टिहरी/ नरेंद्रनगर: उत्तराखंड के टिहरी जनपद में बुधवार बेहद दर्दनाक सड़क हादसा (Tehri Accident) 100 मीटर गहरी खाई में गिरी स्कूटी, युवक की मौत; SDRF ने रेस्क्यू कर शव किया बरामद) हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। दुवाधार क्षेत्र के पास एक स्कूटी अचानक बेकाबू होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें स्कूटी सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। सुबह जैसे ही यह घटना स्थानीय पुलिस के संज्ञान में आई, राहत और बचाव दल तुरंत सक्रिय हो गए, लेकिन खाई की गहराई के कारण बड़ी मशक्कत के बाद शव बाहर निकाला गया।
सूचना मिलते ही SDRF टीम हरकत में आई
घटना की जानकारी मिलने पर थाना नरेंद्रनगर टीम ने SDRF को सूचित किया। जानकारी मिलते ही SI सुरेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में SDRF टीम पोस्ट ढालवाला से फौरन घटनास्थल की ओर रवाना हुई। पहाड़ी इलाकों में ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन हमेशा चुनौतीपूर्ण होते हैं, लेकिन SDRF के जवान बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे।

SDRF और फायर सर्विस की संयुक्त टीम को खाई तक उतरने में विशेष उपकरणों का सहारा (Tehri News) लेना पड़ा। ढलान बेहद फिसलन भरा था और नीचे तक पहुंचना जोखिम भरा। लेकिन टीमों ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 100 मीटर नीचे जाकर युवक के शव को बरामद किया। कई घंटों की मेहनत के बाद शव को सुरक्षित ऊपर लाया गया और फिर जिला पुलिस के सुपुर्द किया गया।
युवक की पहचान हुई
पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान हरेंद्र सिंह पुंडीर (उम्र 34 वर्ष) पुत्र शूरवीर सिंह पुंडीर निवासी ग्राम सोनी, हिंडोलाखाल, टिहरी के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवक देर रात स्कूटी से कहीं जा रहा था, लेकिन रास्ता अंधेरा होने और सड़क संकरी होने के चलते वाहन बेकाबू हो गया और खाई में गिर गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर सड़क किनारे उचित सुरक्षा बैरियर नहीं होने से पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

परिवार में मचा कोहराम, गांव में मातम
हरेंद्र की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। हरेंद्र शांत स्वभाव का और परिवार का सहारा था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम सुधारने और सड़क किनारे मजबूत बैरियर लगाने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस कठिन रेस्क्यू में SDRF और फायर सर्विस के जवानों द्वारा दिखाई गई तत्परता और साहस की खूब सराहना की जा रही है। रात भर चले अभियान के बाद शव को बाहर निकाल पाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। SDRF के जवान हर बार की तरह इस बार भी संवेदनशीलता और प्रोफेशनलिज्म के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते नजर आए।
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