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उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ITBP और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के मध्य MOU

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देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ के अंतर्गत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) की उत्तराखंड में तैनात वाहिनियों के लिए स्थानीय उत्पादों (ताज़े फल एवं सब्जियों) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के मध्य समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने उत्तराखंड औद्यानिक परिषद और आईटीबीपी के मध्य हुए इस समझौता ज्ञापन (MoU) को राज्य के किसानों, स्थानीय उत्पादकों एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समझौते के माध्यम से राज्य में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों को स्थानीय स्तर पर ताज़े फल एवं सब्जियों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे एक ओर हमारे जवानों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल “स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा” देने के राज्य सरकार के संकल्प को सशक्त करेगी तथा किसानों को अपनी उपज के विपणन के लिए एक सुदृढ़ एवं स्थायी मंच प्रदान करेगी। इस व्यवस्था के तहत चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ एवं चंपावत जैसे दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ ही देहरादून में भी स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता सीमांत क्षेत्रों में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक होगा और उन्हें बाजार तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों से भी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं हमारे जवानों के कल्याण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड सरकार और आईटीबीपी के मध्य स्थानीय उत्पादों की खरीद के लिए पहले भी समझौता किया गया, जिसके काफी अच्छे परिणाम रहे हैं। अभी तक आईटीबीपी 14 करोड़ 77 लाख रुपये के स्थानीय उत्पादों की खरीद कर चुका है, जिसे और बढ़ाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में आईटीबीपी वार्षिक मांग की 25 प्रतिशत फल एवं सब्जियाँ भी खरीदती है, तो इससे स्थानीय किसानों को लगभग 6 करोड़ रुपये की आमदनी होगी।

इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी, सचिव कृषि श्री एस.एन. पाण्डेय, आईजी आईटीबीपी श्री मनु महाराज, अपर सचिव श्री आनन्द श्रीवास्तव, निदेशक उद्यान श्री एस.एल. सेमवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखंड औद्यानिक परिषद श्री नरेन्द्र कुमार यादव एवं आईटीबीपी के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

 

Action: देहराखास में अवैध निर्माण पर MDDA ने कसा शिकंजा, बिना मानचित्र बने भवन पर सीलिंग कार्रवाई

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वेद सिटी गली नंम्बर-1 में निर्माणाधीन भवन सील, बिना अनुमति निर्माण पर प्राधिकरण का सख्त रुख

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करते हुए देहराखास क्षेत्र में एक निर्माणाधीन भवन को सील कर दिया। यह कार्रवाई प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे सतत निरीक्षण अभियान के तहत की गई, जिसमें बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य को नियमों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।

*बिना अनुमति निर्माण पर कड़ी कार्रवाई*
प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार देहराखास स्थित वेद सिटी गली नंम्बर-1 में दिनेश्वर पंडित एवं सूरज द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य किया जा रहा था। शिकायत मिलने के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और निर्माण को अवैध पाए जाने पर भवन को सील कर दिया। अधिकारियों ने साफ किया कि नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

*संयुक्त सचिव प्रत्युष कुमार के निर्देश पर टीम ने की कार्रवाई*
यह पूरी कार्रवाई संयुक्त सचिव प्रत्युष कुमार के निर्देशों के अनुपालन में की गई। मौके पर सहायक अभियंता निशांत कुकरेती और सुपरवाइजर की मौजूदगी में निर्माण कार्य को रुकवाकर भवन को सील किया गया। टीम ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा।

एमडीडीए का कहना है कि बिना स्वीकृति के हो रहे निर्माण कार्य न केवल शहरी नियोजन को प्रभावित करते हैं, बल्कि भविष्य में सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा पैदा करते हैं। ऐसे मामलों में प्राधिकरण लगातार निगरानी कर रहा है और जहां भी अनियमितता पाई जा रही है, वहां तुरंत कार्रवाई की जा रही है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। किसी भी निर्माण कार्य से पहले मानचित्र की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति निर्माण करने वालों के खिलाफ सीलिंग, ध्वस्तीकरण और जुर्माने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी निर्माण से पहले नियमानुसार अनुमति लें और अपने आसपास हो रहे अवैध निर्माण की सूचना प्राधिकरण को दें।

