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हरिद्वार में भंडारे वाले बाबा को हरिद्वार पुलिस ने दी सम्मानजनक अंतिम विदाई

जब अपनों के कदम थम गए, तब वर्दी ने निभाया इंसानियत का फर्ज
हरिद्वार।
हर की पौड़ी की गलियों में भूखे पेट को भोजन कराने वाले रमाशंकर गुप्ता (58 वर्ष), जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘भंडारे वाले बाबा’ या *‘भंडारा किंग बाबा’* के नाम से जाना जाता था, का निधन हो गया। आर्थिक तंगी के कारण परिजन अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंच सके, तो हरिद्वार पुलिस ने मानवता और सेवा भाव से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उनका सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया।
दिनांक 9 जुलाई 2026 को पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक व्यक्ति का शव मिलने पर कोतवाली नगर पुलिस ने तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की। शिनाख्त में मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी रमाशंकर गुप्ता के रूप में हुई, जो वर्षों से हरिद्वार में श्रद्धालुओं के सहयोग से सूक्ष्म भंडारे कराते थे।
परिजनों से संपर्क करने पर पता चला कि वे आर्थिक कारणों से हरिद्वार नहीं आ सकते। ऐसे में 12 जुलाई 2026 को पोस्टमार्टम के बाद कोतवाली नगर हरिद्वार पुलिस ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूर्ण हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कराया।
*सेवा का अनूठा रूप*
रमाशंकर गुप्ता किसी बड़े संगठन या मठ से नहीं जुड़े थे। वे अकेले ही यह कार्य करते थे। हर की पौड़ी क्षेत्र में बैठकर श्रद्धालुओं से विनम्रतापूर्वक अपील करते कि यदि संभव हो तो गरीबों, साधु-संतों और बेसहारा लोगों के भोजन का खर्च उठा लें। उनके आग्रह में न कोई दिखावा था, न दबाव। जो सहयोग मिलता, उसे वे स्वयं भोजन तैयार करवाकर जरूरतमंदों को सम्मान के साथ परोसते।
स्थानीय दुकानदारों और नियमित श्रद्धालुओं के बीच वे ‘भंडारे वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थे। उनके जाने के बाद उन गरीबों और बेसहारों के बीच चिंता है, जिनका रोज का भोजन उनके भंडारे पर निर्भर था।
*पुलिस का संदेश: सेवा और संवेदना*
हरिद्वार पुलिस ने इस मौके पर साबित किया कि वर्दी सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि इंसानियत भी है। पुलिस का कहना है- *“सेवा, संवेदना और मानवता ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”*
रमाशंकर गुप्ता ने बिना प्रचार के वर्षों तक समाज सेवा की। शिवसेतु के पास उनकी आत्मीय पुकार अब सुनाई नहीं देगी, लेकिन गरीबों के लिए भोजन जुटाने की उनकी सोच और सेवा का भाव लोगों की यादों में लंबे समय तक जीवित रहेगा।
*अंतिम दूत* इस मानवीय पहल के लिए हरिद्वार पुलिस की सराहना करता है। ऐसे कार्य समाज में विश्वास और सद्भावना को मजबूत करते हैं।

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