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SSP दून सख्त संदेश:  शिक्षा के आड़ में दून का माहौल खराब करने वाले जायेंगे सलाखों के पीछे

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एसएसपी दून के निर्देशों पर प्रेमनगर क्षेत्र में दून पुलिस ने चलाया वृहद स्तर पर सत्यापन/चैकिंग अभियान

*एसपी सिटी के नेतृत्व में पुलिस क्षेत्राधिकारियों सहित पुलिस की अलग-अलग टीमों द्वारा प्रेमनगर क्षेत्र में हॉस्टल/पी0जी0 में रहने वाले बाहरी छात्रों का किया सत्यापन।*

*सभी हॉस्टल/पी0जी0 संचालकों को अपने प्रतिष्ठानों में रहने वाले छात्र/छात्राओं का शत प्रतिशत सत्यापन कराने की दी हिदायत*

*किसी भी हॉस्टल/पी0जी0 में रह रहे छात्र/छात्राओं के नशे अथवा अन्य आपराधिक गतिविधियों में लिप्त मिलने पर उनके साथ-साथ सम्बन्धित हास्टल/पी0जी0 संचालकों/मालिकों के विरूद्ध भी होगी वैधानिक कार्यवाही*

*पी0जी0/हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के सत्यापन न कराने पर 08 प्रतिष्ठान संचालकों का पुलिस एक्ट में चालान कर किया 80 हजार रू0 का जुर्माना*

*पहचान संबंधित दस्तावेज न दिखा पाने/ बिना सत्यापन के रह रहे 75 छात्रों को पूछताछ हेतु लाया गया थाने*

*अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 52 वाहन चालकों के विरूद्ध की कार्यवाही, 16 वाहनों को किया सीज*

*होटल/ढाबों/रेस्टोरेन्ट की चैकिंग कर सभी संचालकों को निर्धारित समयावधि के बाद प्रतिष्ठानों को न खोलने की दी हिदायत*

*नियमों का उल्लंघन करने वाले 24 व्यक्तियों के पुलिस एक्ट में किये चालान*

आज दिनांक: 24-03-26 को पुलिस की अलग-अलग टीमों द्वारा प्रेमनगर क्षेत्र में वृहद स्तर पर चैकिंग/सत्यापन अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस टीमों द्वारा हास्टल, पी0जी0 आदि में रहने वाले कालेज के छात्र/छात्राओं के सत्यापन की कार्यवाही की गई। अभियान के दौरान सभी पीजी/हास्टल संचालकों को अपने-अपने प्रतिष्ठानों मंे रहने वाले सभी छात्र/छात्राओं का शत प्रतिशत सत्यापन कराने, गैर प्रान्त के रहने वाले छात्र/छात्राओं का उनके मूल स्थान से भी चरित्र सत्यापन करवाकर उपलब्ध करवाने, पी0जी0/हास्टल में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवाने तथा रात्रि 10 बजे के बाद किसी भी व्यक्ति को पी0जी0/हास्टल में प्रवेश न करने देने के निर्देश दिये गये। इसके अतिरिक्त हास्टल/पी0जी0 में निवासरत छात्र/छात्राओं के नशे अथवा अन्य आपराधिक गतिविधियों में लिप्त मिलने पर उनके साथ-साथ सम्बन्धित हास्टल/पी0जी0 संचालकों/मालिकों के विरूद्ध भी वैधानिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई। इस दौरान अपने प्रतिष्ठानों मंे रहने वाले छात्र/छात्राओं का सत्यापन न कराने वाले 08 संचालकों के 83 पुलिस एक्ट में चालान कर 80 हजार रू0 का जुर्माना किया गया।

अभियान के दौरान पुलिस टीम द्वारा प्रेमनगर क्षेत्र में वृहद स्तर पर चैकिंग अभियान चलाते हुए ट्रिपल राइडिंग, रैश ड्राइविंग, ओवर स्पीडिंग करने वाले नव युवकों के विरूद्ध कार्यवाही की गई। चैकिंग के दौरान पुलिस द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करने, मुख्य मार्गों पर बेतरतीब तरीके से वाहनों को खडा कर आवागमन बाधित करने वाले 52 वाहन चालको के विरूद्ध एम0वी0एक्ट के तहत कार्यवाही की गई तथा 16 वाहनों को सीज किया गया।

