Sunday, February 8, 2026
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UPNL Strike: सरकार ने लगाई 6 महीने तक हड़ताल पर रोक, कर्मचारियों पर नो वर्क-नो पे लागू; उपनल कर्मियों ने जलाई ऑर्डर की प्रतियां

नो वर्क–नो पे आदेश के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सचिव दीपेंद्र चौधरी का पुतला दहन किया और आदेश की प्रतियां जलाकर कड़ा विरोध जताया। उपनल आंदोलन अब और तेज होने के संकेत दे रहा है।

देहरादून: राज्य में पिछले कई दिनों से लगातार चर्चाओं में चल रहे उपनल कर्मचारियों के आंदोलन (UPNL Strike) के बीच धामी सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठा दिया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर अगले छह महीनों तक सभी राज्य सेवाओं में हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजधानी देहरादून स्थित परेड ग्राउंड पर उपनल कर्मचारी पिछले 10 दिनों से नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।

राज्य के कार्मिक सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना ने साफ कर दिया कि अब किसी भी विभाग, निगम, बोर्ड या संस्थान में कार्यरत कर्मचारी अगले छह महीनों तक हड़ताल नहीं कर सकेंगे। अधिसूचना को उत्तर प्रदेश आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1966 की धारा 3(1) (जो उत्तराखंड राज्य में लागू है) के तहत जारी किया गया है। सरकार का तर्क है कि जनहित और आवश्यक सेवाओं के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय अनिवार्य हो गया था।

UPNL Strike
हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर ‘नो वर्क-नो पे’

उपनल कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी

सरकार ने सिर्फ हड़ताल पर रोक नहीं लगाई, बल्कि इसके साथ ही उपनल कर्मियों को लेकर एक और कड़ा आदेश जारी कर दिया है। सैनिक कल्याण विभाग को भेजे गए पत्र में निर्देश दिया गया है कि हड़ताल में शामिल उपनल कर्मचारियों की पहचान की जाए और जिन कर्मचारियों की आंदोलन में सहभागिता पाई जाएगी, उन्हें No Work, No Pay के तहत कार्रवाई झेलनी होगी। इस सख्ती के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार अब आंदोलन को लेकर नरमी नहीं दिखाने वाली। कई विभागों को अपनी रिपोर्ट शासन को तुरंत भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

UPNL Strike
उत्तराखंड में 6 महीने की हड़ताल पर पूरी रोक

10 दिनों से देहरादून में धरना, कांग्रेस का खुला समर्थन

गौरतलब है कि उपनल कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन और सुरक्षा लाभों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर वे पिछले 10 दिनों से परेड ग्राउंड, देहरादून में लगातार धरने पर बैठे हैं। राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा गर्मा चुका है। कांग्रेस ने खुले तौर पर उपनल कर्मचारियों के आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश तेज कर दी है। विपक्ष का कहना है कि कर्मचारियों की मांग जायज है और सरकार को बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।

UPNL Strike

सरकार का एक्शन, आंदोलन की रफ्तार और तेज?

जारी अधिसूचना के बाद आंदोलन कर रहे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हड़ताल पर प्रतिबंध और ESMA की सख्ती से एक तरफ जहां शासन तंत्र को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर संघर्षरत कर्मचारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

शासनादेश को लेकर उपनल कर्मचारियों की दो टूक

वहीं दूसरी ओर, उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों का शोषण करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर नियमितीकरण के लिए उप समिति बनाने का ढोंग रचती है वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को डराने धमकाने के लिए काला शासनदेश जारी करती है, जिसके विरोध में कर्मचारियों ने सचिव दीपेंद्र चौधरी का पुतला दहन के साथ नो वर्क नो पर के ऑर्डर की प्रतियां जलाई।

UPNL Strike
उपनल कर्मचारियों पर सरकार का शिकंजा

अब देखना होगा कि क्या सरकार संवाद का रास्ता चुनेगी या सख्ती बढ़ने से आंदोलन और उग्र होगा? उपनल कर्मचारियों पर नो वर्क, नो पे की तलवार क्या नए विवाद पैदा करेगी? फिलहाल इतना तय है कि उत्तराखंड में अगले छह महीनों तक हड़ताल का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है और शासन ने साफ संदेश दे दिया है कि आवश्यक सेवाओं में किसी तरह का व्यवधान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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