*शहर के सुनियोजित विकास पर खतरा- बंशीधर तिवारी*
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास और नागरिकों की सुरक्षा के लिए निर्माण कार्यों का नियमानुसार होना बेहद आवश्यक है। बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और जहां भी अनियमितता मिल रही है, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

*अभियान रहेगा जारी, जनता से सहयोग की अपील- मोहन सिंह बर्निया*
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। देहराखास क्षेत्र में बिना अनुमति के निर्माण कार्य पाए जाने पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि सभी सहायक अभियंताओं और क्षेत्रीय टीमों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि अवैध निर्माण पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

 

HLL-HLFPPT द्वारा हरिद्वार के टोल कर्मियों हेतु भव्य स्वास्थ्य शिविर का आयोजन:  अधिकारियों ने की सराहना

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​हरिद्वार/देहरादून, 29 मार्च 2026:
राष्ट्रीय राजमार्गों पर कार्यरत टोल कर्मियों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देते हुए, आज HLL-HLFPPT द्वारा हरिद्वार क्षेत्र के दो प्रमुख टोल प्लाजा— बहादराबाद (Bahadrabad) और सय्यद माजरा (Sayad Majra) पर ‘विशेष स्वास्थ्य शिविर’ (Specialized Health Camps) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।


​इस शिविर का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर निरंतर सेवाएं देने वाले कर्मचारियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करना और उन्हें आवश्यक चिकित्सा परामर्श प्रदान करना था। शिविर के दौरान डॉक्टरों की टीम द्वारा टोल कर्मियों की सामान्य शारीरिक जांच, रक्तचाप (BP) और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की जांच की गई।
​उच्चाधिकारियों द्वारा सराहना
​इन शिविरों के कुशल प्रबंधन और सफल कार्यान्वयन के लिए रीजनल ऑफिस (RO) देहरादून और प्रोजेक्ट डायरेक्टर (PD) ने टीम के प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाती है, बल्कि कार्यस्थल पर एक स्वस्थ वातावरण भी सुनिश्चित करती है।
​प्रमुख उपस्थिति
​स्वास्थ्य शिविर के दौरान कार्यस्थल पर प्रबंधन और संचालन की निगरानी हेतु HLFPPT की ओर से निम्नलिखित अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
​श्री मनोज कुमार (स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर – SPM)
​श्री मुकेश नौटियाल (एसोसिएट रीजनल प्रोजेक्ट ऑफिसर – ARPO)
​शिविर के अंत में टोल कर्मियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और नियमित जांच कराने की सलाह दी गई। HLFPPT भविष्य में भी समुदाय और कार्यबल के स्वास्थ्य उत्थान हेतु इस तरह के सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

SSP Action: निर्धारित समयावधि के बाद खुला मिला पब, बार या रेस्टोरेंट, तो सीधे दर्ज होगा मुकदमा

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एसएसपी देहरादून द्वारा पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिकों/संचालकों के साथ की गोष्ठी

*अपने प्रतिष्ठानों में नियमो का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दी हिदायत*

*नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे वैधानिक कार्यवाही के लिये तैयार रहने की दी चेतावनी*

*01 दिन पूर्व ही पुलिस द्वारा आकस्मिक छापेमारी के दौरान निर्धारित समयावधि के बाद भी संचालित होने वाले 02 बार/ रेस्ट्रोरेंट संचालकों के विरुद्ध दर्ज किया था अभियोग*

आज दिनांक – 31/03/2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा पुलिस कार्यालय में जनपद के सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिकों/संचालकों के साथ गोष्ठी की गयी। गोष्ठी के दौरान एसएसपी देहरादून द्वारा सभी प्रतिष्ठान मालिकों/संचालकों को उनके प्रतिष्ठानों में अनियमितता मिलने पर सख्त कार्यवाही की हिदायत देते हुए निम्न निर्देश दिये गये।

1- सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिक/संचालक यह सुनिश्चित कर ले कि किसी भी पब/बार/रेस्टोरेंट को निर्धारित समयावधि के उपरान्त संचालित न किया जाये। निर्धारित समयावधि के बाद संचालित होने वाले पब/बार/रेस्टोरेंट के संचालक के विरूद्ध सीधे अभियोग पंजीकृत करते हुए कडी वैधानिक कार्यवाही की जायेगी, साथ ही सम्बन्धित प्रतिष्ठान के लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट भी भेजी जायेगी।

2- सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिक/संचालक अपने प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों का शत प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित करते हुए उक्त सभी कर्मियों की सूची पूर्ण विवरण के साथ पुलिस को उपलब्ध करायेंगे, साथ ही इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ा कोई भी व्यक्ति उनके प्रतिष्ठान से न जुड़ा हो, इसमें कोताही बरतने वाले प्रतिष्ठान संचालकों के विरूद्ध आवश्यक विधिक कार्यवाही की जायेगी।

3- सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिक/संचालक अपने प्रतिष्ठानों में हुए किसी भी विवाद की सूचना तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, यदि किसी प्रतिष्ठान में हुए किसी विवाद, जिसकी सूचना सम्बन्धित संचालक द्वारा पुलिस को न दी गई हो, के चलते कोई आपराधिक घटना घटित होती है तो सम्बन्धित प्रतिष्ठान संचालक के विरूद्ध भी सख्त वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

4- सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिक/संचालक अपने प्रतिष्ठान के एन्ट्री तथा एक्जिट प्वांइट पर लगे सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस पुलिस को भी उपलब्ध करायें, जिससे निर्धारित समयावधि के बाद संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्यवाही की जा सके।

5- अक्सर पीजी/हॉस्टल में रहने वाले छात्र देर रात्रि तक पब तथा बारों में बैठे रहते हैं, जिसके पश्चात उनके द्वारा नशे की हालत में वाहनों को चलाया जाता है, जिससे दुर्घटना होने की सम्भावना बनी रहती है। अत: सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिक/संचालक निर्धारित समयावधि के बाद किसी भी दशा में अपने प्रतिष्ठानों का संचालन न करें, नियमों का उल्लघंन करता पाये जाने पर सम्बन्धित प्रतिष्ठान के विरूद्ध सख्त वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

देहरादून में संचालित होने वाले पब/बार/रेस्टोरेंट की संख्या के सापेक्ष पुलिस की उपलब्धता कम होने के दृष्टिगत एसएसपी देहरादून द्वारा सभी पब/बार/रेस्टोरेंट के मालिक/संचालकों सें अपेक्षा की गई कि वह अपने प्रतिष्ठानों में नियमों का सख्ती से पालन करना सुनिश्चित करेंगे तथा देहरादून के माहौल में सकारात्मक सुधार लाने में पुलिस को अपना सहयोग प्रदान करेंगे।

 

चारधाम यात्रा 2026ः स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर व्यापक तैयारियां, 1350 डॉक्टरों की तैनाती

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यात्रा में प्राइवेट व सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टर देंगे सेवाएं

*श्रद्वालुओं को राहतः चारधाम मार्ग पर बनेंगी 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट*

*हाई एल्टीटयूड चुनौतियों से निपटने को डॉक्टरों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण- डीजी हेल्थ*

*देहरादून 31 मार्च,2026 (सू.वि),*
आगामी 19 अप्रैल से प्रारंभ हो रही चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक एवं सुदृढ़ व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा मार्गों तथा ट्रांजिट कैंपों में चिकित्सा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रा रूट पर लगभग 1350 डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती हेतु विस्तृत रोस्टर तैयार किया गया है। ये टीमें विभिन्न पड़ावों, कैंपों एवं प्रमुख स्थलों पर 24 घंटे सेवाएं प्रदान करेंगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। सभी चिकित्सा कर्मियों को संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के अधीन रखा गया है।

यात्रा के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर स्क्रीनिंग एवं मेडिकल चेकअप की सख्त व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, यात्रा मार्गों पर आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी भी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि श्रद्धालु यात्रा के दौरान सतर्क एवं सुरक्षित रह सकें।

महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखंड, डॉ. सुनीता टम्टा ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जानकारी दी कि विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती भी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यात्रा मार्गों पर 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट (एमआरपी) स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का त्वरित लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

*विशेष प्रशिक्षण पर जोर*
यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों को जनपद स्तर एवं राजधानी स्थित मेडिकल कॉलेजों में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु सक्षम बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान, रक्तचाप असंतुलन एवं हृदय संबंधी समस्याओं के त्वरित उपचार की विशेष जानकारी दी जा रही है। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने का अभ्यास भी कराया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन सुदृढ़ व्यवस्थाओं एवं प्रशिक्षण के माध्यम से देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान बेहतर, सुरक्षित एवं सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

जिला सूचना अधिकारी, देहरादून।

 

Action: DM की QRT अलर्ट, घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग पर 16 सिलेंडर जब्त

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देहरादून दिनांक 31 मार्च 2026, जनपद में एलपीजी गैस की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा शत-प्रतिशत होम डिलीवरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के अनुपालन में क्षेत्रवार क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) का गठन किया गया है।


निर्देशों के क्रम में गठित क्यूआरटी टीम द्वारा आज जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम ने एलपीजी गैस की मांग, आपूर्ति, वितरण प्रणाली एवं होम डिलीवरी व्यवस्था का गहनता से परीक्षण किया। साथ ही उपभोक्ताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गैस उपलब्ध कराए जाने की भी समीक्षा की गई।
इसी क्रम में संयुक्त टीम द्वारा शिमला बायपास, चंद्रबनी क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें अनियमितता पाए जाने पर कुल 16 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए। जब्त सिलेंडरों के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी गैस की कालाबाजारी, अवैध भंडारण अथवा वाणिज्यिक उपयोग में घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की किसी भी स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही सभी गैस एजेंसियों को निर्देशित किया गया है कि वे गैस वितरण में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखें तथा शत-प्रतिशत होम डिलीवरी सुनिश्चित करें।

जिला प्रशासन द्वारा प्रसारित 1077, 0135-2626066, 2726066 और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 के माध्यम से कुल 26 शिकायतें एलपीजी गैस की आपूर्ति के सम्बन्ध में दर्ज हुई है, वही कंट्रोलरूम में मौजूद जिला खाद्य पूर्ति विभाग, देहरादून में एलपीजी गैस की आपूर्ति, सिलेंडर उपलब्धता या अन्य किसी प्रकार की समस्या को लेकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में आज लगभग 10803 अधिक उपभोक्ताओं को घरेलू तथा 674 उपभोक्ताओं को व्यवसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। एलपीजी का घरेलू 31536 तथा व्यवसायिक का 2852 स्टॉक उपलब्ध है। घरेलू के साथ ही व्यवसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर का लोड निंरतर बढाया जा रहा है।
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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून।

Action: मसूरी में अवैध निर्माण पर MDDA का शिकंजा, कैमल बैंक रोड स्थित भवन सील

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बिना मानचित्र स्वीकृति निर्माण पर कार्रवाई, टीम के साथ पुलिस बल रहा मौजूद

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए मसूरी के प्रमुख क्षेत्र कैमल बैंक रोड में एक भवन को सील कर दिया। प्राधिकरण द्वारा की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण कराने वालों में हड़कंप मच गया है। एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे निर्माण कार्यों पर सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण को मिली शिकायतों और नियमित निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कैमल बैंक रोड स्थित वेलमाउंट कॉटेज के पास, चाह इन्दारा जुबली के पीछे मकान संख्या 2152 में रेनु सिंह पत्नी हरि सिंह द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य किया जा रहा है। जांच में यह पाया गया कि निर्माण कार्य प्राधिकरण की निर्धारित नियमावली के विपरीत है और इसके लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त नहीं की गई थीं।