इसके अतिरिक्त प्रेमनगर, पौंधा, नन्दा की चौकी आदि क्षेत्रों में होटल/रेस्टोरेंट/ढाबों में चैकिंग अभियान चलाया गया। जिसमें सभी होटल/रेस्टोरेंट/ढाबा संचालकों को निर्धारित समयावधि के उपरान्त अपने प्रतिष्ठानों का संचालन न करने तथा अपने प्रतिष्ठानों में किसी भी व्यक्ति को शराब का सेवन न करने देने की सख्त हिदायत दी गई। साथ ही किसी भी प्रतिष्ठान में शराब व अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से सम्बन्धित शिकायत पर प्रतिष्ठान स्वामी के विरूद्ध सख्त वैधानिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई।

अभियान में दौरान पुलिस द्वारा मौके पर पहचान सम्बन्धी दस्तावेज न दिखा पाने तथा बिना सत्यापन के रह रहे 75 संदिग्ध छात्रों को पूछताछ हेतु थाने पर लाया गया, जिनसे आवश्यक पूछताछ करते हुए उनके सत्यापन की कार्यवाही की गई, साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि में लिप्त न रहने की सख्त हिदायत दी गई, इसके अतिरिक्त नियमों का उल्लंघन करने वाले 24 व्यक्तियों के पुलिस एक्ट के अन्तर्गत चालान किये गये।

 

जिला प्रशासन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “आधुनिक इंटेंसिवकेयर सेंटर” जनमानस को विधिवत समर्पित 

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CM Dhami ने किया लोकार्पण

मा0 मुख्यमंत्री के भिक्षावृत्तिमुक्त राज्य के संकल्प को साकार करता जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर

एक वर्ष में ही गेमचेंजर बना जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंन्टर; 325 से अधिक बच्चे रेस्क्यू; भिक्षावृति, बालश्रम में संलिप्त 200 से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े

देहरादून । मा0 मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा जनपद देहरादून में जिला प्रशासन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर” का राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विधिवत लोकार्पण कर इसे जनमानस को समर्पित किया गया। साधुराम इन्टर कालेज राजा रोड देहरादून में लगभग 157.60 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र राज्य का पहला आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम में संलिप्त बच्चों का पुनर्वास कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
जिला प्रशासन के आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में रेस्क्यू किए गए बच्चों के समग्र विकास हेतु योग, संगीत, खेलकूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनके मानसिक एवं व्यवहारिक सुधार (माइंड रिफॉर्म) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर एक गेम चैंजर संस्थान के रूप में उभर कर सामने आया है जहां जिला प्रशासन की टीम द्वारा अब तक 325 से अधिक बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम से रेस्क्यू किया गया है। तथा आधुनिक इंटेसिव केंद्र के माध्यम से अब तक 200 से अधिक बच्चों का विद्यालयों में नामांकन कराया जा चुका है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है


भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम उन्मूलन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष अंतरविभागीय टीम का गठन किया गया है, जिसमें होमगार्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, पुलिस विभाग तथा विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं को शामिल किया गया है। यह टीम निरंतर समन्वय स्थापित कर रेस्क्यू अभियान को प्रभावी रूप से संचालित कर रही है।
शहर में भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की पहचान एवं त्वरित रेस्क्यू हेतु 3 विशेष रेस्क्यू वाहनों को तैनात किये गए हैं, जो नियमित पेट्रोलिंग कर अभियान को गति दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रमुख चौराहों एवं संवेदनशील स्थलों पर 16 होमगार्ड कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर लाया जा सके।
जिलाधिकारी ने जिले का कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए शीघ्रता से इसकी नींव रखी तथा मा0 मुख्यमंत्री ने दिसम्बर 2024 में आधुनिक इंटेंसिवकेयर सेंटर का शिलान्यास किया। जिला प्रशासन ने इस सेंटर का संचालन प्रारंभ कराया। वर्तमान में यह केंद्र अपने सुसज्जित भवन एवं आधुनिक संसाधनों के साथ संचालित हो रहा है, जहां बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा एवं पुनर्वास की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। जिला प्रशासन का यह अभिनव प्रयास न केवल भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को एक नई दिशा और बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून।

जाममुक्त होगा दून:  परेडग्राउंड आटोमेटेड पार्किंग जनमानस को विधिवत् समर्पित, सीएम धामी ने किया लोकार्पण

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आधुनिक आटोमेटेड पार्किंग से सुसज्जित हुआ अपना शहर दून; परेडग्रांड, तिब्बती मार्केट, जिला चिकित्सालय में स्थापित है आटोमेटेड पार्किंग

शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध जिला प्रशासन का प्रोजेक्ट आटोमेटेड पार्किंग जनमन को समर्पित

