Homeताज़ा खबरेंहरिद्वार में छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा: 19 स्कूलों-संस्थानों पर FIR दर्ज

हरिद्वार में छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा: 19 स्कूलों-संस्थानों पर FIR दर्ज

 

हरिद्वार। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 के दौरान छात्रवृत्ति योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, हरिद्वार ने 19 शैक्षणिक संस्थानों के विरुद्ध FIR दर्ज करवा है ।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (इंस्पेक्टर रावत) द्वारा जारी पत्र के अनुसार, केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं में संदिग्ध तरीके से लाभार्थियों का चयन, दस्तावेजों में अनियमितता और शासकीय धन का गबन किए जाने के आरोप हैं। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन संस्थानों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
संदिग्ध संस्थान (2021-22)
1. गॉड ब्लेस पब्लिक स्कूल, सहदेवपुर
2. एम.जी. पब्लिक स्कूल, अहमदपुर ग्रांट
3. ए.एस.एन. इंटर कॉलेज, धीरवाली, ज्वालापुर
4. सैनी प्राइवेट आई.टी.आई., औद्योगिक क्षेत्र, बहादराबाद
5. जय भारती प्राइवेट आई.टी.आई., पर्था उर्फ धनपुरा
6. एस.बी.एन. प्राइवेट आई.टी.आई., टिक्कमपुर
7. आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, मुस्तफाबाद
8. विश्व भारती पब्लिक स्कूल, गाज़ीवाली
9. मदरसा नूर-ए-हसन, हरिद्वार
10. जय भारत पी.एस. विंध्यवण्ढक
11. हन्नू आई.टी.आई., भगवानपुर
12. रेडियंस एकेडमी, नेहरूनगर, सुटारी, लक्सर
13. रामतीर्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रहमतपुर, रुड़की
14. रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुहाना
15. महर्षि दयानंद प्राइवेट आई.टी.आई., धनौरी
16. संस्कृति पब्लिक स्कूल, भौरी रुड़की
17. फीनिक्स स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड बिजनेस कॉलेज, इमली खेड़ा, रुड़की
18. एस.डी.पी.एस. गर्ल्स इंटर कॉलेज, रुड़की
19. ओम इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, बड़ौली, राजपुर ताना, रुड़की
जांच में क्या पाया गया?
जांच रिपोर्ट के अनुसार इन संस्थानों द्वारा छात्रवृत्ति राशि में वित्तीय अनियमितता, फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया प्रतीत होता है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित थानों को FIR दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह मामला केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। ऐसे घोटालों से असली जरूरतमंद छात्रों को लाभ पहुंचने में बाधा उत्पन्न होती है।
अंतिम दूत इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करता है और उम्मीद करता है कि दोषी संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा वसूली प्रक्रिया भी तेज की जाएगी, ताकि छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

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