उक्त प्रकरण में एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर तत्काल प्रभाव से भवन को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अजय मलिक, संबंधित सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। टीम ने आसपास के क्षेत्र का भी निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों को अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त चेतावनी दी।प्राधिकरण ने कहा कि मसूरी जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में अनियंत्रित और अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी और प्राकृतिक सौंदर्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एमडीडीए “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार कार्रवाई कर रहा है। एमडीडीए ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले विधिवत मानचित्र स्वीकृति और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करें। बिना अनुमति निर्माण करने पर सीलिंग, ध्वस्तीकरण सहित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में मसूरी और देहरादून के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के अभियान जारी रहेंगे, जिससे नियोजित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

*बिना स्वीकृति निर्माण पर सख्त कार्रवाई तय— बंशीधर तिवारी*
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मसूरी जैसे संवेदनशील हिल स्टेशन में नियमों की अनदेखी कर निर्माण करना गंभीर विषय है, जो पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रभावित करता है। एमडीडीए द्वारा लगातार निगरानी और निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत चिन्हित अवैध निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी बिना स्वीकृति निर्माण कार्य पाया जाएगा, वहां सीलिंग और आवश्यकतानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आम नागरिकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि निर्माण शुरू करने से पहले प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य है। नियमों के अनुरूप विकास ही सुरक्षित और स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए भविष्य में कार्रवाई को और तेज किया जाएगा।

*शिकायत और निरीक्षण के आधार पर हो रही कार्रवाई— मोहन सिंह बर्निया*
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण के विरुद्ध नियमित अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी क्षेत्र में प्राप्त शिकायतों और फील्ड निरीक्षण के आधार पर संबंधित भवन में बिना अनुमति निर्माण की पुष्टि हुई, जिसके बाद नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे प्राधिकरण के नियमों का पालन करें और किसी भी अवैध निर्माण की जानकारी तुरंत एमडीडीए को दें। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सुव्यवस्थित, सुरक्षित और नियमों के अनुरूप विकास सुनिश्चित करना है।

 

चंपावत में 55.52 करोड़ की लागत से निर्माणधीन साइंस सेंटर का सीएम धामी ने किया निरीक्षण

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चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज चंपावत के भ्रमण के दौरान लगभग 55.52 करोड़ की लागत से निर्माणधीन अत्याधुनिक साइंस सेंटर का स्थल निरीक्षण किया


उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित वैज्ञानिक एवं चार मंजिला कैंपस का अवलोकन किया। इस कैंपस में 40 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास स्टाफ क्वार्टर तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही है , जिससे यहां केंद्र विद्यार्थियों के लिए आवासीय वैज्ञानिक शिक्षण का भी महत्वपूर्ण स्थल बनेगा।

इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने अवगत कराया कि दो मंजिला साइंस गैलरी ब्लॉक में “फन साइंस गैलरी”, प्रदर्शनी कक्ष, विज्ञान एवं कृषि गैलरी, प्रशिक्षण हॉल तथा अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त परिसर में 120 क्षमता वाला ऑडिटोरियम, 71 सीटों वाला आधुनिक प्लैनेटेरियम (तारामंडल) — जिसमें इनर एवं आउटर डोम की सुविधा होगी — तथा स्टाफ के लिए कॉन्फ्रेंस एवं डेवलपमेंट हॉल जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं भी स्थापित की जा रही हैं।

निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री ने विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किए गए विज्ञान मॉडलों का अवलोकन किया तथा नन्हे वैज्ञानिकों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह साइंस सेंटर भविष्य में प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान के बिना विकास की परिकल्पना अधूरी है और इस केंद्र के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों एवं खगोल विज्ञान को समझने का अवसर प्राप्त होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। साथ ही उन्होंने निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों एवं श्रमिकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने पर भी बल दिया।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह सामंत, भाजपा प्रदेश मंत्री निर्मल मेहरा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमा पांडे, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

बड़ी खबर: उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को मिली राहत, 18.86% टैरिफ बढ़ोतरी को आयोग ने किया खारिज

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नियामक आयोग का बड़ा फैसला—दरें यथावत, उद्योग और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अहम बदलाव लागू