देहरादून दिनांक 24 मार्च 2026 (सू.वि), परेड ग्राउंड में निर्मित ऑटोमेटेड पार्किंग जनमानस को समर्पित, शहर को जाम से मिलेगी राहत मा० मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड द्वारा जनपद देहरादून के परेड ग्राउंड में 111 वाहन क्षमता वाली ऑटोमेटेड पार्किंग का विधिवत लोकार्पण कर इसे जनमानस को समर्पित किया गया। यह आधुनिक पार्किंग सुविधा लगभग रू0 472.23 लाख की लागत से निर्मित की गई है।

मा० मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने एवं नागरिकों को सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। जिला प्रशासन द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से ऑटोमेटेड पार्किंग का निर्माण कराया गया है, जिससे शहरी यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ बनाया जा सके। जिला प्रशासन की इस योजना के अंतर्गत शहर में कुल तीन प्रमुख ऑटोमेटेड पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें परेड ग्राउंड (111 वाहन क्षमता), तिब्बती मार्केट (132 वाहन क्षमता), कोरोनेशन (18 वाहन क्षमता) शामिल हैं।

इन पार्किंग सुविधाओं को और अधिक प्रभावी एवं नागरिक हितैषी बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा अभिनव पहल करते हुए “फ्री सखी कैब सेवा” संचालित की जा रही है। इस सेवा के अंतर्गत जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, देहरादून को नई ईवी वाहन (टाटा पंच) उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से पार्किंग में वाहन खड़ा करने वाले वाहन स्वामियों को नजदीकी व्यस्त एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तक निःशुल्क आवागमन की सुविधा प्रदान की जा रही है।

इसके अतिरिक्त, शहर में सार्वजनिक परिवहन को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जल्द ही आधुनिक ईवी मिनी बस शटल सेवा प्रारंभ की जाएगी। यह सेवा पार्किंग स्थलों से प्रमुख गंतव्यों तक आवागमन को आसान बनाएगी तथा निजी वाहनों के उपयोग को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।

जिला प्रशासन का यह प्रयास न केवल शहर को जाम से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट एवं नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है।

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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी देहरादून।

 वात्सल्य योजना के तहत मंत्री रेखा आर्या ने 3 करोड़ 2 लाख खातों में किए ट्रांसफर

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महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डीबीटी किया 2 महीने का पैसा

*देहरादून, 24 मार्च ।* मंगलवार को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत लाभार्थियों को 3 करोड़ 2 लाख रुपए से ज्यादा की धनराशि जारी की।

कैंप कार्यालय पर धनराशि लाभार्थियों की खातों में डीबीटी करने के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि इस योजना में प्रदेश सरकार 2020 से ही कोरोना महामारी के समय अभिभावकों को खो देने वाले बेसहारा बच्चों को प्रति माह ₹3000 की सहायता राशि देती है। इस योजना के तहत जनवरी 2026 तक का धन पहले ही जारी कर दिया गया था।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि फरवरी में 5057 लाभार्थियों को कुल 1 करोड़ 51 लाख 71 हजार रुपए मंगलवार को जारी किए गए हैं। जबकि मार्च महीने के लिए कुल 5025 लाभार्थियों के 1 करोड़ 50 लाख 75 हजार रुपए की धनराशि जारी की गई है।

इस योजना के तहत लाभार्थी के 21 वर्ष के हो जाने या बालिका लाभार्थियों के विवाह या लाभार्थी के सेवायोजित हो जाने के बाद वह योजना से बाहर हो जाते हैं।

इस अवसर पर सीपीओ अंजना गुप्ता और डिप्टी सीपीओ राजीव नयन आदि उपस्थित रहे।

मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार

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रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी

देहरादून 24 मार्च 2026
उत्तराखंड में सहकारिता के माध्यम से बहुउद्देशीय सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से व्यापक कार्य किया जा रहा है। कृषि, मिलेट्स, रेशम उत्पादन, सब्जी क्रय, बायोफर्टिलाइजर वितरण, साइलेज विक्रय और सामूहिक सहकारी खेती जैसी गतिविधियों से समितियों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है तथा किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है।

राज्य में मिलेट्स मिशन के अंतर्गत 214 क्रय केंद्रों के माध्यम से लगभग 53,000 कुंतल मंडुवा की खरीद की गई है। इस खरीद पर सहकारी समितियों को ₹100 प्रति कुंतल सेवा शुल्क के आधार पर लगभग ₹53 लाख की आय प्राप्त हुई है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना के अंतर्गत सहकारी समितियों के माध्यम से साइलेज का वितरण किया जा रहा है। राज्य में कुल 181 केंद्रों (गढ़वाल में 96 और कुमाऊं में 85) के माध्यम से लगभग 20,000 टन उच्च गुणवत्ता का साइलेज विक्रय किया गया है, जिससे सहकारी समितियों को लगभग ₹63 लाख की आय प्राप्त हुई है।

