में फँसाकर उनके लक्ष्य से भटकाने का प्रयास कर रही हैं, ताकि राष्ट्र की जड़ों को कमजोर किया जा सके। उन्होंने बताया कि आतंकवाद को मिलने वाली सबसे बड़ी फंडिंग अवैध नशे के कारोबार से होती है, और अनजाने में नशे की लत में पड़कर युवा भी इस राष्ट्रविरोधी गतिविधि को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने का कारण बन जाते हैं।
अपने प्रेरणादायक संबोधन में एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने संस्कारों से जुड़ने, माता-पिता के सम्मान और उनके ख्याल रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान और उनके प्रति कर्तव्यबोध ही सच्चे संस्कारों की पहचान है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, पारिवारिक मूल्यों और नैतिक आदर्शों को भी अपनाएँ।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने खुलकर अपने विचार साझा किए और नशे के कारण अपने आसपास व अपने घरों में घटित घटनाओं की जानकारी भी साझा की। छात्रों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक संवेदनशील व प्रभावशाली बना दिया।
कार्यक्रम को उत्तराखण्ड पुलिस के उप निरीक्षक विजय प्रताप ने भी संबोधित किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों के साथ-साथ सड़क सुरक्षा नियमों, यातायात अनुशासन और साइबर अपराधों से बचाव को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग और अनजान लिंक से होने वाले नुकसान के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी तथा कहा कि जागरूकता ही अपराध से बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है।
कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं को नशे से दूर रहने, अच्छे संस्कार अपनाने, माता-पिता का सम्मान करने तथा कानून का पालन करने की शपथ दिलाई गई। संवाद कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले विद्यार्थियों को मानवाधिकार संरक्षण एवं भ्रष्टाचार निवारक समिति की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्कूल की प्रधानाचार्या नीरजा डंडरियाल, तनु गर्ग, मनीषा जुयाल शिक्षक एवं कर्मचारी सहित 400 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।