देहरादून। महंगाई के इस दौर में उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 18.86% बिजली टैरिफ वृद्धि को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिलों के बोझ से सीधी बड़ी राहत मिली है। आयोग ने 25 किलोवाट वालों को सौर ऊर्जा का उपयोग करने पर बड़ी राहत दी है।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी प्रभात कुमार डिमरी और सदस्य न्यायिक अनुराग शर्मा ने मंगलवार को संयुक्त प्रेस वार्ता कर आगामी साल की विद्युत दरों की जानकारी साझा की। आयोग ने बताया कि ऊर्जा कंपनियों यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल की ओर से टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन आयोग ने दरों को यथावत रखते हुए केवल टैरिफ रेशनलाइजेशन (संरचनात्मक सुधार) लागू किए हैं।आयोग ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाले बिना बिजली व्यवस्था को अधिक संतुलित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लिया गया है। क्रॉस-सब्सिडी को राष्ट्रीय टैरिफ नीति के तय दायरे (±20%) में रखा गया है, जबकि फिक्स्ड चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बहरहाल,यूईआरसी का यह फैसला उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर आम जनता को राहत मिली है, वहीं उद्योग, सौर ऊर्जा और स्मार्ट बिजली प्रबंधन को बढ़ावा देकर राज्य की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में संतुलित प्रयास भी किया गया है।

RTS-1 में बड़ी कटौती, सोसायटियों को फायदा

सबसे बड़ा बदलाव सिंगल पॉइंट बल्क सप्लाई (RTS-1) श्रेणी में किया गया है, जहां दर को ₹7.50 से घटाकर ₹6.25 प्रति KVAh कर दिया गया है। इससे बड़ी आवासीय सोसायटी, अपार्टमेंट और समूह कनेक्शनों को सीधा लाभ मिलेगा।

उद्योगों को राहत, ज्यादा उपयोग पर सस्ती बिजली

औद्योगिक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने लोड फैक्टर आधारित टैरिफ में बदलाव किया है। अब 50% से अधिक लोड फैक्टर पर ₹6.60 प्रति KVAh की कम दर लागू होगी, जबकि कम उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को अधिक दर चुकानी होगी।

स्मार्ट मीटरिंग और लाइन लॉस पर सख्ती

आयोग ने यूपीसीएल को स्मार्ट मीटरिंग लागू करने, लाइन लॉस कम करने और वित्तीय दक्षता सुधारने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।

सौर और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

आयोग ने 25 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं को दिन के समय (सुबह 9 से शाम 5 बजे) 22.5% तक छूट और निरंतर आपूर्ति अधिभार 15% से घटाकर 7.5%
ऑनलाइन भुगतान पर 1.5% और अन्य माध्यमों पर 1% शीघ्र भुगतान छूट दी है। साथ ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर अपनाने पर अतिरिक्त लाभ तथा ग्रीन टैरिफ ₹0.39 प्रति यूनिट, जिससे उपभोक्ता स्वेच्छा से स्वच्छ ऊर्जा चुन सकेंगे।

विद्युत दरों पर एक नजर घरेलू टैरिफ….

लाइफ-लाइन उपभोक्ता
-वर्तमान: ₹1.85 | प्रस्तावित: ₹1.94 | अनुमोदित: ₹1.85
0–100 यूनिट
-वर्तमान: ₹3.65 | प्रस्तावित: ₹4.23 | अनुमोदित: ₹3.65
101–200 यूनिट
-वर्तमान: ₹5.25 | प्रस्तावित: ₹6.09 | अनुमोदित: ₹5.25
201–400 यूनिट
-वर्तमान: ₹7.15 | प्रस्तावित: ₹8.29 | अनुमोदित: ₹7.15
400 यूनिट से ऊपर
-वर्तमान: ₹7.80 | प्रस्तावित: ₹9.04 | अनुमोदित: ₹7.80
RTS-1 (बल्क सप्लाई)
-वर्तमान: ₹7.50 | प्रस्तावित: ₹7.88 | अनुमोदित: ₹6.25

 

