चेन्नई (Tamil Nadu stampede): तमिलनाडु के करूर (Karur) जिले में शनिवार शाम एक राजनीतिक रैली (Tamil Nadu politics) मातम में बदल गई. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कळगम (TVK) की रैली में मची भगदड़ ने 39 लोगों की जान (Vijay rally stampede Karur 39 dead) ले ली, जबकि 95 लोग घायल हो गए. घायलों में से 94 की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, जबकि एक गंभीर स्थिति में है. यह हादसा तमिलनाडु (Vijay rally stampede Latest Update) की राजनीति के इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक माना जा रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा इंतज़ाम में ऐसी लापरवाही कैसे हुई?
कैसे हुआ हादसा?
रैली दोपहर 12 बजे शुरू होनी थी, लेकिन विजय करीब 7 घंटे देर से, यानी रात 7:40 बजे पहुंचे. हजारों की भीड़ सुबह 11 बजे से ही मैदान में उमड़ पड़ी थी. लोग धूप में बिना (Tamil Nadu headlines) पानी और भोजन के इंतज़ार कर रहे थे. आयोजकों ने पुलिस को बताया था कि 10,000 लोगों की भीड़ आने की उम्मीद है, लेकिन हकीकत में 30,000 से भी ज्यादा लोग पहुंच गए. कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 50,000 तक बताई गई है. विजय का काफिला जब नामक्कल से कारूर पहुंचा, तो उसके साथ करीब 5,000 अतिरिक्त कार्यकर्ता भी आ गए.
विजय जैसे मंच पर पहुंचे वैसे ही…
विजय जैसे ही मंच पर पहुंचे और बोलना शुरू किया, उसी दौरान लाइट चली गई और लाउडस्पीकर बंद हो गया. लोग विजय को नज़दीक से देखने और सुनने (Latest Indian news) की कोशिश में बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने लगे. धक्का-मुक्की में लोग गिर पड़े, कई दम घुटने से बेहोश हो गए. देखते ही देखते भगदड़ ने भयावह रूप ले लिया. विजय ने भाषण रोककर मंच से बार-बार कहा – “पुलिस प्लीज हेल्प” – लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
मौत और घायल – दर्दनाक आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मरने वालों में –
- 17 महिलाएं
- 13 पुरुष
- 5 लड़कियां
- 4 लड़के शामिल हैं.
घायल 95 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.
- 51 मरीज सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कारूर में
- 44 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हैं.
तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव पी. सेंथिल कुमार ने बताया कि सभी घायलों की हालत स्थिर है, केवल एक मरीज गंभीर है. विशेष डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज कर रही है.
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
जैसे ही हादसे की खबर आई, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन रात को ही (Tamilaga Vettri Kazhagam stampede) कारूर पहुंचे और अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की. उन्होंने मृतकों के परिवारों को ₹10 लाख, घायलों को ₹1 लाख और ICU में भर्ती मरीजों को अतिरिक्त ₹1 लाख मुआवजा देने का एलान किया.
साथ ही कारूर जिला कलेक्टर कार्यालय ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए –
- फोन: 04324 256306
- व्हाट्सऐप: 7010806322
स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यन और पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को भी तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया.
जांच और कानूनी मोर्चा
मुख्यमंत्री ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज अरुणा जगदीसन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग बनाया है. अरुणा जगदीसन वही जज हैं जिन्होंने 2018 के थूथुकुडी फायरिंग केस (14 मौतें) की जांच की थी. केंद्र सरकार ने भी राज्य से रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों से बात की. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील जीएस मणि ने विजय और TVK नेताओं पर गंभीर लापरवाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने की मांग की है. उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की अपील भी की है.
पुलिस और सुरक्षा की नाकामी
तमिलनाडु DGP जी. वेंकटरमन ने माना कि केवल 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि 20,000 लोगों के हिसाब से प्लानिंग हुई थी. असल में 30,000 से ज्यादा लोग पहुंचे. जगह संकरी थी, जिससे भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया.
पुलिस ने पहले ही नियम बनाए थे कि –
- रोड शो नहीं होगा
- LED स्क्रीन की अनुमति नहीं
- बच्चों को न लाया जाए
- अलग एंट्री और एग्ज़िट पॉइंट होंगे
लेकिन इनमें से ज्यादातर नियम तोड़े गए। दुखद यह कि 9 बच्चों की जान गई.
राजनीति और प्रतिक्रियाएं
विजय ने एक्स (Twitter) पर लिखा –
“मेरा दिल टूट गया है। कारूर की घटना ने मुझे असहनीय दुख दिया है. जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं.”
हालांकि DMK प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि विजय ने जानबूझकर भीड़ जुटाई और 6 घंटे की देरी से पहुंचे, जिससे हादसा हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई.
कारूर की यह त्रासदी कई सवाल छोड़ गई है..
- क्या आयोजकों और पुलिस ने भीड़ का सही अनुमान लगाया था?
- क्या सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफी थे?
- क्या रैलियों में लोगों की जान से खिलवाड़ हो रहा है?
- साफ है कि खराब प्लानिंग, भीड़ का गलत आकलन, सुरक्षा की कमी और नेताओं की देर से एंट्री, इन सबने मिलकर 39 मासूमों की जान ले ली. अब तमिलनाडु सरकार (Vijay rally overcrowding stampede) की जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि जिम्मेदारी किसकी है और क्या भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकेंगी.
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