उत्तराखंड सहकारी संघ के माध्यम से टिहरी और उत्तरकाशी जनपदों में पांच सहकारी समितियों द्वारा किसानों से सीधे सब्जियों की खरीद की जा रही है। वर्तमान वर्ष में अब तक किसानों से लगभग ₹1.50 करोड़ मूल्य की सब्जियों की खरीद की जा चुकी है, जिन्हें बाजार में बेहतर मूल्य पर विक्रय किया गया है। इस प्रक्रिया में सहकारी समितियों को लगभग ₹3 लाख की आय प्राप्त हुई है। आगामी 1 अप्रैल से 22 सहकारी समितियों के माध्यम से सब्जी क्रय कार्य का विस्तार किया जाएगा, जिससे समितियों को 2 प्रतिशत लाभांश प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त बायोफर्टिलाइजर के क्रय-विक्रय में भी सहकारी समितियां सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं, जिससे 14 समितियों को लगभग ₹68.38 लाख की आय प्राप्त हुई है।

माधो सिंह भंडारी सामूहिक सहकारी खेती योजना के अंतर्गत अनुपयोगी भूमि को उपयोग में लाते हुए फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में चमोली और पौड़ी जनपद में लगभग 500 नाली भूमि पर गुलाब और ग्लेडियोलस के फूलों की खेती सहकारी समितियों के माध्यम से की जा रही है। अब तक इस पहल से समितियों को लगभग ₹10 लाख की आय प्राप्त हो चुकी है और भविष्य में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
इसी क्रम में धान खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य की 115 गृह सहकारी समितियों को लगभग ₹63 लाख की आय प्राप्त हुई है।

सहकारिता क्षेत्र में रेशम उत्पादन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन अपने सदस्य कीटपालन सहकारी समितियों के माध्यम से कच्चे रेशम कोया का उत्पादन कराता है और जिन कीटपालकों को अपने उत्पाद के विपणन में कठिनाई होती है, उन्हें 100 प्रतिशत विपणन सुविधा और त्वरित भुगतान उपलब्ध कराया जाता है।

वर्तमान में राज्य में लगभग 6500 रेशम कीटपालक रेशम उत्पादन से जुड़े हुए हैं। इनमें से लगभग 4000 कीटपालकों से फेडरेशन द्वारा करीब 25,000 किलोग्राम कच्चे रेशम कोया की खरीद की जाती है। इस कच्चे रेशम को पूर्ण उत्पादन श्रृंखला में उपयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के रेशमी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
फेडरेशन के माध्यम से वर्तमान में 150 से अधिक बुनकर परिवारों को रेशम बुनाई के कार्य से जोड़ा गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 15,000 से अधिक मानव दिवसों का रोजगार सृजित हो रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन द्वारा लगभग ₹6.30 करोड़ मूल्य के रेशम उत्पादों का उत्पादन किया गया, जबकि ₹2.53 करोड़ के रेशम वस्त्रों का विक्रय किया गया।

उत्तराखंड सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, कीटपालकों और बुनकरों को बाजार से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिलेट्स, सब्जी क्रय, बायोफर्टिलाइजर, रेशम उत्पादन और सामूहिक खेती जैसी गतिविधियों से सहकारी समितियों की आय में वृद्धि हो रही है और भविष्य में इन गतिविधियों का और अधिक विस्तार किया जाएगा।

*बयान-*
राज्य सरकार लक्ष्य प्रदेश में सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। सहकारिता का सीधा लाभ किसानों, काश्तकारों, कारीगरों और युवा उद्यमियों को मिले इसके लिये ठोस नीतियां तैयाकर कर धरातल पर उतारी जा रही है। – *डाॅ. धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री, उत्तराखंड।*

*वी.पी. सिंह बिष्ट*
जनसम्पर्क अधिकारी/मीडिया प्रभारी
माननीय सहकारिता मंत्री।xt

सीएम आवास में शहद निष्कासन: पहले चरण में 60 किलोग्राम शहद निकाला

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मुख्यमंत्री आवास परिसर में मंगलवार को शहद निष्कासन कार्य किया गया। पहले चरण में 60 किलोग्राम शहद निकाला किया गया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री आवास परिसर एवं आस-पास के क्षेत्र में 3-बी गार्डन (बी-फ्रेंडली गार्डन, बटर-फ्लाई फ्रेंडली गार्डन एवं बर्ड फ्रेंडली गार्डन) विकसित करने की दिशा में कार्य किये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रचुर मात्रा में फूलों की प्रजातियां हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले जैविक शहद उत्पादन में सहायक हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय गुणों वाला शहद तैयार करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।