पिटकुल : संतुलित टैरिफ ऑर्डर: कंपनी की मांगों में कटौती, उपभोक्ताओं को राहत

देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का टैरिफ ऑर्डर जारी करते हुए कंपनी की कई मांगों में कटौती कर संतुलित निर्णय लिया है। इस फैसले से जहां ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं उपभोक्ताओं के हित भी सुरक्षित रहेंगे।
आयोग के समक्ष पीटीसीयूएल ने 2025-26 की वार्षिक कार्य समीक्षा (APR) और 2026-27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) के तहत टैरिफ में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था। साथ ही 2024-25 के लिए ट्रू-अप (True-Up) के तहत घाटे का दावा भी किया गया था। हालांकि आयोग ने कंपनी के दावों की समीक्षा के बाद उनमें कटौती कर दी। कंपनी ने जहां करीब ₹74.90 करोड़ के घाटे का दावा किया था, वहीं आयोग ने मात्र ₹10.68 करोड़ के अंतर को ही स्वीकार किया।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक प्रसारण प्रभार (ATC) ₹636.08 करोड़ तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16.30% अधिक है, लेकिन कंपनी के प्रस्ताव से कम रखा गया है। इसके अलावा आयोग ने पूंजीकरण (Capitalisation) के प्रस्तावों में भी संशोधन किया और ₹93.75 करोड़ के रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) को मंजूरी दी, जिसमें ₹15.19 करोड़ का कैरिंग कॉस्ट शामिल है।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय बिजली व्यवस्था को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न पड़े। टैरिफ ऑर्डर में कंपनी की मांगों में कटौती करते हुए संतुलित निर्णय लिया गया है, जिससे ट्रांसमिशन व्यवस्था भी मजबूत होगी और उपभोक्ताओं के हित भी सुरक्षित होंगे।

 

चम्पावत को मिली 36.83 करोड़ की योजनाओं की सौगात: “आदर्श जनपद” के रूप में स्थापित हो चंपावत- सीएम ‌धामी

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चंपावत: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए जनकल्याण एवं आधारभूत संरचना को सशक्त बनाने के लिये 36.83 करोड़ की 17 योजनाओं शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इसमें ₹ 7.12 करोड़ लागत वाली 4 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹29.71 करोड़ की 13 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा इन योजनाओं से चम्पावत के अंतिम छोर तक विकास का लाभ पहुंचेगा और जनपद तेजी से “आदर्श जनपद” के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री ने गांधी चौक में स्थापित 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का विधिवत अनावरण भी किया।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है, जो प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रसेवा का भाव जागृत करता है तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा चम्पावत को “आदर्श जनपद” बनाने का संकल्प इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि जनपद में ₹117 करोड़ से अधिक की लागत से गोलज्यू कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए जिला चिकित्सालय में ₹20 करोड़ की लागत से 50 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित किया गया है तथा ₹5 करोड़ की लागत से सीटी स्कैन एवं एमआरआई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ₹57 करोड़ की लागत से बन रहा साइंस सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में बच्चों को आधुनिक ज्ञान से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। उन्होंने बताया कि शारदा कॉरिडोर के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि खेल क्षेत्र में बेटियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लोहाघाट में ₹257 करोड़ की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोट्र्स कॉलेज निर्माणाधीन है। इसके साथ ही भारत-नेपाल सीमा पर ड्राई पोर्ट निर्माण तथा बुजुर्गों के लिए ₹8.99 करोड़ की लागत से वृद्धाश्रम भवन निर्माणाधीन है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान वीर सैनिकों, वीर नारियों एवं पर्यावरण मित्रों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और कहा कि सरकार विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
इस दौरान दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, अध्यक्ष जिला पंचायत आनंद सिंह अधिकारी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, अध्यक्ष नगर पालिका चंपावत श्रीमती प्रेमा पांडेय, लोहाघाट गोविंद वर्मा, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती, व्यापार मंडल अध्यक्ष विकास शाह सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी कर्मचारी, भूतपूर्व सैनिक, वीर नारियां एवं बड़ी संख्या में नागरिक व अन्य मौजूद रहे।