इस अवसर पर उद्यान प्रभारी श्री दीपक पुरोहित और चेयरमैन देवभूमि पर्वतीय ग्रामोद्योग विकास संस्थान हरबर्टपुर श्री अजय कुमार सैनी मौजूद थे।

 

Good News: OpenAI के सहयोग से UPES बना ‘एआई-फर्स्ट’ कैंपस

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शिक्षण, सीखने, शोध और छात्र अनुभव को बदलने के लिए चैटजीपीटी एजु को अपनाया

दिल्ली, 24 मार्च 2026: यूपीईएस देहरादून, एक अग्रणी बहुविषयक और शोध-केंद्रित विश्वविद्यालय, ने आज घोषणा की कि ओपनएआई के सहयोग से वह अब एक ‘एआई-फर्स्ट’ विश्वविद्यालय बन गया है। संस्थान अब ऐसा एआई ढाँचा उपलब्ध कराएगा जो सुव्यवस्थित, सबके लिए समान रूप से सुलभ और परिणामों के आधार पर मापा जा सके, ताकि शिक्षण, सीखने, शोध और छात्र अनुभव में बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें। यूपीईएस अपने कैंपस में चैटजीपीटी एजु लागू करेगा, जिससे जेनरेटिव एआई को संस्थान की मुख्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा और सभी छात्रों, शिक्षकों व स्टाफ सदस्यों को इसका निःशुल्क उपयोग मिल सकेगा।

चैटजीपीटी एजु, ओपनएआई की शिक्षा के लिए बनाई गई योजना है, जिसे ज़िम्मेदारी से पूरे विश्वविद्यालय स्तर पर लागू करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें संस्थागत एडमिन नियंत्रण और एंटरप्राइज़-ग्रेड सुरक्षा उपलब्ध है। यूपीईएस में इसका उपयोग इस बात को बदलेगा कि सीखने की पूरी व्यवस्था में एआई को किस तरह शामिल किया जाता है। यह उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक नई और मजबूत दिशा तय करेगा, क्योंकि इससे छात्र अपनी रोज़मर्रा की पढ़ाई के दौरान व्यावहारिक और विषय-विशेष एआई क्षमता विकसित कर सकेंगे, जिससे उन्हें प्लेसमेंट और नए दौर की नौकरी के अवसरों में बढ़त मिलेगी।

यह सहयोग यूपीईएस में छात्रों और शिक्षकों के लिए कई ठोस और उपयोगी अनुभव लेकर आएगा:
• हर छात्र के लिए फ्लैगशिप एआई ट्यूटर – जो प्रोग्राम और सेमेस्टर के अनुसार सिलेबस तथा लर्निंग आउटकम्स पर आधारित सहायता देगा। इसमें विषयों को समझने में मदद, अभ्यास में सहयोग और बहुभाषी सहायता शामिल होगी।
• ऐसे सीखने के तरीके जो असेसमेंट की विश्वसनीयता बनाए रखें – ताकि एआई के उपयोग के बाद भी छात्र अपनी वास्तविक समझ दिखा सकें और शैक्षणिक ईमानदारी बनी रहे।
• स्टूडेंट सर्विसेज मॉड्यूल – जो छात्रों को नीतियों की जानकारी देगा, उन्हें चरणबद्ध मार्गदर्शन प्रदान करेगा और महत्वपूर्ण मामलों को तय प्रक्रिया के अनुसार मानवीय सहायता तक पहुँचाएगा।
• रिस्पॉन्सिबल एआई चार्टर – जो एआई के सही उपयोग, गोपनीयता और डेटा हैंडलिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करेगा, ताकि पूरे विश्वविद्यालय में भरोसा, जवाबदेही और एकरूपता बनी रहे।
• छात्रों और शिक्षकों के लिए डीप रिसर्च मॉडल्स तक पहुँच – जिससे गहन अध्ययन, बेहतर शैक्षणिक और ज्ञानपरक परिणाम, तथा एडवांस्ड क्रेडिट्स के साथ गहरे शोध की संभावनाएँ बढ़ेंगी।

इस रणनीतिक सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए, डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस, ने कहा,
“हमें खुशी है कि हम भारत के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल हैं जो इस स्तर पर एक सुव्यवस्थित, पूरे कैंपस में लागू होने वाली जेनएआई व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं—जहाँ एआई को कुछ अलग-अलग प्रयोगों की तरह नहीं, बल्कि शिक्षा और सेवाओं की मुख्य संरचना के रूप में देखा जा रहा है। हम एक ऐसे एआई-फर्स्ट विश्वविद्यालय का निर्माण कर रहे हैं जहाँ एआई सीखने, पढ़ाने, शोध और छात्र जीवन के हर हिस्से में स्वाभाविक रूप से जुड़ा होगा। एआई साक्षरता पहले दिन से हर छात्र, हर शिक्षक और कैंपस की हर प्रक्रिया की बुनियादी नींव होगी।”

राघव गुप्ता, हेड ऑफ एजुकेशन – इंडिया एंड एशिया-पैसिफिक, ओपनएआई, ने कहा, “भारत में चैटजीपीटी का उपयोग करने वाले छात्रों का समुदाय पहले ही दुनिया में सबसे बड़ा है। जैसे-जैसे एआई टूल्स का उपयोग और गहराई से होगा, वे रोज़मर्रा की पढ़ाई का हिस्सा बन जाएंगे। यूपीईएस की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह एआई को शैक्षणिक अनुभव का एक मुख्य हिस्सा बनाएगी, जिससे एआई-प्रधान दुनिया में नौकरी के लिए तैयारी बेहतर होगी।”

छात्रों के लिए सीखना अधिक व्यक्तिगत और आसान होगा, जिसमें उन्हें रियल-टाइम सहायता, अनुवाद और फीडबैक मिलेगा। वे पहले दिन से ही एआई का व्यावहारिक ज्ञान विकसित करेंगे। इसके साथ ही, उन्हें अपने-अपने विषयों में एआई का उपयोग करना भी सिखाया जाएगा, ताकि वे अधिक मजबूत, नौकरी के लिए तैयार क्षमता और बेहतर रोज़गार संभावनाओं के साथ स्नातक बनकर निकलें। शिक्षकों के लिए एआई रोज़मर्रा के कई कामों का बोझ कम करेगा, जिससे वे मार्गदर्शन, चर्चा और गहरे शिक्षण पर अधिक समय दे सकेंगे। शोधकर्ताओं के लिए एआई साहित्य को जल्दी समझने, जानकारी को व्यवस्थित करने और विश्लेषण में सहायता करेगा, जिससे शोध दल विचारों से विश्वसनीय परिणामों तक तेज़ी से पहुँच सकेंगे, जबकि गुणवत्ता, ईमानदारी और मानवीय निर्णय को केंद्र में रखा जाएगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीईएस केवल भविष्य की तकनीकों को अपना नहीं रहा, बल्कि भारतीय शिक्षा में एक नया मानक भी स्थापित कर रहा है। अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें: www.upes.ac.in

यूपीईएस के बारे में:
उत्तराखंड राज्य विधानमंडल के यूपीईएस एक्ट, 2003 के तहत स्थापित, यूपीईएस एक उच्च रैंकिंग वाला, यूजीसी-मान्यता प्राप्त निजी विश्वविद्यालय है। नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2025, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार, यूपीईएस को विश्वविद्यालयों में 45वाँ स्थान मिला है। वहीं, लॉ में 18वाँ, मैनेजमेंट में 36वाँ और इंजीनियरिंग में 43वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।

टाइम्स हायर एजुकेशन (टीएचई) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएस अब वैश्विक स्तर पर 501-600 बैंड में और भारत में 5वें स्थान पर है, जो 2025 में 7वें स्थान से बेहतर है। विशेष रूप से, रिसर्च क्वालिटी में यूपीईएस ने सिर्फ एक वर्ष में 57 स्थानों की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 299वाँ स्थान हासिल किया है। इसके अलावा, क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएस को भारत में अकादमिक प्रतिष्ठा के आधार पर नंबर 1 निजी विश्वविद्यालय का स्थान मिला है। यह दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में शामिल है।

यूपीईएस को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित क्यूएस रेटिंग द्वारा एम्प्लॉयबिलिटी (प्लेसमेंट्स) में 5 स्टार मिले हैं। विश्वविद्यालय ने पिछले पाँच वर्षों में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट्स दर्ज किए हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार, यूपीईएस के 50 से अधिक फैकल्टी सदस्य दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल हैं।

यूपीईएस अपनी सात स्कूलों के माध्यम से स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करता है: स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ डिज़ाइन, स्कूल ऑफ लॉ, स्कूल ऑफ बिज़नेस, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, और स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज़ एंड ह्यूमैनिटीज़।

यूपीईएस परिवार में 19,100 से अधिक छात्र, 1,500 से अधिक फैकल्टी और स्टाफ सदस्य, और 40,000 से अधिक पूर्व छात्र शामिल हैं, जो ईवाई, केपीएमजी, बेन एंड कंपनी, मैकिन्से एंड कंपनी, कैपजेमिनी, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल, नेस्ले, आईटीसी, अदाणी पावर, ओएनजीसी, जीएमआर, टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, एक्सेंचर, डेलॉइट और अन्य प्रमुख संस्थानों में कार्यरत हैं।

11000 कन्याओं का पूजन अत्यंत सौभाग्यशाली: ऐसे आयोजनों से नारी सम्मान को मिलता है सुदृढ़ीकरण : धामी

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रेमनगर, देहरादून स्थित सनातन धर्म मंदिर परिसर में आयोजित सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति एवं संस्कारों के माध्यम से शक्ति उपासना का महापर्व है।

सीएम धामी ने 1100 कन्याओं के पूजन को अत्यंत सौभाग्यपूर्ण बताते हुए आयोजन समिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में नारी सम्मान को सुदृढ़ करने तथा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे मूल्यों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्या को साक्षात देवी स्वरूप माना गया है। बेटियां अपने संस्कार, स्नेह और त्याग से समाज को सशक्त और समृद्ध बनाती हैं तथा हमारी संस्कृति और परंपराओं की सशक्त वाहक हैं।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार बेटियों के सशक्तिकरण हेतु निरंतर कार्य कर रही हैं। सरकार द्वारा बेटियों की शिक्षा और प्रोत्साहन के लिए छात्रवृत्ति, कक्षा 9 में प्रवेश पर साइकिल वितरण, 12वीं उत्तीर्ण करने पर प्रोत्साहन राशि तथा सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की बेटियों के सामूहिक विवाह हेतु ₹61 हजार तथा व्यक्तिगत विवाह हेतु ₹55 हजार तक की सहायता दी जा रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विवाह सहायता के रूप में ₹50 हजार तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे हर बेटी की रक्षा, शिक्षा और प्रगति का संकल्प लें, जिससे कन्या पूजन की भावना वास्तविक रूप से सार्थक हो सके।

 

सीएम धामी ने इस अवसर पर प्रेमनगर स्थित गुरुद्वारा में मत्था टेका। इस दौरान विधायक श्रीमती सविता कपूर, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय रोहिला, भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ अग्रवाल, छावनी परिषद देहरादून के उपाध्यक्ष श्री विनोद पंवार, श्री विनय गोयल एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

4 साल बेमिसाल नहीं, 4 साल बेहाल :  धामी सरकार का सच उजागर” – कांग्रेस

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देहरादून। धामी सरकार के “4 साल बेमिसाल” के दावों के जवाब में उत्तराखंड कांग्रेस ने आज प्रेस वार्ता कर सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली की वास्तविक तस्वीर सामने रखी।

उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, पूर्व कैबिनेट मंत्री, चकराता से विधायक एवं चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष तथा केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के सदस्य प्रीतम सिंह और अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिव और मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
प्रीतम सिंह ने कहा कि यह “4 साल बेमिसाल” नहीं बल्कि “4 साल बेहाल” रहे हैं। बजट का आकार बढ़ाने के बावजूद राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, महंगाई चरम पर है और राज्य की केंद्र पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।
15वें वित्त आयोग की अवधि में 28000 करोड़ राज्य को दिए गए परंतु 16 वित्त आयोग ने सहायता देने से साफ इनकार कर दिया है दूसरी तरफ जीएसटी की प्रतिपूर्ति जो राज्यों को जीएसटी लागू होते समय से मिल रही थी वह भी बंद हो गई है जिसके कारण राज्य के आय के साधन बंद हो गए हैं।
प्रीतम सिंह ने कहा कि मातृशक्ति कुपोषण दर 56% हो गई है ,राज्य की धामी सरकार के द्वारा 30000 रोजगार दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं जबकि सेवा नियोजन कार्यालय में 10 लाख से ज्यादा बेरोजगार पंजीकृत हैं। प्रीतम सिंह ने यह भी कहा कि कृषि का ग्रोथ रेट – 4% हो गया है, भाजपा के द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था उसके उलट कांग्रेस सरकार की कार्यकाल में यूरिया का बैग 50 किलो का था वही बाग का 40 किलो का हो गया है और मूल्य वृद्धि भी कर दी गई है। डीजल और बिजली के बढ़ती हुई दरों पर भी प्रीतम सिंह ने हमला बोला

उन्होंने कहा कि पलायन आयोग खुद ही पलायन कर गया, 1726 गांव निर्जन हो चुके हैं और लगभग 1700 विद्यालय बंद हो चुके हैं। स्मार्ट सिटी के नाम पर केवल घोषणाएं हो रही हैं—देहरादून ही स्मार्ट नहीं बन पाया, तो तीन नए स्मार्ट सिटी के लिए धन कहां से आएगा, सरकार जवाब दे। नमामि गंगे में लगभग 26500 करोड़ रूपया खर्च करने के बाद ताज़ा कैग की रिपोर्ट में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं “रेफर सेंटर” बन चुकी हैं, शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, आपदा प्रबंधन विफल है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। खनन, आबकारी और भूमाफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिव एवं मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि उत्तराखंड का बजट अब एक पारंपरिक आर्थिक दस्तावेज नहीं रह गया है, बल्कि एक “नैरेटिव-ड्रिवन प्रेजेंटेशन” बन गया है, जबकि वास्तविक सच्चाई Finance Accounts में सामने आ रही है।

उन्होंने कहा कि बजट अनुमान (BE) और वास्तविक व्यय (Actual) के बीच लगातार बड़ा अंतर दिखता है, जो बजट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। राज्य में राजस्व व्यय का प्रभुत्व है और पूंजीगत व्यय सीमित है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार खर्च तो कर रही है, लेकिन निवेश नहीं कर रही।

काजी निजामुद्दीन ने कहा कि राज्य की अपनी राजस्व स्वायत्तता कमजोर हो रही है और केंद्र पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, वहीं उधारी और ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जो भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है।

उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी कमी है, बार-बार underspending और savings सामने आ रही हैं, जिससे यह साबित होता है कि सरकार घोषणाएं तो कर रही है लेकिन उन्हें जमीन पर लागू करने में विफल है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “डेटा बोल रहा है, नैरेटिव नहीं” और सरकार को Finance Accounts के आधार पर जनता को जवाब देना चाहिए। कई ने कहा कि परिवहन विभाग में 400 सौ से अधिक बसें ऐसी हैं जो मानकों पर खरी नहीं उतरती पर फिर भी सड़कों पर दौड़ रही हैं ?68000 बसें ऐसी हैं जिनको परमिट तो मिल गया लेकिन फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं।

अंत में कांग्रेस ने कहा कि उत्तराखंड को झूठे दावों और प्रचार नहीं, बल्कि जवाबदेह, पारदर्शी और विश्वसनीय राजकोषीय शासन की आवश्यकता है।
प्रेस वार्ता में मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी, देहरादून महानगर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष लालचंद शर्मा, महामंत्री नवीन जोशी, शोभाराम, प्रतिमा सिंह उपस्थित रहे।

गरिमा मेहरा दसौनी

उपलब्धियों का कालखंड रहे सरकार के चार साल:  रेखा आर्या

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हल्द्वानी में आयोजित जन-जन की सरकार कार्यक्रम में बोली कैबिनेट मंत्री

*हल्द्वानी, 23 मार्च।* सोमवार को हल्द्वानी स्थित खंड विकास कार्यालय सभागार में जन-जन की सरकार जन-जन के द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सरकार के 4 साल के कार्यकाल को उपलब्धियां से भरा कालखंड बताया।

इस अवसर पर विभिन्न सरकारी विभागों के स्टॉल लगाकर लोगों के प्रमाण पत्र बनाने और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बारे में सहायता प्रदान की गई। कैबिनेट मंत्री ने सभी स्टॉल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिला और युवाओं का सशक्तिकरण, रोजगार व विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है।

कार्यक्रम के दौरान 6 पात्र महिलाओं निशा जोशी, इंदिरा आर्या, ममता भट्ट, अर्चना नेगी राधा भंडारी और तारा सान्याल को महालक्ष्मी किट प्रदान की गई। इसके साथ ही रीप परियोजना के तहत विभिन्न महिलाओं को स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने पर सहायता राशि की चेक वितरित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान चहुंमुखी विकास किया है और उत्तराखंड 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर मेयर गजराज बिष्ट, राज्य मंत्री सुरेश भट्ट, रेनू अधिकारी, दीपक मेहरा, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, ब्लॉक प्रमुख मंजू गौड़, मुख्य विकास अधिकारी रविंद्र पांडे, भाजपा अनुसूचित मोर्चा जिला अध्यक्ष रविंद्र बाली आदि उपस्थित रहे।